जीवन के विभिन्न पहलुओं पर लिखने की एक कोशिश.....

अक्सर ख्यालातों में गुम हो जाते है मेरे एहसास
फिर उन्हें कहानियो में ढूंढने निकल पड़ती हूँ मैं...!!

-Apoorva Singh

रुख़सत होने को है अब यादों का जखीरा हमराही
अब बस यादों में ढूंढा करोगे खुद एक याद बनकर

-Apoorva Singh

रंग भरे अरमान सजे थे निगाहों में पाक मुहब्बत के।
जज्ब ख्वाहिशे कर ली देख रंग जमाने के।

-Apoorva Singh

छोटी सी कहानी थी
वो बारिश वाली शाम बड़ी सुहानी थी।
राह गुज़रती रही
कारवां बढ़ता गया।वो राह वो बारिश वो शाम दूर कहीं रह गये
कहीं दूर फिर किसी कहानी के इंतजार में....!

-Apoorva Singh

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मैं रंग की गोरी और वो वर्ण का श्याम
मेरी हर सांस में बसा है बस एक ही नाम
राधे श्याम🙏

-Apoorva Singh

आओ एक छोटा सा काम करे दूर रहकर भी ख्वाबो के जरिये मुलाकात करे।

-Apoorva Singh

यूँ तो अफ़साने बहुत है कलम चलाने को
शुरुआत कहां से करूँ ये सोच कर हाथ रुक जाते हैं

-Apoorva Singh

यूँ तो हसरत-ए-दिल तमाम हैं बयां करने को
मगर उन्हें एक मुलाकात भी गंवारा नही तो क्या कीजै।

-Apoorva Singh

आंखों से जो कह न सकूँ
उसे होठों से कैसे समझाऊं मैं
कर सकूँ तारीफ तुम्हारी जिन लफ्जो में वो लफ्ज कहां से लाऊं मैं

-Apoorva Singh

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वो सर्दी के कोहरे के बाद खिली धूप सा है
और मै धूप के बाद की सर्द शाम हूँ

कुछ ऐसा ही है ये इश्क़
साथ होकर भी जुदा सा

-Apoorva Singh

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