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बाढ़ की विभीषिका में सड़के निरुत्तर है ।
अपनी असहायता का बोध हैं करा रही ।
छोटे सरोवर भी क्रोध में उफन रहे हैं ।
नदियों की धाराएं हर्षित हो गा रहीं ।
आम जन कैदी बन गेह में समाया है ।
भोजन पानी की चिंता है सता रही ।
धान गेंहूँ दाल नमक जल में समा गये ।
पीकर अशुद्ध जल बेटी भी जा रही ।
इन्द्र देव रोको अब तो निज वेग को ।
अब तो सहन शक्ति सीमा पार जा रही ।

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अम्मा मोर नउँवा लिखाय देव ।
हमहूँ स्कूलै जइबय ।
काकू के लरिके दुइव जात हैं ।
कहैं जे पढ़ै न उ ही बिलात है ।
जिनगी म ढ़ंग से जियत न खात हैं।
हम पढ़ि लिखि कय अइबय ।।
पढ़ै लिखै कय बात है अउरै ।
दुई जन आगे पाछे दउरैं ।
बिनु गियान मनही मन भउरैं ।
हमहूँ गियान धन लइबय ।
सब स्कूलै म होत है पढ़ाई ।
कापी किताब मुफत मिलि जाई ।
जूता बस्ता भी मुफतै मा पाई ।
दोपहर कय भोजन भी पइबय ।
ज्ञान कय कीमत कोउ न देवै।
मुफतै मा सब शिक्षा लेवै ।
ई सरकार जे सबका सेवै ।
गियान गंगा मा हमहूँ नहइबय ।
हे अम्मा मोर नउँवा लिखाय देव।

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अ से अमिया खट्टी होती ।
आ से मीठा होता आम।
इ से इमली भी है खट्टी।
ई से ईख दिलाता दाम ।
उ से उल्लू है भाई सुन ।
ऊ से ऊन का स्वेटर बुन।
ऋ से ऋषि सिखाते ज्ञान।
बच्चों का भी हो सम्मान।
ए से एड़ी धोते साफ।
ऐ से ऐनक दिखाता साफ ।
ओ से ओंकार का ज्ञान।
औ से औरत बड़ी महान।
अं से मीठे हैं अंगूर ।
विद्यालय तुम आओ जरूर।
अः का खाना खाली ।
बच्चों बजाओ ताली ।
क से कार चलाते हैं।
ख से खबर सुनाते हैं ।
ग से गमला लाते हैं ।
घ से घर को सजाते हैं ।
ङ का घर है खाली ।
च से चप्पल पहन के आओ।
छ से छह तक गिन के आओ ।
ज से जल की बोतल लाओ।
झ से झगड़ा आप बचाओ ।
ञ का घर है खाली ।
ट से टमाटर गोल मटोल ।
ठ से ठग्गू के लड्डू गोल।
ड से डमरु मदारी वाला ।
ढ से ढोलक बजे निराला ।
ण का घर है खाली ।
त से तरबूज खाते हैं ।
थ से थरमस लाते हैं ।
द से दरवाजे की ओर।
न से नल के जल का शोर ।
प से पानी बहता है ।
फ से फूल खिलते हैं ।
ब से बस में जाते हैं ।
भ से भौंरे गाते हैं ।
म से होता माली ।
य से यज्ञ होता है ।
र से रमेश पढ़ता है ।
ल से लम्बे -लम्बे बाल ।
व से वीर करे कमाल ।
श से शीला आती है ।
ष से षटकोण बनाती है ।
स से साल बीत गया ।
ह से हल जोत गया ।
क्ष से क्षत्रिय लड़ते हैं ।
त्र से त्रिशूल चलाते हैं ।
ज्ञ से ज्ञानी देते ज्ञान।
बच्चों का भी हो सम्मान ।

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मन मेरो राम नाम भजि डारो ।
जीवन का एक हेतु राम सुनू ।
भवनिधि पार उतारो ।

रमापतिं विष्णु सहस्त्र रूपं .देवाधिदेवः लक्ष्मीपतिं त्वम्।
त्वम् राम रूपेन् आदर्श कारम्,त्वम् कृष्ण रूपेन योगस्वरूपम् ।
भक्तानुकम्पान् करोति प्रभु त्वम्,प्रह्लाद गजराज उद्धार कारम् ।
संहारकर्ता दुष्टानि वृत्तिं कृपालु भगवन् सद् वृत्ति रूपम्।

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नीक मीठ न बोलब भाई ,यदि कहुँ हमैं शुगर होइ जाई ।
लेइ डाक्टर जाँच कई पइसा ,सोचइ मिला हमई बड़ भैंसा।
मलकिन रोवैं जार बेजारा ,बिनु इनके है कउन हमारा ।
सार ससुर सुनतय चलि आए, घर कै नाज दबायकै खाए ।
सात आठ मन आलू लइगे , कहैं रही तो कहाँ बरबै ।
दस मान चाउर बोरम भरिकै , भागैं सरपुत सरपट लइकै ।
जब तक जाँच रपट है आवा,घर कै तिया पाँच हम पावा।
कहिस डाक्टर सुनहु फलाने ,शुगर मिलै नहिं जाँच कराने।

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प्यासी धरती के ओठों की प्यास बुझाने आए हैं ।
कृषकों की जीवन दीप शिखातेज जलाने आए है।
ताल तलैया में भी हम उत्साह जगाने आए हैं ।
नदियों को नीरधि जैसा एहसास दिलाने आए हैं।
मेरी गर्जना बोध करती होने का जीवन्त मेरे ।
बूँदे कहती हो एकत्रित बनना है जलधार मुझे ।
तीव्र तरंगें विद्युत की स्पष्ट दृष्टि देती मुझको।
आशाओं पर खरा उतरना करना है स्वीकार मुझे ।

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सूरज काका बोलो कब छुट्टी में घर जाते हो ।
अपनी माँ से क्या तुम हलुवा -पूरी बनवाते हो ।
मैं तो तुमको रोज राह पर चलते ही पाता हूँ ।
स्थिति देख तुम्हारी दिन मान पता कर पाता हूँ

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देखो बच्चों हाथी आया ।
धम्मक-धम्मक हाथी आया ।
पानी भर कर सूंड़ में लाया ।
क्या उसने तुमको नहलाया।
देखो-देखो केले खाकर ।
है हाथी कैसे मुस्काया ।
गन्ना खाता बड़े मजे से ।
खेत का पूरे करे सफाया ।

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दौड़ा- दौड़ा चूहा आया ।
भागो-भागो शोर मचाया ।
दौड़ो बिल्ली मौसी आयी
आँखें गोल-गोल मटकाई
मौसी के सिर पुलिस की टोपी ।
भागो यह मौसी की चौकी ।
भाग के बिल में तुम घुस जाऔ।
मौसी को फिर नजर न आओ।
यदि बिल से निकलोगे बाहर ।
जा न पाओगे फिर अन्दर ।
डरकर भाग गए हैं सारे ।
डर के मारे छुपे बेचारे।

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