I am a very thankful to god.. who born me to live in this heaven and also society who help me to know this heaven. I always found everywhere knowledge and I effort to learn... My father my god, my mother my love.. my brother my arms, my sister my charms.. My writing piece is witness to myself,yourself and itself. how it is and what situation in this heaven and how to enjoy myself. And how I am trying to remove difficulties in this heaven...

ये पलाश के फूलों सें
सजे रास्ते
है हमारे तुम्हारे वास्ते
ये बादलों का उमङना
हमारे तुम्हारे दिलों का धङकना
सच कहूँ सपनों को है तराशते।

ये रंग बिरंगे पत्तियों का झरना
सौन्दर्य का है समय के साथ बिखरना
है बिखरना तो क्या हुआ
सौन्दर्य का सुंदरता से है मिलना।

सदाबहार
गीतों यादों का गुलदस्ता हैं
जीवन के उधेङबुन में व्यस्तता है
फिर भी मौहब्बत और मौहब्बत के लिए
प्रकृति ने सजाया ये रास्ता है।

#अनंत

-Anant Aman

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अब तब की जिंदगी का
कितना किस्सा लिखूंगा
कल तक की जिंदगी का
कितना हिस्सा दिखूंगा।

माना स्याहा का रंग गाढ़ा है
किंतु पन्ने की उम्र में दीमक का पहरा है
उस दीमक से गर बचा भी लूँ
तो मेरे बाद पन्ने को सहेजेगा कौन
उसको पढकर स्वंय को बर्बाद करेगा कौन।

हाँ! उम्मीदों का आसमान साफ है
किन्तु इस बदलते मौसम में मेघ को रोकेगा कौन
जबतलक मैं-तुम का चक्कर है
उसे आखिर हम करेंगा कौन????

इनसब के बाबजूद भी हमारा मिलना होगा
ओस की टपकती आखिर बूंद में
फटेहाल जर्जर बुरादों की बुनियादी ढांचे की खोज में
कोना आधा कभी पूर्ण चांद में
अधुरे किस्सों के दर्द भरी आवाज़ में
मैं-तुम से आगे निकलकर हम होने के इतिहास में।।

#अनंत

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प्रेम कोई पूर्वाग्रह नही,
ये तो पावन एहसासों की "गाथा" है।
#अनंत

सावन शिव सा है निर्मल शीतल पुनीत अनुराग सा है।
#अनंत

Anant Dhish Aman लिखित कहानी "समुंदर से सुदंर क्या" मातृभारती पर फ़्री में पढ़ें
https://www.matrubharti.com/book/19929822/what-is-better-than-the-sea

नव नूतन
नव हर्षोल्लास है
नव चेतन
नव कोपल, पलाश है ।।

दिल दिल में हर्ष है
भगवा का उत्कर्ष है
नौ दिन नौ याम है
माँ मंगला का वरदान है ।।

झूमा सारा गगन है
नव वर्ष का आगमन है
सजी रंगोली हर द्वार है
दिपक लौ में प्यार है ।।

हरी भरी टहनियां है
नव वर्ष की दुल्हनिया है,
चूं चूं की हर ओर आवाज है
प्रकृति में क्या ताल क्या साज है ।।

ना ठंड है ना गर्म है
देखो मस्त बहार नर्म है
सबका अपना अपना कर्म है
देखो सत्य सनातन हिंदू धर्म है ।।

#अनंत

नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं मित्रों....

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जन गण मण का
राग बहता है लहू में,
वंदे मातरम् का गान होता है
मन मंदिर में ।।

तिरंगा लहरता हैं
मन मस्तिष्क में,
अशोक चक्र घूमता है
ह्रदय के गति में ।।

तूम पुछते हो जब मैं कौन?
याद आता अशफ़ाक मुझे
कहते थे जो
बिस्मिल मेरा भाई है
भारत मेरी माई है ।।

न पुछ मेरा धर्म
मेरे लहू का जान मर्म,
न पुछ मेरी जाति
तू सून मेरी ह्रदय गति ।।

भगत, सुखदेव, राजगुरु
के राग है हम
आजाद के अनुराग है हम ।।

सुभाष के विश्वास,
पटेल के आस है हम
माँ भारती के
एक से बढ़कर एक सपूत है हम ।।

#अनंत

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तुमसे मिलना इत्तेफाक था
बिछुड़ना जैसे कोई गरही साजिश ।।
अनंत

हिंदी एक ऐसा भाषा है जो हर भाषा हर बोली को अपने में समेटने का सामर्थ्य रखता है।
#अनंत

मेरे सामने जो है वो मेरे अंतस नहीं,
दुनिया है कोई मगर मेरी दुनिया नहीं।
#अनंत