कहाँ गईं तुम नैना - 6


              कहाँ गईं तुम नैना (6)

कहानी बताते हुए बसंत की आवाज़ भर्रा गई।
"सर दीपा मेरी सगी बहन नहीं थी। लेकिन वह मुझे बहुत चाहती थी। उसकी माँ नहीं थी। खाना वही बनाती थी। मुझे अक्सर दाल या सब्ज़ी दे जाती थी। कहती थी कि तुम ठीक से खाया करो। अगर मैं कर पाता तो जमुना प्रसाद का गला घोंट देता। लेकिन मैंने सोंचा कि उसके जुर्म के सबूत इकठ्ठे कर लूँ तो नैना मैडम उसे सज़ा दिला ही देंगी।"

बसंत ने अपनी कहानी आगे बढ़ाई....

जमुना प्रसाद की जासूसी करने का मतलब शेर की मांद में घुसना था। इसलिए बसंत ने जोश की जगह होश से काम लिया। बिना किसी हड़बड़ी के वह धीरे धीरे जमुना प्रसाद के बारे में सूचनाएं एकत्र करने लगा। जो भी सूचना उसे मिलती उसके बारे में अच्छी तरह विचार कर यह तय करता कि वह कितने काम की है। 
इस तरह सूचनाएं बटोरते हुए उसके हाथ एक बहुत काम की सूचना लगी। गुरुग्राम और दिल्ली के बीच जमुना प्रसाद का एक फार्म हाउस था। वह फार्म हाउस ही उसके अधिकांश काले कारनामों का अड्डा था। 
बसंत नैना के लिए लोगों की जासूसी करता था। पर अभी तक वह किसी की निगाह में नहीं आया था। यह उसके लिए एक अच्छी बात थी। बसंत जमुना प्रसाद के फार्म हाउस के पास की बस्ती में कमरा लेकर रहने लगा। जमुना प्रसाद पर नज़र रखने के लिए उसे जो भी खर्च करना पड़ता था उसके लिए नैना उसे पैसे देती थी। 
बसंत ने जमुना प्रसाद के फार्म हाउस पर काम करने वाले नौकर बलदेव जिसे सब बल्लू कहते थे से दोस्ती कर ली। उसने बल्लू  को अपना नाम शिवप्रसाद बताया। बल्लू शौकीन मिजाज़ होने के साथ निहायत ही लालची आदमी था। बसंत ने उसकी इस कमज़ोरी का बहुत चालाकी के साथ फायदा उठाया। 
बल्लू को शीशे में उतारने की नियत से बसंत अक्सर उसके लिए कोई ना कोई तोहफा लेकर जाता था। इनके लिए पैसे नैना से ही मिलते थे। बल्लू ने एक दो बार पूँछा भी कि उसे यह चीज़ें कहाँ से मिलती हैं तो बसंत ने कहा कि उसके कई जुगाड़ हैं। वह आम खाए गुठलियां ना गिने। लालची बल्लू उसके जवाब से संतुष्ट हो गया। 
कुछ दिन लगे पर बल्लू पूरी तरह शीशे में उतर चुका था। बसंत ने उसके ज़रिए जमुना प्रसाद की गतिविधियों के बारे में कई बातों का पता लगा लिया। कब वह फार्म हाउस आता है। उसके साथ कितने लोग होते हैं। फार्म हाउस के अंदर क्या होता है इत्यादि।
बल्लू ने उसे बताया कि जमुना प्रसाद छोटे बच्चों के साथ गलत हरकतें करने का शौकीन है। अक्सर जब वह आता है तो किसी ना किसी नाबालिग बच्चे को साथ लाता है। उसकी वहशी हरकतों से बच्चे चीखते चिल्लाते हैं। उनकी चीख सुन कर वह दहल जाता है। पर जमुना प्रसाद बड़ा आदमी है। इसलिए वह उसके खिलाफ कुछ कर नहीं सकता है। उसने कहा कि मैंने तो सारी बातें चोरीछिपे सावधानी से सुनी हैं। 
इतना ही नहीं जमुना प्रसाद दिल्ली और गुरुग्राम के स्कूलों और कॉलेजों के पास मिलने वाले नशे का भी धंधा करता है। बल्लू ने बहुत कुछ बता दिया था। लेकिन बसंत जानता था कि जब तक इन बातों के ठोस सबूत नहीं मिलेंगे जमुना प्रसाद की सच्चाई लोगों के सामने नहीं लाई जा सकती है। वह पक्के सबूत जुटाने के बारे में सोंचने लगा। 
बसंत बड़ी सावधानी के साथ फार्म हाउस में घुसने वाली गाड़ियों के नंबर नोट करता था ताकि उनके मालिकों के बारे में पता लगाया जा सके। उसे गौर किया था कि दो ऐसी गाड़ियां थीं जो अक्सर आती थीं। एक लाल रंग की हांडा एकॉर्ड दूसरी थी एक सिल्वर स्कोडा ऑक्टेविया कार। बसंत ने दोनों के नंबर नैना को दे दिए। दोनों ही गाड़ियां जसबीर सिंह की थीं। जसबीर सिंह दिल्ली के एक पब का मालिक था। कुछ साल पहले एक ड्रग्स रैकेट में उसका नाम आया था। लेकिन अपने रसूख के चलते वह बच गया था। जसबीर सिंह शानो शौकत से रहना पसंद करता था। उसके पास कई महंगी गाड़ियां थीं। 
जसबीर सिंह का अक्सर जमुना प्रसाद के फार्म हाउस पर आना इस बात की तरफ इशारा कर रहा था कि दोनों यहाँ ड्रग्स के धंधे के लिए ही मिलते हैं। लेकिन इतना उन लोगों का पर्दाफाश करने के लिए काफी नहीं था। बसंत चाहता था कि दोनों की आपसी बातचीत को रिकॉर्ड कर सके। साथ ही वह जमुना प्रसाद के वहशीपन के भी सबूत इकठ्ठे करने की फिराक में था। इसके लिए आवश्यक था कि वह फार्म हाउस के अंदर प्रवेश पा सके।
अभी तक वह बल्लू से फार्म हाउस के बाहर ही मिलता था। वह इस चक्कर में था कि बल्लू के माध्यम से फार्म हाउस में प्रवेश पा सके। यह मौका भी बल्लू के ज़रिए उसे मिल गया।
बल्लू ने उसे बताया कि घर से संदेसा आया है कि उसकी पत्नी बहुत बीमार है। वह ज़ोर डाल रही है कि वह आकर उसकी देखरेख करे। वह बहुत परेशान है। कई दिनों के बाद जा रहा है तो लंबी छुट्टी लेनी पड़ेगी। जमुना प्रसाद छुट्टी देने के मामले में बहुत सख्त है। वह नहीं चाहेगा कि मैं छुट्टी पर जाऊँ और इतने दिनों तक फार्म हाउस की देखभाल करने वाला कोई ना हो। 
उसकी बात सुन कर बसंत ने सुझाया कि तुम जब तक छुट्टी पर रहो अपनी जगह किसी और को रख जाओ। बल्लू ने कहा कि मैं किसे ढूंढूंगा। जब तक कोई जान पहचान का ना हो तब तक जमुना प्रसाद मानेगा भी नहीं। उस समय बसंत ने जानबूझ कर अपना नाम नहीं सुझाया तकि बल्लू को यह ना लगे कि वह फार्म हाउस में काम करने को लालायित है। पर वह जानता था कि बल्लू को कोई और मिलेगा भी नहीं। 
दो दिन बाद बल्लू फिर मिला। वह बहुत परेशान था। पत्नी के साथ साथ माता पिता भी घर आने पर ज़ोर दे रहे थे। उसने जमुना प्रसाद से बात की तो उसका कहना था कि छुट्टी मिलना मुश्किल है। वह चला गया तो फार्म हाउस की देखभाल कौन करेगा। उसके और मेहमानों के आने पर उनका खयाल कौन रखेगा। बल्लू ने बसंत से कहा कि जाना भी ज़रूरी है और कोई ऐसा नहीं है जो उसके ना रहने पर फार्म हाउस की देखभाल कर सके। सही मौका देख कर बसंत ने बल्लू से कहा कि अगर जमुना प्रसाद मान जाए तो वह उसकी मदद के लिए फार्म हाउस में काम करने को तैयार है।
बल्लू  कुछ देर सोंचता रहा। फिर बसंत से बोला कि मैं कोशिश करूँगा कि जमुना प्रसाद को तुम्हारे बारे में राज़ी कर लूँ। पर तुम्हें भी बहुत ध्यान रखना होगा। जब जमुना प्रसाद फार्म हाउस में हो तो तुम अपने सर्वेंट क्वाटर में ही रहना। जब तक जमुना प्रसाद ना बुलाए फार्म हाउस के अंदर मत जाना। अगर उसके रहते तुम इधर उधर करते दिख गए तो तुम्हारी खैर नहीं। बसंत ने उसे आश्वासन दिया कि वह ऐसा वैसा कुछ नहीं करेगा। वह तो बस उसकी मदद करना चाहता है। साथ ही कुछ कमाई हो जाएगी।
जमुना प्रसाद अपने फार्म हाउस में आया था। बल्लू बसंत को लेकर उसके सामने हाज़िर हुआ। उसने विनती की कि पत्नी बहुत बीमार है। उसका छुट्टी लेना बहुत ज़रूरी है। वह उसे छुट्टी दे दे। उसकी गैरहाज़िरी में बसंत काम करेगा। वह बसंत को अच्छी तरह से जानता है। बल्लू की बात सुन कर जमुना प्रसाद सोंच में पड़ गया। 
बसंत चुपचाप नज़रें झुकाए खड़ा था। बेवजह बोल कर वह किसी तरह का शक पैदा नहीं करना चाहता था। जमुना प्रसाद को सोंच में डूबा देख कर बल्लू ने फिर हाथ जोड़ कर प्रार्थना की कि उसे छुट्टी पर जाने दें। उसका दोस्त सब काम ठीक से करेगा। वह उसकी गारंटी लेता है।
जमुना प्रसाद खीझ कर बोले। 
"नाटक मत करो। इसे समझा दो कि जब मैं या मेरे मेहमान यहाँ हों तो इधर उधर करता ना नज़र आए। अगर इस आदमी ने कोई गड़बड़ की तो तुम्हारी खैर नहीं।।"
बल्लू ने फिर आश्वासन दिया कि कोई गड़बड़ नहीं होगी। सही मौका देख कर बसंत बोला।
"साहब आप यकीन रखें मैं वही करूँगा जैसा आप कहेंगे। कोई शिकायत नहीं होगी आपको।"
"क्या नाम है तुम्हारा ?"
"जी शिवप्रसाद...."
"पहले कहीं काम किया है।"
"पहले मैं नोएडा में एक वकील साहब के बंगले पर काम कर चुका हूँ। वह मुझ पर बहुत भरोसा करते थे। वह अपने बच्चों के पास विदेश चले गए। इसलिए हम खाली हो गए।"
जमुना प्रसाद ने बसंत को गौर से देखा। बसंत भोलाभाला बना खड़ा था। जमुना प्रसाद को वह ठीक लगा। उसने बल्लू से कहा।
"ठीक है तुम जा सकते हो। लेकिन दस दिनों से अधिक समय के लिए नहीं। इसके दस दिनों की तनख्वाह तुम्हारी तनख्वाह से काटूँगा। कब जाओगे ?"
"कल सुबह निकल जाऊँगा।" 
जमुना प्रसाद ने बसंत को देख कर कहा।
"मैं अभी कुछ देर में चला जाऊँगा। दो दिन बाद आऊँगा। साफ सफाई ठीक से होनी चाहिए।"
"जी साहब आपको शिकायत नहीं होगी।"
बसंत जमुना प्रसाद को धन्यवाद देकर बल्लू के साथ बाहर आ गया। बल्लू ने उससे पूँछा कि क्या वह सचमुच किसी वकील के पास काम करता था। बसंत ने कहा कि वह झूठ नहीं बोल रहा है। इस पर बल्लू ने पूँछा कि वह सब संभाल तो लेगा ना। बसंत ने हंस कर कहा कि यह कोई बड़ा काम नहीं है। 
बल्लू दस दिनों के लिए अपने घर चला गया। बसंत फार्म हाउस में आ गया। साफ सफाई के लिए वह जमुना प्रसाद के विशेष कमरे और मीटिंगरूम में भी जा सकता था। अपने अनुभव का प्रयोग कर उसने दोनों जगहों पर छिपे हुए कैमरे लगा दिए। 
जमुना प्रसाद जब फार्म हाउस पर आया तो उसके साथ एक मासूम बच्चा था। उसके आने के कुछ ही देर बाद जसबीर सिंह भी आ गया। दोनों अपने मीटिंगरूम में चले गए। वहाँ दोनों ने लगभग एक घंटे तक ड्रग्स के बिज़नेस के मुनाफे, ड्रग्स बेचने के नए अड्डों तथा ड्रग्स की सप्लाई के बारे में बात की। सब कुछ छिपे हुए कैमरे में रिकॉर्ड हो गया। 
मीटिंग के बाद दोनों पीने बैठे। जमुना प्रसाद के पास एक बटन था। उसे दबाते ही सर्वेंट क्वाटर में घंटी बजती थी। दो तीन बार अगल अलग कामों से उसने बसंत को बुलाया। 
शराब पीने के बाद दोनों जमुना प्रसाद के विशेष कमरे में गए। वहाँ उन लोगों ने बच्चे के साथ दुष्कर्म किया। बसंत सब जान कर भी चुपचाप सब सह रहा था। उसके हाथ जो सबूत लगने वाले थे वह दोनों दुष्टों को उनके कुकर्म की सजा दिला सकते थे। 
अगले दिन सुबह जमुना प्रसाद और जसबीर सिंह फार्म हाउस से चले गए। बसंत ने मौका देखते ही कैमरा निकाल लिया।
अब वह उसमें रिकॉर्ड सबूत को लोगों के सामने लाने की तैयारी करने लगा।

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