बरसात के दिन - 10

बरसात बहुत तेज हो चुकी थी। आदित्य कुछ ही सेकिंड में पूरा गीला हो गया। पर उसे इस सब की कोई फिक्र नही थी। उसका ध्यान केवल दिशा को ढूंढने में था। लेकिन वो उसको कहीं नही मिल रही थी।

वो काॅलेज के मेन गेट पर आ चुका था पर ना उसे राज नजर आया और ना ही उसे दिशा कहीं दिखाई दे रही थी। बरसात भी थमने का नाम नही ले रही थी। काॅलेज के स्टूडेंट बरसात में भीगते आदित्य को घूर घूर कर देख रहे थे। आदित्य को भी अचानक लगा कि वो पूरा भीग चुका है। उसे जूते भी पानी जाने से भीग चुके है। उसने इधर उधर देखा। और एक पेड़ के नीचे बैठ गया। और अपने जूते खोल दिए।

‘‘आज तो मेरा दिन ही खराब निकला। सुबह से ही न जाने क्या क्या हो गया ?’’ - आदित्य खुद से बातें करने में लगा था। तभी उसकी नजर दिशा पर पड़ी वो दूर एक काॅलेज की दीवार के सहारे खड़ी थी। और पास में ही राज खड़ा हुआ था। दोनों ठीक उसी तरह खड़े थे जैसे उसने अपनी कहानी में लिखा था।

‘‘ओह नो। क्या काॅपी राज के ही पास है। और दिशा राज के साथ क्या कर रही है ? और अगर काॅपी उसके पास है तो कहीं ऐसा तो नही कि काॅपी जिसके पास चली जाती है उसी के साथ वह होता है जो उस काॅपी में लिखा है। कितने सवाल है मन में और उनका उत्तर देने वाला कोई नही हैै। मुझ वक्त न गंवाते हुए उनके पास जाना चाहिए। क्या पता कल जो लिखा था वो राज के साथ हो जाए।’ ’- आदित्य सोचने लगा और बिना जूते पहने ही राज और दिशा की तरफ जाने लगा।

तभी अचानक जोर की बिजली चमकी। दिशा राज के गले लग गई। आदित्य उसी पल जल्दी से उस तरफ भागा। वो नही चाहता था कि जो कल लिखा वो सब राज के साथ हो। आदित्य ने दूर से देखा। राज के हाथ में वही काॅपी थी। दिशा आदित्य को देखते ही उससे दूर हो गई। आदित्य को पूरा भीगा हुआ देखकर राज और दिशा को कुछ समझ नही आया।

आदित्य ने कहा - ‘‘दिशा मुझे तुमसे कुछ बात करना है।’’

दिशा राज से दूर खड़ी हो गई और कहा - ‘‘मुझे तुमसे बात नही करना है। 
क्या हुआ दिशा तुम ऐसी बातें कैसे कर रही हो ?’’

‘‘इतने भोेले भी मत बनो। आदित्य। तुमने मेरे बारे में ऐसा सोचते हो मैंने कभी सोचा नही था। मैं तुम्हे केवल एक अच्छा दोस्त समझती थी और तुम, तुम भी उन अवारा आशिक लड़को की तरह ही निकले।’’ - दिशा ने आदित्य को गुस्से से देखते हुए कहा।

‘‘तुम गलत समझ रही हो। दिशा . . .’’

‘‘गलत नही। अब मैं तुम्हे सच समझ रही हूं। मुझे तो उसी दिन समझ जाना चाहिए था। जिस दिन तुमने मेरा पीछा करवाने के लिए मेरे पीछे कार्तिक और राकेश को भिजवाया था।’’ - आदित्य ने दिशा के पास आते हुए कहा।

उसी वक्त कार्तिक राकेश और टीना भी वहां आ चुके थे। पर उन्हें कुछ समझ नही आ रहा था कि आखिर हो क्या रहा है ? बरसात थम नही रही थी। और कार्तिक अपने साथ छाता लाया था। उसने आदित्य को छाते के अंदर आने का इशारा किया पर उसने मना कर दिया।

‘‘क्या हुआ है दिशा ? तुम दोनों के बीच कुछ बात हो गई है क्या ?’’ - टीना ने पूछा।

‘‘कुछ नही। टीना तू शुरूआत में मुझसे सही कहती थी कि आदित्य जैसा दिखता है वैसा है नही ? पर मैं तेरी बात नही मानती थी।’’

‘‘ये सब क्या बोल रही है यार। उस वक्त हम सब एक दूसरे को अच्छे से जानते नही थे। इसलिए कह दिया था। पर अब तो हम सब अच्छे दोस्त है ना यार।’’- टीना ने आदित्य, राकेश और कार्तिक की तरफ देखते हुए कहा।

‘‘नही। तुझे पता है ये इंसान जिसे मैं अपना इतना अच्छा दोस्त मानती हूं। इसने मेरा नाम लिखकर क्या क्या लिखा है ? मतलब मैं इसे अपना इतना अच्छा दोस्त मानती हूूं और ये मेरे बारे में ऐसा।’’ - दिशा ने कहा।

टीना ने कहा - ‘‘अरे यार ये बात करने की जगह नही है। किसी रूम में चल कर बात करते है। देख नही रही बरसात कितनी तेज हो रही है।’’

राकेश ने कहा - ‘‘हां दिशा। टीना एकदम ठीक कह रही है।’’

‘‘तुम तीनों तो अब बस चुप ही रहो। मुझे अब तुममें से किसी से बात नही करना है।’’

‘‘पर दिशा इन दोनों ने क्या कर दिया यार। तू भी ना आज कुछ ज्यादा ही ओवर रिएक्ट कर रही है।’’

‘‘तू मेरी जगह होती तो तू भी ऐसा ही करती।’’

‘‘पर यार ये कोई जगह नही चल वो सामने वाले रूम में चलते है। वहां अब कोई क्लास भी नही लगेगी।’’ - टीना ने हाथ से इशारा करते हुए कहा।

आदित्य चुपचाप बरसात में खड़ा भीग रहा था। उसकी आंखों में नमी आ चुकी थी पर उसे कोई नही देख पाया। बरसात की बूंदों के साथ उसकी आंखों नमी मिल चुकी थी। वो समझ चुका था कि अब कुछ नही होने वाला है। वो चुपचाप राज को घूरे जा रहा था। राज ने भी उसकी आंखो में अपने लिए गुस्सा देख लिया था।

दिशा, टीना राकेश कार्तिक जब रूम की तरफ जाने लगे तो राज ने उसके पास आ कर कहा - ‘‘तू आज गया काम से आदित्य। और ये आंखों से घूर कर तू मेरा कुछ नही बिगाड़ सकता।’’

आदित्य बरसात में भीगता भीगता ही कमरे तक गया। सभी आ चुके थे। आदित्य पूरा गीला हो चुका था। और उसे हवाएं चलने से ठंड भी लग रही थी।

कार्तिक ने कहा - ‘‘टीना मुझे लगता है अभी आदित्य और हमें घर जाना चाहिए। क्योंकि आदित्य पूरा भीग चुका है। और इसे बरसात के पानी से अक्सर बुखार आ जाता है। कभी भी नही भीगता है ये बरसात में।’’

‘‘नहीं। मैं ठीक हूं। बच्चा नही हूं। कुछ नही होगा मुझे।’’ - आदित्य ने कहा। और तभी एक जोरदार छींक उसे आई।

‘‘हां, हम देख ही रहे हे। कार्तिक सही कह रहा है। आदित्य तुम्हे अभी घर जाना चाहिए। देखो तबीयत बिगड़ जाएगी ज्यादा देर गीले रहे तो। और बरसात भी रूकने का नाम नही ले रही है।’’ - टीना ने कहा।

‘‘पर दिशा से मुझे कुछ बात करना है।’’

‘‘दिशा कहीं भाग कर नही जा रही है यार। काॅलेज में ही रहेगी। कल बात कर लेना। और दोस्तों में गलतफहमियां हो जाती है। सब ठीक हो जाएगा। अभी चल यार।’’ - राकेश ने कहा।

‘‘हां और तेरे शूज कहां है ?’’ - कार्तिक ने कहा।

‘‘पेड़ के पास’’ - आदित्य ने धीरे से कहा।

आदित्य लगातार दिशा को देखे जा रहा था लेकिन दिशा उसे नही देख रही थी। राज अभी भी दिशा की तरफ ही खड़ा था।

आदित्य आज अपने आप को बहुत बेबस महसूस कर रहा था। अचानक से उसे काॅपी का ध्यान आया। काश वो काॅपी उसके पास होती तो वो सब कुछ ठीक कर देता। पर अब वो उससे काॅपी नही मांग सकता था।

अचानक से फिर से बिजली चमकी और जोरदार बादल गरजे। एक मिनट के लिए सब सहम गए। आज सच में बहुत तेज बरसात हो रही थी।

सब चुपचाप थे। अचानक से आदित्य ने कहा - ‘‘तेरे शूज क्या बरसात में नाव बनाकर कर बहाएगा। चल छाता लेकर और तेरे शूज लेकर आते है।’’

‘‘हां ’’- आदित्य ने कहा। उसका पहले ही बहुत नुकसान हो चुका था वो जूतों का नुकसान नही उठाना चाहता था। पिछले महीने तो उसने आॅनलाइन आॅर्डर किए थे। कार्तिक और आदित्य क्लासरूम से बाहर आए।

आदित्य के दिमाग में विचारों का तूफान उठ रहा था। ये क्या हो गया यार अभी तो मेरी लव स्टोरी ठीक से शुरू भी नही हुई थी और फिर ये तो खत्म होने पर आ गई। कितनी मुश्किल से तो कहानी में मजा आने लगा था। पर अचानक से सब बर्बाद हो गया।

कार्तिक ने कहा - ‘‘भाई। एक बात पूंछू ?’’

आदित्य ने कुछ जवाब नही दिया। वो अपने विचारों में ही खोया हुआ था। कार्तिक चलते चलते अचानक रूक गया। पर आदित्य चलता ही रहा।

‘‘लगता है इसका देवदास वाला पार्ट शुरू हो चुका है। अबे रूक पागल। ’’- कार्तिक ने कहा। और तेजी से आदित्य के पास गया।

‘‘ओह दीवाने रूक।’’ - उसने आदित्य का हाथ पकड़ते हुए कहा।

आदित्य विचारों की दुनिया से बाहर आया।

‘‘क्या हुआ ?’’ - उसने कहा।

‘‘तुझे क्या हुआ यार ? और राज ने ऐसा क्या कह दिया दिशा से कि वो अब तुझसे बात भी नही करना चाह रही।’’

‘‘वही तो पता नही है यार, इतनी मुश्किल से तो उसकी दोस्ती हासिल की थी। पर पता नही ये अचानक से . . .’’ - आदित्य कहते कहते रूक गया ।

उसने देखा सामने उसके जूते को कुत्ते के पिल्ले उठा उठा कर घूम रहे थे। कार्तिक ने भी देखा। दोनो उसे पीछे भागे। वो जूते लेकर इधर उधर भागे। इन सब से आदित्य के चेहरे पर हंसी आ गई। पिल्लों ने दोनों को बहुत परेशान किया। पर कुछ देर बाद वो जूते छोड़ कर भाग गए।

‘‘ये तो पूरे गीले हो चुके है।’’ - आदित्य ने कहा।

‘‘बरसात में ऐसे छोड़ कर जाएगा तो यही होगा न। अब घर चल। बरसात तो बंद होने का नाम ही नही ले रही है।’’ - कार्तिक ने कहा।

‘‘हां यार। पर पहले एक बार क्लासरूम में चलते है। मुझे एक बार दिशा से बात करना है यार।’’

‘‘देख यार। अभी कुछ भी बात करने का फायदा नही है। अभी वो गुस्से में है।’’

‘‘हां, पर बस एक बार वो मेरी बात सुन ले।’’

‘‘तूू मानेगा नही दीवाने। चल। जूतों को अब पहनना मत। और पैरो में कुछ हो जाए।’’

‘‘हां। अब चल।’’ - आदित्य ने जूतों को हाथ में उठाते हुए कहा।

दोनांे क्लासरूम में पहुंचे। वहां टीना और राकेश थे। पर राज और दिशा नही थे।

आदित्य ने कहा - ‘‘ये राज और दिशा कहां चले गए ?’’

‘‘वो तो तुम्हारे जाते ही काॅलेज के दूसरे गेट से चले गए यार।’’ - राकेश ने कहा।

‘‘और टीना कैसे रूक गई ?’’ - कार्तिक ने कहा।

दिशा तो बार बार कह रही थी कि चल मेरे साथ। पर इसने ही मना कर दिया। टीना ने कहा कि तुझे एक बार आदित्य से बात करना चाहिए। पर वो गुस्से में थी और चली गई।

‘‘अरे यार टीना तुम्हे चले जाना चाहिए था।’’ - आदित्य ने कहा।

‘‘देखो मैं तुम्हे काॅॅलेज के पहले दिन से नोटिस कर रही हूं। मुझे इतना तो पता है कि तुम कम से कम दिशा के साथ कुछ गलत तो नही करोगे और उसकी सबसे ज्यादा ‘केअर‘ भी करते हो। ये सबको दिखता है पर पता नही उसे क्यों नही दिखता ? और राज आज से नही बहुत दिनों से दिशा के पीछे पड़ा है।’’ - टीना ने कहा।

‘‘क्या ? ये क्या कह रही हो तुम ? तुमने बताया नही आज तक। ’’- आदित्य ने कहा।

‘‘हां, इस बारे मे तुमसे कभी बात करने का मौका ही नही मिला क्योंकि दिशा हमेशा मेरे साथ ही रहती थी। मुझे लगता है राज ने कुछ उल्टा सीधा दिशा के दिमाग मे भरा है।’’

‘‘वैसे भाई। एक बार मैंने भी दोनों को होटल पर कचौरी खाते देखा था पर उस टाइम दोनों थोड़ा दूर खड़े थे। इसलिए तुम्हे नही बताया।’’ - राकेश ने कहा।

‘‘और आज राज ने जो मेरी हद से ज्यादा बेइज्जती की। उसका भी शायद यही कारण था। अब मुझे सब समझ आ रहा है। दिशा ने भी मुझसे दो चार बार पूछा कि तुमने राज को जवाब क्यों नही दिया ? शायद राज ने ही उससे पूछने को कहा हो।’’ - आदित्य ने कहा।

‘‘अरे यार ये दिशा तो बहुत तेज निकली। मैं तो इसे बहुत सीधी सादी समझ रहा था।’’ - कार्तिक ने कहा।

‘‘अरे वो कुछ तेज नही है। कोई भी उसे कुछ कहे तो बहुत जल्दी बातों में आ जाती है। इसीलिए तो आज मैं रूक गई। क्योंकि मुझे पता है, राज की बातों में आकर ही वो आदित्य से आज ऐसे गुस्सा हो रही थी।’’

‘‘तो अब क्या किया जाए यार ? तुम ही कुछ बताओ।’’ - आदित्य ने कहा।

‘‘कुछ मत करो। रात को उसे मैसेज या काॅल करके देख लेना। या लास्ट टाइम मिलने की बोल देना। शायद कुछ हो जाए।’’ - टीना ने खड़े होते हुए कहा।

‘‘हां सही कह रही हो। थैंक्स यार। मुझे सपोर्ट करने के लिए।’’ - आदित्य ने कहा।

‘‘दोस्तों में थैंक्स नही बोलते पता है ना। इतना अच्छा ग्रुप था हमारा दोस्तों का पर जब से ये राज आया न। तब से सब बदल गया। पर कोई नही मुझे पता है बहुत जल्दी दिशा को ये बात समझ आ जाएगी और सब कुछ ठीक होगा। चलो अब कोई एक मुझे घर छोड़ कर आओ। आज तो बरसात रूक ही नही रही है।’’

‘‘चलो। मैं छोड़ कर आता हूं। कार्तिक तुम अपने दीवाने के साथ जाओ। कहीं घर की जगह कहीं और न चला जाए।’’ - राकेश ने कहा।

इस बात पर सब जोर जोर से हंसने लगे।

                                                                                      ******

अगले दिन दिशा काॅलेज नही आई। बरसात पूरी तरह से रूकी नही थी। और आज टीना भी नही आई थी। आदित्य को कुछ समझ नही आ रहा था वो क्या करे ? काॅलेज में दोपहर तक उसने दिशा का इंतजार किया पर वो नही आई। राज भी काॅलेज नही आया था।

वो उदास परेशान सा घर आया। उस वक्त भाभी अपने कामों मे लगी थी। इसलिए उन्होंने उससे कुछ पूछा नही। आदित्य बिस्तर पर लेटा लेटा सोचने लगा - राज बचपन से ही हमेशा से मुझसे अक्सर जीतता ही रहा है। आज उसने काॅपी भी मुझसे ले ली और दिशा भी मुझसे छीन ली। मन में तो आ रहा है कि उसका अभी जाकर मर्डर कर दूं । उसे कहीं सुनसान जगह पर ले जाकर पानी में डूबो डूबो कर मार दूं कमीने को। दिशा ने भी एक बार मेरी बात सुनना जरूरी नही समझा। कम से कम दोस्त होने के नाते ही सुन लेती।


शाम के 5 बजे चुके थे। अचानक उसके मोबाइल में टेक्स्ट मैसेज आया। दिशा का मैसेज था - "ठीक है हम लास्ट बार मिल सकते है। 6 बजे मुझे प्रताप गार्डन में मिलो।"

आदित्य की खुशी का ठिकाना न रहा। दिशा ने उसको खुद आगे होकर मैसेज किया। अब वो उसे सब सच सच बता देगा। वो जल्दी से तैयार हुआ और 5.45 पर प्रताप गार्डन पहुंच गया। और गार्डन में घूमने लगा।

घूमते घूमते उसे पता ही नही लगा और 6 बज गए। दिशा अभी तक नही आई थी। वो इधर उधर उसे ढूंढने लगा। उसी वक्त दिशा का काॅल आया। उसने जल्दी से काॅल रिसीव किया। और कहा - "हैलो दिशा कहां हो ?"

"मैं गार्डन में तालाब की तरफ हूं। जहां बोटिंग होती है।" - दिशा ने कहा।

"ठीक है मैं वहीं आता हूं।" - आदित्य ने कहा।

और दौड़ कर उस तरफ गया। उसने दूर से ही देखा दिशा तालाब के पास बने पुल पर खड़ी थी। उसके हाथ में राज की काॅपी थी। आदित्य को अब समझ नही आ रहा था कि वो दिशा को अब क्या समझायेगा ? क्योंिक वो तो काॅपी ही लेकर आ गई थी। पर साथ ही आदित्य के मन में काॅपी को देखकर सूकून आया। अब उसे कुछ भी कर के वो काॅपी हासिल करना था।

आगे जारी . . .

आगे क्या हुआ ? क्या दोनों की गलतफहमियां दूर हुई या आदित्य का प्यार शुरू होने से पहले ही खत्म हो गया।

मेरी पुरानी हवेली का राज, लव इन कॉलेज उपन्यास और ईश्वर तू महान है, छोटी लड़की की सीख, कसक प्यार की, बाबू कहानियां भी अगर आपने अभी तक पढ़ी नही है तो मेरी प्रोफाइल पर जाकर जरूर पढ़े।

आपके अमूल्य सुझावों का इंतजार रहेगा।

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