Adhure se ishk ki adhuri si yaad Wo adhuri si zindgi or adhuri si bat .....

प्रेम के धागे से
बांधा ही नही मैने तुझे..

रूह के हर रेशे से जुड़ा है
तेरा मेरा रिश्ता...




—अमृत

મુંઝવણ ભર્યો સવાલ...

સમજે એવો સંબંધ....
હશે ? આ દુનિયામાં..!


—અમૃત

भ्रम हमेशा
रिश्तो को बिखेरता है
और प्रेम से
अजनबी भी बंध जाते हैं....



—अमृत

તારો પ્રેમ પણ કોરોના જેવો જ છે,

દિવસે ને દિવસે વધતો જ જાય છે.



—અમૃત

जिंदगी में सब कुछ फिर से मिल सकता है,

पर वक़्त के साथ खोया हुआ रिश्ता फिर नहीं मिलता......



—अमृत

समुद्र मंथन सा
लग रहा है यह साल।

इतना विष निकल रहा है तो,
अमृत भी जरूर निकलेगा।




—अमृत

मेरी जिंदगी की किताब में
हर अध्याय आपका है....,

कहानी तो मेरी है कान्हा.....
पर हर पन्ने पर नाम आपका है....



—अमृत

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इबादत..इन्तज़ार..इज़हार
लब्ज़ो में घूमती फिरतीं ज़िंदगी
सुबह से शाम में ढल जाती ज़िंदगी.!


—अमृत

यही होता अगर
तुम होते यहाँ

बेज़ार सी जिन्दगी
महकती गुलो की खुशबू से
खुशियो के भौंरे
गुंजन करते
मन विलास की कलियो पर

नित नये गीत
रचता तुम्हारे स्वागत मे
अधखुली मदिराये से नयन
रोज़ मेरी राह तकते

करते सवाल
हर एक मुस्कुराहट पर
हाँ, यही होता
गर तुम होते यहाँ ।।




—अमृत

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मीरा को लगा कि
जहर में कैसा नशा हैं
देख लूँ......

और

जहर को भी लगा कि
इसी बहाने कंठ में
कृष्ण प्रेम देख लूँ......




—अमृत

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