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🇮🇳🇮🇳💐💐💐🙏आप सभी भारतीयों को मेरी तरफ से गणतंत्र दिवस की हार्दिक सुभकामनाये 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳💐💐💐🙏

हम बढ़े और बढ़ाये लोगो को,

करें सब का साथ सब का विकास

खुद को बदले और बदले लोगो को,

बदलते मौसम के साथ।

सच्चाई की राहों पे जो है चलते,

जिनके लिए हैं हम और हमेशा साथ

खुद को बदले और बदले लोगो को,

बदलते मौसम के साथ।

सींखे और सिंखाये, प्रेम सौहार्द बढ़ाये,

ज्ञान का जलता दीपक है सबके पास

खुद को बदले और बदले लोगो को,

बदलते मौसम के साथ।

नई नई तकनीकी को बढ़कर जाने,

आदर करें सबका और सबको माने

धरती पे जीवो में है मानव सबसे खास,

खुद को बदले और बदले लोगो को

बदलते मौसम के साथ

-आलोक शर्मा

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जीवन में प्रगति का आशय यह है की शंका संदेह उठते रहें और उनके समाधान के प्रयास का क्रम चलता रहे !"
-सुभाष चंद्र बोस

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कुछ मीठा हो जाये..☺️ इज़हार हो न पाया।

11 वीं क्लास की पहली शीट पर,
एक चेहरा जो मन भाया
2 साल गुजर गए नज़रो में पर,
मौक़ा हाथ कभी वो न आया
डर न जाने किस बात का,
हिम्मत भी कई बार जुटाया
कह दिया होता उस दिन गर ,
चपरासी ने न होता घंटा बजाय
पैसा अफसोस नहीं पर पछतावा था,
जो यूँ फर्जी में समय गवांया
फ़ेल हुए सो हुए चक्कर मे,
पापा से मार अलग जो खाया
छोड़ दिया इन सबका चक्कर
पर आँखों मे वो चेहरा अब भी समाया
किससे कहें और कैसे बताये
दिल की बात दिल मे रही
जो कभी कह न पाया
मिले जब एक दिन साथ,
वो अपने हमदम के,
आँख से आँसू निकल गए बेदर्दी से,
और दिल भी बहुत पछताया
सहमे लबों से बोले जब नज़रे उठाकर
प्यार बहुत था गहरा मुझे भी,
पर तुमसे इज़्हार हो न पाया

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पूरी ज़िदगी निकल
जाती है खोजने में
पर क्या खोया है ये
पता ही नही चलता।

आप सभी सम्मानित मातृभारती परिवार को नव वर्ष 2020 की हार्दिक सुभकामनाये।