a writer by passion , a teacher by profession and a learner by nature

एक लहर आये टकराये मिट जाये
दिखता है इसमें जीवन का सार मुझे
क्यों मैंने नदिया बनकर खुद को खोया
रास न आया सागर का विस्तार मुझे

अंजलि सिफ़र

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तेरी बाहों में ढल रही है शाम
लड़खड़ा कर सँभल रही है शाम
मेरे हाथों में हाथ है तेरा
हाथ से क्यों फ़िसल रही है शाम
अंजलि 'सिफ़र'

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करता जा बस कर्म तू, रख ख़ुद पर विश्वास
चलकर अपने आप ही, फल आयेगा पास
#विश्वास

महब्बत

चल आसमाँ के पार कहीं उड़ चलें सनम
न साये की हो फ़िक्र कोई धूप का न ग़म
हों बादलों की खिड़कियाँ दीवारें और दर
इक घर हो चाहतों का हों बस जिसमें तुम और हम
...अंजलि 'सिफ़र'

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#freedom #आज़ादी #देशभक्ति #मुक्तक


***मुक्तक***

नहीं आसान थी मिलनी जो हमने पायी आज़ादी
वतन वालों बहुत क़ीमत चुका कर आई आज़ादी
शहीदों की शहादत का करें सम्मान कुछ तो हम
जिन्होंने जाँ से जाकर हिन्द को दिलवायी आज़ादी


#freedom

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#freedom
क्षणिका

पिंजरे में क़ैद परिंदे को
अधिक बेबस और लाचार लगा
तस्वीर के फ्रेम में क़ैद पंछी
कुंडी भी नहीं थी बनी जिस पर कोई
कि रख सकता वो
उसके खुलने की उम्मीद...

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एक शे'र