बिन तेरे...! भाग 1

"डॉक्टर..! प्लीज..! मैं यह बच्चा नहीं चाहती | आय मिन..! अभी नहीं चाहतीं |"
"शिवानी..! ये सेकंड अबॉर्शन तुम्हारे लिए ठीक नहीं हैं | मैं ईसकी परमिशन तुम्हें नहीं दे सकती |"
"बट डॉक्टर..! मेरा करिअर ख़त्म हो जाएगा |"
"ये तुम्हें पहले सोच लेना चाहिए था |"
"प्रिकॉशन तो लिया था पर पता नहीं कैसे ये सब...!"
"देखो..! शिवानी..! लेट मी क्लिअर वन थिंग..! ईस अबॉर्शन के बाद तुम कभी माँ नहीं बन पाओगी |"
"व्हॉट..? ओह गॉड..!"
"यस..! पहले अबॉर्शन के वक्त जो कॉम्प्लिकेशन्स आये थे वो देख तभी मैंने राजीव से ये बात क्लिअर कि थी, की दूसरी बार अबॉर्शन ना सिर्फ तुम्हारे लिए बल्कि बच्चे के लिए भी रिस्की हो सकता हैं |"
"कुछ तो रास्ता होगा..?"
"मेरी मानो तो बच्चा होने दो, शिवानी | वैसे भी थ्री मंथस हो चुके हैं | आय कांट टेक एनी रिस्क |"
ज़रूरत से ज़्यादा सोचने की वजह से शिवानी के दिल की धड़कनें तेज़ हो रहीं थी | कार ड्राइव्ह करना उसके लिए मुश्किल हो रहा था | उसने कार अपनी मॉम के घर की तरफ मोड़ दी |
"शिवानी..! तुम इस वक्त, यहां..? बेटा..! ऑफिस नहीं गई..? सब ठीक तो हैं..?" - शिवानी मॉम के सवालों का बिना कोई जवाब दिये सीधे वॉशरूम की तरफ बढ़ी | फ्रेश होतेही उसे थोड़ा ठीक लगने लगा |
"लो..! नींबू पानी पी लो |" - मॉम ने दिया हुआ नींबू पानी पी कर शिवानी सोफे पर लुढ़क गयी |
"क्लिनिक गई थी..?"
"हाँ..! मॉम..!" - शिवानी की आवाज़ में मानो जान ही नहीं थी |
"तो..? क्या कहां डॉक्टर ने..?"
"अबॉर्शन नहीं हो सकता | रिस्क हैं, शायद फिर कभी माँ नहीं बन सकती |"
"हे भगवान..! ह्म्म्म...! राजीव को पता हैं ये सब..?"
"नहीं मॉम..! अभी तो आ रहीं हूँ डॉक्टर से मिल कर | पता नहीं अब ये सब सुन कर वो कैसे रिअॅक्ट होगा ?"
"रिअॅक्ट क्या होना हैं ? बस..! बहोत हुआ ये लिव्ह इन वाला चक्कर, शादी कर लो और क्या..? पिछले पाँच सालों से साथ में रह रहे हो | मुझे तो पहले से ही ये बात खटक रहीं थी | पर तेरी ज़िद की वज़ह से चुप थी | बस..! अब और नहीं |"- मॉम ने अपना फैसला सुना दिया था |
"मॉम..! अब उस अकेले की ग़लती थोड़ी हैं..? प्रिकॉशन तो मुझे भी लेनी चाहिए थी ना..? शीट..! यार..! ये सब अभी होना था..!तीन महिने बाद राजीव को बोस्टन जाना हैं |"- शिवानी परेशान थी | शादी-बच्चा ये सब उसने कभी सोचा ही नहीं था |
"इसका मतलब तुझे यहाँ इस हालत में छोड़ वो भाग जाएगा ?"
"ऐसी बात नहीं हैं मॉम..? उसे भी तो अपना करिअर बनाना हैं |"
"तो राजीव के जाने से पहले तुम लोग शादी कर लो बस..!"
"नहीं मॉम बस करो..! तुम क्या चाहती हो..? जबरदस्ती राजीव के गले पडूँ..? मैं अपने बच्चे को अपना नाम देकर बड़ा कर सकती हूँ..! उसके लिए शादी की क्या जरूरत हैं..?"
"ज़रूरत हैं | इसीलिए कह रही हूँ | बड़ा होने पर क्या कहेगी बच्चेसे ? के वो नाजायज़ हैं | पता नहीं उसका बाप कहाँ हैं ?" मॉम ने उठाए सवालपर शिवानी के पास कोई जवाब नहीं था | वो सोच में डूब गई | ईतने में शिवानी का मोबाईल कांप उठा | राजीव का कॉल था | शिवानी बात करने के मूड में नहीं थी |
"हे.. हाय..!...मॉम के यहाँ हुँ... यस..एम ओके..हम्म..! गई थी.. कुछ खास नहीं... वो..हम...मिलकर बात करते हैं... ठीक हैं.. नो..! कुछ नहीं यार...शाम को बात करते हैं..! मैं अभी घर जा रहीं हूँ... बस तुम जल्दी आना..! या..! बाय..!"
"कहां क्यूँ नहीं उसे...?"- मॉम को शिवानी की चिंता सताये जा रही थी |
"मॉम..! रिलॅक्स...! वो ऑफिस से लौटेगा तब बता दूँगी | मैं अब घर जा रहीं हुँ | अॅण्ड प्लीज डोंट टेक टेंशन..! ओके..? मैं सब संभाल लुँगी..!"
"बेटा..! देखो..! सोच समझकर फ़ैसला लेना |"
"ठीक हैं मॉम..!"
शिवानी ने घर आते ही अपने आप को शावर के हवाले किया | तब जाके उसे तरोताज़ा महसूस हुआ | किचन में जाकर सैंडविच बना लिया और कॉफ़ी का मग हाथ में लिए वो बाल्कनी में जा बैठी | समंदर की हवा जुबां पर नमक का स्वाद चखाती हुई शिवानी के गीले बालोंसे होकर गुजर रहीं थी | बाल्कनी में खिले हुए गुलाब और मोगरे की धीमी खुशबू शिवानी ने साँसोमे भर ली | वहीं झूले में बैठकर कॉफ़ी की चुस्कियों संग राजीव की यादों में वो खो गई | दोनों ने मिलकर यह घर जब खरीदा था तब अपने-अपने करिअर के बारे में कितने सपने देखे थे | वो सारे सपने अब जाके कहीं पूरे होने ही वाले थे कि, ये सब...! पता नहीं सोचते-सोचते कब शिवानी की आँख लग गई | होश आया तो देखा वो बेडरूम में अपने बेड पर लेटी थी | और बाहर अंधेरा छा चुका था | शिवानी हड़बड़ाकर बेडरूम से बाहर निकली | राजीव किचन में कुछ काम कर रहा था | शिवानी को देखतेही उसने प्यारभरी मुस्कान से उसे गले लगाकर चुम लिया |
"यार..! कमाल की सोयी थी तुम | बाल्कनी से उठाकर तुम्हें अंदर ले आया फिर भी नहीं उठी | तो सोचा तुम्हारी आँख खुलने तक डिनर प्रिपेअर कर लूँ |"
"सॉरी..! डिअर..! तुम कब आये..?"- शिवानी राजीव की बाहों में समा गई | माइक्रोवेव की आवाज से राजीव शिवानी से दूर होते हुए खाने की प्लेट्स निकालने लगा |
"बस..! घंटेभर पेहले... तुम जल्दीसे फ्रेश हो जाओ, तुम्हारी फेव्हरेट कोफ़्तेवाली बिरयानी लाया हूँ... फ़टाफ़ट आ जाओ |"- राजीव नॉर्मल बातें कर रहा था | शिवानी ने सोचा फ़िलहाल खाना खा लिया जाय वैसे भी उसे भूख लगी थी | डिनर के बाद राजीव ने आइस्क्रीम ली और शिवानी से कॅज्युअली पूछा,
"तो..? कब की डेट मिली हैं..?"
"कौनसी डेट..?"
"तुम आज क्लिनिक गयी थी ना..?"
"हाँ..! गई थी..|"
"तो अबॉर्शन को डेट कब की मिली..? क्या कहां डॉक्टर ने..?"
"राजीव वो अॅक्च्युअली..! अबॉर्शन नहीं हो सकता |"
"व्हॉट..? आर यू मॅड..? बच्चा रखना चाहती हो..?"
"नहीं.. वो..मैं.. हाँ..! आय मिन..."
शिवानी ने आखिर दिनभर जो कुछ भी हुआ सब राजीव को बता दिया | शादी की बात सुनकर वो हैरान था |
"बट..! हमने तो कभी शादी के बारे में सोचा नहीं था, शिवानी |"
"आय नो...राजीव..! पर क्या फ़र्क पड़ता हैं..? हम वैसे भी साथ तो रहते हैं ना..?"
"पर शादी की अपनी अलग रिस्पॉन्सिबिलिटी होती हैं यार..! ऊपर से बच्चा..? नो..नो..नो..! आय एम नॉट रेडी फॉर धिस.."
"मुझे भी मॉम की बातें सुनकर पहले डर लगा था पर फिर बहोत सोचा मैंने, राजीव ! मॉमने जो सवाल उठाए वो भी तो करेक्ट हैं | हो जाएगा सब मॅनेज डोंट वरी..!"
"तुम्हें पता हैं ना मुझे बोस्टन सेटल होने का चान्स मिल रहा हैं | और फिर तुम भी तो वहाँ आकर अपना करिअर बनाना चाहती हो | बच्चा हो जाएगा तो ये सब नहीं कर पाएंगे शिवानी..!"
"तो क्या तुम चाहते हो इन फ्यूचर मैं कभी माँ ही ना बनूँ..? कभी ना कभी तो हमें शादी करनी होगी..?"
"सच कहूँ तो मैंने नहीं सोचा कभी |"- राजीव कन्फ्यूज़ था |
"तो अब सोच लो राजीव | आय लव्ह यू..! क्या तुम प्यार नहीं करते मुझसे..? क्या तुम रह सकते हो मेरे बिना..?"

                                       To be continued........

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