बरसात के दिन - 5

आज के भाग पढ़ने से पहले एक नया प्रयोग करने जा रहा हूं अगर आपको अच्छा लगे तो जरूर आजमा कर देखें। बरसात के दिन में बरसात के दिन कहानी को पढ़ते समय इन गानों को आप यू ट्यूब या किसी म्यूजिक एप से डाउनलोड कर ले | और इसी क्रम में प्लेलिस्ट बना कर रख ले और जब कहानी में ये गाने आये तो उन्हें प्ले कर दे| कहानी का आनंद दुगुना हो जाएगा।

 


1.अभी ज़िंदा हूँ तो जी लेने दो जी लेने दो

भरी बरसात मे पी लेने दो

2.ये मौसम की बारिश

ये बारिश का पानी

3.मौसम है आशिक़ाना ऐ दिल कही से उनको

ऐसे मे ढूँढ लाना ऐसे मे ढूँढ लाना

 


वैसे कहानी इस सब के बिना भी पढ़ी जा सकती है ये सुझाव केवल आपके कहानी पढने के आनंद को दुगुना करने के लिए था इसे मानने या न मानने के लिए स्वतंत्र हो |

 


पिछले भाग की अंतिम पंक्ति से आगे ...

 


“यार बरसात के दिन है पर फिर भी गर्मी कितनी ज्यादा लग रही है ?” - राकेश ने बाइक चला रहे कार्तिक से कहा।

 


“हां यार, वैसे ये गर्मी नही है उमस है। हो सकता है बरसात हो जाए।” - कार्तिक की निगाह उस समय दिशा जिस आॅटो में बैठी थी उसके ही पीछे थी।

 


“बरसात तो होगी ना। आखिर ये दिन बरसात के दिन जो है।” - राकेश ने कहा।

 


आगे कुछ दूर जाने पर एक मोड़ आया। उसी समय अचानक से बरसात की बूंदे गिरने लगी।

 


राकेश ने कहा - “ये तेरे पसीने की बंूदे मेरी तरफ आ रही है क्या ?”

 


“पागल, ऊपर देख सामने देख बरसात हो रही है। तेरा ध्यान किधर है ?”

 


“मोबाइल में, पबजी खेल रहा था ?”

 


“ये कोई पबजी खेलने की जगह है ?”

 


राकेश ने जल्दी से मोबाइल जेब में रखा और कहा - तू मुझ पर नही दिशा पर ध्यान दे यार। वो कहां है ?”

 


कार्तिक ने देखा - “उसका आॅटो कहीं नजर नही आया।”

 


उसने बाइक रोक कर कहा - “किस तरफ गई यार वो ? ”

 


“ये तो तुझे याद होना चाहिए। मैं तो पबजी में बिजी था। ”

 


तभी अचानक से बरसात तेज हो गई। दोनों को कुछ समझ नही आया। क्या करें ?

 


कार्तिक ने जल्दी से अपने जेब से पाॅलिथीन निकाली और अपना मोबाइल उसमें रखते हुए कहा - “चल घर चलते है। बस मोबाइल बचा लेना।”

 


राकेश ने जल्दी से मोबाइल को संभाला और कार्तिक ने बाइक स्टार्ट की।

 


“भाई बाइक आराम से चलाना यार। पहली बार इतनी तेज बरसात हो रही है। कितना मजा आ रहा है भीगने में” - राकेश ने अपना सिर ऊपर कर के बरसात की बूंदों को अपने चेहरे पर महसूस करते हुए कहा।

 


“हां तुझे तो मजा आएगा ही बाइक चला तब पता चलेगा।” - कार्तिक ने कहा।

 


“चल बरसात का कोई गाना गाता हूं|”- राकेश ने कहा। और गाने लगा -

(पहला गाना शुरू कीजिये )

 


“बरसात के मौसम मे

तन्हाई के आलम मे

बरसात के मौसम मे तन्हाई के आलम मे

मै घर से निकल आया बोतल भी उठा लाया

अभी ज़िंदा हूँ तो जी लेने दो जी लेने दो

भरी बरसात मे पी लेने दो

अबी ज़िंदा हूँ तो जी लेने दो जी लेने दो

भरी बरसात मे पी लेने दो . . .”

 


“पियक्कड़, ये बरसात का गाना है, तू तेरी इच्छा बता रहा है।” - कार्तिक ने हंसते हुए कहा।

 


“मेरा फेवरिट बरसात सोंग है |”- राकेश ने कहा।

 


“पता था मुझे ऐसा ही सोंग हो सकता है तेरा फेवरिट। ले तेरा घर आ गया और हां कल काॅलेज में मिलते है। - बाइक रोकते हुए कहा।”

 


“आज तो आदित्य की दिशा के चक्कर में भीग गए। ”

 


“हां, पर यार उसने भी तो कितनी हेल्प की है। इतना तो चलता है।”

 


“हां दोस्ती की है तो निभानी तो पड़ेगी। अच्छा मैं चलता हूं। बाय ”- कार्तिक ने बाइक स्टार्ट करते हुए कहा।

 


***

(दूसरा गाना शुरू कीजिये )

 


“चेहरे में तेरे

खुद को मैं ढूँढू

आँखों के दरमियाँ

तू अब है इस तरह

ख़्वाबों को भी जगह ना मिले

ये मौसम की बारिश

ये बारिश का पानी

ये पानी की बूँदें

तुझे ही तो ढूँढें

ये मिलने की ख्वाहिश

ये ख्वाहिश पुरानी

हो पूरी तुझी से मेरी ये कहानी . . .”

 


आदित्य अपने रूम की खिड़की के पास बैठा बाहर बरसात की बूंदे देख रहा था। और उसके मोबाइल पर तेज आवाज में गाना सुना जा रहा था।

 


“वाह। भैया। क्या गाना लगा रखा है ? मुझे लगता है छतरी वाली की याद आ रही है।” - कोमल ने अचानक से आदित्य के रूम में गाना सुनकर कहा।

 


कोमल भाभी उसके लिए गर्मागर्म चाय और बिस्किट लेकर आई थी।

 


आदित्य ने सोचने लगा आखिर भाभी को हर बात का पता कैसे लग जाता है, पर उसने पहले सवाल का जवाब देते हुए कहा - “हां गाना तो अच्छा ही है।”

 


“लो चाय।” - कोमल ने कप पकड़ाते हुए कहा।

 


वैसे आपने छतरी वाली के बारे में कुछ नही बताया - “कोमल अपने सवाल का जवाब लेना ही चाहती थी।”

 


“अरे नही भाभी, ऐसा कुछ नही है।”

 


“उसका घर पता किया या नही। आप नही पता कर पाओ तो कार्तिक से बोल देना।” - कोमल ने हंसते हुए कहा।

 


“भाभी आप कहीं मेरी जासूसी तो नही कर रहे हो ? हर बात का पता आपको कैसे लग जाता है ?”

 


“किस बात का पता ? मैं तो मजाक कर रही हूं भैया ? भला मैं आपकी जासूसी क्यों करवाने लगी ? आपको तो पता है मैं तो आपसे अक्सर ऐसे मजाक करती रहती हूं।”

 


“हां, अरे मैंने भी मजाक में ही कहा” - आदित्य ने खुद की बात को संभालते हुए कहा। कार्तिक वाली बात सुनकर आदित्य को लगा कि सच में भाभी को सारी बात पता है। पर उसे भाभी का स्वभाव याद था। वो अक्सर ऐसे मजाक करते रहते थे। और किसी भी लड़की तरफ देखते ही उससे शादी करने तक की बात करने लग जाते थे। क्योंकि आदित्य को शादी के नाम से चिड़ होती थी।

 


“अब क्या सोचने लगे ? कुछ बोलोगे भी” - कोमल ने कहा।

 


“अरे नही भाभी ?”

 


“वैसे अगर कभी कोई लड़की पसंद आए तो बता देना। आपकी भाभी आपके साथ है ?” - कोमल ने कहा।

 


“हां जरूर भाभी।” - आदित्य ने मुस्कुराते हुए कहा।

 


***

 


अगले दिन सुबह से ही तेज बरसात शुरू हो गई थी। आदित्य को समझ नही आ रहा था कि वो काॅलेज जाए या नही।

 


वो सोचने लगा कि दिशा ने कहा था कि वो आज काॅलेज में उसकी छतरी लेने आएगी। इसलिए जाना जरूरी है। अगर आज वो आई और मैं नही मिला तो उस पर गलत इम्प्रेशन पड़ेगा।

 


“भाभी, छतरी कहां है ?”

 


“कौनसी छतरी ? एक तो आपके भैया ले गए और एक शायद हाॅल में ही रखी है ?” - कोमल ने रसोई से कहा।

 


“अच्छा देखता हूं।” - आदित्य ने वहां जा कर देखा वो छतरी नही थी। जो दिशा ने दी थी।

 


“भाभी ये वो छतरी नही है जो मैंने आपको दी थी।” - आदित्य ने रसोई में जाकर कोमल को दिखाते हुए कहा।

 


“तो क्या फर्क पड़ता है आज ये ले जाइए।”

 


“ओह भाभी , अब क्या बताऊँ ?”

 


“बता दो, जो बताना है।”

 


“अरे वो छतरी जो आपने मुझे दी थी वो दिशा की दोस्त की छतरी है और आपकी दी हुई छतरी दिशा के पास है।” - उसने एक बार में ही सारी बात बता दी।

 


“हा हा तो ये बात है ”- कोमल ने हँसते हुए कहा।

 


“आप हंस रही हो भाभी। पर इसमें हंसी की बात क्या है ?”

 


“अरे आपको पता है ना आपकी भाभी वर्ल्ड की बेस्ट भाभी है। वो तो जिस दिन आप छतरी लाए थे उसी दिन मैंने देख लिया था पर यही सोच कर कुछ नही बोला कि आप खुद बताओगे। पर आपने कोई बात नही की तो मैंने भी कुछ नही कहा।”

 


“हां मैने भी ध्यान नही दिया था। कल उसने बताया तब पता चला।”

 


“तो पता रखा कीजिए। ऐसे तो कोई भी कुछ भी दे जाएगा आपको।”

 


“हां सही है। पर वो छतरी . . .”

 


“हां लाती हूं, मैंने पहले ही अलग रख दी। याद था कभी तो आपकी दिशा को या आपको पता चलेगा।” - कोमल ने हंसते हुए कहा।

 


“भाभी यू आर रिअली ग्रेट” - आदित्य ने भी हंसते हुए कहा।

 


कोमल ने वो छतरी ला कर दी। और आदित्य ने जल्दी से वो छतरी ली और काॅलेज के लिए निकल गया। क्योंकि बरसात थम चुकी थी।

 


***

 


आदित्य काॅलेज आ चुका था। पर कार्तिक और राकेश दोनो का ही पता नही था। उसने दोनो को काॅल किया पर किसी ने भी काॅल नही उठाया। उसका मन भी नही लग रहा था। उसने मोबाइल में एफएम आॅन किया।

 


“तुम्हें गीतों मेें ढालूंगा, तुम्हें गीतों मेें ढालूंगा

सावन को आने दो। ”

 


आ तो गया यार और कितना सावन आएगा।” - आदित्य ने कहा और चैनल चेंज किया।

 


“बरसो रे मेघा मेघा बरसो रे मेघा मेघा बरसो रे मेघा बरसो ”

 


“कल दिन से लेकर अभी तक तो बरस रहे थे और कितना बरसेंगे ? ” - उसने कहा और फिर से चेनल चेंज कर दिया।

 


“इतना अच्छा मौसम है यार। काश . . ”

 


तभी एफएम में गाना बजा (तीसरा गाना शुरू कीजिये )- अगला गाना पाकीजा फिल्म से

 


“मौसम है आशिक़ाना ऐ दिल कही से उनको

ऐसे मे ढूँढ लाना ऐसे मे ढूँढ लाना

मौसम है आशिक़ाना ऐ दिल कही से उनको

ऐसे मे ढूँढ लाना ऐसे मे ढूँढ लाना

मौसम है आशिक़ाना”

 


आदित्य ने ये गाना पहली बार सुना था, पर उसके शब्द उसे ऐसे लगे जैसे उसके मन की बात कर रहे हो। गाना हालाँकि महिला के ऊपर महिला की आवाज में था पर उसमे जो फीलिंग थी उसे वो अपने ऊपर फील कर रहा था उसे वैसे नए गाने पसंद थे पर उसने वो गाना सुनना जारी रखा।

 


“कहना के रुत जवा है और हम तरस रहे है

काली घटा के साए बिरहन को डस रहे है

डर है ना मार डाले सावन का क्या ठिकाना

सावन का क्या ठिकाना

मौसम है आशिक़ाना

सूरज कही भी जाए तुम पर ना धूप आए

तुम पर ना धूप आए

आए आए आ

तुमको पुकारते है इन गेसुओ के साए

आ जाओ मैं बना दू पलकों का शामियाना

पलकों का शामियाना

मौसम है आशिक़ाना

फिरते है हम अकेले बाहो मे कोई ले ले

आख़िर कोई कहा तक तनहाइयो से खेले

दिन हो गए है ज़ालिम राते है क़ातिलाना

राते है क़ातिलाना

मौसम है आशिक़ाना”

 


“वाह यार, क्या गाना है ?” - तभी पीछे से आवाज आई।

 


“अरे दिशा तुम कब आई ?” - आदित्य ने पीछे देखकर कहा।

 


बस उसी वक्त जब तुमने एफएम आॅन किया था। पहले जो गाने चलाए थे वो मेरे फेवरिट सोंग्स थे। मैं उसी वक्त तुमसे बोलने वाली थी कि एक गाना तो चलने दो। बरसात में बरसात के गाने सुनना कितना अच्छा लगता है ?”

 


“हां वो तो है। तभी तो सुन रहा था।”

 


“हां लेकिन ये गाना भी बहुत अच्छा है, मुझे पुराने गाने सुनने का शौक है, इस गाने में एक चाहत है सच में बहुत अच्छा गाना है |”

 


“हां किसी पुरानी फिल्म का गाना है| आजकल ऐसे गाने बनते कहाँ है ?”

 


“हां सही कहा| इन पुराने गानों में एक फीलिंग होती थी। दिल से लिखे जाते थे और दिल को छू जाते थे।”

 


“हां सही कहा।” - आदित्य को विश्वास नही हो रहा था कि एक गाना ये कमाल कर देगा। और दिशा उससे इतनी बातें कर लेगी।

 


“वैसे आप मेरी छतरी ले आए।”

 


“हां ये लीजिए। आपकी दोस्त नही आई आज” - आदित्य ने छतरी देते हुए पूछा।

 


“हां उसे मैंने ही मना कर दिया। बहुत गुस्सैल है वो। आप से भी ठीक से बात नही की उसने , ये लीजिए आपकी छतरी।” - उसने आदित्य की छतरी लौटाते हुए कहा।

 


“अरे कोई बात नही। मुझे बुरा नही लगा।” - आदित्य ने मुस्कुराते हुए कहा।

 


“वैसे आपसे एक और हेल्प चाहिए थी, अगर आप बुरा न माने तो।

 


“अरे बुरा मानने वाली क्या बात है ? कहिए।”

 


“वो मुझे लाइब्रेरी कार्ड बनाना था आप हेेल्प कर देंगे। क्या करना है और कैसे करना है ?”

 


“अरे बस इतनी सी बात जरूर। आप मुझे बस आपका फाॅर्म और एक फोटो और बाकी जो जो भी डाॅक्यूमेंट लगाना है उसकी जेरोक्स दे देना।”

 


“ओके। ये सब मैं साथ लाई हूं। ये लीजिए। मुझे आज घर पर जरूरी काम है। और मेरा अभी तक कार्ड भी नही बना है। इसलिए आपको परेशान कर रही हूं।”

 


“अरे नही कोई बात नही। एक दूसरे की हेल्प करने से ही तो दोस्त बनते है।”

 


आदित्य ने ये सोच कर बात कही थी कि दिशा भी उसे अपना दोस्त मान चुकी है। पर दिशा ने कोई जवाब नही दिया।

 


“तो कल मिलते है।”

 


“हां जरूर।”

 


“ओके बाय।”

 


“बाय”- दिशा ने कहा और वो चली गई।

 


ये तो मतलबी लड़की लगती है यार। बस मतलब की बात करती है। जब लड़कों से मतलब निकालना हो तब आ जाओ बस। बाकी दोस्ती वाली कोई बात नही। हां पर हो सकता है वो शर्मीले स्वभाव की हो। इसलिए दोस्ती में हिचक रही हो। - आदित्य दिशा के जाने के बाद सोचने लगा।

 


आखिर सच क्या था ? क्या सच में दिशा शर्मीली लडकी थी या केवल मतलब निकालने के लिए आदित्य से बात कर रही थी | कार्तिक और राकेश ने दिशा के बारे में क्या पता लगाया सब अगले भाग में …

 


आपका फेवरेट रेन सोंग कौनसा है ? और कहानी कैसी चल रही है कमेन्ट कर के जरुर बताएं |

 

***

Rate & Review

Verified icon

Komal 2 months ago

Verified icon

Rakhee Mehta 2 months ago

Verified icon

Harsh Parmar 2 months ago

Verified icon

Dolly Jasani 3 months ago

Verified icon

Shambhu Rao 3 months ago