skew your eyes every thing will be clear

आओ आज मनुष्य बनें हम ।
जीवन का मतलब समझे हम ।
कर्मविरत क्षण मात्र न हों हम ।
सत्य से मुँह न मोड़े कभी हम ।

अवसरों की खोज में ,अवसरों की खोज में ।
चला किए चला किए चला किए.चला किए ।
जो जहाँ था जिस तरह मिले थे उससे उस तरह ।
दृश्य जैसे मंच के किए श्रंगार उस तरह ।
अभिनयन की राह में चले यथार्थ की तरह ।
सजीवता की खोज में बहे प्रवाह की तरह ।
विरत हुए न राह से चला किए चला किए ।।
वनान्तरों में काली रात सोचकर गुजार दी ।
प्रभात की प्रसन्नता में काली रात पार की ।
आप से विनय किया प्रभाती कुछ उधार ली ।
नेह रज्जु मार्ग से उफनती नदियां पार की ।
कभी तो होगा शुभ इसी प्रयास में चला किए ।।

Read More

रघुपति राघव राजा राम ,अर्थव्यवस्था जय सियाराम ।
पतितपावन राजा राम. नौकरी चाकरी सीता राम ।
पैंतीस ए का काम तमाम, तीन सौ सत्तर जय श्री राम ।
एयर स्ट्राइक जयश्री राम ,तीन तलाक हुआ राम ही राम ।
भजु मुख्य मन्त्री सीता राम.भये चिदम्बरम् जय श्री राम ।

Read More

कुछ शेष हो रहे हैं कुछ शेष हो चुके हैं ।
अब शेष जो बचे हैं वो विशेष हो चुके है ।

स्वर तन्त्रियों से मचलकर प्रस्फुटित होती ।
हमारी संस्कृति को सभ्यता को रूप देती है ।
हमें सम्बद्ध करती विश्व की नवचेतना से ।
हमारी कल्पनाओं को नवल अभिरूप देती ।
वो हिन्दी है वो हिन्दी है वो हिन्दी है वो हिन्दी ।

Read More

कुछ टी.वी चैनल उदघोषक बजा रहे हैं रणभेरी।
करते तुलना बम गोलों की करते रहते मेरी तेरी ।
एसी है स्टूडियो आपके जानो युद्ध भला क्या है ।
जीवन कीहोती क्षति इससे भला मिला क्या है ।
अपने घर के समाचार क्या रीत गये हैं सारे ।
पढ़लिखे नवयुवक नौकरी हित हैं मारे मारे ।
बच्चा चोरी की अफवाहों से बाजार भरा है ।
आर्थिक मन्दी का दानव मुँह को फाड़ खड़ा है ।
राजनीति के संदर्भों से उत्तर तुमको लेना होगा ।
एनआरसी के घाल मेल पर उनका मत लेना होगा ।
सोचो प्रथम राष्ट्र हित फिर तुम समाचार बाँचो।
क्या है शुद्ध सार्थक सुन्दर निज विवेक से तुम जाँचो।

Read More

हे कैलाश वासी तुम्हारे शरण हम ।
कृपाशील शिवजी तुम्हारे शरण हम।

मेरा घोड़ा मेरा घोड़ा ,दौड़ लगाए थोड़ा-थोड़ा ।।
बापू आओ एड़ लगाओ,दौडा़ घर जल्दी पहुँचाओ।
घर पर चिंकी रिंकी कालू खेल रहे हैं भालू भालू ।
दीपू बैठ रसोईघर घर में खाय गपागप गप कचालू ।
बिल्ली मौसी ताक में बैठी देंखे मूषक भाई को ।
मूषक भाई कुतर रहे राजू तेरी रजाई को ।
टामी भाई पूँछ हिला कर माँग रहे है रोटी ।
एक छोटा रोटी का टुकड़ा लेकर आयी छोटी ।
बड़े बजे से रोटी खाते देखो टामी भाई ।
पूँछ हिला कर करें इशारा पेट है खाली माई ।

Read More

युद्ध की धमकियों से डरेंगे न हम ।
ग्रामसिंहों से वनराज डरते हैं क्या ।
मृत्यु निश्चित है एक बार ही आनी है ।
कायरों की तरह रोज मरते हैं क्या ।
तुम मिसाइल बनाते हो जिस नाम से ।
नाम लेते हो तुम जिसका सम्मान से ।
गौरी अब्दाली बाबर तुम्हारे थे सब ।
उन लुटेरों की औकात समझोगे कब ।
हैं क्षमाशील और शान्ति के दूत हम ।
पर न समझो की युद्ध मे हम हैं कम ।
मातृभूमि के हित प्राण दे देगें हम ।
राष्ट्र रक्षा के हित प्राण ले लेंगे हम ।
विश्वबन्धुत्व का गान गाते तो क्या ।
ग्रामसिंहों से वनराज डरते हैं क्या ।
नागरिक देश के सुन हमारे जो हैं ।
आत्मा में बसे प्राणप्यारे जो हैं ।
नयनो में आस भर कर निहारे जो है ।
वो प्रिय मेरी आँखों के तारे जो हैं ।
रक्त की आखिरी बूँद उनके लिए ।
श्वास की हर एक तार उनके लिए ।
सारे जीवन का व्यापार उनके लिए ।
बुद्ब गाँधी के वंशज हैं हम तो क्या ।
ग्राम सिंहों से वनराज डरते हैं क्या।

Read More

हर ओंठ मुस्कुराते हों हृदय गीत गाते हों ।
पंख लगी कल्पना जीवंत हुई जाती हैं ।
दूर कहीं प्रतिध्वनित होती है सांसे मेरी ।
लगता जलधार कोई मस्ती में गाती हो।

Read More