skew your eyes every thing will be clear

बाज आ अपनी शरारतों से
,कुछ खौफ कर उस नियतिका प्यारे ।
तेरी इन ओछी शरारतों ने .
दुनिया के लाखों हैं घर उजाड़े ।
सूप चमगादड़ों. का पीना
मछलियों के वस्त्र सीना ,
लाखों वर्षों से तू यहां है
बता दे कब सीखेगा प्यारे
धरा के जीवों के संग जीना ।
शरारती बन कर ए मानव
प्रकृति के संग जीना सीख प्यारे ।




#शरारती

Read More

शक्तिमान भी कभी -कभी मजबूर होता है ।
सुई हो यान ,बनाने वाला सिर्फ मजदूर होता है ।
आज यही मजदूर रो रहा है ।
संभवतः अपने जीने का हेतु खो रहा है ।
#शक्तिमान

Read More

अर्थ तंत्र में उलझकर जीवन चकनाचूर ।
बाँह फैलाया गाँव ने आओ सब मजबूर ।।
#देखने के लिए क्लिक करें

मैं शाहजहां बोल रहा हूँ ।
हाँ वही जिसने ताजमहल तामीर कराया था ।
अपने प्यार की खातिर ।
तुम लोग जिसे देखकर आहें भरते हो ।
अजूबा कहते हो जिसे ।
मैंने मजदूरों के हाथ क्या काटे ।
जी भर गालियाँ सुनाई तुम लोगों ने ।
लेकिन ध्यान रखो ।
मैं मरा नहीं था कभी और मरूँगा भी नहीं ।
जबतक मजदूर इस धरती पर हैं ।
देखो आज मैं अपने हजार रूपों के साथ ,
खड़ा हूँ तुम्हारे पास पहचान सकते हो तो ।
पहचानों मुझे ।
और दो गालियाँ ।
नहीं दे सकते क्योंकि तुम मुझे जिस कपड़े से पहचानते थे
मैने उतार दिया है ।
और अब मैने हाथ काटना भी छोड़ दिया है ।
अब तो मैं सीधा सिर काटता हूँ सिर ।
भूख बनकर मार देता हूँ ।
मैं इन सब भागने वालों को रोक सकता था ।
क्योंकि इनके चेहरे आज भी मुझे मेरे बेडरूम में दिखते हैं
इनके होने का अहसास मैं अपने गार्डन में भी पाता हूँ ।
इनका अस्तित्व मैं घर के हर कोने में पाता हूँ ।
इनके दुधमुंहे बच्चों की किलकारियां जैसे कल की बात हो ।
लेकिन मैं इन्हें नहीं रोक रहा ।
क्योंकि इनकी नियति में दखल देने वाला कौन हूँ मैं ।
भागने दो ,थक कर गिरने दो ,मरने दो ।
इनको इनके किए की सजा मिलने दो ।
मैं वातानुकूलित कक्ष में अपने बच्चे संग खेल रहा हूँ ।
हाँ मैं शाहजहां बोल रहा हूँ ।
हाँ मैं शाहजहां बोल रहा हूँ ।

Read More

खुद से खुद की बात करे जो,खुद से खुद को जाने ।
ऐसा योगी ध्यानी जन को जग क्यों न पहचाने ।।
#खुद

भाग्य प्रबल नहिं होत है कर्म प्रबल सुन राय ।
बिना युद्ध विजयी कहाँ जन कोऊ कहलाए ।।


#भाग्य

सीखना आयु से संबंधित नहीं है ।
उठो आओ सीखते है ज्ञान कुछ ।
आपको अनुभूति है ममतामयी माँ ।
नवजात शिशु को ले पैदल चली ।
(सद्यः जात शिशु को उठाकर सैंकड़ों.किमी की यात्रा जो कि स्वतंत्र भारत का सबसे बड़ा प्रवजन है ।क्य ये क्षण हमें कुछ सिखाना.नहीं चाहते हैं ।
#सीखना

Read More

जीवन एक पतंग है डोरी वा के हाथ ।
वाके चाहे चाहे उड़ि रहो न चाहे गिर जात ।।
#पतंग

शूरवीरों की धरा पर जन्म का अभिमान है ।
राष्ट्र गौरव के लिए अर्पित ये तन मन प्राण है ।
युद्ध ही निर्णय न करती है वीरोचित कृत्य का ।
आपदाएं भी परीक्षा लेती उनकी शक्ति का ।
हर कदम पर युद्ध की है भेरियां बजती हुई ।
जो भी विजयी हुआ संधान कर निज सत्य का ।।
#शूरवीर

Read More

देखि विनोदी छवि कभी लेहु न सोच बनाय ।
हो सकता वह दुःख को मन में रहा दबाय ।।
#विनोदी