Hindi Novels Books and stories free PDF

    दहलीज़ के पार - 7
    by Dr kavita Tyagi
    • (13)
    • 107

    दो—तीन महीने तक गरिमा के पिता सुयोग्य वर की तलाश मे भटकते रहे। अन्त मे पर्याप्त भाग—दौड़ करने के उपरान्त ऐसा वर मिल ही गया, जो सुशिक्षित होने के ...

    शेनेल लौट आएगी - 4
    by Pradeep Shrivastava
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    आने के एक दिन पहले उसने यह बात अपने अच्छे वाले सौतेले पिता को बताई तो उन्होंने कहा था कि ‘मैं तुम्हें रोक तो नहीं सकता। लेकिन मेरी सलाह ...

    हवाओं से आगे - 16
    by Rajani Morwal
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    सुरेखा ने खिड़की से बाहर झाँककर देखा, पिछली रात से झूमकर चढ़ी काली बदली लगातार बरस रही थी यूँ लग रहा था जैसे एक ही रात में ...

    शेनेल लौट आएगी - 3
    by Pradeep Shrivastava
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    सुबह नींद खुली तो आठ बज गए थे। एसी फुल स्वींग में चल रहा था। उसकी ठंड से ही मेरी नींद खुली थी। नींद खुलते ही ऐमिलियो की याद ...

    मनचाहा - 3
    by V Dhruva
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    (आगे की कहानी जानने के लिए मनचाहा और मनचाहा 2 पढ़ें) बसस्टेंड पहुंच कर दिशा से हायहल्लो किया उतने में बस आ गईं। ईधर उधर की बातें करते करते ...

    हिम स्पर्श - 76
    by Vrajesh Shashikant Dave
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    76 “यह ऊंचाई अधिक होती है किसी भी मैदानी मनुष्यों के लिए। कैसा अनुभव हो रहा है यहाँ आकर?” “क्या इस अनुभव को शब्दों के द्वारा व्यक्त किया जा ...

    ख़्वाबगाह - 7
    by Suraj Prakash
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    मैंने उसी दिन से लिस्ट बनानी शुरू की दी थी कि कौन कौन सी चीजें इस ख़्वाबगाह में आयेंगी। ड्राइंग रूम बीस फुट लंबा और बारह फुट चौड़ा था। ...

    92 गर्लफ्रेंड्स भाग ८
    by Rajesh Maheshwari
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    उसकी कविता सुनकर और उसकी साहित्यिक अभिरूचि के लिए मैंने उसकी प्रशंसा करते हुए उसे प्रोत्साहित किया। एक दिन हम लोग शहर के एक प्रसिद्ध रेस्टारेंट में बैठे थे। ...

    दहलीज़ के पार - 6
    by Dr kavita Tyagi
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    अपनी मौसी के साथ रहते हुए गरिमा को तीन महीने का समय बीत चुका था। उस दिन उसके पिता उससे मिलने के लिए वहाँ पर आये थे। वही पर ...