बरसात के दिन - 1

नीरज इतनी रात को क्या कर रहा है ? -’’ नीरज ने आदित्य से कहा।

रात के 11 बजे चुके थे। और स्कूल टाइम में भी बहुत कम पढ़ने वाला आदित्य एक काॅपी में ना जाने क्या लिख रहा था ? जबकि फिलहाल काॅलेज की छुट्टियां चल रही थी। जब आदित्य के बड़े भाई नीरज ने रात के 11 बजे उसके रूम की लाइट जलती देखी तो उससे पूछने आ गए। 

कुछ नही भैया, लिखने की कोशिश कर रहा हूँ -’’ आदित्य ने पेन रोकते हुए कहा।

क्या लिखने की कोशिश कर रहा है ? कहीं लेखक तो नही बनना चाहता है ? - नीरज हंसते हुए बोला।

हाँ कोशिश कर रहा हूँ कुछ लिखने की। वो क्या है, राज ने आज ही मुझे यह काॅपी दी है, कहा है कि इसमेें एक कहानी लिखकर बता।

क्यों उसने ऐसा क्यों कहा ?

राज को कहानी कविता लिखने का शौक है, मैने उसकी कहानी पढ़ी तो मैने उसका बहुत मजाक बनाया उसने मुझे चैलेंज किया कि मैं एक महीने में कैसी भी कहानी लिखकर उसे बताऊं। तो मैने भी उसे कह दिया तुझसे भी अच्छी एक कहानी लिखकर बताऊंगा।

हा हा हा हा आदित्य तू और कहानी, हा हा इससे बड़ा तो कोई मजाक हो ही नही सकता

भैया प्लीज आप तो ऐसे मत हंसो, मेरे सारे दोस्त भी ऐसे ही हंस रहे थे। आपको तो मुझे उत्साहित करना चाहिए।

हाँ तो तेरे दोस्त हंसेेंगे ही सही, चल सो जा ये कहानी कविता लिखना तेरे बस की बात नही है, ओके मैं सोने जा रहा हूँ गुड नाइट - भैया ने कमरे का दरवाजा बन्द करते हुए कहा।

ओके भैया गुड नाइट -आदित्य ने कहा।

पर आदित्य को नींद कहा। उसे तो राज की शर्त याद आ रही थी। और वह किसी भी तरह शर्त जीतना ही चाह रहा था।

उसने बहुत देर तक सोचा और लिखना शुरू किया।

सूरज की गर्मी से तप चुकी धरती के लिए बारिश की हर बूंद उसकी तपन को कम करती है। पर इनमें भी सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होती है, गर्मी के मौसम के बाद की पहली बरसात, क्योेंकि पहली बरसात ही होती है जो उसकी गर्मी को शांत करती है, बाद की बरसात तो फिर धरती को पानी से लबालब करने के लिए होती है।

आदित्य को लगा उसने जो लिखा है वो कहानी से ज्यादा तो ऋतु वर्णन लग रहा है। उसने फिर सोचा और अब कहानी को लिखना शुरू किया।

उस दिन गर्मी के बाद की पहली बरसात थी। उस मौसम की पहली बरसात। मैं छाता लेकर पेड़ के नीचे खड़ा हो गया था। इतने में एक लड़की आयी और वो भी पेड़ के नीचे खड़ी हो गयी। पर पानी की बूंदे उसे गीला कर रही थी। मैने उससे कहा- आप गीली हो जायेंगी। आप चाहे तो मेरे छाते के नीचे आ सकती है। और लड़की बिना कुछ बोले मेरे छाते के नीचे आ गयी। इतने में ही उसकी सहेलियां आ गई। और उसे बुलाने लगी। मैने उसे अपना छाता दे दिया।

आदित्य कहानी लिखने में लगा हुआ था। तभी उसकी नजर घड़ी पर पड़ी।

ओ माय गाॅड रात के 12.30 बज गये। अब सो जाना चाहिए। नही तो सुबह देर से उठूंगा।
आदित्य ने जल्दी से काॅपी बन्द की और सो गया।

सुबह जब नींद खुली तो देखा। 7.30 बज चुके थे। आदित्य जल्दी से तैयार हो गया।

भाभी, नाश्ता तैयार है क्या ? आदित्य ने भाभी से कहा।

हाँ तैयार है, पर आप तैयार हो गये क्या -भाभी ने किचन से पूछा।

हाँ भाभी 

तो ये लीजिए आपका नाश्ता - भाभी ने नाश्ता टेबल पर रखा।

अच्छा हुआ भाभी आप जल्दी से नाश्ता ले आयी। मुझे जल्दी जाना है - आदित्य ने नाश्ता शुरू करते हुए कहा।

क्यो भैया आज क्या खास बात है और आज तो आप खुश भी लग रहे है।

हाँ भाभी आज से काॅलेज में एडमिशन शुरू है। 

हाँ स्कूल के बाद काॅलेज जाना वाकई में बहुत अच्छा लगता है।

ओके भाभी मैं अब में चलता हूँ।

बस इतना सा ही थोड़ा और ले लेते 

थैंक्स भाभी पर आज तो केवल फोर्म लेकर आना है। दोपहर तक आ जाऊंगा। ओके भाभी में चलता हूँ।

रूको भैया 

क्या हुआ भाभी

ये लीजिए छाता

छाता भला क्यों ?

गर्मी बहुत है, मौसम से ऐसा लग रहा है जैसे बरसात हो सकती है और मैने न्यूज में भी देखा था इसलिए कह रही हूँ।
ओके थैंक्स भाभी - आदित्य ने छाता लेते हुए कहा।

आदित्य निकलने को था तभी कार्तिक भी आ गया। दोनो काॅलेज साथ में पहँुचे। एडमिशन फोर्म के लिए लम्बी लाइन लगी थी।

आदित्य ने कार्तिक को लाइन में लगाया। और खुद काॅलेज के गार्डन में घूमने लगा। काॅलेज में सभी चेहरे नये थे। एक दो को छोड़कर कोई भी जान पहचान का नजर नही आ रहा था।

तभी धीरे धीरे आकाश में काले बादल छा गये। बिजलियां कड़की। और कुछ ही देर में छम छम बारिश बरसने लगी। गर्मी के मौसम की पहली बरसात।

आदित्य ने जल्दी से छाता निकाला। और एक पेड़ के नीचे खड़ा हो गया। सब जल्दी से दौड भाग कर बारिश से बचने के लिए पेड़ो और छत के नीचे खड़े हो गए। 

इतने में एक लड़की आयी और वो उसी पेड़ के नीचे खड़ी हो गयी। पर पानी की बूंदे उसे गीला कर रही थी। उसके हाथ में एडमिशन फोर्म भी थे। आदित्य से रहा ना गया। उसने कहा -’’ आप बुरा ना माने तो छाते के नीचे आ सकती है, नही तो आप गीली हो जायेंगी।

नही, थैंक्स - लड़की ने धीमी सी आवाज में कहा।

आप के फोर्म गीले हो जायेंगे इसलिए कह रहा हूँ - आदित्य ने कहा।

पर इस बार लड़की ने कुछ नही कहा और छाते के नीचे आ गयी पर थोड़ी दूर ही रही। लड़की सिर झुकाये खड़ी थी। आदित्य ने उसे देखा। आदित्य को वो पहली नजर में ही अच्छी लगी। आदित्य उससे कुछ पूछना चाह रहा था। तभी उसकी दो सहेलियाँ आॅटो में उसे लेने आ गयी। 

दिशा जल्दी आ - उनमें से एक ने कहा।

हाँ आती हूँ - उस लड़की ने कहा। 

पर वो ठिठक गयी क्योकि आॅटो सड़क पर खड़ा था और वो काॅलेज के अन्दर थी वो दरवाजे तक जाती तब तक वो गीली हो जाती इसलिए वो आगे नही बढ़ी।

आदित्य उसकी मन स्थिति समझ गया।

ये लीजिए छाता, आप वहां तक जायेगी तो गीली हो जायेगी - आदित्य ने छाता बढ़ाते हुए कहा। नही कोई बात नही।
आपके फोर्म भी गीले हो सकते है- आदित्य ने एक बार फिर छाता बढ़ाया।

दिशा क्या कर रही है यार, चलना, आॅटो वाला किराया बढ़ाता जायेगा। लेट और हो जायेगा। उसकी सहेली आॅटो में से जोर से चिल्लायी।

देखिए आपकी सहेलियाँ भी बुला रही है - आदित्य ने कहा।

पर मैं आपका छाता कैसे ले सकती हूँ, ना तो मैं आपको जानती हँू ना आप मुझे - लड़की ने अपनी बात कही।
ओके मेरा नाम आदित्य है और आपका . . ..

दिशा - आदित्य और लड़की ने एक साथ कहा।

और मैने इसी काॅलेज में एडमिशन लिया है। बी.ए. फस्र्ट इयर में . . . 

दिशा ने आदित्य से छाता लिया और सहेली के साथ आॅटो की तरफ चली गयी।
आदित्य जाते हुए उसे देख रहा था।

आॅटो में बैठते ही उस लड़की ने मुस्कुरा कर एक बार उसे देखा। अगले ही पल आॅटो आँखो से दूर हो गया।

तभी बारिश में भीगा कार्तिक आदित्य के पास आया।

ओए फोर्म नही लाया क्या ? 

यार चल आज तो कुछ ज्यादा ही लम्बी लाइन है और पापा का फोन आया था। कल देखते है।

ओके चल घर

फुल स्पीड से बाइक चलाकर दोनो 10 मिनिट में घर पहँुच गये। कार्तिक आदित्य को छोड़कर चला गया।

भाभी, भाभी- आदित्य ने आते ही भाभी को पुकारा।

हाँ, आयी भैया - भाभी ने रसोई से कहा।

ये लीजिए, टाविल पोंछ लीजिए - भाभी ने टाॅविल बढ़ाते हुए कहा।

थैंक्स भाभी,मैं चेंज कर के आता हँू 

पर भैया मैने तो आपको छाता दिया था फिर आप गीले कैसे हो गये।

वो . . . . वो भाभी काॅलेज में एक के फोर्म गीले हो जाते , इसलिए उसे दे दिया - आदित्य ने रूम में जाते जाते कहा।

आदित्य चेंज कर के आया तो गरमा गरम चाय और पकौड़े टेबल पर रखे थे।

ओ भाभी यू आर सो ग्रेट, आप तो हर चीज कहने से पहले ही ला देती हो, यू आर सो नाइस, भाभी, थैंक्यू - आदित्य के मन की इच्छा पूरी हो गई थी।

अरे बस भैया इतनी इंग्लिश और इतनी बड़ाई ठीक नही, वैसे भैया उसका नाम क्या है ?

किसका भाभी, 

उसीका जिसको छाता दिया है, क्या नाम है उस लड़की का ?

भाभी आप भी ना ऐसा कुछ नही है।

छुपाइये मत भैया, जरूर छाता किसी लड़की को दिया होगा।

ओह, भाभी आप तो सच में ग्रेट हो , आपको ये सब पता कैसे चल जाता है।

वो राज की बात है भैया, अच्छा आप उस लड़की का नाम बताइये। और पहली मुलाकात थी या कोई स्कूल की ही क्लासमेट थी।

कुछ नही भाभी, एक लड़की थी बारिश में भीग रही थी। उसके फोर्म गीले हो जाते, इसलिए उसे छाता दे दिया बस।

क्या नाम था ? कहाँ रहती है ? कुछ बताया क्या ?

नही, हाँ नाम जरूर पता चला, दिशा नाम था उसका, कुछ कहता इससे पहले ही उसकी सहेलियाँ आ गई, वैसे ऐसा कुछ नही भाभी - आदित्य ने कहा।

हाँ, तो भैया मैने भी क्या कहा ? आप भी ना - भाभी हंसते हुए किचन में चली गई।

शाम को अचानक आदित्य की नजर राज की दी हुई काॅपी पर पढ़ी। उसने पढ़ा।

ओ गाॅड। इसमें तो वही लिखा है, जो आज मेरे साथ हुआ। नही, नही बल्कि मेरे साथ तो आज वही हुआ है, जो मैने कल इस काॅपी में लिखा था। क्या ऐसा हो सकता है ? कहीं ये जादू की काॅपी तो नही है ? नही यार, ऐसे थोड़े ना होता है, पर हुआ तो वही है, शायद इत्तेफाक भी हो सकता है, पर मन तो कह रहा है जरूर इस काॅपी मे कुछ खास है - काॅपी को पढ़ते पढ़ते आदित्य खुद से कहने लगा और सोच में डूब गया।

आगे जारी . . .

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