इस शर्त पे खेलूंगी पिया प्यार की बाज़ी, जीतु तो तुझे पाऊं हारु तो पिया तेरी....

धोखा देकर ऐसे चले गए,
जैसे कभी जानते ही नहीं थे,
अब ऐसे नफरत जताते हो
जैसे प्यार को मानते ही नहीं थे!!

ये कौनसा अंदाज़
मुहब्बत सिखा गई उसको
वो रूठ कर भी मुझसे
मुस्कुरा के मिलता है....!

मिलावट है तेरे इश्क़ में
इतर और शराब की,

कभी हम महक जाते हैं
कभी हम बहक जाते हैं....!

बेवजह कोई इल्जाम लग जाए तो
क्या किजीये .....!

फिर यूं कीजिये ...

की वो गुनाह कर लिजिए ....!!

टूट जाएं तो फिर खनकती नहीं,
लड़कियां भी तो चूडियां जैसी होती है...!