આપો પ્રેમ કે પછી પસ્તાવો શું ફરક પડે, હસતા રહેવાનો અમે નિયમ રાખ્યો છે....@win*

मन की गाँठ खोल क्यों नहीं देते
जो बात है बोल क्यों नहीं देते

मेरी ही तलाशी लिये जा रहे हो
ख़ुद को भी टटोल क्यों नहीं लेते ...

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आफ़त तो है वो नाज़ भी अंदाज़ भी लेकिन
मरता हूँ मैं जिस पर वो अदा और ही कुछ है

चाँद तो तुम हो ,
मैं तो बस एक रात हूँ,,
तुम्हे गजल की तरह लिखता हूँ ,
मैं तो जरा सी बात हूँ !!

उनके हर एक लम्हे कि हिफाजत करना ए खुदा
मासूम चेहरा है उदास अच्छा नहीं लगता

जिन्दगी समझ आ गयी... तो अकेले में मेला...
और ना समझ आयी तो... मेले में अकेला...!!

गुजारी थी खुशी की चंद घड़ियाँ
उन्हीं की याद अपनी जिंदगी है!