A Poetry/Book writer, Trainer cum Motivational Speaker, A Professional and above all - A True Indian(Keeping Nationalism in heart)!

शाम।

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जब - जब वतन पर आंच आएगी
खून सभी का खोलेगा

पुलवामा हो या हो कारगिल
शहादत कोई ना भूलेगा

बात आएगी जब आन पर
हर देश का बेटा, मोर्चा खोलेगा

मां के लाल जब निकलेंगे शहादत देने
सारा आलम, रंग - दे - बसंती हो लेगा

पुलवामा हो या हो कारगिल
शहादत कोई ना भूलेगा।

- अभिषेक शर्मा

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Hug Day Special!

तुम कुछ ऐसे लगो मुझे गले.........

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"बातें"

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"झूठी हंसी"

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"महखाना"

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"तेरा साथ"

मैं एक लफ्ज नाकाम ही हूं
गर तू जुबां सी नहीं मुझमें,
जिन्दगी जीना, बस एक जबरदस्ती है
तेरा साथ अगर एक मकसद नहीं इसमें।

- अभिषेक शर्मा(Instant ABS)

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"दावेदारी"

तेरी आंखों में इश्क की बेकरारी भर दूंगा

मैं तेरे जिस्म में अपनी रूह की खुमारी भर दूंगा

तू ना चाह कर भी चाहेगी मुझे

इस कदर तुझ में अपनी दावेदारी भर दूंगा।

- अभिषेक शर्मा

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शीर्षक - "इश्क साजिशाना"

प्यार, इश्क, मोहब्बत
तो सदा दिल से होते हैं
दिमाग तो महज एक,
साजिशों का कारखाना है।

जहां साजिशें हैं,
अंजाम साफ है मुक्कमल
कहीं बुझी पड़ी शमा है
और कहीं जलने को मचल रहा परवाना है।

अब तो मायने बदल रहें हैं,
मोहब्बत के
नजरों में कोई और,
बाहों में कोई और,
और ख्वाबों में किसी,
और का ठिकाना है।

बदलते वक्त के साथ,
बदल रही है तजवीज़ मोहब्बत की
जहां होती थी,
कभी कोशिशें मुलाकातों की
अब तो छुटकारा पाने के लिए,
ढूंढ़ते बहाना हैं।

वो जमाने लद गए,
जब इश्क
"आशिकाना" था,
नए दौर का इश्क बेहद
"साजिशाना" है।


- अभिषेक शर्मा(Instant ABS)

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CAA/NRC/NPR

यह चिंगारी को हवा कौन दे रहा है
जहर को दवा कौन दे रहा है

मासूमों को नफरत की तालीम कौन दे रहा है
गद्दारों को पनाह और देश को दगा कौन दे रहा है

कानून आया नहीं और मुकदमा पहले से चल पड़ा है
जो गुनाह हुआ ही नहीं अभी उसका इन्हें गवाह कौन दे रहा है।

तमाशा बिन बात का हो रहा है
तमाशबीन आराम से सो रहा है
तो तू क्यों भटक के भेड़चाल के साथ हो रहा है

कोई नहीं है यहां जो अपनी नागरिकता खो रहा है
यह तो बस वफादारी का इम्तहान हो रहा है।

- अभिषेक शर्मा

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