Legum Magister.

"कुछ इस कदर प्रेम है 'चाय' से कि,
जब भी मिलती है, मना नहीं कर पाता।।"
☕☕😍
#TeaLover 😊

"खुशी मापने का कोई पैमाना हो तो, आकर माप लो मेरे श्याम!!
आज जिंदगी में मैं सबसे ज्यादा खुश हूँ मेरे राम!!"
🚩🚩😊🙏

Read More

----दहेज की मंडी----

"बबुआ की सरकारी नौकरी लगी!
यह खबर तेजी से चंहुओर फैली!

फिर मान-सम्मान का दौर शुरू हुआ!
इस बात से बबुआ का सीना 56 इंची हो गया।

नौकरी मिलते ही, बबुआ बड़का विद्वान हो गए!
अखबारों/कोचिंगो में बाइट्स दे-देकर निहाल हो गए!

परिचित-अपरिचित उपहार लाने लगे!
दुश्मन भी अब मेलजोल बढ़ाने लगे!

फिर बबुआ के बिआह की बात शुरू हुई!
इस बात से दहेज की मंडी में आवक बढ़ गयी!

मंडी में बबुआ का भाव दिन-रात चढ़ने लगा!
देखनहरू लोगों से बबुआ का दुआर पटने लगा!

भाव सुन-सुनकर बबुआ के बापू का मन अकुलाने लगा!
पल-भर में मालामाल होने का ख्वाब नजर आने लगा!

फिर बबुआ के बापू ने घरवालों से राय-सलाह लिया!
सबसे ऊंचा भाव देखकर बबुआ का बिआह तय किया!

शुभ मुहूरत देखकर बबुआ का बिआह हो गया!
गाँव-जवार में दहेज की चर्चा सरेआम हो गया!

दहेज की रकम सुन सब अचरज में पड़ गए!
कुछ बड़ाई तो कुछ बुराई करने में लग गए!

कोई बबुआ के बापू तो कोई दहेज को दानव बताने लगा!
सच जानते हुए भी, सच्चाई से मुँह चुराने लगा!

दहेज लेना-देना दोनों अपराध है! यह सब जानते हैं, लेकिन कुछ विरले लोग ही इस बात को मानते हैं।

जब दहेज की मंडी ही न सजे, तो कोई दहेज कैसे ले पाएगा?  इसलिए,
सब लोगों को दहेज मंडी के खिलाफ आना पड़ेगा,
दहेज दानव के समूल नाश के लिए प्रण लेना पड़ेगा!!


🙏💐
पढ़ने के लिए हृदय से धन्यवाद।🙏😊
©️🅰️njani Tiwari.

Read More

कब कौन सा राज्य गठित हुआ थाः-- Part-2.

-- मेघालय (1972): मेघालय को असम के अंतर्गत 1970 में स्वायत्त राज्य बनाया गया था। 21 जनवरी 1972 को इसे पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया।

-- त्रिपुरा (1972): यह राज्य तीन ओर से बांग्लादेश से घिरा हुआ है। 1972 तक यह केंद्रशासित राज्य था। इसके बाद इसे पूर्ण राज्य बनाया गया।

-- सिक्किम (1975): यह देश का दूसरा सबसे छोटा राज्य है। 16 मई 1975 को यह भारतीय संघ का हिस्सा बना था।

-- गोवा (1987): भारत को स्वतंत्रता मिलने के बाद भी यह क्षेत्र पुर्तगाली आधिपत्य में था। 1961 में भारतीय सेना ने इसे मुक्त कराया और इसे केंद्रशासित क्षेत्र बनाया गया। इसी के साथ दमन और दीव भी स्वतंत्र करा लिया गया। 30 मई 1987 को इसे पूर्ण राज्य घोषित किया गया।

-- अरुणाचल प्रदेश (1987): 1972 में अरुणाचल प्रदेश को केंद्रशासित प्रदेश बनाया गया था। 1987 में इसे पूर्ण राज्य बनाया गया और ईटानगर को इसकी राजधानी घोषित किया गया।

-- मिजोरम (1987): 20 फरवरी 1987 को मिजोरम को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया। इससे पहले यह असम का एक जिला था। 1972 में इसे केंद्रशासित प्रदेश बनाया गया था।

-- छत्तीसगढ़ (2000): एक नवंबर 2000 को मध्यप्रदेश का पुनर्गठन किया गया और छत्तीसगढ़ को अलग राज्य बनाया गया।

-- झारखंड (2000): आदिवासी बाहुल्य इस क्षेत्र को 15 नवंबर 2000 को बिहार से पृथक करके अलग राज्य बनाया गया था।

-- उत्तराखंड (2000): उत्तरी उत्तर प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों को मिलाकर यह राज्य बनाया गया था।

-- तेलंगाना (2014): यह देश का 29वां राज्य था। आंध्रप्रदेश के कुछ जिलों को मिलाकर एक अलग राज्य तेलंगाना का गठन किया गया था। 2 जून 2014 को यह पूर्ण राज्य घोषित हुआ था।

Read More

कब कौन सा राज्य गठित हुआ थाः-- Part-1.
-- जम्मू एवं कश्मीर (1948): जम्मू-कश्मीर के राजा हरिसिंह ने भारत में विलय के कागजातों पर हस्ताक्षर किए। 1956 में इसे भारतीय संघ का हिस्सा घोषित कर दिया गया। अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा समाप्त करके इसे केंद्र शासित प्रदेश में परिवर्तित कर दिया गया।

-- उत्तर प्रदेश (1950): राजनीतिक रूप से देश का सबसे महत्वपूर्ण राज्य है यह प्रदेश। उत्तर प्रदेश बनने से पहले इसे यूनाइटेड प्रॉविंस के नाम से जाना जाता था, जिसमें अवध और आगरा भी शामिल थे।

-- बिहार (1950): 22 मार्च 1912 को इस राज्य को अंग्रेजों ने बनाया था। 26 जनवरी 1950 को इसे पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया। साल 2000 में बिहार से विभाजित करके झारखंड नाम का एक नया राज्य बनाया गया।

-- असम (1950): अंग्रेजों ने 1826 में असम को अपने अधिकार में लिया था। 1874 में यह बंगाल से विभाजित किया गया था। 1912 में इसे पुनर्गठित किया गया था। मेघालय, नगालैंड और मिजोरम भी इसमें शामिल थे।

-- ओडिशा (1950): एक अप्रैल 1936 को अंग्रेजों ने उड़ीसा को एक अलग राज्य घोषित किया था। 1950 में यह भारतीय राज्य बना और 2011 में इसका नाम बदलकर ओडिशा किया गया था।

-- तमिलनाडु (1950): ब्रिटिश शासनकाल इसे मद्रास प्रेजिडेंसी कहा जाता था। 1950 में यह भारतीय प्रांत बना और 1969 में इसका नाम तमिलनाडु किया गया था।

-- आंध्र प्रदेश (1953): 1 नवंबर 1956 को इसे पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया था। इससे पहले यह मद्रास का हिस्सा था। 2 जून 2014 को आंध्र प्रदेश के उत्तर-पश्चिमी हिस्से को अलग राज्य तेलंगाना नाम दिया गया।

-- मध्य प्रदेश (1956): ग्वालियर, इंदौर और भोपाल रियासत को मिलाकर मध्यप्रदेश को बनाया गया था। सन 2000 में इसे विभाजित छत्तीसगढ़ को अलग राज्य बनाया गया।

-- केरल (1956): त्रावणकोर, कोचीन और मलाबार को मिलाकर 1956 में केरल राज्य का गठन किया गया है।

-- कर्नाटक (1956): एक नवंबर 1956 को मैसूर राज्य का गठन किया गया था। 1973 में राज्य का नाम कर्नाटक कर दिया गया।

-- महाराष्ट्र-गुजरात (1960): महाराष्ट्र और गुजरात, बॉम्बे प्रेजिडेंसी का हिस्सा थे। एक मई 1960 को महाराष्ट्र और गुजरात को विभक्त करके दो अलग-अलग राज्य बना दिए गए।

-- नागालैंड (1963): असम से नगा क्षेत्र को अलग करके एक दिसंबर 1963 को नगालैंड राज्य का गठन किया गया था।

-- पंजाब (1966): पटियाला रियासत में आठ छोटी-छोटी रियासतों को विलय करके पंजाब का गठन किया गया था। 1966 में पंजाब से हरियाणा को अलग किया गया और चंडीगढ़ को दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी बनाया गया।

-- हिमाचल प्रदेश (1971): 1950 में 30 रियासतों को मिलाकर हिमाचल प्रदेश बनाया गया था। 1956 में इसे केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था और 25 जनवरी 1971 को इसे पूर्ण राज्य बनाया गया।

-- मणिपुर (1972): 1947 में मणिपुर को भी स्वतंत्रता प्राप्त हुई थी। 1956 में यह केंद्रशासित प्रदेश बनाया गया और 21 जनवरी 1972 को इसे पूर्ण राज्य का दर्जा मिला।

Read More

सरदार पटेल का जन्म 31 अक्तूबर 1875 को नडियाद, गुजरात में हुआ था। वे झवेरभाई पटेल एवं लाडबा देवी की चौथी संतान थे। सोमाभाई,नरसीभाई और विट्टलभाई उनके अग्रज थे। उनकी शिक्षा मुख्यतः स्वाध्याय से ही हुई। लन्दन जाकर उन्होंने बैरिस्टर की पढाई की और वापस आकर अहमदाबाद में वकालत करने लगे। महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित होकर उन्होने भारत के स्वतन्त्रता आन्दोलन में भाग लिया। स्वतंत्रता आन्दोलन में सरदार पटेल का सबसे पहला और बड़ा योगदान 1918 में खेडा संघर्ष में हुआ। गुजरात का खेडा खण्ड उन दिनों भयंकर सूखे की चपेट में था। किसानों ने अंग्रेज सरकार से भारी कर में छूट की मांग की। जब यह स्वीकार नहीं किया गया तो सरदार पटेल, गांधीजी एवं अन्य लोगों ने किसानों का नेतृत्व किया और उन्हे कर न देने के लिये प्रेरित किया। अन्त में सरकार झुकी और उस वर्ष करों में राहत दी गयी। स्वाधीनता संग्राम के दौरान वर्ष 1928 में गुजरात में हुआ एक प्रमुख किसान आंदोलन था, जिसका नेतृत्व वल्लभभाई पटेल ने किया । उस समय प्रांतीय सरकार ने किसानों के लगान में तीस प्रतिशत तक की वृद्धि कर दी थी। पटेल ने इस लगान वृद्धि का जमकर विरोध किया। सरकार ने इस सत्याग्रह आंदोलन को कुचलने के लिए कठोर कदम उठाए, पर अंतत: विवश होकर उसे किसानों की मांगों को मानना पड़ा।
यद्यपि अधिकांश प्रान्तीय कांग्रेस समितियाँ पटेल के पक्ष में थीं, गांधी जी की इच्छा का आदर करते हुए पटेल जी ने प्रधानमंत्री पद की दौड से अपने को दूर रखा और इसके लिये नेहरू का समर्थन किया। उन्हे उपप्रधान मंत्री एवं गृह मंत्री का कार्य सौंपा गया। किन्तु इसके बाद भी नेहरू और पटेल के सम्बन्ध तनावपूर्ण ही रहे। इसके चलते कई अवसरों पर दोनो ने ही अपने पद का त्याग करने की धमकी दे दी थी। देश की स्वतंत्रता के पश्चात सरदार पटेल उप प्रधानमंत्री के साथ प्रथम गृह, सूचना तथा रियासत विभाग के मंत्री थे। सरदार पटेल की महानतम देन थी 562 छोटी-बड़ी रियासतों का भारतीय संघ में विलीनीकरण किया। 15 अगस्त 1947 तक केवल तीन रियासतें-कश्मीर, जूनागढ़ और हैदराबाद छोड़कर उस लौह पुरुष ने सभी रियासतों को भारत में मिला दिया। इन तीन रियासतों में भी जूनागढ़ को 9 नवम्बर 1947 को मिला लिया गया तथा जूनागढ़ का नवाब पाकिस्तान भाग गया। 13 नवम्बर 1947 को सरदार पटेल ने सोमनाथ के भग्न मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया, जो पंडित नेहरू के तीव्र विरोध के पश्चात भी बना। 1948 में हैदराबाद भी केवल 4 दिन की पुलिस कार्रवाई द्वारा मिला लिया गया। न कोई बम चला, न कोई क्रांति हुई। सरदार पटेल द्वारा यह 562 रियासतों का एकीकरण विश्व इतिहास का एक आश्चर्य था।
उनमें कौटिल्य की कूटनीतिज्ञता तथा महाराज शिवाजी की दूरदर्शिता थी। वे केवल सरदार ही नहीं बल्कि भारतीयों के हृदय के सरदार थे।
भारत को एकता के सूत्र में पिरोकर 15 दिसंबर 1950 को भारत के इस महामानव की मृत्यु हो गई और यह लौह पुरूष दुनिया को अलविदा कह गया।

Read More

"सत्याधारस्तपस्तैलं दयावर्ति: क्षमाशिखा।
अंधकारे प्रवेष्टव्ये दीपो यत्नेन वार्यताम्।।"

"प्रकाश व खुशियों के महापर्व दीपावली में आपके जीवन मे सुख, शांति एवं समृद्धि आये। माँ लक्ष्मी आपके जीवन को धन-धान्य से परिपूर्ण करें।।"

॥ *卐 शुभ दीपावली 卐॥*

Read More

उनकी मदमस्त निगाहों ने हम पर ऐसा कहर बरपाया,
हमारी अलमस्त जिंदगी में बर्बादी का मंजर लाया।।

एक छोटे-से शहर के रामलीला में दशहरा के दिन रावण-वध और उसके पुतला-दहन का कार्यक्रम था। निर्धारित समय पर राम ने रावण का वध किया और अब उसके पुतला-दहन का कार्यक्रम बचा था। रामलीला समिति ने घोषणा किया कि, रावण का पुतला-दहन स्थानीय विधायक मंगेश्वर नाथ द्वारा किया जायेगा, और पुतला-दहन से पहले विधायक जी जनता के समक्ष अपनी बात रखेंगे।
विधायक जी जनता को संबोधित करते हुए बोले!!, दशहरा पर्व हमारे जीवन में बहुत सीख देता है, यह अधर्म पर धर्म की जीत, बुराइयों पर अच्छाई की विजय और दुर्गणों से दूर रहने की सीख देता है। यह बोलने के बाद विधायक जी ने रावण के पुतला-दहन का कार्यक्रम सम्पन्न किया।
उसके बाद विधायक जी का काफिला उनके फार्म हाउस के लिए चल दिया। रास्ते में विधायक जी ने अपने खास गुर्गे लल्लन को फोन किया और बोले कि, क्या बे लल्लनवा! हम जो तुमसे कहे थे वह व्यवस्था पूरी हुई कि नहीं?? लल्लन बोला! नेता जी! यहाँ पूरी व्यवस्था हो गई है, जल्दी आइये बस आपका ही इंतजार हो रहा। थोड़ी देर बाद नेता जी का काफिला उनके फार्म हाउस पहुंचा। वहाँ उम्दा शराब, कबाब और शबाब की पूरी व्यवस्था थी, जैसे ही महफिल जमी, विधायक जी अपने गुर्गो के साथ नशे में टुन्न होकर बार-बालाओं के साथ ठुमके लगा रहे थे और उन पर पैसे लुटा रहे थे।।

Read More

उसने हमसे पूछा.....
तुम्हें मैं पसंद हूँ या चाय????
हमने कहा... चाय लाओ फिर बात करते हैं।।😊😉