बरसात के दिन - 8

उसी समय बरसात शुरू हो गई। उसने अपने रूम की खिड़की खोल दी। ठंडी ठंडी बरसात की फुहारे उसके कमरे में आने लगी। उसी समय वहां से साइकिल पर एक आदमी रेनकोट में मोबाइल पर एफएम में गाने सुनता जा रहा था। और उस समय एफएम पर जो गाना बज रहा था उसने आदित्य को आगे की कहानी लिखने का आयडिया दे दिया।

गाने के बोल थे -

 बादल यूं गरजता है

 डर कुछ ऐसा लगता है . . .

वो जल्दी से बैठा। कुछ देर तक दिमाग में बहुत कुछ सोचा और फिर कहानी लिखना शुरू किया।

लड़की का नाम दिशा था। और कॉलेज के कुछ ही दिनों में मेरी उससे अच्छी दोस्ती हो चुकी थी। मैं तो उसे शुरू से ही पसंद करता था पर वो भी मुझे पसंद करने लगी थी। एक दिन कॉलेज में हम भूगोल की कक्षा में अपने सर का इंतजार कर रहे थे। पर शायद वो उस दिन नही आए थे। भूगोल की क्लास कॉलेज के सबसे अंतिम छोर पर लगती थी। उस दिन इत्तफाक से कोई और स्टूडेंट भी नही आया था। हम दोनों ही क्लास में बैठे थे। और एक दूसरे से बातें कर रहे थे। बातें करते करते कब समय निकल गया पता ही नही चला। अचानक सब तरफ अंधेरा छाने लगा। मैंने बाहर निकल कर देखा। सारा कॉलेज सुनसान पड़ा हुआ था। ना कोई सर था और ना कोई स्टूडेंट। मैंने मोबाइल में टाइम देखा। कॉलेज के बंद होने का टाइम हो गया था। बातों के बीच हम दोनों को पता ही नही चला।

दिशा भी बाहर आ गई। और बादलों का अंधेरा देखकर उसने कहा - "आदित्य लगता है बहुत तेज बरसात आने वाली है। हमें घर के लिए निकलना चाहिए।"

"हां सही कह रही हो। जल्दी से पहले मोबाइल पॉलीथीन में रख लो। और चलो।"

दिशा ने ऐसा ही किया और दोनो जल्दी से चलने लगे।

"ये पूरा कॉलेज सुनसान कैसे हो गया ? "- दिशा ने जल्दी जल्दी चलते हुए कहा।

"टाइम देखा है तुमने क्या हुआ ? ओर टीचर्स को तो वैसे ही घर भागने की जल्दी रहती है और स्टूडेंट आए नही।"

दोनों तेजी से चले जा रहे थे पर अचानक बीच में ही बहुत तेज बरसात शुरू हो गई। आज दोनों ही अपनी छतरी भी घर पर भूल गए थे क्योंकि उनके कॉलेज आने के समय पर धूप निकल आई थी।

दोनो जल्दी से भागते हुए एक कमरे की दीवार के सहारे खड़े हो गए। बहुत जोर जोर से बादल गरजने लगे और तेज हवाओं के साथ बरसात होने लगी। दोनों कॉलेज की ऐसी जगह पर खड़े थे जहां साधारण दिनों में भी कोई आता जाता नही था।

दिशा मेरे पास चिपक कर खड़ी थी। मेरा सारा ध्यान उस पर था और उसका बरसात पर।

अचानक जोरदार गड़गड़ाहट के साथ बिजली चमकी। दिशा ने डर की वजह से कसकर मुझे पकड़ लिया। और मेरे सीने से चिपक गई। उसकी गर्म सांसो को मैं अपने शरीर पर महसूस कर सकता था। साथ ही उसके बदन की कोमलता को मैं महसूस कर रहा था। उसके गीले बालों से एक अलग ही सुगंध मुझे आ रही थी।

एक जवां दिल में प्यार और उससे जुड़े अनेक अरमान होते हैं। उस समय मेरे मन में भी इसी तरह के अरमान जागने लगे थे। जिस्म उस समय चाहता था कि इस जिस्म को अपना बना लूं। इसलिए मैंने भी उसको कमर से कसकर पकड़ लिया उसने सिर उठा कर मेरी तरफ देखा। मैने उसकी आंखो में देखा। उसने मेरी आंखों में देखा। वो शायद मेरी आंखों की भाषा समझ चुकी थी। उसने अपना दुपट्टा मेरे और उसके सिर पर डाल दिया। दोनों की आंखे बंद थी और फिर उसने अपने होंठ मेरे होंठो पर रख दिए।

उस पल को सोचकर  आदित्य को एक अलग ही आनंद आने लगा। पर वो फिर वहीं रूक गया क्या उसने जो लिखा है वो सही है ? क्या दिशा के प्यार को इस तरह पाना सही होगा। बिना कॉपी के भी तो उसने दिशा से दोस्ती कर ही ली। तो फिर इस रोमांस के लिए कॉपी की जरूरत क्यों ?

लेकिन फिर उसके दूसरे मन ने कहा अरे यार। इस रोमांस का इंतजार करेगा तो न जाने कितना समय निकल जाएगा? अब जो लिख दिया है। लिखा ही रहने दे। और ये भी पता लग जाएगा कि कॉपी के पेज फटने के बाद कॉपी में लिखा सब सच हो रहा है या नही ?

आदित्य ने फिर आगे लिखना शुरू किया।

हम दोनों एक दूसरे में खो चुके थे। बरसात और जोर जोर से बरसने लगी थी। मन तो चाहता था कि बस अब उसको कभी न छोडूं। पर ये मुमकिन न था। बरसात का पानी अचानक से हमारे पैरो में आया तो हम दोनों ही अचानक से चौंक गए और अलग हो गए।

“आज तो पानी बहुत देर तक बरस गया। लगता है धरती की सारी प्यास बुझा कर ही बंद होगी बरसात“ - उसने मेरी आंखो में देखते हुए कहा।

“हां, इतने दिनों की प्यास थी। और वो प्यास आज सच में बुझ गई।“ - मैंने कहा।

“प्यास बुझ गई। सच में ?“ - उसने कहा।

“नही, अब तो प्यास जागी है। इतने से क्या होता है ? असली प्यास तो अभी बुझी ही नही है ?“

“इस बारे में अभी तक सोचा नही है ? आज शायद इस मौसम की वजह से . . “

“बस अब कुछ मत कहो। चाहे झूठ हो या सच हो। मुझे इस अहसास के साथ ही रहने दो।“

“मुझे तो आज घर जाना था। अब क्या करें ?“ -उसने बात को समझते हुए दूसरी बात पूछ ली।

“क्या करेंगे ? इंतजार के अलावा“ - मैंने कहा।

आदित्य का दिमाग अब बहुत तेज गति से दौड़ने लगा था और वो लगातार कहानी को आगे बढ़ाता जा रहा था लेकिन उसी समय बिजली चली गई। आदित्य को बहुत गुस्सा आया। उसने जल्दी मोबाइल उठाया। देखा उसकी की भी बैटरी अपनी आखिरी सांसे गिन रही थी।

“तो अब कल ही लिखना हो पाएगा“ - उसने खुद से कहा।

उसने कुछ देर तक बिजली आने का इंतजार किया। उसे नींद भी आने लगी थी। बरसात की वजह से वातावरण में ठंडक थी। और खिड़की से आती ठंडी हवाओं ने उसकी पलकों को भारी कर दिया। उसका मन था कि वो आज ही बहुत कुछ लिख दे। पर अंत में मन मसोस कर सो गया।

’’’’’
अगले दिन 31 जुलाई थी। राज की दी हुई समय सीमा समाप्त तो बहुत पहले हो गई थी। पर राज ने उसे पहली बार कहानी लिखने की वजह से उसे एक महीने से ज्यादा का समय दे दिया था। और आज राज से किए वादे के अनुसार आदित्य को कहानी लिखकर वो कॉपी वापस लौटाना थी।

कॉलेज में राज उसी का इंतजार कर रहा था। उसने आते ही आदित्य से कहा - “आइए। लेखक महोदय। बताइए। कहां है आपकी लिखी हुई कहानी है? हम कब से आपका इंतजार कर रहे थे।“

राज बहुत ही सम्मान से आदित्य से बोल रहा था पर उसे पता था कि ये सब बस वो उसका मजाक बनाने के लिए कर रहा है।

पर आदित्य अब वो कॉपी दुनिया की सारी दौलत लुटाने के बाद भी नही देना चाहता था।

राज ने कहा - “चुपचाप क्यों खड़ा है ? कहां है वो कॉपी जो मैंने तुझे दी थी। और कहानी लिखी या नही ?“

“नही।“ - आदित्य ने बस एक शब्द कहा और चुपचाप खड़ा हो गया।

उसे पता था कि अब उसका बहुत ज्यादा मजाक बनने वाला है। क्योंकि उसने कॉपी लेते समय बहुत बहुत ऊँची ऊँची बातें की थी।

राज के और आदित्य के सभी दोस्त उस समय वहां खड़े थे। और सब की निगाहें राज और आदित्य पर ही थी।

“कुछ बोलेगा भी या चुपचाप खड़ा रहेगा ?“ - राज ने कहा।

“वो कॉपी मेरी दीदी के बच्चों ने फाड़ दी। मैंने कोशिश की थी लिखने की पर लिख नही पाया।“ - आदित्य ने कहा।

हालांकि राज अपने स्वभाव में उसके पिता के पद की हेकड़ी नही दिखाता था पर सब उससे अधिकतर सोच समझ कर ही बात करते थे। आदित्य और राज वैसे तो दोस्त थे पर स्कूल के दिनों से ही वो एक दूसरे से कॉम्पिटिशन करते आते थे। कभी राज जीत जाता था और कभी आदित्य।

जब कॉलेज में राज, आदित्य और बाकी सब लड़के इस हंसी मजाक में लगे थे। उसी समय दिशा वहां से गुजर रही थी। आदित्य ने राज से कहा कि सॉरी यार अब माफ कर दे। और बात यहीं खत्म कर।

राज ने भी दिशा को देख लिया था। इसलिए अब राज भी खुद को बेस्ट साबित करने में लगा था। दिशा भी उनकी बातें सुनने के लिए उनसे दूर खड़ी हो गई। उसके साथ टीना भी थी।

वैसे तो राज हमेशा सबकों हंसाने के लिए आदित्य का मजाक बनाता था लेकिन इस बार दिशा के आ जाने से और उसे इम्प्रेस करने के लिए उसने जान बूझकर आदित्य के मजाक के साथ साथ उसकी बेइज्जती करना भी शुरू कर दिया।

आदित्य ने उसे कहा कि अब बहुत हो गया। बात खत्म करते है। तब राज ने इस बात पर इस बात पर राज ने सब दोस्तों के सामने उसका बहुत मजाक बनाया। कार्तिक और राकेश को गुस्सा आ रहा था। पर आदित्य ने उन्हें इशारे से मनाकर दिया। क्योंकि वो नही चाहता था कि हंसी मजाक की बात लड़ाई में बदल जाए। और वैसै भी उसे पता था कि गलती उसी की हैं। और इसमें वो कार्तिक और राकेश को नही लाना चाहता था।

लेकिन उस दिन राज ने कुछ ज्यादा बोल दिया। उसने आदित्य  को लूजर और बहानेबाज, झूठा, मक्कार बहुत कुछ सुनाया। पर राज चुप रहा क्योंकि राज शहर के एसआई का बेटा था। इसलिए सभी उससे डर कर रहते थे। और उसकी बातों का विरोध नही करते थे।

और जब राज का मन भर गया तो उसने कहा कि वो कॉपी 100 रूपये की थी इसलिए अभी जा और कैंटीन से 150 का नाश्ता लेकर आ। क्योंकि 50 रूपये तेरे कहानी न लिख पाने का चार्ज लगेगा।

आदित्य को गुस्सा बहुत ज्यादा आ रहा था पर वो चुपचाप मुट्ठी बांध कर खड़ा हुआ था। उसे खुद पर बहुत गुस्सा आ रहा था। कॉपी को खुद के पास रखने के लिए उसे ये सब सहन करना पड़ेगा। उसने सोचा नही था।

पर उसने खुद को समझाया। राज और बाकी दोस्तों के लिए कैंटीन में ले जाकर नाश्ता करवाया। दिशा भी उस समय कैंटीन में थी। उसे भी आदित्य ने नाश्ता ऑफर किया पर उसने मना कर दिया। वो आदित्य के जवाब न देने की वजह से गुस्सा थी। 


आदित्य ने भी इस बात को भांप लिया था। पर उसने सब दोस्तों के सामने चुप रहना ही सही समझा। क्योंकि उसके पास जादुई कॉपी थी जिसमें लिखकर वो सब कुछ सही कर सकता था।

’’’’’’
दिन के 1 बज चुके थे। और भूगोल की क्लास शुरू हो चुकी थी। आदित्य ने आसमान में देखा आज दूर दूर तक कहीं कोई बादल नजर नही आ रहे थे। भूगोल की क्लास में भी बच्चे आना शुरू हो चुके थे। और उसे सामने से भूगोल के सर भी आते हुए दिख गए।

आदित्य सोचने लगा कि ऐसा कैसे हो सकता है उसने तो कॉपी में ऐसा कुछ नही लिखा था। अभी तक तो उसने जो कुछ भी लिख वो सब वैसा का वैसा ही हुआ। इस बार क्यों नही हुआ ?

क्या आज उस कॉपी में लिखा हुआ सच नही होने वाला था। और क्या पहले जो कुछ भी हुआ वो सब एक इत्तफाक था। पर इतना सबकुछ इत्तफाक। आखिर सच क्या है ?

आगे जारी . . .

आपके अनुसार सच क्या है ? कॉपी जादुई है या नही ? आदित्य ने जो लिखा वो सच क्यों नही हुआ ?

कमेंट कर के जरूर बताएं। कहानी के अगले भाग की नोटिफिकेशन के लिए मुझे फॉलो करना ने भूलें।

मेरी पुरानी हवेली का राज, लव इन कॉलेज उपन्यास और ईश्वर तू महान है, छोटी लड़की की सीख, कसक प्यार की, बाबू कहानियां भी अगर आपने अभी तक पढ़ी नही है तो मेरी प्रोफाइल पर जाकर जरूर पढ़े।

आपके अमूल्य सुझावों का इंतजार रहेगा।

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