आ भैंस मुझे मार

अर्जुन और पंडित गर्मी की शाम को नदी से स्नान करके लौट रहे थे तभी उन्हें एक भैंस दिखाई दी।

अरे पंडित वो देख भैंस, कितनी सुंदर है यार अर्जुन बोला।

अर्रे!!, हां यार बहुत सुंदर है लेकिन आबादी से इतनी दूर जंगल में क्या कर रही है अकेली पंडित ने कहा।

आ गयी होगी पानी पीने या नहाने,, या फिर चरवाहे इसे हांकना भूल गए होंगे, देख तो  कितनी सुंदर है यार माथे पर सफेद चांद बाकी पूरी काली और लगता है दूध भी दे रही है बांक भी लटका है , चल पकड़ते हैं यार।
अर्जुन तेजी से भैंस की तरफ दौड़ा,, 

अरे रुक यार ओ अर्जुन ऐसे बिना सोचे,, अरे रुक जा पहलवान मैं भी आता हूँ,, कहकर पंडित ने भी उसके साथ दौड़ लगा दी।

जैसे ही इन्हें आता देखा भैंस भी दौड़ने लगी ,,

अच्छा हमसे दौड़ लगाती है,, कहकर अर्जुन बहुत तेज़ भागने लगा।

तू इधर से रोकना पंडित , मैं इसे सामने से फेरता हूँ, अर्जुन दौड़ते हुए बोला और पण्डित धीमा होकर दूसरी ओर मुड़ गया, उसे यकीन था कि अर्जुन उसे अकेले रोक लेगा।

अर्जुन भैंस के पीछे बहुत तेज़ी से दौड़ रहा था, किन्तु भैंस भी उसके आगे आड़ी टेढ़ी भाग रही थी।
अर्जुन  उसको कभी दाएं तो कभी बाएं से घेरने की कोशिश करता किन्तु भैंस हर बार उसे नाकाम कर देती।
रात घिरने लगी थी सूरज लगभग डूब चुका था ।

दौड़ते दौड़ते भैंस कब पानी में घुस गई अर्जुन को पता भी न चला और अर्जुन भी उसके पीछे बेख़याली में नदी में घुस गया।
जैसे ही अर्जुन बीच नदी के लगभग पहुंचा भैंस पलट कर रुक गई।

हम्ममम्मममम्म!!! 
भैंस ने सर झुककर आंखे लाल करते हुए भयानक आवाज निकाली,, आवाज इतनी डरावनी थी कि आसपास पेड़ों पर बैठे पंछी भी घबराकर उड़ गए।
इस आवाज से पंडित चोंका और हड़बड़ा कर आवाज की दिशा में दौड़ा।
जैसे ही पंडित नदी पर आया वहां का नज़ारा देख कर सहम गया।
अर्जुन तगड़ी तक पानी में खड़ा था और सामने भैंस गुस्से में फुफकारते हुए सींग झुकाये उस पर हमला करने को तैयार खड़ी थी।

अर्जुन जल्दी पानी से बाहर आजा ये छलाबा है,,ये भटकाकर हमें पानी में खींच लाया आज पंडित चीखा।

क्या छलाबा!!!, !अर्जुन पलट कर भागने लगा, 
अभी उसने दो कदम भी ठीक से नहीं बढ़ाये थे कि भैंस ने गुर्राते हुए सींग से जोरसे पानी उछाला,, और नदी का पानी बहुत तेज़ी से उफनते हुए अर्जुन के आगे किसी दीवार की तरह जम गया अर्जुन ने उसमें तेज़ी से लात मारी,, 

ये क्या, !!, ? यार पंडित ये पानी तो बर्फ की दीवार बनाकर खड़ा हो गया,, अर्जुन जोर से चीखा।
उधर भैंस सर को झटके देते हुए धीरे धीरे उसकी तरफ बढ़ रही थी, उसके सींगों से उछला पानी बर्फ बन कर अर्जुन पर बरस रहा था।

अर्जुन घबरा कर पंडित को पुकारने लगा,, जल्दी कुछ कर यार पंडित,,, अर्जुन जोर से चीखा।

पहले तो तू डरना बन्द कर दे और इसे नज़रंदाज़ करना शुरू कर ,,तेरा डर ही इसकी संबसे बड़ी ताकत है , भूल गया तू कितनी बार हम इस छलाबे को हरा चुके हैं,, पंडित ने चीख कर कहा।

अर्जुन ने आंखें बंद करके मुट्ठियों को कस लिया और पलट कर भैंस के समाने खड़ा हो गया।
भैंस ठिठक कर खड़ी हो गयी।

इधर पंडित ने एक पत्थर उठाया और कुछ पढ़ते हुए उस पानी की दीवार पर दे मारा।
सारी दीवार खन्न से किसी काँच की तरह ढह गयी।

अर्जुन बिना पीछे मुड़े पानी से वापस आने की कोशिश करो कियूंकि पानी में ये छलाबा बहुत ताकत रखता है, पण्डित जोर से चीखा।
इधर भैंस फिर से सर झुककर फुंकारने लगी,, उसे देखकर अर्जुन उल्टे पांव तेज़ी से नदी से बाहर आने लगा,,
जैसे ही अर्जुन किनारे के पास पहुंचने लगा भैंस ने तेज़ी से इसपर झपट्टा मारा किन्तु भैंस के टकराने से पहले ही अर्जुन उछलकर पानी से बाहर निकल आया और किनारे पर बैठ कर अपनी सांसे समान्य करने लगा।
इधर भैंस जोर से किनारे से टकराई जिससे उसके सींग किनारे की मिट्टी में धंस गए।

चलो अर्जुन घर चलें पंडित ने अर्जुन का हाथ पकड़कर उसे उठाते हुए कहा। 
भैंस इन्हें यूँ जाते देख बहुत क्रोध करने लगी और उसने अपना सर बहुत जोर जोर से हिलाया उसकी डरावनी आवाज से जंगल के पत्थर तक थर्रा रहे थे।
भैंस ने सर को जोर जोर से हिलाया और वह एक भैंस के सर बाला बहुत बड़ा आदमी बन गयी,, उसने नदी के पानी को बड़ी बड़ी बर्फ के गोले बना कर इनपर फेंकना शुरू कर दिया जिन्हें अर्जुन और पंडित डंडे से मारकर खेलने लगे और हंसते हुए लौटने लगे।
कुछ दूर निकलने पर पंडित बोला यार "आ बैल मुझे मार" तो सुना था लेकिन तुमने तो आज,

"आ भैंस मुझे मार",, कर दिया था।
ओर दोनो जोर जोर से हँसने लगे।
समाप्त
नृपेंद्र शर्मा 'सागर', 
९०४५५४८००८

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