बरसात के दिन - 2

इसमें जो लिखा है, वो सच है, जादू है, या सिर्फ एक इत्तेफाक कैसे पता करू ? राज से पूछूँ ? नही उसे पता चला तो कहीं काॅपी वापस ना ले ले। भाभी से पूछ तो लूंगा, पर भाभी क्या बता पायेगी ? कार्तिक से पूछूँगा तो हो सकता है वो मेरा मजाक उड़ाये ? फिर क्या करूँ ? अरे हां क्यो ना काॅपी में ही लिखूँ ? पर क्या लिखूं ? अपनी इच्छाएं, नही, कहानी छोड़ कर इच्छाएं कैसे लिखूँ ? ऐसा करता हूँ कहानी को ही आगे लिखता हूँ।
आदित्य ने पेन उठाया और एक बार फिर लिखने की कोशिश की। 

‘‘ अगले दिन में काॅलेज में गया। मैं आज भी उसी पेड़ के नीचे खड़ा था। तभी वो लड़की भी वहाँ आ गई। उसने मुझे छाता लौटाया। मैने उसे आई लव यू कहा। उसने भी मुझे आई लव यू कहा। और बस हम दोनो में प्यार हो गया। मैने अपने भैया को उनके घर भेजा। उनके माँ बाप ने भी हाँ कर दी और हमारी सगाई तय हो गयी। और उसके कुछ दिन बाद . . . 
आदित्य कहानी को एक दिन में ही जान पहचान से शादी पर पहुँचाने वाला था लेकिन अचानक भाभी के आने से वो रूक गया।

भैया आ जाऊँ - एक दम भाभी ने दरवाजा खोलकर कहा।

आदित्य चौंक गया। उसके हाथ से पेन नीचे गिर गया।

क्या हुआ भैया ? आप तो चौंक गये। वैसे ये आज क्या लिखने बैठ गये। अभी तो आपका एडमिशन भी नही हुआ है ? भाभी ने अन्दर आ कर कहा।

नही भाभी, बस ऐसे ही टाईम पास कर रहा था। आप बोलिये क्या हुआ ? 

अभी आपके भैया को मेरे पापा ने फोन किया था। मेरी बड़ी दीदी के ससुराल से एक लड़की से आप की बात चलाने की कह रहे थे। तो आपकी अभी क्या राय है या क्या सोचा है आपने शादी के बारे में बस वही पूछने आयी हूँ।

भाभी, आपको पता है ना, मुझे अरेंज मेरिज नही करना है ? मै करूंगा तो लव मैरिज ही। 

क्यो भैया, लव मैरिज में ऐसा क्या है ? आपकी और मेरे भैया की, आपके और मेरे मम्मी पापा और अधिकतर लोगो ने सबने अरेंज मैरिज ही तो की है।

नही, भाभी मैं चाहता हूँ कि मै जिससे प्यार करूँ, उसी से ही शादी करूँ।

तो फिर आई क्या कोई पसन्द ? 

नही भाभी,

तो भैया फिर आपको तो अरैंज मैरिज कर ही लेना चाहिए।

नही भाभी मै करूंगा तो सिर्फ लव मैरिज ही

नही भैया देखना आप शादी करोगे तो अरैंज ही और वो भी मेरे और आपके भैया की पसन्द की लड़की से।

नही भाभी ऐसा नही होगा।

ओके देखते है भैया बाकी अगर आपका विचार हो देखने या मिलने का तो बता देना। - भाभी ने दरवाजा बंद करते हुए कहा |

ओके भाभी।

भाभी के जाने के बाद आदित्य ने अपनी काॅपी उठायी और उसे पढ़ने लगा। उसे लगा कि उसने गलती कर दी है। ये काॅपी राज ने एक अच्छी कहानी लिखने के लिए दी थी और अभी अभी उसने जो ये बकवास लिखी है ये तो कोई कहानी नही है। अब वो क्या करे ? क्या पेज फाड़ दे ? या इसी को जैसे तैसे आगे बढ़ाये। पेज फाड़ूगाँ तो राज कहेगा कि कहानी कम लिखने के लिए पेज फाड़ दिये। ऐसा करता हूँ कि इसी को आगे बढ़ाता हूँ। उसने मन में कुछ देर सोचा और जहाँ से छोड़ा था वहाँ से आगे लिखना शुरू किया।


उसके कुछ दिन बाद . . .मेरी उससे शादी हो गई।
तभी अलार्म बजा और मेरी नींद खुल गई। मैं एक सपना देख रहा था। मैं भी कितना पागल हूँ। एक दिन एक लड़की मिली और उसी के साथ शादी सगाई सब कर डाला। सुबह काॅलेज गया तो मेरी नजरे उसी लड़की को ढूंढ रही थी। ये बात मेरे दोस्त ने भांप ली और बोला- क्या बात है किसे खोज रहा है ? अभी तो काॅलेज में आये दो दिन भी नही हुए और कोई लड़की भी पटा ली क्या ? 
अरे नही यार ! तुझे कल बताया था न छाते वाली के बारे में 
ओह तो तुझे अपने छाते की याद आ रही है। हा हा हा - राकेश हंसने लगा। चिंता मत कर अभी बरसात का मौसम शुरू नही हुआ है। वो मौसम की पहली बरसात थी। अभी पूरा मानसून आने में वक्त है। 
यार तू भी ना। वो लड़की मुझे अच्छी लगी यार। सादगी में भी सुंदर लग रही थी। असली सुंदरता तो वही है जो बिना मेकप के भी अच्छी लगे। 
हाँ ये बात तो है भाई, पर चिन्ता मत कर हो सकता है वो भी काॅलेज में तुझे ही ढूंढ रही हो तेरा छाता लौटाने के लिए।
हाँ ऐसा भी हो सकता है। - मैं काॅलेज के दरवाजे की तरफ देख रहा था। शायद वो नजर आ जाये। 
तभी मेरे पीछे से एक कोमल आवाज आई - सुनिये भईया।
मैने देखा। ये तो कल वाली ही लड़की है। पर भईया, अरे यार इन लड़कियों की जुबान पर ये भईया शब्द ही क्यों लगा रहता है। जिसको देखो उसको भईया बनाने लग जाएगी। भले ही लड़का दूर दूर तक भाई वाली कोई फीलिंग चाहता ही न हो। सारी लव स्टोरी का सत्यानाश कर दिया। मूड खराब कर दिया। इतना स्मार्ट बन्दा इसे भईया नजर आ रहा है। 
भईया जी क्या सोचने लग गये। ये लीजिए आपकी छतरी। उसने छतरी पकड़ाते हुए कहा। 
मेरा तो दिमाग ही खराब हो गया। पर इसमें उसकी कोई गलती नही। ये तो भारतीय लड़की के ‘‘ संस्कार‘‘ है जो हर लड़के में भईया देखती है। मैने भी छतरी ली और कसम खायी कि तुमने अभी भले ही अनजाने में भईया कह दिया हो। पर एक दिन तुम्हें अपना बना कर ही रहूँगा। 
और वह इतना कह कर चली गई। जाते जाते थैंक्स भी न कहा। 
राकेश जो इतनी देर से शांति से सारा घटनाक्रम देख रहा था। अब जोर जोर से हँसने लगा। 
भईया जी क्या सोचने लग गये। ये लीजिए आपकी छतरी। हा हा हा हा हा हा
अब बस कर यार! ये तो लड़कियों का ‘काॅमन वर्ड‘ है। इसे इतना ‘सीरियसली‘ लेने की जरूरत नही है। समझा। 
हाँ हाँ पता है तू उसे इतनी आसानी से छोड़ने वाला नही।


आदित्य अब थक चुका था और उसके मन में कोई नई बात नहीं आ रही थी। इसलिए पेन को कान में लगा कर वह सोचने लगा कि अब आगे क्या लिखा जाये। उसने शुरू से कहानी फिर एक बार पढ़ी। उसे लगा कि उसने संवाद कुछ ज्यादा ही लिख दिये। कहानी में वर्णन होना चाहिए। पर वो कौनसा मुंशी प्रेमचंद जैसा महान कथाकार बनना चाहता है। उसे तो बस राज से जीतना है। 
ऐसा करता हूँ कल लिखता हूँं। फ्रेश माइन्ड से - उसने खुद से कहा और बिना एक पल की देर किये सो गया। 
सुबह उसकी नींद अचानक खुल गई। उसने वो सपना देखा। जो उसने कल भाभी के कमरे में आने से पहले काॅपी में लिखा था। अब तो उसे पक्का यकीन हो गया कि ये जादुई काॅपी है। पर दिमाग ने तर्क दिया हो सकता है कल से इसके बारे में ज्यादा सोच रहा था तो सपना आ गया। ऐसा हो जाता है। साइन्स भी तो यही कहता है। देखते है आज काॅलेज में क्या होता है ?
आज वो बड़ी उत्सुकता से काॅलेज गया। आज जैसा उसका मन था काॅलेज जाने का वैसा कभी नही था। जैसे एक प्यासा कुएं की तलाश में रहता है, वो भी उस लड़की की तलाश में था। 
तभी राकेश ने पूछा क्या बात है किसे खोज रहा है ?
नही यार क्या सच में ऐसा हो सकता है ये तो वो ही लाइन है जो कल मैने लिखी आदित्य मन में सोचने लगा। देखता हूँ आगे क्या होता है ?


आगे जारी - - -

आगे क्या हुआ ? जादुई कॉपी मिलने के बाद अब आदित्य क्या करेगा ? अगले भाग में 

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