I am a very thankful to god.. who born me to live in this heaven and also society who help me to know this heaven. I always found everywhere knowledge and I effort to learn... My father my god, my mother my love.. my brother my arms, my sister my charms.. My writing piece is witness to myself,yourself and itself. how it is and what situation in this heaven and how to enjoy myself. And how I am trying to remove difficulties in this heaven...

कविता ढह रही है
अंतर्मन में
शब्द चीख रही है
मन मन में ।।

क्यों मैं लिखी जाती
क्यों मैं पढी जाती
क्यों मैं छपती जाती
क्यों मैं गाँव शहर बिकती जाती ।।

आग जल रही
मेरी अक्षर अक्षर में
भस्म हो रही
होकर दरबदर मैं ।।

मैं क्यों
रस बंध छंद गंध
रास रंग प्यास अंग
में बहती आयी
क्या थी मैं
और क्या से क्या तक
हो गयी मैं ।।

मेरा रचियता
अपना नाम लिखते लिखते
दफन हो गया
मुझको देकर आवाज
खुद कैद हो गया ।।

वो भी
व्यंग्य हास्य रचनात्मक
तक मुझको फंसा गया
जाने कैसा रचा दिया मुझे
न समाज हीं बचा पाई
न स्वंय हीं बच पाई ।।

प्राण देकर शरिर ले गया
मेरे अस्तित्व पर
यह कैसा सवाल खङा कर गया ।।

#अनंत

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गली गली में अब भटकता नहीं मैं,
अब किसी के दर पर ठहरता नहीं मैं ।।
अनंत

कुछ दिन दूर हो जा अनंत स्वंय से,
कुछ दिन दूर हो जा अहले वफा के कदम से ।।
अनंत

कल रात आँख डब डबा गई मेरी
शहर मेरा सुबह तक पानी पानी हो गया ।।

-Anant Aman

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अहंकार का ठोस परत है मेरे अंदर
रावण हीं रावण हर जगह है मेरे अंदर
मैं भी जलना चाहता हूँ
कतरा कतरा पिघलना चाहता हूँ ।।

प्रेम दिप के तपन से रोम रोम
राम कृष्ण हीं हो जाना चाहता हूँ
हाँ मैं भी जलना चाहता हूँ
कतरा कतरा पिघलना चाहता हूँ ।।

-Anant Dhish Aman

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यह जात है परिंदो का
इसलिए एकजुट है
गर मानव का जात होता तो
बंटा होता रंग रुप लिंग धर्म में।

-Anant Dhish Aman

हमें अजमाले खुदा हमारे आंखों को नहीं,
अनुभव के हुनर को आजमाना कोई आम नहीं ।

-Anant Dhish Aman

खामोशी भी बड़ी
गजब की तहजीब
होती है,
रिश्तो के वजूद को बड़ी
अदब से बचा लेती है ।।

-Anant Dhish Aman