नमस्ते मेरा नाम आशीष कुमार त्रिवेदी है। मैं कहानियां, लघुकथाएं, बालकथाएं एवं लेख लिखता हूँ। जो लोग कठिनाइयों से घबराते नहीं हैं तथा हर परिस्थिति में उनसे उबरने का प्रयास करते हैं उनकी सच्ची प्रेरणादाई कहानियां लिखता हूँ। Matrubharati पर धारावाहिक रूप में प्रकाशित मेरे उपन्यास पाठकों द्वारा बहुत पसंद किए गए हैं। पौराणिक चरित्रों उर्वशी और पुरुरवा पर लिखा गया मेरा उपन्यास वनिका पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित हुआ है। Matrubharti द्वारा दिल्ली के प्रगति मैदान में Reader's choice award दिया गया है

आप सभी को दशहरे की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏

अमृता ने कुछ साल एक असफल शादी में बिताए। फिर अपने बेटे समीर को लेकर अलग हो गई। समीर उसकी ज़िंदगी का एकमात्र सहारा है।

समीर चौदह साल का एक किशोर है जो अपनी पहचान से जूझ रहा है। एक लड़के के रूप में जन्मा समीर भीतर से खुद को एक लड़की की तरह महसूस करता है।

समीर कैसे अपनी पहचान तलाश पाएगा ?

उससे जुड़े अमृता के सपनों का क्या होगा ?

मेरे घर आना ज़िंदगी जल्दी ही......

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योगेश शर्मा अपनी पत्नी उर्मिला को बहुत चाहते हैं। अल्ज़ाइमर्स की बीमारी से जूझ रही उर्मिला की एक बच्चे की तरह देखभाल करते हैं।

अचानक उन्हें पता चलता है कि वह खुद कैंसर की बीमारी से जूझ रहे हैं।

उनकी इकलौती संतान विशाल मात्र अठ्ठारह साल की उम्र में ही इस दुनिया से विदा हो गया था।

योगेश को फिक्र है कि अगर उन्हें कुछ हो गया तो उर्मिला को कौन संभालेगा।

क्या होगा योगेश और उर्मिला का ?

मेरे घर आना ज़िंदगी जल्दी ही आ रहा है।

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नंदिता और मकरंद की शादी को एक साल हुआ था। उन्होंने तय किया था कि अगले दो साल तक परिवार नहीं बढ़ाएंगे।

लेकिन नंदिता गर्भवती हो जाती है।

अचानक मिली यह खबर दोनों के बीच परेशानी पैदा कर देती है। दोनों एक दूसरे पर लापरवाही बरतने का इल्ज़ाम लगाते हैं।

पर जब यह पता चलता है कि बच्चे को जन्म देने के अलावा उनके पास कोई और उपाय नहीं है तो बच्चे के आने की तैयारी शुरू कर देते हैं।

बच्चे के आने के बाद क्या होता है उनकी ज़िंदगी में ?

जल्दी ही आ रहा है।

मेरे घर आना ज़िंदगी......

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जल्दी ही आ रहा है.......

एसपी गुरुनूर कौर आ रही है एक नए केस के साथ

ग्यारह अमावस जल्दी ही Matrubharti.com पर....…

एक लेखक जब एक कहानी कहता है तो उसके माध्यम से मानव ह्रदय की किसी भावना को ही उद्वेलित करता है। मानव ह्रदय में कई तरह की भावनाएं होती हैं। जैसे प्यार, नफरत, ईर्ष्या, दया, भय आदि। कोई भी कहानी इनमें से किसी एक या कई भावनाओं की अभिव्यक्ति ही होती है। जो कहानी के चरित्रों द्वारा आपके सामने व्यक्त होती हैं।

हिमाद्रि भी ऐसे ही कई भावनाओं की अभिव्यक्ति करती है। परंतु इसमें भय की भावना को प्रमुख रूप से दर्शाया गया है। भय मनुष्य की ऐसी भावना है जो सबसे अधिक उस पर हावी होती है।

मनुष्य के भय के बहुत से कारण होते हैं। लेकिन उसके भय की सबसे बड़ी वजह वह शक्तियां होती हैं जो उसके आसपास अदृश्य रूप से रहती हैं। इन अदृश्य शक्तियों को भूत, पिशाच, चुड़ैल और प्रेत कहा जाता है।

यह कहानी भी एक प्रेत की कहानी है। जिसने कुमुद के जीवन में उथल-पुथल मचा रखी है। उसकी हंसती मुस्कुराती ज़िंदगी में दुख के बादल छा गए हैं। यह कहानी है उमेश के अपनी पत्नी कुमुद के लिए प्रेम व समर्पण की। अपनी पत्नी को दुख से उबारने के लिए किए गए प्रयासों की।

कहानी वर्तमान में आरंभ होकर आपको अतीत में ब्रिटिश काल में ले जाएगी। कई उतार चढ़ावों के बाद यह कहानी बहुत ही रोमांचक मोड़ पर समाप्त होती है।

मुझे उम्मीद है कि यह पुस्तक आपका भरपूर मनोरंजन करेगी। इसलिए भय और रोमांच का अनुभव करने के लिए आज ही आर्डर करें।

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Matrubharti पर वर्ष 2020 के Top 100 लेखकों में प्रथम स्थान पर स्वयं को देखकर बहुत खुशी हुई।
इस उपलब्धि के लिए ईश्वर की कृपा व परिवार का सहयोग प्रमुख कारण है।
इसके अलावा Matrubharti.com एवं Mahendra Sharma जी का आभार।
मेरे उन सभी पाठकों को ह्रदय से धन्यवाद जिन्होंने मुझे इस सम्मान के योग्य बनाया।
इस सूची में शामिल सभी सह लेखकों को हार्दिक बधाई 🙏

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कुछ ही घंटों में समय का वह पड़ाव आएगा जहाँ 2020 विदा लेगा और हमारी बागडोर 2021 को सौंप देगा। वैसे तो बीता हुआ साल कोरोना की कड़वाहट लेकर आया था पर उस कड़वाहट के बीच भी मेरे पाठकों ने मुझ पर अपने मधुर स्नेह की वर्षा की। लेखन के हिसाब से मेरे लिए 2020 बहुत अच्छा रहा।
अब 2021 में भी मुझे पूरा विश्वास है कि आप लोगों का प्यार मेरे साथ रहेगा। जो मुझे नया लिखने को प्रेरित करता रहेगा।
आने वाला साल मेरे पाठकों और इस मंच पर सक्रिय सह लेखकों के लिए मंगलमय हो यही मेरी ईश्वर से प्रार्थना है।
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