Sanvednao ke swar : ek drashti - 5 by Manoj kumar shukla in Hindi Poems PDF

संवेदनाओं के स्वरः एक दृष्टि - 5

by Manoj kumar shukla in Hindi Poems

संवेदनाओं के स्वरः एक दृष्टि (5) कविता मेरे सॅंग ही रहना..... कविता मेरे सॅंग ही रहना, अंतिम साथ निभाना । जहाँ-जहाँ मैं जाऊॅं कविते, वहाँ - वहाँ तुम आना । अन्तर्मन की गहराई में, गहरी डूब लगाना । सदगुण ...Read More