samajik badlav - khuli aankho suraj dekhne ka anubhab by कृष्ण विहारी लाल पांडेय in Hindi Human Science PDF

सामाजिक बदलाव-खुली आँखों सूरज देखने का अनुभव

by कृष्ण विहारी लाल पांडेय in Hindi Human Science

खुली आँखों सूरज देखने का अनुभव प्रायः अपने वर्तमान समय की अपेक्षा, गुजरा हुआ समय अधिक अच्छा अधिक सुखद लगता है । कुछ तो स्थितियों की भिन्नता के कारण और कुछ इसलिए कि वर्तमान की भीषनता का अनुभव अधिक ...Read More