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हमेशा अलग सोचे अलग करे और अलग बनें...

खाली खाली लगता है
मेरे दिल का हर कोना।
एक दर्द सा है सीने में
मुझे बहुत आ रहा रोना।।

क्या भूल हुई जो छोड़ दिया
मैं तड़प रही तू क्यूँ मुहँ मोड़ लिया।
एक बार तो गलती बता दे मेरी
तुझे नहीं चाहती मैं खोना।।
मुझे बहुत आ रहा रोना।।

तू तो गया मेरी जान भी ले गया
एक बार न सोचा कि मेरा क्या होगा।
मैं एक जिन्दा लाश बन गयी
अब चाहती हूँ हमेशा के लिए सोना।।
मुझे बहुत आ रहा रोना।।

एक बार गर जानते मुझको
कि तू ही मेरी धड़कन है।
अब तो बस साँस चल रही
अब भी तो कुछ कहो ना।।
मुझे बहुत आ रहा रोना।।।

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जो मैं यूँ मुस्कुरा रही हूँ
क्या गम है जो छुपा रही हूँ।
ऐसी बेबसी का है ये आलम
फिर क्यूँ खिलखिला रही हूँ।।

एक नकाब है चेहरे पर
और दर्द से बिलबिला रही हूँ।
टूट चुकी हूँ अन्दर से
फिर भी क्यूँ खिलखिला रही हूँ।।

जो मैं ऐसे मुस्कुरा रही हूँ
क्या गम है जो छुपा रही हूँ।।

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हर श्रृंगार मेरा तुमसे था
तुम ही थे मेरी दुनिया।
भूलूं कैसे जरा ए तो बता
जब भूल गयी ये दुनिया।।

दर्द जो सहा न जाय
दिल में उठे एक टीस ।
हर पल सोचू यही बात
कैसी है ये खीस।।

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डूब रही मैं गहरे गर्त में
एक बार मुझे तो उबारो ना।
मैं थकी थकी सी भटक रही
कोई पथ मुझे दिखाओ ना।।

कब तक भटकूं तनहा गलियों में
अब साथ मेरे तुम आओ ना।
मैं मीन प्यासी तेरे प्यार की
आके मेरी प्यास बुझाओ ना।।

तुझे खबर नहीं या याद नहीं मैं
ऐसे तो मुझको भुलाओ ना।
मर जाउंगी मैं बिन तेरे सनम
ऐसे तो मुझे तड़पाओ ना।।

तू मेरी चाहत तू प्यार मेरा
जिद छोड़ो, यूं ऐसे तरसाओ ना।
मैं तेरी हूँ तेरी ही रहुंगी
अब ऐसे मूझे बिसराओ ना।।

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चाहा तो था मैंने भी सनम
पर तुमने सिर्फ चाहत की।
एक बार तो करते प्यार मुझे
क्यों मेरी भावनाएं आहत की।।

गर तुझे जानती ओ बेदर्दी सनम
तो दिल तुझसे मैं लगाती ना।
ना डूबती इस गहरे भवर में
और कभी पछताती ना।।

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