Phir bhi Shesh - 4 by Raj Kamal in Hindi Love Stories PDF

फिर भी शेष - 4

by Raj Kamal Matrubharti Verified in Hindi Love Stories

‘जवान होती परी जैसी लड़की के लिए यहां कुछ नहीं हो पाएगा ...कौन करेगा, शराबी निकम्मा बाप... आवारा भाई... कंजूस दादी! जेठ—जिठानी तो पहले ही सारी जायदाद अकेले हड़पने के लिए प्रपंच रचते रहते हैं। चाहते हैं कि ‘नशा—पानी' ...Read More


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