'સપના પૂરા કરવાની 'ઉડાન' મા 'આઝાદી' ની પાંખો કપાઈ ગઈ.', ને માતૃભારતી પર વાંચો :
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''સિલસિલા બદલતી જિંદગી કે પહેલું કા'', ને માતૃભારતી પર વાંચો :
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मुसाफिर की सोच...।


इस धरती पर खड़ा,
       हर कोई इंसान एक मुसाफिर है।
वह सब अपने आगे आने वाले,
       रास्ते के बारे में सोचते हैं।
उस सोच में सब को आगे आने वाले,
        रास्ते में फूल ही चाहिए।
किसी को भी पूछोगे,
           कोई नहीं बोलेगा मुझे कांटा चाहिए।
लेकिन रास्ते में कांटे ही नहीं होगे,
            तो फिर फूल की अहमियत कैसे पता चलेगी।
अब सोचोगे तो पता चलेगा कि,
        जिंदगी इतनी खूबसूरत चीज क्यू हैं?
क्योंकि इस सफर में कांटे और फूल,
            दोनों की अहमियत है।

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जिंदगी के कदम- कदम पर है खड़ी रुकावटें..।

हर कोई इंसान इस धरती पर,
एक दिन जन्म लेकर आया।
जन्म लेने के बाद वक़्त गुजरता गया,
सब ने पूछा हम इधर तो आए हैं,
लेकिन ये है क्या? कोई बोला सफर है।
जो यह सफर है, तो उसका कुछ नाम तो होगा।
इस नाम के बारे में किसी ने बोला,
ये जीवन की सफर है।
या तो कुछ लोगों ने बोला,
ये तो जिंदगी की सफर है।
जीवन की सफर और जिंदगी की सफर,
दोनों सफर को सुनकर हम तो confuse हुए।
बाद में हम school गये,
वहा भाषा पढ़ने में आई।
उधर हमने सीखा की जिंदगी और जीवन,
दोनों तो एक ही झरने से, निकलने वाले समानार्थी शब्द है।
मतलब जिंदगी और जीवन,
दोनों शब्दों का मतलब तो एक ही है।
उस दिन तो जान लिया कि,
जिंदगी या जीवन एक शब्दप्रयोग है।
लेकिन हर इंसान के, जीवन का वक़्त बितता है।
उस बीतते हुए वक़्त के भीतर,
कदम -कदम पर है खड़ी रुकावटें।
वो रुकावटों को देखकर हारना,
वो जीवन की सार्थकता नहीं।
जिंदगी में आने वाली रुकावटें,
तो जिंदगी की परीक्षा है।
आज तक जिस-जिस ने,
रुकावटों का सामना किया है,
वही लोग जिंदगी को समझ पाए हैं,
और एक चीज हमेशा याद रखना,
रुकावटें हैं, तो ही जिंदगी में जान है।
क्योंकि रुकावटें आये तभी तो,
धड़कने की आवाज सुनाई देगीना।
और हम सब जानते हैं कि,
धडकनो के आवाज के बिना की,
जिंदगी को, जिंदगी ना हीं बोल सकते।
इसीलिए रुकावटों को ,
जोड़ लो जिंदगी के साथ।

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जिंदगी और मोत के बीच में क्या ..??


इंसान जब इस दुनिया में जन्म लेता है,
उसके पहले उसने कहा जन्म लिया था, और कौन था वो।
इसके बारे में या तो, मृत्यु के बाद वो कहां जाता है,
उसके बारे में शायद आज तक कोई तत्वचिंतक,
नहीं तो कोई सामान्य इंसान से लेकर महान इंसान,
यानी कि इस दुनिया में कोई भी वैसा इंसान नहीं है,
जो इसके बारे में जान पाया हो।
तो ये सब जानने के बाद इंसान वैसा क्यूँ,
नहीं सोचता कि मुझे जिंदगी एक ही बार मिली है,
तो जिंदगी में कुछ अलग तो करना ही चाहिए।
जिंदगी को अपने सपनों के लिए, अपने लोगों के लिए,
और अपने सपनों को साथ में लेकर कुछ वैसा,
अलग करना चाहिए कि भले ही हम ये दुनिया से,
चले जाए लेकिन तब भी, हमारे बारे में,
पेन से लिखा हुआ हर शब्द, हमारे मुंह से बोला गया हर शब्द,
और हमने किए हुए हर काम,
हमारी एक बार मिली हुई जिंदगी पर हमारी वो,
लगन आने वाली पीढ़ियों के लिए एक Moral बन जाए।
कुछ ऐसे इंसान तो हर काल में पैदा होते हैं,
लेकिन कुछ अलग करने की सोच वाले,
और कर पाये वैसे इंसान बहुत कम होते हैं,
लेकिन कुछ वैसा सोचो कि हमारा नंबर भी इस कम में आए।
सोचने के बाद ऐसा लगा कि साला Imagination मे,
इतना Power है तो सच में ये कम में हम आए,
हम यहां ना हो तब भी हमारी आत्मा में कितनी Energy आये।
इसीलिए जिंदगी एक बार मिलती है,
जी लेनी चाहिए अपने आप के लिए।
इस दुनिया के लिए और छप जाने चाहिए,
हमारे मुंह से बोला गया हर शब्द पेन से।


-BHARVI PATEL
DATE=30/12/2017

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બદલતી મંઝીલે...


વિચારોની મહેફિલમાં રાચતો હોય છે માનવ,
અને તે વિચારોની મહેફિલમાં,
ક્યારે તે તેના જીવનનો માર્ગ બનાવી બેસે,
તે તેને ખુદને નથી સમજાતું,
જ્યાં માર્ગ છે ત્યા ધ્યેય નિશ્ચિત છે,

પણ છે જિંદગીના અનેક પ્રકાર તો માર્ગ પણ હોય અનેક,
જ્યાં અનેક હોય ત્યાં મૂંઝવણ ઘણી,
તો માર્ગની મૂંઝવણમાં મુકાય માનવ,
બની શકે મૂંઝવણમાં હોય અટકણ,
અટકણ માં ભટકે માર્ગ,
પણ ધ્યેય રહે જીવિત,
તો અનેકમાંથી એક માર્ગ,
બનાવી જાય જિંદગીને જીવી જાણી....

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