वीर शिरोमणिःमहाराणा प्रताप।(भाग-(२)

by Manish Kumar Singh in Hindi Poems

सांगा को मिली पराजय अब, भीतर ही भीतर खाती है।बाबर से बदला लेने को,हर पल ही जलती छाती है।।प्रण उसने कठिन लिया ऐसा, प्रतिशोध नहीं जब तक लूंगा।सिर पर पगड़ी अब तब जाये, महलों में पग भी तब दूंगा।।अगणित ...Read More