बरसात के दिन - 7

जुलाई का महीना खत्म होने वाला था| दिशा और आदित्य की दोस्ती बहुत अच्छी हो गई थी। दोनों ने बहुत ही कम वक्त में एक दूसरे से बहुत सारी बातें की। एक दूसरे की पसंद और नापसंद को भी जान लिया था। आदित्य कॉलेज जल्दी आ जाता तो दिशा का इंतजार करता और दिशा जल्दी आ जाती तो वो आदित्य का इंतजार करती। दोनों हमेशा साथ साथ ही क्लास में बैठते थे। आदित्य कुछ सब्जेक्ट में कमजोर था। दिशा उसकी उन चैप्टर को समझाने में मदद करती थी।

कार्तिक और राकेश से भी दिशा की दोस्ती हो चुकी थी। साथ ही दिशा की दोस्त टीना भी अब आदित्य से बात करने लगी थी। राज भी कभी कभार उन सबसे बात कर लेता था। उन दोस्तों का एक ग्रुप बन चुका था, पर उसमें राज शामिल नही था क्योंकि वो उन सबसे थोड़ा अलग था और खुद को थोड़ा स्पेशल बताने की कोशिश करता था।

30 जुलाई का दिन था। उस दिन आदित्य जल्दी कॉलेज आ गया था और उदास सा गार्डन में बैठा था। दिशा भी कुछ देर बाद आ गई थी। उसने दूर से ही आदित्य का उदास चेहरा देख लिया था। वो चुपचाप उसके पीछे गई। और उसकी आंखे बंद कर दी।

उसने हाथों को छूते हुए कहा - "आरती!"

पर दिशा ने कुछ नही कहा।

"ओह तो कीर्ति हो, अरे नही पूजा, राधिका अरे नही नही टीना।"

दिशा को गुस्सा आ गया और उसने हाथ हटा कर कहा - "तुम्हारी जिंदगी में इतनी लड़कियां है तुमने कभी बताया नही और टीना तक का नाम ले लिया पर मेरा नाम नही लिया।"

"हा हा हा। मजाक कर रहा था। मुझे पता था कि तुम्हारे सिवा कोई और ऐसे काम नही कर सकता।" - आदित्य ने हंसते हुए कहा।

"अभी तो उदास दिख रहे थे अचानक से कैसे हंसने लगे और उदास किस बात से थे ये बताओ ?"

"तुमसे मिलकर बस खुशी भी साथ आ जाती है।"

"हां छोड़ो ये फिल्मी डायलॉग बताओ क्यों उदास थे?"

"अरे यार। मैंने एक बात नही बताई तुम्हे। राज कहानियां लिखता है, और एक दिन मैंने उसकी कहानियों और उसका मजाक बनाया था इसलिए उसने मुझे एक छोटी से कॉपी में कहानी लिखने का चैलेंज दिया था पर मैं उसका चैलेंज पूरा नही कर पाया। कल उसका लास्ट दिन है।"

"ओह, पर तुमने कहानी क्यों नही लिखी ?"

"वो जो कॉपी दी थी वो मेरी दीदी के बच्चों ने फाड़ दी यार। फिर कहां से लिखता ?"

"तो क्या हुआ ? ये बात उसे बता देते ना।"

"अरे यार वो समझता कि मैं बहाने बना रहा हूं।"

"तो तुम किसी और कॉपी में भी तो लिख सकते थे। कोई वही कॉपी जरूरी तो नही थी। उसे तो तुम्हारी कहानी से मतलब होना चाहिए था ना। तुमने उसकी कॉपी में लिखा या नही इससे उसे क्या मतलब होना चाहिए।"

"हां यार, ये बात तो मैंने सोचा नही। काश ये बात मेंं तुमसे पहले शेयर कर लेता तो तुम सही सलाह देती तो अब तक तो मैं कहानी पूरी कर के दे देता।"

"हां तो अभी भी देर नही हुई। तुम्हारे पास अभी पूरा एक दिन है। लिख लेना। और राज को सब बात सही सही बता देना। वो विश्वास कर लेगा। वैसे कहानी में लिखा क्या था ? मेरा मतलब कुछ लिखा भी था या पहले ही फाड़ दी बच्चों ने ?"

"लिखा तो यार, पर ठीक से याद नही।"

"याद नही, हा हा हा। बहाने देखो। कुछ तो लिखा होगा अब बताना नही चाह रहे तो मत बताओ। जरूर कुछ उल्टा पुल्टा लिखा होगा तभी नही बता रहे।"

"हां ऐसा ही कुछ समझ लो। एक बार पूरी लिख लेता हूं फिर तुम्हे जरूर बताऊँगा।"

"चलो। अच्छी बात है। अब चलो। क्लास का टाइम हो गया है और फेस पर स्माइल लाओ। राज तुम्हारा दोस्त है कोई पुलिसवाला नही जो तुम्हे जेल में डाल देगा।

"उसका बाप तो है ना।"

"अरे यार, तुम्हारा कुछ नही होगा। चलो। क्लास में।" - दिशा ने उसका हाथ पकड़ के उसे उठाते हुए कहा।

                                                                                        ******

उसी दिन आदित्य जब अपने घर पर पहुंचा तो उसकी कोमल ने उदास शक्ल लेकर दरवाजा खोला।

आदित्य ने पूछा - "क्या हुआ मेरी ग्रेट भाभी की शक्ल आज उदास कैसे ?"

"क्या बताऊँ ? यू तो नही आप जल्दी से शादी करके एक देवरानी ले आए तो मेरा काम में हाथ बंट जाए।" - कोमल ने उदास चेहरे पर मुस्कुराहट लाते हुए कहा।

"अरे भाभी! अभी तो 12वी ही पास की है। अभी से मेरा बाल विवाह करवाओगे क्या ? हा हा हा" - आदित्य ने हंसते हुए कहा।

"मेरा बस चले तो आज ही शादी करवा दूं।"

"तो इसलिए उदास हो आप ?" - आदित्य ने अपने जूते उतारते हुए कहा।

"अरे नही वो बात नही है। आज साफ सफाई के चक्कर में ज्यादा वजन उठा लिया कमर में झटका आ गया। दर्द हो रहा है।" - कोमल ने अपनी कमर पर हाथ लगाते हुए कहा।

"ओह, तो भाभी मैंने आपसे कितनी बार कहा है कि भारी चीजे उठाने के लिए मैं और भैया है ना। आप क्यों पहलवान बनते हो ? अब दर्द होने लगा ना। मलहम लगाया क्या ?"

"हां लगाया तो है। पर मुझे थोड़ा आराम करने की जरूरत है। और सॉरी आपका कमरा मैं साफ नही कर पाई। बहुत दर्द हो रहा है थोड़ा सा झुकने में ही तो आज आपको अपना कमरा खुद साफ करना पड़ेगा।"

"क्यों नही भाभी ? मैं तो हमेशा आपसे कहता हूं कि अपना कमरा मुझे ही साफ करने दिया करो। आप ही नही करने देते हो ? आप आराम करो। मैं कुछ देर में कमरा साफ करके आता हूं।"

"तब तक मैं आपके लिए चाय बनाती हूं।"

"भाभी आप आराम करो। ज्यादा दर्द होने लगा तो। चाय मैं ही बना दूंगा। आप रूम में जाओ चुपचाप। फिर दर्दनिवारक दवाई खा लेना।"

"हां , आपको किसी चीज की जरूरत हो तो आवाज दे लेना।"

"हां जरूर भाभी|" - आदित्य ने कहा और अपने रूम में चला गया।

                                                                                 *****

आदित्य को अपने रूम में आए हुए आधा घंटा हो चुका था पर उसे समझ नही आ रहा था कि वो कहां से शुरू करे ? उसने न जाने कितने सालों से कभी अपने रूम की सफाई नही की थी। वो चाहे कितनी ही गंदगी करके जाता था पर जब वापस आता था तो रूम हमेशा साफ सुथरा ही मिलता था।

कॉपी किताबें कपड़े जमाने के बाद सबसे अंत में झाडूं लगाने की बारी आई। उसने झाडू उठाकर सबसे पहले पलंग के नीचे से कचरा निकालने की सोचा। पर उसकी झाडू के बीच में कुछ अड़ गया। उसने झुककर देखा। पर उसे नजर नही आया।

पलंग और दीवार के बीच थोड़ी से जगह थी वो चीज वहीं फंसी हुई थी। उसकी भाभी का हाथ शायद वहां तक नही पहुंच पाया होगा इसलिए वो उसे निकाल नही पाई होंगी।

उसने एक लम्बा हाथ किया ओर झाडू से धक्का दे दे कर उसे बाहर की तरफ निकाला। और पलंग के नीचे से जब वो चीज बाहर आई तो उसके होश उड़ गए। ये तो उसकी जादुई कॉपी थी।

उसको तो विश्वास नही हुआ। जल्दी से उसने वो कॉपी उठाई। राज की दी हुई वो जादुई कॉपी ही थी। उसकी कहानियों के पन्ने कुछ फटे हुए थे। और बीच में से भी कुछ पन्ने फटे हुए थे। पर बाकी कॉपी में बहुत से पेज बाकी थे। उसकी खुशी का ठिकाना नही था। घर की साफ सफाई करने का उसे तोहफा मिलेगा उसने सोचा नही था। वो जोर जोर से खुश होकर चिल्लाने लगा - "वाह मजा आ गया।"

पर फिर अचानक से उसके दिमाग में ये बात आई कि उसने उस दिन ये क्यों नही सोचा कि उसकी कॉपी के पन्ने तो वहां है पर कॉपी का कवर कहां है ? वो तो कचरे में निकला नही था। इंसान जब गुस्से में या दुख में होता है तो इसी तरह उसके सोचने की क्षमता कम हो जाती है। शायद इसलिए उसने उस दिन दुखी होने के बाद इस बात पर ध्यान नही दिया था।

मोदी जी सही कहते है स्वच्छता के बहुत सारे लाभ होते है मुझे तो सच में बहुत बड़ा लाभ हुआ। और सबसे ज्यादा थैंक्स तो मेरी ग्रेट भाभी को। उन्होंने ही मुझ रूम साफ करने की कहा। - आदित्य मन में सोच सोच कर खुश होने लगा।

"भैया, आपके लिए चाय बना दी है। आ जाइए।" - कोमल ने आवाज लगाते हुए कहा।

"ओह। मैं तो भूल ही गया। रूम साफ करके भाभी और खुद के लिए चाय बनाना था। और मैंने रूम भी साफ नही किया।" - आदित्य ने खुद से कहा।

"भाभी। आता हूं। एक मिनट।" - आदित्य ने जल्दी से उस कॉपी को अपनी दराज में रखा और उसको लॉक कर दिया। और चाय पीने हॉल में आ गया। आज वो बहुत खुश था पर इस खुश था पर इस खुशी को किसी के साथ शेयर नही कर सकता था।

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रात को एक बार फिर वो उस जादुई कॉपी को अपने हाथों में लेकर देखने लगा। वो कहीं सपना तो नही देख रहा है ? ये कॉपी सच में उसे मिल गई है। ऐसी कॉपी जिसमें जो कुछ भी लिखो वो सच हो जाता है ?अब आगे इसमें क्या लिखूं ? दिशा अब तो मेरी बहुत अच्छी दोस्त बन चुकी है। और ये दोस्ती ही आगे जाकर प्यार बन जाएगी। तो अब उसके बारे में लिखना सही रहेगा क्या ?

आगे जारी . . .

आगे क्या हुआ ? आदित्य ने कॉपी में क्या लिखा ? और क्या वो सच हुआ ?

कहानी के अगले भाग की नोटिफिकेशन के लिए मुझे फॉलो करना ने भूलें।

मेरी पुरानी हवेली का राज, लव इन कॉलेज उपन्यास और ईश्वर तू महान है, छोटी लड़की की सीख, कसक प्यार की, बाबू कहानियां भी अगर आपने अभी तक पढ़ी नही है तो मेरी प्रोफाइल पर जाकर जरूर पढ़े।प्रकाशित करें

आपके अमूल्य सुझावों का इंतजार रहेगा।

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