Hey, I am reading on Matrubharti!

उपर वाले ने
हम दोनों में इतना
फर्क क्यु किया...

दिल दोनों को दिये
फिर दर्द सिर्फ
मुझे क्यु दिया... bhavna

जिंदगी की शिकायतें
सभी के सामने
मत खोल ऐ दिल...

कोई हाल अगर पूछे
तो हस के उन्हे मिल... bhavna

चुप हैं तों
चल रही है जिंदगी...

अगर जुबान खोलीं
तो सांसे
थम जायेंगी... bhavna

खुद के करीब
नहीं रहे तबसे...

तुमसे दुर गये हैं
जबसे... bhavna

जिनके दिल में दर्द होता हैं
वो अकेले ही सहते हैं...

बाकी तसल्ली तो
कई लोग देते हैं... bhavna

मिलन में लम्हा ओर
बिछड़ने में जिंदगी
गुज़र जाये...

क्यु ना कभी हम
ऐसे मिल जाये... bhavna

हम शायर है
पर कायर नहीं...

हम सिर्फ दर्द लिखते हैं
कभी देते नहीं... bhavna

पहले हम तेरे पास
अपने लिए
वक़्त मांगते थे...

अब हम वक़्त से
तुम्हे मांगते हैं... bhavna

यादों के संदूक में
बंद हो गई ओर एक रात...

नई सुबह ले कर
सूरज आया है
नई उम्मीदों के साथ...

उलझे हुए रखते हैं
जिंदगी की उलझनों
में खुद को...

डर लगता है
के फिर से किसी से
लगाव ना हो जाये... bhavna