Hey, I am on Matrubharti!

वो जो पूछते थे बात बात पर कि हमें क्या चाहिए ,

कल अगर इश्क ही किया था
तो समझ क्यूँ नहीं पाये!!

तुम लड़ोगे जिसके लिए आज सबसे,
कल एक जंग फिर खुद से भी होगी!!

मैं खामोशियों में लिपट जाऊ ये हालात नहीं हो मेरे

मुझे अकेलेपन में भी मेरे अल्फाज चाहिए।

कुछ एहसासो ने सिखाये थे बेवजह बहकने के सलीके

अब जो एहसास मर गये तो कहानी ही थम सी गयी!

फिर एक नये तजुरबे की तलाश हैं मुझे
पुराने वालों का सबक अधूरा है।।

वो जो जज्बाती गुफ्तगु थी
फिजूल उसे भी ठहराया गया

यूं सरफिरे ख्याल जो आये सामने
जी उससे भी बहलाया गया!!

फरेब का महीना हैं और दिखावे का इजहार
यूं चंद दिनों के लिए अब इश्क सर चढ़ने लगा!!

वो तकलीफें देकर भी खुद को सही ठहराता रहा,
सोच कितना गलत इन्सान चुन लिया था तुने!!

ये जो नफरत भरी है जहन में इसे तू कैसे मिटायेगा

अब जो गिर चुका है नजरों से वापस कैसे उठ पायेगा!

दुआऐ कल भी की थी
और दुआऐ आज भी कर रही हूं

बस कल तुझे पाने की थी,
और आज तुझे भुलाने की कर रही हूं।।