मुझको मेरे वजूद की हद तक न जानिए, बेहद हूँ बेहिसाब हूँ बेइन्तहा हूँ मैं। गुजरे हुए लम्हों में सदियाँ तलाश करता हूँ,  प्यास गहरी है कि नदियाँ तलाश करता हूँ, हक़ से दो तो तुम्हारी नफरत भी कबूल हमें,  खैरात में तो हम तुम्हारी मोहब्बत भी न लें। हमारे दिल में भी झांको अगर मिले फुर्सत,  हम अपने चेहरे से इतने नज़र नहीं आते। मेरी सादगी ही गुमनामी में रखती है मुझे,  जरा सा बिगड़ जाऊं तो मशहूर हो जाऊं। ........खान@..

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