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  • #Kavyotsav2
    God

    होलिका दहन हुई, प्रह्लाद अग्नि बीच रहे !
    भक्त वो मिटे कहाँ, प्रभू जिसे सींच रहे !!

    ध्रुव को तार-तार किया, किसी अहंकार ने
    ॐ हरी-हरी तब, लगे ध्रुव पुकारने
    प्याला हरी नाम पिये, बैठे धरा बीच रहे !
    भक्त वो मिटे कहाँ, प्रभू जिसे सींच रहे !!

    विष्णु ज्ञान राग भरे, नभ में जगमगा रहे
    मय के अहंकार में, मनुष्य डगमगा रहे
    प्रगति सीधे हाँथ में, आड़े हाँथ खींच रहे !
    भक्त वो मिटे कहाँ, प्रभू जिसे सींच रहे !!

    आओ सभी भस्म करें, अपने-अपने पाप को
    ज्योति प्रज्वलित करें, ज्योति से मिलाप को
    आज फिर प्रमाण मिला, सत्य सबके बीच रहे !
    भक्त वो मिटे कहाँ, प्रभू जिसे सींच रहे !!
    !! ज्योति प्रकाश राय !!

  • #Kavyotsav2
    लान करो भारत बंदी का, मत ध्यान रखो प्रगति की मंदी का।
    जब-जब मन का गति मंद हुआ, तब-तब यह भारत बंद हुआ।

    क्या नेता यही पढ़ा करते, या गठबंधन में गढ़ा करते।

    कुछ तो करतब दिखलाना है, चलो भारत बंद कराना है।
    ऐ राजनीति से खेलने वालों, क्या परंपरा को भूल गये।
    कुर्बान हुये जो वीर पुरुष, उस लहू, धरा को भूल गये।

    मत अपमान करो भारत माँ का, यह देश नहीं इक नारी है।

    सुत कुर्बान हुये जिनकी रक्षा में, उस माँ की महिमा प्यारी है।
    ऐ सिंहासन के चाहने वालों, क्या मिलता है इस बंदी से।
    यदि शिक्षित हो तो मत रोको, बढ़ते कदमो को डंडी से।

    मानो कहना संत पुत्र का, यह देश नहीं मेरा घर है।

    भारत माँ की जय गूंजेगा, हिन्द देश का प्रेम अमर है।

    ।। ज्योति प्रकाश राय।।

  • #Kavyotsav2
    जगह आपके दिल में बनाने आया हूँ ,

    महफिलों से कारवां सजाने आया हूँ।
    बड़ी दूर का सफर था, मै आप लोगों से बे-खबर था
    मीठे अल्फाज सुनने और सुनाने आया हूँ,

    महफिलों से कारवां सजाने आया हूँ।

    जहाँ उद्योग कालीन का छाया है,

    यह शख्स जिला भदोहीं से आया है
    मै अपनी पहचान बताने आया हूँ,

    महफिलों से कारवां सजाने आया हूँ।

    यह संत पुत्र , आज मंच पर बोल रहा,
    दो टूक शब्द जो लिख पाया, उसमे खुद को तोल रहा,
    निखरेंगे शब्द पंक्तियों से, विश्वास दिलाने आया हूँ

    महफिलों से कारवां सजाने आया हूँ।

    अद्भुत और अलौकिक यह, रंग मंच इतिहास रहे,
    वाह वाह क्या बात है के इस प्रांगण में,

    कविवर ज्योति प्रकाश कहे।
    गीतों की माला ले कर, ह्रदय लगाने आया हूँ,

    महफिलों से कारवां सजाने आया हूँ।

    ।। ज्योति प्रकाश राय।।

  • #kavyotsav2
    सावित्री बाई एक नायिका

    र्दद के दामन पर
    जग सोया था
    जाती प्रथा के कथा
    मैं हर वर्ग खोया था।
    तब आई वह
    नारी की देवी थी,
    महात्मा से विदया पाकर
    वो संयम सरस्वती थी।
    सावित्री नाम उसका
    जोति बा के संग व्याही थी
    हथेली में उसके विदया की सयाही थी।
    उस जमाने में धर्म के नाम पे
    ये रोग,
    तन,मन सब हारे थे
    वो आई देवी बनकर
    धर्म के जंजीरों को सबने तोडा था ।
    सन अठालिस मैं
    मराठों मैं वह
    समाज की नायिका थी
    वचन मे उसके
    दलितो की पुकार थी
    बालपन से था
    पुस्तकों का प्रेम
    हाथो मैं पाकी पेनसील
    और मन मैं अभिलाषा
    पूरी की प्राथमिक शिक्षा
    लेकर मन मे अनेक आशा।
    दलित और हारे
    को उधार किया
    मन मैं विशवास
    हर नारी को देना शिक्षा था
    पथ सीखा गई मानवीकता का
    जोति बा के विचार सदा प्रेरणा देते ।
    न देख पाई सत्रीयो का दर्द
    हर प्रथा पे करती विवाद
    पूने, सातारा अब कहा न
    शिक्षा वयापी थी,
    हर वर्ग.की नारी
    अब शिक्षा की पूजारी थी
    विदया हर वर्ग का नाव
    तन,मन से सवीकरो
    उठो दलित, उठो मित्रों
    शिक्षा के राहे चलो
    यही तेरा प्राण प्रतिष्ठा और मान
    सब का है सम अधिकार
    by divyanshi das
    Carmel school
    rourkela
    odisha
    ।। शिक्षा हैं उननति का आधार ।।