Sanvednao ke swar : ek drashti - 9 by Manoj kumar shukla in Hindi Poems PDF

संवेदनाओं के स्वरः एक दृष्टि - 9

by Manoj kumar shukla in Hindi Poems

संवेदनाओं के स्वरः एक दृष्टि (9) फिंगर प्रिंट दौड़ते आ रहे, एक रास्ते के मोड़ पर थानेदार से हवलदार टकराया । जिसे देखते ही थानेदार गुर्राया- क्यों बे,चोर भाग गया ? और तू उसे पकड़ नहीं पाया। अगर ऐसे ...Read More