बरसात के दिन - 3

अभी तो काॅलेज में आये दो दिन भी नही हुए और कोई लड़की भी पटा ली क्या ? - राकेश ने पूछा
अरे नही यार ! तुझे कल बताया था न छाते वाली के बारे मे - आदित्य ने कहा।

ओह तो तुझे अपने छाते की याद आ रही है। हा हा हा - राकेश हंसने लगा।

राकेश ने कंधे पर हाथ रखते हुए कहा - चिंता मत कर अभी बरसात का मौसम शुरू नही हुआ है। वो मौसम की पहली बरसात थी। अभी पूरा मानसून आने में वक्त है। 

यार तू भी ना। वो लड़की मुझे अच्छी लगी यार। सादगी में भी सुंदर लग रही थी। असली सुंदरता तो वही है जो बिना मेकप के भी अच्छी लगे। - आदित्य की नजरें काॅलेज के दरवाजे पर टिकी थी।

हाँ ये बात तो है भाई, पर चिन्ता मत कर हो सकता है वो भी काॅलेज में तुझे ही ढूंढ रही हो तेरा छाता लौटाने के लिए।

हाँ ऐसा भी हो सकता है। - आदित्य काॅलेज के दरवाजे की तरफ देख रहा था। शायद वो नजर आ जाये। 
तभी आदित्य पीछे से एक कोमल आवाज आई - सुनिये भईया।
आदित्य ने देखा। ये तो दिशा है। पर भईया, अरे यार इन लड़कियों की जुबान पर ये भईया शब्द ही क्यों लगा रहता है। जिसको देखो उसको भईया बनाने लग जाएगी। भले ही लड़का दूर दूर तक भाई वाली कोई फीलिंग चाहता ही न हो। सारी लव स्टोरी का सत्यानाश कर दिया। मूड खराब कर दिया। इतना स्मार्ट बन्दा इसे भईया नजर आ रहा है। 
भईया जी क्या सोचने लग गये। ये लीजिए आपकी छतरी। उसने छतरी पकड़ाते हुए कहा। - दिशा ने कहा।
आदित्य का दिमाग ही खराब हो गया। पर इसमें उसकी कोई गलती नही। ये तो भारतीय लड़की के ‘‘ संस्कार‘‘ है जो हर लड़के में भईया देखती है। आदित्य ने भी छतरी ली और कसम खायी कि आज भले ही अनजाने में दिशा ने भईया कह दिया हो। पर एक दिन वो उसे अपना बना कर ही रहेगा। 
और वह इतना कह कर चली गई। जाते जाते थैंक्स भी न कहा। 
राकेश जो इतनी देर से शांति से सारा घटनाक्रम देख रहा था। अब जोर जोर से हँसने लगा। 
भईया जी क्या सोचने लग गये। ये लीजिए आपकी छतरी। हा हा हा हा हा हा
अब बस कर यार! ये तो लड़कियों का ‘काॅमन वर्ड‘ है। इसे इतना ‘सीरियसली‘ लेने की जरूरत नही है। समझा। 
हाँ हाँ पता है तू उसे इतनी आसानी से छोड़ने वाला नही। - राकेश ने हंसते हुए कहा।

ये शब्द ये शब्द। ये घटना। ये सब मैंने कल कहानी में लिखा था। - आदित्य का दिमाग अचानक से होश में आया। उसने जल्दी से मोबाइल निकाला और कल जो उसने काॅपी में लिखा था। उसका खींचा हुआ फोटो देखा। सच में आज वही सब हुआ था। जो उसने काॅपी में लिखा था। 
ओह ओह नो। ओह नो। क्या ये पाॅसिबल है ? नही नही। ऐसा नही हो सकता। दिशा के आते ही मैं तो सबकुछ भूल गया। कि ये सब तो मैंने पहले ही उस काॅपी में लिख दिया था। आज तो बस वो असलियत में हुआ है। वो काॅपी सच मंें बहुत अनमोल है उसका एक एक पेज काम का है। उसने खुद से बातें करते हुए कहा।
क्या हुआ यार ? उस लड़की के जाते ही कहां खो गया तू ? सब ठीक तो है ? - राकेश ने कहा।
हां यार सब ठीक है। - आदित्य ने कहा।
चल यार गार्डन में चल कर बैठते है कुछ देर - राकेश ने कहा।
हां, चल। - आदित्य ने कहा। 
दोनों गार्डन में बैठने वाले थे कि अचानक आदित्य को याद आया आज काॅलेज जाने की जल्दी में वो काॅपी को टेबल पर ही छोड़ आया है। और भाभी रोजाना उसके जाने के बाद उसके कमरे की साफ सफाई करती है। कहीं भाभी ने वो काॅपी पढ़ ली तो। ओह नो। मैं इतनी बड़ी गलती कैसे कर सकता हूं। 
उसने राकेश से कहा - यार राकेश मुझे अचानक से बहुत जरूरी काम याद आ गया है। मुझे अभी इसी वक्त जाना होगा।
पर हुआ क्या ? 
वो सब मैं तुझे वापस आकर बताता हूं। आज कार्तिक भी नही आया वरना उसके साथ चला जाता। - आदित्य ने कहा।
वो जल्दी से जाने के लिए घूमा ही था कि सामने से उसे राज आते दिखा। उसे वो उसकी नजरों से बचना चाह रहा था पर राज ने आगे होकर उससे कहा - और मेरे आदिमानव कहां घूम रहा है ? और कार्तिक कहां है ?
हैलो। राज। घर पर कुछ जरूरी काम था वो याद आ गया तो बस इसलिए अभी थोड़ा जल्दी में हूं। कार्तिक आज नही आया उसे भी काम था इसलिए नही आया। ओके बाय मैं चलता हूं। - आदित्य बस वहां से उसी समय निकलता चाहता था। 
अरे इतनी भी किस बात की जल्दी है यार। - राज ने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा। 
ये बता ? कहानी वहानी लिखी या नही उस काॅपी में ? या खाली ही पड़ी। - उसने मुस्कुराते हुए कहा।
हां लिखना शुरू किया है। अभी एक पेज लिखा है। 
ओह सच में ? बता यार क्या लिखा है ? जरा हम भी तो सुने ? - राज ने खुश होते हुए कहा।
यार प्लीज अभी जाने दे। कल आकर बताता हूं न। बहुत जरूरी है। और आसमान को देखकर लग रहा है बरसात आने वाली है | - आदित्य ने आसमान की और देखते हुए कहा।

अरे यार बरसात के दिन है तो बरसात तो आएगी ही न - राज ने कहा | 
राज भाई। इसने मुझसे भी बोला था। जरूरी काम है। इसलिए मुझे भी छोड़कर जा रहा था। कल बात करते है। - राकेश ने आदित्य के मन की बात समझते हुए कहा |
चल ठीक है। कल बताना क्या लिखा ? - राज ने कहा।
हां, ओके बाय। - आदित्य ने कहा। 
कुछ ही देर में वो घर पर था। घर पर पहुंचते ही उसके हाथ पैर फूल गए। उसके माथे पर पसीने की बूंदे छलछला उठी। उसके घर पर हाॅल में उसके ताऊजी की लड़की साक्षी और उसकी भाभी बैठे हुई थी। साक्षी दीदी के बच्चों की वजह से 12वीं में उसे अपने प्रोजेक्ट को दुबारा बनाना पड़ा था क्योंकि उनके बच्चों ने उसके बने बनाए प्रोजेक्ट पर पानी की बोतल गिरा दी थी। उनके बच्चे उम्र में 5 और 7 साल के थे। लेकिन शैतानी करने में 15 साल के थे। उस रात उसने 3 बजे तक जाग कर प्रोजेक्ट बनाया था। उसे ये देखकर थोड़ी राहत मिली कि आज उनके बच्चे नही आए हुए थे।

आदित्य को देखते ही साक्षी ने कहा - अरे आदि। इतनी जल्दी काॅलेज से आ गया ? 
हां दीदी वो आज . . कुछ। मैं आपसे थोड़ी देर बाद आकर बात करता हूं। कहता हुआ वो अपने कमरे की तरफ चला गया।

आदित्य की भाभी और साक्षी दोनों को उसका ये व्यवहार अजीब लगा। आदित्य ने खुशी खुशी कमरा खोला पर कमरा खोलते ही वो चैंक गया। साक्षी दीदी के दोनों बच्चे उसके ही कमरे मे थे। और उसका पूरा कमरा कागज के हवाई जहाज। नाव। और खेल खिलौनों से बिखरा पड़ा था।

उसने अपनी वो जादुई काॅपी देखी। पर अब उस जगह बस अब कुछ बिखरे हुए कागज पड़े थे। आदित्य को समझ नही आया कि वो अब क्या करे ?
हां पर गुस्से मंे उसने उनके साक्षी दीदी के दोनों बच्चों को जोरदार थप्पड़ लगाए। और जोर से चिल्लाते हुए कहा - क्या हाल कर के रख दिया है मेरे कमरे का ? चैन से रहना नही आता तुम्हे। मेरा इतना बड़ा नुकसान करवा दिया। जाओ भागो यहां से। 
दोनों ने अपने मामा को इस तरह पहली बार देखा था। वो रोते हुए कमरे से भाग गए।

आदित्य भी आंखों में नमी लेकर उन कागज के टुकड़ों को समेटने लगा। उसने एक बहुत अनमोल चीज़ खो दी थी | जो शायद किसी के पास नहीं थी | उसी वक्त बरसात होने लगी| क्योंकि ये दिन बरसात के दिन है|

आगे जारी . . .

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