Sanvednao ke swar : ek drashti - 3 by Manoj kumar shukla in Hindi Poems PDF

संवेदनाओं के स्वरः एक दृष्टि - 3

by Manoj kumar shukla in Hindi Poems

संवेदनाओं के स्वरः एक दृष्टि (3) मित्र मेरे मत रूलाओ..... मित्र मेरे मत रूलाओ, और रो सकता नहीं हूँ । आँख से अब और आँसू, मैं बहा सकता नहीं हूँ ।। जिनको अब तक मानते थे, ये हमारे अपने ...Read More