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जीत कर भी हार गई बेकार थी जो नींदें,
हार कर भी हार गई खुद्दार थी जो नींदें।

लाशें उठाते - उठाते दफ्न हो गई,
न जाने कितनी लाशें।

सरकार की हसरतें थकी नहीं,
तमाशा दिखाते - दिखाते।।

गीत वही गाता हूं, मैं गीत वही गाता हूं।

kindly click the link below to watch one of my Motivational poetry.......

https://youtu.be/fqX-DNlQgYI

फिक्रमंद की मियाद पर,
खड़ी थी मेरी उम्मीद की इमारत

अफसोस तब हुआ मुझे,
जब देखी मैंने उसकी गैरत।

पत्थर को भी पसीना आयेगा,

जब सूरज उसे तबीयत से हड़काएगा।

जब एहसास की डोर में फीलिंगस(feelings) खत्म हो जाती है।

तब मेरे दोस्त,
मोहब्बत के जख्मों की हीलिंग (healing) खत्म हो जाती है।

इसीलिए, आगे बढ़ो (मूव ऑन)।।।

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जान हाजिर है,
मांगकर तो देखो।

बस। यूं जानकर,
मेरी जान ना लो।।

मेरे शऊर को
वो गुरूर समझ बैठे,

हमने सलाम क्या किया
वो हमें शागिर्द समझ बैठे।

इतना भी मत झुकना कि,
लोग तुम्हारी पीठ पर बैठकर सवारी करने लग जाएं,

और

इतना भी मत उठना कि,
लोग तुम पर रस्सी डालकर
मर जाएं।

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