प्राध्यापिका,लेखिका,वकील

सियासत के खेल तो बस ऐसे ही चलते रहते हैं...
देश वही रहता है,बाँटने वाले बदलते रहते हैं...

अर्चना अनुप्रिया

-Archana Anupriya

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बड़े शिकारी और तीरंदाज समझते थे खुद को...
आज तीखे नयनों के तीर का शिकार हुए बैठे हैं...

अर्चना अनुप्रिया

-Archana Anupriya

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त्याग,समर्पण,विश्वास जरूरी है,
आदमी को इंसान बनने के लिए..
बहुत कुछ खोना पड़ा था राम को
मर्यादा-पुरुष श्रीराम बनने के लिए..

अर्चना अनुप्रिया

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ताले ने आकर भरोसा तोड़ दिया सबका..
दरवाजों पर पहले विश्वास की कड़ी होती थी..

अर्चना अनुप्रिया

अजीब स्वाद है लोगों का भी...
झूठ मीठा और सच कड़वा लगता है...

अर्चना अनुप्रिया

बड़े अंदर तक घाव कर देती हैं...
वे शिकायतें जो खामोश रहती हैं...

अर्चना अनुप्रिया

सिर्फ उम्र से ही बड़ा नहीं हुआ जाता...
जिम्मेदारी उम्र से पहले ही बड़ा कर देती है...

अर्चना अनुप्रिया

फूल मसला भी जाये तो खुशबू देता है..
तकलीफों में भी मुस्कुराने का अंदाज रखें..

अर्चना अनुप्रिया

बहुत सावधान होकर गया था उसकी महफिल में..
उसने पलकें उठायीं और निगाहों से कैद कर लिया..
अर्चना अनुप्रिया

#सावधान

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साँसें हैरान और धड़कनें बेकाबू...
नजर भर तुझे देखना भी आफत...

अर्चना अनुप्रिया