i love my self ... my family

तुमसे बेहतर तुम्हे कोई नहीं जानता
फिर क्या देखना चाहते हो मेरी आंखो में

मैने सारे रंग को खुद से दूर कर दिया
सोचा बेरंग सी जिंदगी में कयामत का रंग भरूं

कहते है तस्वीरे बोला करती है
तो फिर आंखे क्या कहती होगी

चलो आज वफाओं को थोड़ा और गहरा करते है
सुनामी सा इश्क़ है तेरा हमदम
हम उठते हुए तूफानों को आंखो में कैद करते है

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अधूरापन भी अच्छा है
पूरे होने की आस तो है
पल पल घटते बढ़ते चांद को पूर्णिमा की प्यास तो है
जैसे रात अमावस की जैसे चांद अधूरा है
तुम वेदना बन उतर आओ हृदय में की अभी प्यार अधूरा है

-Arti Shukla

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चलो आज ना कुछ कहा जाए
तुम बस देखते रहो और मैं खामोश तुझे महसूस करू

मुझे मेरे ना होने का मलाल नहीं ,,तेरे जिक्र में कुछ कुछ पूरी होती हूं ,,
अगर मैं बेवफा होती तो शायद महफ़िल रौशन करती,,,पर इल्म वफाओं का था इसलिए रातें तन्हा गुजरती हैं मेरी

-Arti Shukla

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कुछ धुंधली धुंधली सी इश्क़ है
एक बड़ा सा यादों का पिटारा है
चलो आज उन यादों से
थोड़ी मुलाकात की जाए

-Arti Shukla

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जब तक ये रात ख़त्म होगी
टूट कर तेरी बांहों में बिखर जाऊंगी
सुनो तुम रोक लो ना आज की रात को
कल कहां फिर मैं आऊंगी
पिघल जाने दो ना आज तुम मुझे
फिर ना कहीं पत्थर बन जाऊं मैं
समेट लो ना तुम मुझे बांहों में अपनी
तुम भी तो तरसे हो ना बरसों इन राहों में
तड़प कर मिल जाओ की तडपन ये खत्म हो
मुझे फिर से तुम एक बार पूरा कर दो

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क्या करू मैं तेरी यादों का
कफ़न पहना कर दफन कर दूं इसे
या सिसकियों के साथ गंगा में बहा दूं
बोलो ना ,,,या आग की लपट में स्वाहा कर दूं
बेहतर होगा कि एक खत में यादों को तेरी बन्द कर
तेरी अमानत तुझे सौंप दूं

-Arti Shukla

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