बरसात के दिन - 6

दिशा काॅलेज से निकल चुकी थी। काॅलेज के बाहर ही उसे आॅटो मिल गया। वो उसमें बैठी और घर के लिए निकल गई। उसी समय कार्तिक और राकेश भी काॅलेज आ रहे थे पर दिशा को आॅटो में देखकर काॅलेज न जा कर वो उसके पीछे चल दिए।

आज दोनों का ध्यान उसके पीछे ही था। कुछ देर बाद आॅटो एक काॅलोनी के अंदर गया। उन्होंने भी गाड़ी उस तरफ मोड़ ली। एक दो मंजिला मकान के सामने आॅटो वाले ने दिशा को छोड़ दिया।

सामने नेमप्लेट पर सूरजमल शर्मा लिखा हुआ था।

कार्तिक ने कहा - ये दिशा शर्मा है क्या ?

राकेश ने कहा - नही यार ये शर्मा थोड़े ही लगाती है ये तो . . .

ये तो क्या ?

अरे यार अब इतना तो याद नही पर जहां तक मुझे याद है ये शर्मा नही है।

तो इसका मतलब ये इसका घर नही है। तो फिर ये यहां क्या कर रही है ?

अरे हो सकता है किसी से मिलने आई हो ?

किससे ? 
वो उस लड़के से - राकेश ने सामने देखते हुए कहा।

उस घर में से एक लड़का बाइक लेकर बाहर निकला। दिशा उसके पीछे बैठी हुई थी।

ओह नो यार। अब तो आदित्य का कोई चांस नही है। ये लड़का तो वैसे भी लम्बा चैड़ा और हेंडसम है। अपना आदित्य बेचारा सिम्पल लड़का। उसका कुछ नही हो पाएगा।

अरे कैसी बात करता है यार, अपना आदित्य कोई कम नही। खैर हम जिस काम के लिए आए है। वो तो करें। पता तो करें ये जा कहां रहे है ? और वैसे भी आदित्य जानकारी लेने के लिए कहा था। ये नही कहा था कि उसकी स्टोरी आगे बढ़ पाएगी या नही। ये पता लगाना है।

हां सही है। तो फिर बाइक स्टार्ट कर - राकेश ने कहा।

कार्तिक धीरे धीरे उनका पीछा करता रहता है। अचानक वो लड़का अपनी बाइक उम्मेद पार्क के सामने कचौरी की दुकान पर रोक देता है। दिशा वहां उतर जाती है। और वो लड़का बाइक लेकर आगे निकल जाता है। दिशा दुकान से कचैरी लेने लगती है।

ये दिशा कचौरी खाने के चक्कर में उस लड़के के साथ यहां तक आई। ये तो खुद भी खा सकती थी। - राकेश ने कहा।

तुझे क्यों चिंता हो रही है ? तुझे भी खाना है क्या ?

अरे मेरे मुंह की बात छीन ली यार। चल और अभी कचौरी खाने के बहाने उससे बात भी कर लेंगे। उसका बाॅडीगार्ड दोस्त भी नही है अभी।

हां ये सही कहा। - कार्तिक ने जल्दी से अपनी बाइक बंद की।

दोनों ने दुकान से कचैरी ली और खाने लगे। दिशा भी कचौरी खा रही थी। उसकी नजर उनसे मिली और दोनो मुस्कुरा दिए।

दिशा उनके पास आई और कहा - आप दोनों मेरा पीछा कर रहे है ना।

राकेश और कार्तिक दोनों एकदम से सकपका गए। उन्हें कोई जवाब नही आया। पर कार्तिक ने बात को संभालते हुए कहा - नही तो।

मैं आप दोनों को दो दिन से नोटिस कर रही हूं। आज भी आप मेरा पीछा कर रहे है। पुलिस वाले की बेटी हूं। जब भी कहीं आती जाती हूं। आते जाते सब जगह निगाह रखती हूं। कौन आस पास है। और कौन मुझे फाॅलो कर रहा है ? - दिशा ने कहा।

अरे नही दीदी, ऐसी बात नही है - राकेश जो आदित्य को हमेशा चिढ़ाता था। आज उसने खुद दिशा को दीदी कहा।

कार्तिक तो अपनी हंसी नही रोक पा रहा था। इसलिए वो उन दोनों से दूर चला गया।

राकेश अभी भी दिशा को जवाब दे रहा था - वो दीदी। मेरी मौसी की लड़की भी वहीं रहती है हम उसके पास गए थे। आप चाहो तो मेरे दोस्त कार्तिक से पूछ लो।

उसने पीछे मुड़कर देखा कार्तिक उसे नजर नही आया। राकेश को कुछ समझ नही आ रहा था। लेकिन खुद को बचाने के चक्कर में अभी भी बोले जा रहा था - आपको जरूर कोई गलतफहमी हुई है। ऐसी कोई बात नही। मेरा विश्वास कीजिए।

तब तक कार्तिक वापस लौट आया। तभी राकेश की पीठ पर किसी ने हाथ रखा। और एक आवाज आई - क्या हुआ दिशा क्या बात हो गई ? कौन ये दोनों ?
कुछ बात नही सौरभ ? ये तो मेरे काॅलेज में मेरे साथ पढ़ते है। अभी मिल गए तो बात करने लगे। इन्होंने काॅलेज फाॅर्म भरने में मेरी मदद की थी।- दिशा ने दोनों के डरे हुए चेहरे देख कर कहा।

ओह ये तो अच्छी बात है। वैसे तुमसे इंतजार भी नही हुआ ना मेरे आने से पहले ही शुरू हो गई।

भूख के आगे इंतजार नही होता। हा हा हा - दिशा ने कहा।

कार्तिक और राकेश नजर बचाकर चुपचाप वहां से निकल गए।

***

अगले दिन आदित्य काॅलेज के गार्डन में बैठा हुआ कार्तिक और राकेश से बात कर रहा था। कार्तिक और राकेश ने आदित्य को सारी बात बता थी।

तुमसे एक काम ठीक से नही होता यार - आदित्य ने कहा।

हां बचपन से यही काम तो करते हुए आ रहे है हम ? - राकेश ने कहा।

बाकी भाई कल जब राकेश ने दिशा को दीदी कहा तो इसका फेस देखने लायक था। हा हा हा - कार्तिक ने कहा।

साले धोखबाज। तू कहां गायब हो गया था अचानक ये भी बता - राकेश ने गुस्से में कहा।

तूने जब दिशा को दीदी बोला न सच में इतनी जोर से हंसी आई क्या बताऊँ ? हा हा हा - कार्तिक ने हंसते हुए कहा।

तभी सामने से दिशा आते हुए दिखी। दोनों जल्दी से खड़े हो गए। आदित्य भी खड़ा हो गया। 
अच्छा हम चलते है यार। बाद में बात करते है। - कार्तिक ने कहा। और राकेश का हाथ पकड़ कर जल्दी से निकल गया।

उन दोनों को जाते हुए दिशा ने देख लिया। उन दोनों के जाने के बाद वो आदित्य के पास आई और कहा - मुझे तुमसे एक जरूरी बात करना है।

राकेश और कार्तिक के बारे मेें ??

हां, तो उन्होंने आपको बता दिया। कैसे दोस्त है आपके ? दो दिन से मेरा पीछा कर रहे थे।

साॅरी। इसमें इनकी कोई गलती नही।

हां, आप तो अपने दोस्तों का ही पक्ष लोगे। मेरी बात थोड़े ही सुनोगे।

अरे नही। आप गलत समझ रहे हो। सच बात तो ये कि उन दोनों की कोई गलती नही है। सारी गलती मेरी है। मैं आपसे दोस्ती करना चाह रहा था इसलिए उन दोनों से आपके बारे में पता लगाने के लिए कहा। और उन्होनंे भी केवल मेरी दोस्ती के चक्कर में केवल आपके बारे में पता लगाने के लिए पीछा किया होगा। आपके साथ कोई बदतमीजी नही की होगी।

तो आपको लगता है किसी लड़की का इस तरह आप पीछा करोगे तो वो आपको पसंद करेगी।

साॅरी। मैंने कहा ना उनकी गलती नही है। मेरी गलती है। मैं आपसे केवल दोस्ती करना चाहता था। और आपसे आपके बारे में पूछने में हिचक रहा था इसलिए दोस्तों से कहा था। पर बाद में मुझे समझ आ गया कि मैंने गलती कर दी है। इसलिए आपको सब सच सच बता दिया। अब ये आपके ऊपर है कि आप मुझसे दोस्ती करना चाहते हो या नही। - उसने अपना सर झुकाते हुए कहा |

दिशा कुछ देर चुप रही और फिर कहा - कोई भी लड़की किसी लड़के का पीछा करने से या उसके आसपास भटकने से पसंद नही करती है। और इन सब चीजों से वो परेशान होती है। पता नही तुम लड़को को किसने ये बता दिया कि ऐसा करने से लड़कियां इम्प्रेस हो जाती है ? एक लड़की को इम्प्रेस करने का सबसे अच्छा तरीका है उसकी इज्जत करो। प्यार, पैसा सब बाद की चीज है। हां कुछ लड़कियां होती होंगी जो पैसे से इम्प्रेस हो जाती होंगी। पर मैं ऐसी नही। इसलिए तुम जैसे हो वैसे ही रहो। और तुम्हे तो मैं दोस्त मान चुकी थी तभी तो फिर से तुम्हारे पास मदद मांगने आई। पर मैं किसी से दोस्ती करने में शुरू से शर्माती हूं। खास कर लड़कों से। इसलिए तुमसे ये सब कह नही सकी।

साॅरी यार, मुझे माफ कर दो। मैं आपको परेशान नही करना चाहता था। आपको जो ठीक लगे आप वो कीजिए।

हां सजा तो देनी पड़ेगी। बिना सजा के काम कैसे चलेगा ? - उसने अपना हाथ उसकी तरफ बढ़ाते हुए कहा।

ओह सच में - आदित्य के उदासी से भरे चेहरे पर अचानक से खुशी आ गई।

हां, आपकी सजा है कि अब आप आज से हमारी दोस्ती के बंधन में कैद रहेंगे। - दिशा ने मुस्कुराते हुए कहा।

ओह, ये सजा हम पूरे मन से निभायेंगे।

वैसे साॅरी मुझे भी। मैंने आपको गुस्सें में तू तुम कह कर बात की।

अरे नही यार, अच्छा लगा। तुम ही कहा करो | वैसे मुझे पता नही था आपको गुस्सा भी आता है। इतने मासूम से लगते हो।

अच्छा। हा हा हा । - दिशा ने हंसते हुए कहा।
तो फिर चलो। इस दोस्ती की शुरूआत के नाम पर कुछ खाया जाए। - आदित्य ने अपना बैग उठाते हुए कहा।

हां क्यों नही ? आज तो मैं नाश्ता करके भी नही आई। - दिशा ने कहा।

और दोनों साथ में चल दिए। कार्तिक और राकेश उन दोनों को दूर से देख रहे थे। उन्हें लग रहा था कि अभी आदित्य के थप्पड़ पडेंगे। और उसका वीडियों बनाएंगे और फिर उसे ब्लेकमेल करेंगे। क्योंकि दोस्तों में कुछ तो कमीनापन होता है।


आगे जारी . . .


पाठकों से संवाद


सभी पाठकगण से एक विनम्र निवेदन है कि अगर आपकों मेरी कोई कहानी अच्छी या बुरी जैसी भी लगती है। तो पर्सनल मैसेज करते समय उस कहानी का नाम जरूर लिखा करे।

क्योंकि पाठक पर्सनल मैसेज में लिख तो देते है कि आपकी कहानी बकवास है या बहुत अच्छी है लेकिन उस कहानी का नाम नही बताते है।

और कहानी अच्छी लगी तो क्यों ? और बुरी लगी तो क्यों ? ये भी बताने का कष्ट करें तो ज्यादा अच्छा होगा।

ताकि हम भी अपनी कहानियों में लेखन में सुधार कर सके।

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