डॉ अलका अग्रवाल,अब तक10 पुस्तकें प्रकाशित,कविता,कहानी,बाल कविता,बाल कहानी,लघुकथा आलोचना आदि सभी विधाओं में लेखन.अब तक अनेक पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित,38 साल तक राजस्थान के राजकीय कॉलेजों में पढ़ाने के बाद प्राचार्य पड़ से सेवानिवृत्त.साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में अनेक पुरस्कार और सम्मान प्राप्त.

दर्द मेरा,तुमसे कह दूं,तो
बोलो,उससे होगा क्या।
खारे आंसू से चेहरा गर,
धो भी लूँ, तो होगा क्या।
पीर मेरी मुझको है सहनी,
कोई और ,करेगा क्या।
गम मेरा, मैं दूर करूंगी,
वार करूं,ठहरेगा क्या।

-Alka Agrawal

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अल्पकाल के लिए जीवन मिला,अपना क्या है।
यदि तटस्थ रह पाओ,
दुख बुरा सपना सा है ।

-Alka Agrawal

सबके नसीब में हो खुशी,
कहाँ मुमकिन ऐसा।
कुछ लोग जी लेते हैं,
ग़मों के साये में खुशी से।
#नसीब #ग़म

-Alka Agrawal

नैन से जो नीर बरसा,मत इसे आंसू कहो।
दर्द की बदली ही, मेरी आँख से बरसी है आज
#आंसू #नैन

देह धारण की है तो,
यह दंड मिलता ही यहाँ।
ज्ञान से भोगें अगर ,
ढूंढोगे दुख है ही कहाँ।

-Alka Agrawal

किससे करें शिकवा,
किससे करें गिला।
जो भी नसीब में था,
हमको वही मिला।

-Alka Agrawal

तमसो मा ज्योतिर्गमय

-Alka Agrawal

तमस हरे मन का ,जीवन का
दीपक एक जलाओ ऐसा ।

-Alka Agrawal

दीपक एक जलाकर देखें,
अंधियारा सरपट भागेगा।
शुभ दीपावली

-Alka Agrawal

यह नियति का चक्र है,
चलता ही रहता है सदा।
सुख रहा ना साथ तो,
दुख भी रहेगा न सदा।

-Alka Agrawal