आप सभी को मेरा सप्रेम नमस्कार। मैं अनिरुद्ध कुमार तिवारी पुत्र श्री कृष्ण कुमार तिवारी उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर सुल्तानपुर के गांव माधवपुर मेरा निकेतन है। मैं युनाइटेड प्रोद्यौगिकी एवम् अनुसंधान महाविद्यालय ग्रेटर नोएडा में में प्रोद्यौगिकी में स्नातक प्रथम वर्ष का छात्र हूं। मैं एक लेखक हूं मुझे श्रृंगार रस लिखना एवम् गुनगुनाना बहुत पसंद है। ज्यादातर मैं वियोग श्रृंगार लिखता हूं। मेरे द्वारा लिखी ग़ज़लें , कविताएं आप मेरी प्रोफ़ाइल विजिट करके पढ़ सकते हैं अगर पसंद आए तो लाइक शेयर करें।

यूं मुश्किलों से बेतहाश ना हो...
यूं जिंदगी से निराश ना हो...
यूं खुद से नाराज़ ना हो...
सब्र रख...
और ऐसी आगाज़ कर ज़िन्दगी...
यूं मंज़र तो खिले परन्तु तकरार ना हो...

-Aníruddhα "कौशल्य" "ֆ"

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ना करेंगे इश्क़...
ना करेंगे गुलामी...
तुम करो बी०टी०सी०...
हम लड़ेंगे परधानी...
बेरोजगार आशिक़...

-Aníruddhα "कौशल्य" "ֆ"

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ना करेंगे इश्क़...
ना करेंगे गुलामी...
तुम करो बी०टी०सी०...
हम लड़ेंगे परधानी...
बेरोजगार आशिक़...

मुझे वापस कर के देख, मेरी सारी वफाएँ...
मैं भी तो देखूँ आखिर तेरे पास बचता क्या है...

-Aníruddhα "कौशल्य" "ֆ"

कमी खल रही है आपकी बड़ी जोर से...
चले आओ न करीब किसी ओर से...

-Aníruddhα "कौशल्य" "ֆ"

जो नेत्र प्रेम‌ से भरे होते है...
उन्हें आंसूओं से भी भीगना पड़ता है...

-Aníruddhα "कौशल्य" "ֆ"

इक दिन मेरा अंत लिखा यू जाएगा...
भटकेगा ये मन बेचारा, पाप कहा छुपाएगा...
खो देगा, मनवा प्यारा, देह यही रहा जाएगा...
पाप पुण्य का लेखा-जोखा सब यही हो जाएगा...
रह जाए ये कागज प्यारे, रह जाए ये कलम हमारी...

इक दिन मेरा अंत लिखा ही जाएगा...
इस कलयुग के काल चक्र से नाता ही टूट जाएगा...
रिश्ते नाते धरे रहेंगे, मनवा ये पछताएगा...
समय, समय से समय का चलना समय लौट न पाएगा..
राह जाएगा देह बेचारा, प्राण पखेरू तो जाएगा...

एक दिन तो मेरा खुद से नाता है टूट जाएगा...
शाम सवेरे राह निहारे मईया से कौन बताएगा...
चार दिन का नाता लेकर मौन बहुत पछताएगा...
किलकारी मेरे आगन की, बस आगन ही राह जाएगा...

इक कोने में बैठ कहीं, सबका मन भर आएगा...
बस कानो में, यही बात दोहराएगा...
आज मेरा तो कल तेरा भी तो आएगा...
इक दिन मेरा अंत लिखा यू जाएगा...
उजियाला सूरज सा, तेज फैलाएगा...
लिख लू नाम ज़रा, मनवा ना पछताएगा...

-Aníruddhα "कौशल्य" "ֆ"

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हमारे इरादें झूठे...
हमारे वादें झूठे...
हम भी उनसे रूठे...
वो भी हमसे रूठे...
तो मनाता कौन??
इसीलिए वो भी मौन...
और हम भी मौन...😐😐

-Aníruddhα "कौशल्य" "ֆ"

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राधे - राधे

गुरुर जिसने अपने जहन में पाला होगा...
खुली हों खिड़कियां फिर भी ना उजाला होगा...
खुद की परछाइयां जब कद से बड़ी हो जाएं...
तो समझ लेना उसका सूरज डूबने वाला होगा...

-Aníruddhα "कौशल्य" "ֆ"

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