राजनारायण बोहरे के साहित्य में सामाजिक समरसता

by padma sharma in Hindi Book Reviews

शोध आलेख राजनारायण बोहरे के साहित्य में सामाजिक समरसता डॉ पद्मा शर्मा एको देवः सर्वभूतेशू गूढः सर्वव्यापी सर्वभूतान्रात्मा प् कर्माध्यक्षः सर्वभूताधिवासः साक्षी चेता केवलो निर्गुणश्च प्प् (श्वेताश्वतरोपनिशद्,6.11) सामाजिक समरसता से तात्पर्य समानता, सम्मान एवं सौहार्द्र ...Read More