नमस्कार मित्रो, मेरा नाम भूपेंद्र कुलदीप है मैं छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग में प्रथम श्रेणी राजपत्रित अधिकारी हूँ और वर्तमान में दुर्ग विश्वविद्यालय में उपकुलसचिव के पद पर कार्यरत हूँ. मैं बोलचाल की भाषा मे कहानी लिखता हूं उम्मीद है आप सब इसे पसंद करेंगे. आपके सुझाव और समीक्षा आप मुझे bhupendrakuldeep76@gmail.com पर भेज सकते है ताकि मैं अगली कृतियों में सुधार कर सकूं.

"ऐ ज़िंदगी तू अब साथ चल मेरे
अब कहानी नई लिखते हैं,

छोड़ अब किसी के आने की उम्मीद
अब तलाश खुद की करते हैं...!!!

अच्छे रिश्तों को वादे और शर्तों की जरूरत नहीं होती,

बस दो खूबसूरत लोग चाहिए एक निभा सके और दूसरा समझ सके।

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"कर रहा हूँ तुझे खुशी से बसर

ज़िन्दगी तुझ से दाद चाहता हूँ...!!!"

चलते-चलते रास्ते में
रुककर सोचा भी,

क्या मंज़िल पर पहुंचकर
याद रहेगा रास्ता भी...!!!

बिखेर आया हूँ
हर जगह अपने वज़ूद को,

अब तन्हाई तुझे
छू ना पाएगी कभी...!!!

जिन्हें गुणो की पहचान नहीं है
उनकी "प्रशंसा" से डरिए ,
और
जिन्हें गुणों की जानकारी है
उनके "मौन" से डरिए l

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जाने उस शख्स को
कैसे ये हुनर आता है,

रात होती है तो...
आंखों में उतर आता है...!!!

"खुशी" के लिये बहुत कुछ इकट्ठा करना पड़ता है ऐसा हम समझते हैं।

किन्तु हकीकत में "खुशी" के लिए बहुत कुछ छोड़ना पड़ता है,
ऐसा "अनुभव".... कहता है।

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कुछ मोहब्बत की... कुछ इबादत की झलक है तुझमे,

किस रिश्ते मै बांधू.. हर रिश्ते की महक है तुझमे...!!!

मन तृप्त है तो एक बूंद भी बरसात है।

मन अतृप्त है तो समंदर की क्या औकात है।।