मैं अन्नपूर्णा बाजपेयी एक साहित्यकार समाज सेविका हूँ. बचपन से कहानी लिखने का शौक था . आलेख भी लिखती थी . जो अब भी जारी है . साहित्य को समझने जानने का मौका मुझे माँ शारदे की कृपा से अब मिला है. मैं कविताएँ कहानियां लघुकथाएँ इत्यादि लिखती हूँ . यहाँ जुड़ कर सम्भवतः और बहुत कुछ सिख पाऊँगी .

गहना - प्रतियोगिता
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शुद्ध भाव अरु विनय रख, करिये निज अभिसार ।
गहना मानुष का यही, दृष्टि रहे उपकार ।।

रचनाकार
अन्नपूर्णा बाजपेयी अंजू
कानपुर

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सुप्रभात सभी को