बरसात के दिन - 4

बच्चे रोते रोते हाॅल में पहुंचे और अपनी मम्मी को सारी बात बताई। पर बच्चों को जैसी उम्मीद थी वैसा कुछ नही हुआ। साक्षी दीदी ने उल्टा उन्हें ही डांटा - तुमसे घर पर मैंने मना किया था ना कि आदित्य मामा के कमरे में मत जाना। फिर क्यों गए ? पिछले साल भी तुमने उनका प्रोजेक्ट अपनी लड़ाई के चक्कर में बर्बाद कर दिया था। अब क्या किया तुमने ?
मम्मा मैंने कुछ नही किया ? गोलू ने ही मामा की काॅपी फाड़ दी। ओर उसका ऐरोप्लेन बनाया। - छोटे बेटे मोनू ने कहा।
नही मम्मा मैंने तो एक पेज फाड़ा था। बाकी पेज तो मोनू ने फाड़े। - गोलू ने कहा। 
चलो। अब मामा के कमरे में मत जाना। भगवान जाने इस बार क्या नुकसान किया होगा। कोमल तुम जरा देख कर आओ। - साक्षी ने आदित्य की भाभी से कहा।
हां। बच्चों तुम जब तक ये नाश्ता करो। मामी अभी आती है। - कोमल ने कहा।
कोमल ने आदित्य के कमरे का दरवाजा खोला। देखा आदित्य सिर पर हाथ रखकर बैठा था और उसके सामने कागज के टुकड़े पड़े थे। 
क्या हुआ ? आप इतने दुखी क्यों हो ? बच्चों ने इस बार भी कुछ बहुत बड़ा नुकसान कर दिया क्या ? - कोमल ने कमरे में आकर कहा।
अचानक भाभी के आ जाने से आदित्य चौंक गया। उसने आंखो को पोंछते हुए कहा- भाभी इन बच्चों को आपने क्यों मेरे कमरे में आने दिया ?

कोमल ने कहा - क्या बहुत बड़ा नुकसान कर दिया बच्चों ने ?

आदित्य ने सोचा अगर भाभी को राज की काॅपी की बात बताई तो वो दस सवाल पूछेंगी। इसलिए उसने खुद को संभालते हुए कहा - कुछ नही भाभी। पर देखिए मेरे सारे कमरे का सत्यानाश कर दिया। 
आदित्य ने खुद का कमरा बताते हुए कहा। जिसे कुछ देर पहले आदित्य ने गुस्से में खुद ही अस्त व्यस्त किया था।

भाभी को भी कमरा देखकर गुस्सा आया। क्योंकि कुछ पहले ही उन्होंने कमरे की साफ सफाई की थी।

हां, भैया। ये बच्चे सच में बहुत शैतान है। पर क्या करें ? ज्यादा कुछ कहो तो साक्षी दीदी बुरा मान जाएगी। इसलिए मैं कुछ नही कहती। पर आज जरूर उन्होंने बच्चों को डांटा।

ओह, पर अब क्या कर सकते है। कोई बात नही। - उसने खुद के गुस्से पर काबू करते हुए कहा।

हां अब जल्दी से हाॅल में आइए और साक्षी दीदी से बात करिए। और बच्चो मना लेना। कभी कभी तो मिलने आती है साक्षी दीदी। - कोमल ने कहा। 
हां भाभी बस में दो मिनट में आता हूं। - आदित्य ने कहा।

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रात के 10 बज चुके थे। आदित्य आज बहुत उदास था। उसके हाथों में एक जादुई काॅपी आई पर जब तक वो उसके बारे में जान पाता उसने उसे खो दिया। अब वो उसकी और दिशा की प्रेम कहानी को कैसे आगे बढा़एगा ?

काश उसने कल रात को कहानी में कुछ और बातें लिख दी होती तो कितना अच्छा होता। उसे पहली बार कोई लड़की दिल से पसंद आई थी। जिसकी मासूमियत और प्यार से भरा चेहरा देख कर ही वो उसको दिल दे बैठा था। पर अब कुछ नही हो सकता।

यही सब सोचते सोचते कब उसे नींद आ गई ? पता ही नही चला। सुबह अलार्म की आवाज से उसकी नींद खुली।

उदास मन से आज वो काॅलेज गया। क्योंकि उसे उम्मीद नही थी कि अब दिशा से दुबारा मुलाकात होगी। इसलिए वो अपने पुराने दोस्तों के साथ ही गपशप में लग गया। 
और आदित्य तेरी दिशा का क्या हुआ ? - राकेश ने हंसते हुए कहा।
मेरी दिशा ? क्या यार तू भी ?
अरे बता बता भाई क्या बात है पूरी ? - कार्तिक ने पूछा। 
कुछ नही यार ये तो पागल है तू जानता है ना। पहली बरसात के दिन एक लड़की मिली थी, जिसे मैंने छतरी दी थी। उसी के बारे में कह रहा है। - आदित्य ने कहा।
ओह, पर उसने तुझे छतरी दी नही क्या ? - कार्तिक ने कहा। 
अरे दे दी यार, उसके बाद से तो दिखी ही नही। 
पर मुझे दिख गई। - राकेश ने कहा।
ओह सच । कहां ? - आदित्य सुनते ही खुश हो गया।
वो देख शायद तेरी तरफ ही आ रही है ? - राकेश ने कहा। 
आदित्य ने जल्दी से पीछे मुड़कर देखा - दिशा कहीं नही थी। 
सालों, मजे ले रहे हो। - आदित्य ने गुस्से में कहा। 
तो दोस्त होते किसलिए है, यार - राकेश ने हंसते हुए कहा।
एक तो तू ये हर बात पर हंसना बंद कर। जब देखो तब बस हंसता ही रहता है।- आदित्य ने गुस्से में कहा। 
हां, सेहत के लिए हंसना अच्छा होता है इसलिए। पर भाई तू भी खुश हो जा। इस बार सच में दिशा आ रही है। - कार्तिक ने कहा।
फिर से मजाक। - आदित्य ने गुस्से में कार्तिक की तरफ देखा। 
अरे नही यार, इस बार सच में है। - राकेश ने कहा।
और तू झूठ बोल रहा था ना कि तूने छतरी लौटा दी। आज वो फिर छतरी लेकर आई है। - कार्तिक ने कहा।
पर आदित्य ने पलट कर नही देखा। 
राकेश ने कार्तिक से कहा - अभी देखना दीदी। अपने भाई को पुकारेगी। 
आदित्य जी - दिशा ने आवाज दी। 
क्या ये सच में दिशा ही है। उसने पलट कर देखा। हां ये तो दिशा ही है। पर आज फिर छतरी लेकर क्यों ? - आदित्य दिशा को देखकर एकदम से खिल उठा। 
साॅरी आदित्य जी। वो कल जो मैं छतरी दी थी वो आपकी नही। बल्कि मेरी सहेली की थी। दोनों छतरियां एक जैसी थी और मैंने गलती से आपको अपनी छतरी दे दी। - दिशा ने कहा। 
आज वो उसकी एक सहेली के साथ आई थी। जो आदित्य को लगातार देखे जा रही थी। पर आदित्य की नजर केवल दिशा पर थी। वो उसकी बातें सुन रहा था पर आंखे उसकी दिशा के चेहरे पर ही टिकी थी। इस बात को उसकी सहेली ने देख लिया ओर कहा - ओह भैया, दिशा को देखना बंद करो और छतरी दो मेरी ?
आदित्य को कुछ जवाब देते न बना। उसने दिशा से वो छतरी ली। और देखी ये तो सच में वही छतरी है जो उसकी भाभी ने दी थी। उसने भी छतरी लेते समय केवल दिशा को देखा, छतरी हो नही। पर आज वो छतरी नही लाया था। इसलिए उसने कहा कि - आप इसे अभी ले जाइए। मैं कल आपकी छतरी ले आऊंगा। आज बरसात होगी ऐसा नही लग रहा था इसलिए मैं छतरी नही लाया। 
ओह, तो कल फिर लाना पड़ेगा। पर अभी तो बरसात के दिन है आपको लाना चाहिए था। अब ये वापस ले जाकर मैं क्या करूंगी ? 
अपनी सहेली को दे देना और क्या ? - आदित्य ने कहा। 
पर कल क्यों ? आज क्यों नही ? - दिशा की सहेली ने कहा। 
अरे टीना, मुझे बात करने दे यार। गलती मेरी है इनकी नही। - दिशा ने कहा। 
हां ठीक है। आदित्य जी। हम कल मिलते है। - दिशा ने कहा।
इतना कहकर वो दोनों चली गई। 
अब क्या उन्हें घर तक छोड़ कर आएगा - राकेश ने हंसते हुए कहा।
घर पता होगा तब ना - कार्तिक ने कहा। 
पर ये बात सुनकर आदित्य हंसा नही। बल्कि दोनों को बारी बारी से गले लगा लिया। 
वाह मेरे कमीनों, कभी कभी क्या अच्छी बातें करते हो तुम ? 
ये इसे क्या हो गया ? गले क्यों लग रहा है सब ठीक तो है ना ? - राकेश ने हंसते हुए कहा।
अरे दीदी का असर है ? - कार्तिक भी हंसने लगा।
बस करो अब ? और अब तुम्हे मेरा काम करना पड़ेगा। - आदित्य ने कहा। 
अब अचानक से तुझे क्या काम याद आ गया। - कार्तिक ने कहा।
तुम दोनों को दिशा का घर पता करना होगा। 
हम दोनों को ? - राकेश और कार्तिक ने एक साथ कहा। 
तू पागल हो गया है ? पसंद तुझे आई है। और घर हम क्यों ढूढेंगे ? - राकेश ने कहा।
सोच लो। तुम्हे ब्लेकमेल करने के बहुत से तरीक है मेरे पास।- आदित्य ने हंसते हुए कहा।
तो अब कमीनेपन पर उतर आया। - राकेश ने कहा।
अरे ना मुन्ना, ये तो बस तुम्हे याद दिला रहा था। कमीनों तुम्हारे लिए क्या क्या नही किया है ? और करता ही रहता हूं। और तुम इतना भी नही कर सकते। बस यही दोस्ती है। - आदित्य ने इमोशनल होते हुए कहा।
तेरे इस इमोशनल अत्याचार से हम नही पिघलने वाले। - राकेश ने कहा।
इमोशनल अत्याचार नही है यार, तुम्हे लगता है तुम्हारे राज की बातें मैं तुम्हारे मम्मी पापा को बता सकता हूं । राकेश कैसे तूने एक बार तेरे मम्मी पापा के घर से बाहर होने पर पार्टी की थी। और तू बीयर पी कर नाचता रहा था। जिसका वीडियों आज भी मेरे पास सेफ है। क्या तुझे लगता है मैं एक फाॅरवर्ड का बटन दबाकर उसे तेरे पापा को सेंड कर सकता हूं ?

कब तक पता करके बताना ये बोल - राकेश ने कहा।

कार्तिक एकदम से राकेश का बदलाव देखकर चौंक गया। राकेश ने कार्तिक के मन की बात समझते हुए कहा - तू भी मना कर के देख ले। तेरा भी कुछ उसके पास रखा होगा। खुद तो कुछ खाता पीता नही है और हमारे वीडियों बनाकर सेफ करके रख लेता है।

अरे नही यार कार्तिक। तेरा तेरे ही घर की छत पर सिगरेट पीते हुए का वीडियो है मेरे पास। जिसकी वजह से उस दिन घर में आग लगते लगते बची थी। पर वो मैं किसी को नही दिखाऊंगा।- आदित्य ने कहा

अरे यार, आदित्य तू तो ऐसे ही गुस्सा हो जाता है। तू बस एक बार सीरियस होकर बोल देता। हम तो यूं ही मान जाते। तेरे पक्के दोस्त है हम। क्या इतना भी नही करेंगे तेरे लिए। तू भी ना मजाक का बुरा मान जाता है।

हा हा हा, नही यार। मुझे पता है तुम मेरी एक बार में ही बात मान लेते हो। पर क्या करें। मजा आता है तुम्हे ऐसे चिढ़ाने में। मैं खुद इसलिए पता नही कर रहा हूं क्योंकि मुझे देख लिया तो गलत समझ लेगी।

तुम दोनों से उसने ज्यादा बात भी नही की है तो कोई फर्क नही पड़ेगा। - आदित्य ने कहा।

हां, अब सफाई मत दे। 2 दिन में पता लगाते है पूरी जानकारी। तेरे प्यार की कहानी में सपोर्ट जरूर करेंगे। - राकेश ने कहा।

अच्छा। तो लग जाओ काम से - आदित्य हंसने लगा।

अभी शायद काॅलेज से बाहर नही गई होगी। हम देखते है कहां तक जाती है ? - राकेश ने कहा। 
चल मैं बाइक लेकर आता हूं।- कार्तिक ने कहा। 
मैं भी साथ ही चलता हूं यार, क्यों टाइम वेस्ट करता है। - राकेश ने कहा।
तू कब मिलेगा ? - राकेश ने कहा।
अब कल ही मिलेंगे। ओके बाय। 
बाय। - दोनों ने कहा और चले गए।

आगे जारी . . .

आगे क्या हुआ ? कार्तिक और राकेश ने दिशा के घर का पता लगाया ? या वो आदित्य की बात मान कर फंस गए ? इंतजार कीजिए अगले भाग का। 

पाठकों से दो शब्द

अगर कोई लेखक अपना अमूल्य समय देकर कोई कहानी लिखता है, आपको कुछ सीख, कुछ मनोरंजन, कुछ काम की बातें, रिश्तों की समझ कुछ भी देता है तो क्या आपका इतना फर्ज नही बनता कि लेखक को उसकी रचना के बारे में कुछ बताएं ? इसका मतलब है कि आपको लेखक की मेहनत से कोई मतलब नही है। आपको बस एक प्लेटफार्म मिल गया जहां आपको कहानी पढ़ने का मिल जाती है। किसी लेखक ने क्या लिखा ? कैसा लिखा ? एक मिनट का समय देकर ये बताने का कष्ट भी नही करते। 

वैसे लेखक इन कमेंट्स का भूखा नही होता। पर जब कभी मातृभारती पर  बहुत अच्छी कहानियों को पढ़ता हूं, खासकर नए लेखकों की अच्छी रचनाओं को जिन पर मुश्किल से एक दो कमेंटस और एक दो रेटिंग्स ही होते है तो दुख होता है। 

क्योंकि ये उनके शुरूआत का समय है शुरू में ही उन्हें मोटिवेशन नही मिलेगा तो वो आगे क्या लिखेंगे ? और क्यों लिखेंगे ? 

मेरी पुरानी हवेली का राज़ कहानी को 43000 से ज्यादा पाठकों ने पढ़ा पर समीक्षा 2000 लोगों की भी नही आई। इससे पता लगता है कि ये लोग कितने बिजी है। जिनके पास 1 घंटे की रचना पढ़ने का समय है पर 30 सेकिंड का कमेंट करने का नही। कोई भी लेखक हो उसकी रचना पर उसका उत्साहवर्धन करना क्या सही नहीं है | आप खुद इस बात को स्वयम के ऊपर लेकर देखिये| 

खैर मुझे इन कमेन्ट और रेटिंग्स में कुछ रूचि नही पर यहाँ जिस प्रकार लेखक मेहनत कर रहा है वैसे यहाँ पाठकों का न सहयोग मिलता है और न ही पाठको से कोई संवाद होता है |

वैसे मेरा ये संवाद इसलिए था क्योंकि एक दो नवीन लेखकों ने मुझसे कहा था कि आप कहानी कैसे लिखते हो। आपकी कहानियों पर रेटिंग्स  कैसे आ जाते है ? हमें भी बताओ ? 
इसलिए आपसे थोड़ा सा संवाद कर लिया। बाकी आप सब मेरी बात मानने या न मानने के लिए स्वतंत्र है।

 

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