बरसात के दिन - 9

आदित्य इसी कश्मकश में था कि तभी दिशा ने उसके कंधे पर हाथ रखा। उसने पलट कर देखा।

"क्या हुआ तुम टेंशन में दिखाई दे रहे हो ? सब ठीक तो है ? वैसे एक बात कहूं आज सुबह राज ने तुम्हारे साथ जो कुछ भी किया ना वो मुझे बहुत गलत लगा। तुमने उसकी बातों का जवाब क्यों नही दिया ?" - दिशा ने पूछा।

"गुस्सा तो मुझे भी बहुत ज्यादा आ रहा है। पर सब बाद में बताऊँगा ?" - आदित्य ने कहा।

"तो चलो फिर क्लास में, सर आ चुके है ?"

"हां चलो।" - आदित्य ने अपनी गर्दन हां में हिलाते हुए कहा।

पर अचानक आदित्य रूक गया। और कहा - "यार तुम जाओ। आज मेरा दिमाग खराब हो रहा है।"

"यार। जब राज तुम्हारे सामने था तब तुम चुपचाप रहे और अब अकेले में गुस्सा करने से क्या होगा ? चलो। ज्यादा मत सोचो। दिमाग को कहीं और लगाओ।" - दिशा ने कहा।

"हां, ठीक है चलो।" - आदित्य उसके साथ क्लास में चला गया।

भूगोल के सर क्लास में आ चुके थे। पर आदित्य का सारा ध्यान राज के द्वारा की हुई बेइज्जती पर था। वो कैसे भी कर के उससे उसका बदला लेना चाहता था। उसने मन में सोचा कि आज जाते ही कॉपी में राज के बारे में कुछ ऐसा लिखूंगा कि जिससे वो बहुत बुरा फंस जाए या उसकी बहुत ज्यादा बेइज्जती हो। तब उसे पता लगेगा कि उसने आखिर किससे पंगा लिया है ? उसकी दी हुई कॉपी को उसके ही खिलाफ इस्तेमाल करूंगा। पर कॉपी में जो लिखा है वो आज सच क्यों नही हुआ ? शायद उसके पेज फट गए है। और उन बीच के पेजों की वजह से नही हुआ हो। अगर उसमें आज की तारीख लिखकर लिखता तो शायद हो जाता। पिछली बार जब मैंने कहानी लिखी थी तो उसमें समय जरूर बताया था । मतलब कॉलेज का पहला दिन। अगला दिन। और कल जो मैंने लिखा उसमें ऐसा कुछ नही था। शायद इसीलिए सही नही हुआ। आज जाते ही लिख दूंगा। और फिर उसने जो कल कॉपी में लिखा था उसके बारे में सोच सोच कर ही खुश होने लगा। और आंखे बंद कर के सोचने लगा।

तभी दिशा ने उसके कोहनी मारी। और उसकी आंखे खुल गई।

"मेरे पास क्या सोने के लिए बैठे हो ? अभी सर की नजर तुम पर पड़ने वाली थी। चुपचाप आंखे खोलकर पढ़ो।" - दिशा ने कहा।

"हां, यार। नींद आ रही है आज के लेक्चर में। पर तुम कहती हो तो सुन लेते है। क्या समझा रहे है वैसे ?"

"सामने देखो और सुनो सर की बात| सब समझ आ जाएगा।" - दिशा ने कहा।

"हम्म।" - आदित्य ने सर की नजरों से बचते हुए बहुत उबासी लेते हुए बड़ा सा मुंह फाड़ा। लेकिन सर की नजर पड़ते ही जल्दी से मुंह बंद कर लिया। और ऐसे देखने लगा जैसे उसे सर की बातों में सच में बहुत आनंद आ रहा हो।

*******

क्लास पूरी हो चुकी थी। आसमान में बादल छाने लगे थे। ये देखकर आदित्य खुश हो गया। आदित्य दिशा बाहर निकले तो कार्तिक और राकेश जल्दी से आदित्य के पास दौड़ते हुए आए। और उसे अकेले में आने के लिए कहा। आदित्य ने दिशा से कहा कि मैं अभी कार्तिक से बात करके आता हूं। तुम तब तक चलो। और उन दोनों के पास चला गया।

आदित्य ने कहा - "आज फिर क्लास बंक कर ली। कहां घूम रहे थे ?"

"अरे वो सब छोड़ यार। ये बता तेरा मोबाइल कैसे स्विच ऑफ आ रहा है ?" - राकेश ने कहा।

"मोबाइल तो चालू ही है यार, केवल साइलेंट मोड पर है।" - उसने अपनी बेग में से मोबाइल निकालते हुए कहा।

मोबाइल स्विच ऑफ ही था।

"मैंने कहा था ना, कब से कॉल लगा रहे है तुझे ? आज तो तू गया| तेरा दिन ही खराब है आज तो " - कार्तिक ने कहा।

"पर हुआ क्या कमीनों ये बताओं ? क्यों मेरे दिल की धड़कन बढ़ाए जा रहे हो।" - आदित्य ने परेशान होते हुए कहा।

"कुछ देर पहले मैं राकेश, राज और हम बाकी सब गार्डन में बैठे थे। अचानक राज के दिमाग में न जाने कहां से ये बात आई कि तू झूठ बोल रहा है। और एक बार तेरे घर पर जा कर चेक करना चाहिए सच में वो कॉपी फाड़ दी है या नही।" - कार्तिक ने कहा।

"उसके दिमाग में ये बात कैसे आई ? और फिर आगे क्या हुआ ?" - आदित्य का दिल जोर से धड़कने लगा था।

"बात कैसे दिमाग में आई ? पता नही। पर आगे क्या होगा ? वो चला गया।" - कार्तिक ने कहा।

"चला गया मतलब ?"

"अरे तेरे घर गया है यार ? बोल रहा था एक बार कन्फर्म करना चाहता है कि वो कॉपी सच में फट गई है या तू बहाने बना रहा है।" - कार्तिक ने कहा|

"मेरे तो ये समझ नही आ रहा कि क्या कॉपी उसके लिए इतनी जरूरी थी ? मुझे तो लगता है आज कॉलेज में जो कुछ हुआ उसी की चुगली करने गया है। कॉपी का बहाना करके।" - राकेश ने कहा।

"ओह नो। कितनी देर हुई है उसे ?" - आदित्य को लग रहा था उसका कलेजा निकल कर हाथ में आ जाएगा।

"भाई एक घंटे से ज्यादा हो गया ? अब तो वो आने भी वाला होगा कॉलेज में।"

"हमने रोकने की कोशिश की। बोला कि अभी वो घर पर नही है, उसके भैया या भाभी होंगे तो उसने कहा कि कोई बात नही। तेरे भैया भाभी उसे स्कूल टाइम से जानते है। और वो बस अपनी कॉपी लेना चाहता है।"

आदित्य के पैरो तले जमीन खिसक चुकी थी। उसने क्या क्या सोचा था ? और क्या हो गया ? उस कॉपी के चक्कर में ही उसने राज की हर बात और बेइज्जती को चुपचाप सहन कर लिया था। उसे समझ नही आ रहा था कि अब वो क्या करे ? उसके हाथ पैर कांपने लगे थे। उसके अरमानों की दुनिया आज तबाह होने वाली थी।

आज तो मैंने वैसे भी कॉपी को टेबल की दराज में रखा था। भाभी टेबल के बाद अगर कहीं देखेगी तो सबसे पहले दराज में ही देखेगी या हो सकता है कि राज को मेरे रूम घुसकर देख लेने की कह दे। क्योंकि स्कूल टाइम में कहीं बार राज मेरी कॉपी मेरे घर से लेकर आता था | उसके पास उस टाइम भी बाइक थी। अगर भाभी ने वो कॉपी और उसमें लिखी बातें पढ़ ली तो मैं क्या मुंह दिखाऊँगा ? भाभी ऐसे तो बहुत सपोर्ट करती है पर भैया से कोई बात नही छिपाती है। वो तो भैया को पक्का बता देंगी। ओ नो यार। अब मैं क्या करू?

और उसके वो लास्ट वाली लाइन। उसमें तो मैंने दिशा का नाम भी लिखा है। राज ने पढ़ लिया तो। वो तो बिना देर किए दिशा को बता देगा। नही नही। अब मैं क्या करूं ? घर के लिए निकला और पीछे से वो कॉलेज में आ गया तो फिर ? उसे कॉल करता हूं। - आदित्य को लग रहा था कि सोच सोच कर उसका दिमाग फट जाएगा।

वो हारे हुए योद्धा की तरह दीवार का सहारा लेकर खड़ा हो गया। कार्तिक से कहा - "कार्तिक उसे कॉल लगा और उससे पूछ कहां है वो ?"

"हां भाई ?" - कार्तिक ने कहा और राज को कॉल किया। पर राज ने उसका कॉल नही उठाया।

"नही उठा रहा यार ?" - कार्तिक ने कहा।

"तो मेसैज कर उसे कि कहां है वो ? आदित्य को बात करनी है तुझसे बहुत जरूरी।" - आदित्य ने कहा।

"हां!" - आदित्य ने कहा और मैसेज टाइप करके भेज दिया।

कुछ ही देर में रिप्लाई आया। - "आदित्य से बोल देना। मैं कॉलेज में आ गया हूं। मिल कर बात करते है।"

अचानक आदित्य को ध्यान आया कि दिशा भी कॉलेज के मेन गेट पर गई है। और राज भी वहीं से आ रहा होगा ?
उसी समय बूंदाबांदी होने लगी|सब छुपने के लिए इधर उधर चले गये पर आदित्य का ध्यान उस बरसात पर नहीं था|

"नही नही। मैं ऐसा नही होने दूंगा।" - कहते हुए आदित्य कॉलेज के मेन गेट की तरफ भागा।

कार्तिक और राकेश को समझ नही आया कि आदित्य को अचानक ये क्या हो गया ?

अचानक बरसात तेज़ शुरू हो गयी क्यूंकि ये दिन बरसात के दिन थे |


आगे जारी . . .


आगे क्या हुआ ? क्या राज़ ने आदित्य के सारे राज़ खोल दिए ? क्या आदित्य के सपनों की दुनिया सच में तबाह हो गयी | आगे क्या हुआ होगा ?

ये भाग कैसा लगा कमेन्ट कर के जरुर बताएं|

कहानी के अगले भाग की नोटिफिकेशन के लिए मुझे फॉलो करना ना भूलें।

मेरी पुरानी हवेली का राज, लव इन कॉलेज उपन्यास और ईश्वर तू महान है, छोटी लड़की की सीख, कसक प्यार की, बाबू कहानियां भी अगर आपने अभी तक पढ़ी नही है तो मेरी प्रोफाइल पर जाकर जरूर पढ़े।

आपके अमूल्य सुझावों का इंतजार रहेगा।

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