बरसात के दिन - 11 ( अंतिम भाग )


आदित्य दिशा के पास गया। और उससे कहा - ‘‘दिशा। अच्छा हुआ जो तुमने आज मिलने के लिए बुला लिया।’’

‘‘मुझे तुमसे मिलने में कोई इन्टरेस्ट नही है। वो तो टीना ने मुझे समझाया कि एक बार मुझे तुम्हारी भी बात सुन लेनी चाहिए। इसलिए तुम्हे मिलने के लिए बुला लिया। क्या कहना चाहते हो ये बताओ ?’’ - दिशा गुस्से में थी।

‘‘कहना तो बहुत कुछ है दिशा। पर पहले एक वादा करो कि जो मैं तुमसे पूछूंगा उसका सही सही जवाब दोगी। और जब मैं तुमसे कहूंगा तो उसे शांति से सुनोगी।’’

‘‘हां, उसी के लिए आई हूं। कहो क्या कहना है ?’’

‘‘सबसे पहले तो ये बताओ कि तुम मुझसे किस बात पर नाराज हो ? मैंने तो तुमसे कुछ कहा नहीं।’’

‘‘हां तुमने कुछ कहा नही। पर तुमने राज को दी हुई कॉपी में क्या क्या लिखा है मेरे बारे में ?’’

‘‘क्या क्या लिखा है मतलब ? तुम्हारे बारे में तो मैंने कुछ नही लिखा। मैं तो एक सिम्पल कहानी लिख रहा था। मुझे जरा कॉपी दोगी देखें तो क्या लिखा है ?’’

‘‘हां, इसीलिए ये कॉपी लेकर आई हूं। देखो।’’ - दिशा ने उसे कॉपी देते हुए कहा।

राज ने बिना देर किए वो कॉपी ले ली और जल्दी से उसके पेज खोलकर पढ़ने लगा। उसने जल्दी से पढ़ना शुरू कर दिया। अचानक से आदित्य को होश आया। दिशा उसके सामने बैठी थी। और वो खुद की बेगुनाही साबित करने की जगह वो सब बातें पढ़ने में लगा था जो उसने खुद ने लिखी थी।

उसने जल्दी से कॉपी बंद की और खुद को बेगुनाह साबित करने के लिए कहा - ‘‘नही, नही। दिशा ये सब मैंने नही लिखा है। ये सब उस राज की शरारत है। मैं भला क्यों ऐसा लिखने लगा। और सबसे बड़ी बात मैंनें उसमें केवल तुम्हारा नाम लिखा है तुम्हारे बारे में नही लिखा है।’’

‘‘हां मुझे पता था तुम यही सब कहोगे। देखो कल राज ने मुझे यही मैसेज किया था जब मैं उससे बात कर रही थी कि तुम मुझसे मिलने के बाद क्या कह सकते हो ?’’ - दिशा ने राज को मोबाइल खोलकर राज का मैसेज दिखाया।

जो उसने कहा था वही सब लिखा हुआ था।

‘‘दिशा ये सब मैंने नही लिखा है। ये सब उस राज की शरारत है। मैं भला क्यों ऐसा लिखने लगा। और सबसे बड़ी बात मैंनें उसमें केवल तुम्हारा नाम लिखा है तुम्हारे बारे में नही लिखा है।’’

आदित्य ने मन में सोचने लगा - ‘‘ये राज तो मेरी सोच से कहीं आगे की सोच लेता है। अब क्या करूं ?’’

‘‘अब बोलो और क्या कहना चाहते हो ?’’ - दिशा ने उसके हाथ से कॉपी लेते हुए कहा।

आदित्य एक बार को तो अचानक से चौंक गया। उसके हाथ में वो कॉपी आने के बाद वो उसे दुबारा दिशा के पास जाने नही देना चाहता था। उस कॉपी से ही वो सबकुछ ठीक कर सकता था। उसने जल्दी से वो कॉपी उससे लेने की कोशिश की।

दिशा ने कहा - ‘‘ये राज की कॉपी है। इसे तुम्हारे पास नही रहने दूंगी। राज ने मुझे वापस लौटाने कहा।’’

‘‘पर ये कॉपी उसने ही मुझे दी थी। और बिना मेरी मर्जी के वो मेरे घर से लाया था। इसे मुझे वापस दो। मैं तय करूंगा कि मुझे कब कॉपी वापस देना है ?’’ - आदित्य ने कॉपी उसके हाथ से लगभग खींचते हुए कहा।

दिशा ने आसपास देखा। हल्का अंधेरा होने लगा था। और गार्डन में उसे इस वक्त दूर दूर तक कोई नजर नही आ रहा था जिसे वो अपनी मदद के लिए पुकार सके। बरसात की वजह से वैसे ही गार्डन में कम लोग आ रहे थे। और जो आए थे वो भी शाम का अंधेरा होते ही निकल गए थे। इस समय गार्डन में केवल दिशा और आदित्य ही थे।

राज ने उसे इसी वादे के साथ कॉपी दी थी कि वो उस कॉपी को वापस लेकर आएगी और दिशा अपना वादा तोड़ना नही चाहती थी। इसलिए वो जैसे तैसे कॉपी लेकर वहां से जाना चाहती थी। पर आदित्य भी जी जान लगा कर कॉपी को लेने की कोशिश कर रहा था। वो भूल गया था कि इन सबसे दिशा के मन में उसके प्रति नफरत और बढ़ जाएगी। पर उसके दिमाग में बस यही बात थी कि एक बार उसे कॉपी मिल गई तो वो उसे लेकर सब ठीक कर देगा।

उसी वक्त अचानक से जोरदार बरसात शुरू हो गई।

दिशा ने कहा - ‘‘आदित्य कॉपी छोड़ो। मुझे जाने दो। देखो बरसात आने लगी है।’’

आदित्य ने कहा - ‘‘नही दिशा। ये कॉपी मेरी है। और चाहे कुछ भी हो जाए मैं इस कॉपी को लेकर रहूंगा। तुम चुपचाप मुझे कॉपी दे दो।’’

दोनों कॉपी को अपनी अपनी तरफ खींचने में लगे थे। आदित्य को लग रहा था कि दिशा लड़की है इसलिए वो कॉपी को आसानी से छोड़ देगी। पर वो भी अपनी पूरी ताकत लगाए हुए थी।

तेज बरसात में दोनों भीग चुके थे। और कॉपी भी भीगने लगी थी। अचानक से कॉपी के पेज बीच में से खुल गए। दिशा ने जिस तरफ से कॉपी पकड़ी उस तरफ का हिस्सा फटने से दिशा को अचानक जोर का झटका लगा। और वो पीछे की तरफ चली गई। पुल की दो फुट की दीवार से टकराने से उसका बैलेंस बिगड गया और वो तालाब के पानी में गिर गई। गिरते गिरते भी उसने कॉपी के कागज नही छोड़े थे। उसके मुंह से जोरदार चीख निकली - ‘‘आदित्य।’’

अचानक से ये सब हो जाने से आदित्य के हाथ पैर फूल गए। उसे खुद को पानी से बहुत डर लगता था। वो जोर से चिल्लाया - ‘‘दिशा। दिशा।’’

वो दिशा को बचाना चाहता था पर उसके हाथ पैर जैसे जाम हो गए हो। उसे कुछ समझ नही आ रहा था कि उसके साथ क्या हो रहा है ?

अचानक से आदित्य की नींद खुल गई। वो पूरा पसीना पसीना था। जल्दी से अपने बिस्तर पर बैठ गया। उसने समय देखा 6 बजने में अभी 15 मिनट बाकी थे।

‘‘ओह। अच्छा हुआ ये सपना था। मैं तो डर ही गया था। मैं इस सपने को सच नही होने दूंगा। आज मैं सब कुछ ठीक कर दूंगा।’’ - उसने खुद से कहा।

उसने जल्दी से कपड़े चेंज किए। और जूते पहनने के लिए उठाए। पर जब उसने उन्हे उठाया तो उसे याद आया कि दिशा की यादों के चक्कर में उसने जूतों को जैसा का जैसा ही छोड़ दिया था।

‘‘लगता है अब चप्पल पहनना ही सही रहेगा। पर पहले इन जूतों को खोलकर सुखा दूं।’’ - उसने मन में सोचा। और जूते के फीते और तली खोलने लगा। तभी उसे जूतो की तली मे एक कागज का बहुत छोटा से टुकड़ा मिला। जो कि एक सुपारी के पेकिट के अंदर था।

उसने वो कागज देखा उसमें लिखा था - जिंदगी बहुत अच्छे मौके देती है पर कुछ लोग उसे समझ नही पाते है।

‘‘ये मेरे जूतों में इतना महान अनमोल वचन क्या कर रहा है ? ऐसे अनमोल वचन आजकल व्हाट्सएप पर बहुत आते है ? शायद पानी भर जाने से अंदर आ गया होगा।’’ - उसने कागज के टुकड़े को हवा में उछाल कर फेंकते हुए कहा।

और उसके बाद जल्दी से वो तैयार हुआ और प्रताप गार्डन पहुंच गया। दिशा को गार्डन में ढूंढने लगा। उसने मन में सोचा कि कहीं वो तालाब पर बने पुल पर न हो पर वो वहीं खड़ी थी।

‘‘तो क्या अब मैं जो सपने देखने लगा हूं। वो भी सच होने लगे है।’’ - उसने मन में कहा।

आदित्य ने देखा दिशा के हाथ में कॉपी थी। आदित्य दिशा के पास गया। और उससे कहा - ‘‘दिशा। अच्छा हुआ जो तुमने आज मिलने के लिए बुला लिया।’’

‘‘मुझे तुमसे मिलने में कोई इन्टरेस्ट नही है। वो तो टीना ने मुझे समझाया कि एक बार मुझे तुम्हारी भी बात सुन लेनी चाहिए। इसलिए तुम्हे मिलने के लिए बुला लिया। क्या कहना चाहते हो ये बताओ ?’’ - दिशा ने कहा।

‘‘दिशा तुम पहले शांति से मेरी बात सुन लो और फिर खुद डिसाइड करना कि तुम्हे क्या करना है ?’’ - आदित्य ने कहा।

‘‘पहले तुम मुझें ये बताओं कि तुमने इस कॉपी में क्या लिखा है मेरे बारे में ? और क्यों लिखा है ?’’

आदित्य ने कहा - ‘‘दिशा। देखो मैं आज तुमसे कुछ झूठ नही कहूंगा। बस तुम शांति से मेरी बात सुनो।’’

‘‘हां कहो। सुन रही हूं।’’

‘‘मैं कॉलेज के पहले दिन से तुम्हे पसंद करता हूं। और पहली नजर का प्यार जिसे कहते है वैसा ही कुछ मैं तुम्हारे लिए फील करने लगा था। उसी दौरान मुझे राज ने एक कॉपी दी जिसमें उसने मुझे कहानी लिखने के लिए कहा था। जब मैं उस कहानी को लिखने लगा तो मैंने शुरूआत में ऐसे ही मन में जो विचार आए वो लिखे। पर कुछ पेज लिखने के बाद मुझे लगा कि मैं उसमें जो कुछ लिख रहा हूं। वह सब सच हो रहा है। लेकिन इसी बीच मुझसे ये कॉपी गुम हो गई। पर बाद में जो कुछ हुआ वो इस कॉपी की वजह से नही हुआ। मैं सच्चे दिल से तुम्हे चाहने लगा था। पर उस दिन मेरी बुद्धि भ्रष्ट हो गई थी। जो मैंने कॉलेज में बरसात के दौरान वो किस वाली बात लिख दी। पर सच कहूं मेरा मन उस वक्त कह रहा था कि ये सब गलत है। और मुझे नही लिखना चाहिए। पर एक शैतान का मन भी होता है न, जो ऐसा ही कुछ चाहता है। तुम उस दिन पूछ रही थी ना कि मैंने राज की बात का कोई जवाब क्यों नही दिया ? मैंने इसी वजह से उसकी बातों का जवाब नही दिया क्योंकि मुझे लग रहा था उस कॉपी में लिखकर मैं सब कुछ ठीक कर दूंगा। पर मेरी किस्मत खराब थी। जो राज मेरे घर पर चला गया और तुम्हे ये कॉपी दे दी। पर सच कहूं दिशा मैं दिल से तुम्हारी इज्जत करता हूं।’’

‘‘हां कितनी इज्जत करते हो वो मैंने पढ़ लिया। और वैसे मुझे नही पता था कि तुम मुझे इतना बेवकूफ समझते हो।’’ - दिशा ने उसकी नजरों में देखते हुए कहा।

‘‘मतलब ? मैं कुछ समझा नही।’’

‘‘क्या किसी कॉपी में लिखने से कोई बात सच हो सकती है ? और अगर हो भी सकती है तो तुम सच में दुनिया के कितने बड़े मूर्ख हो। जो तुमने केवल अपने मन की कुछ ऐसी इच्छाएं लिखी जो देर सवेर कभी न कभी पूरी हो ही जाती। तुम्हे लिखना ही था तो ऐसा कुछ लिखते जिससे दुनिया के लोगों को कुछ भला होता। अपनी जिंदगी के लिए, अपने परिवार के लिए कुछ अच्छा भविष्य लिखते। पर तुमने लिखा भी तो क्या ? ये सब बकवास बातें। और दूसरी बात ऐसे किसी जादुई कॉपी में लिखकर मेरा प्यार हासिल कर के तुम्हे क्या मन में वह सुकून मिल पाता जो खुद कोशिश कर के किसी का प्यार हासिल करने पर होता है ? जिसे तुम प्यार कह रहे हो, मुझे तो वो कहीं से भी प्यार नही लग रहा है।’’

‘‘हां, दिशा तुम सही कह रही हो। मैं सच में बहुत पागल हूं। इस जमाने में भी ऐसी बातों पर यकीन करने लगा। हमारी जिंदगी में अगर थोड़ा सा भी कुछ ऐसा हो जाए जो सामान्य जीवन में नही होता है तो हम उसे चमत्कार या जादू समझने लगते है। मैंने जो कुछ लिखा वो सब असलियत में मेरे साथ हो गया तो मैं यही सोचने लगा कि ये जादुई कॉपी है। और इसी को फिर परखने के लिए मैंने ये सब लिख दिया जो मुझे नही लिखना चाहिए था।’’

‘‘ये सब इत्तफाक भी हो सकता है। और अगर ऐसा ही कुछ है तो लो ये कॉपी और इसमें लिखों कि हम दोनों की शादी हो गई। तुम्हारा आईपीएस में सिलेक्शन हो गया है। और हम करोड़पति बन गए। क्या तुम्हारे कॉपी में ये सब लिखने से सच हो जाएगा।’’ - दिशा ने कॉपी को आदित्य के हाथों में देते हुए कहा।

आदित्य के हाथ में कॉपी आते ही आदित्य को लगा कि उसे खजाना मिल गया है। उसने मन में कुछ सोचा और फिर उस कॉपी को उसी वक्त तालाब में फेंक दिया।

दिशा भी ये देखकर चौंक गई। और चिल्लाई - ‘‘ये क्या किया तुमने ? वो कॉपी राज को वापस देनी थी। और तुम तो कह रहे थे कि वो जादुई कॉपी है एक बार चैक तो कर लेना था।’’

‘‘नही दिशा, अब चाहे पूरी उमर लग जाए मैं तुम्हारा प्यार खुद की दम पर ही पा कर रहूंगा। तुम्हे उस वक्त तक मनाने की कोशिश करूंगा जब तक तुम मान नही जाती। तुम नही मिली तो भी तुम्हे प्यार करता रहूंगा। पर अब ऐसा कुछ नही करूंगा जिससे तुम्हे बुरा लगे या तकलीफ हो। मुझे समझ आ गया कि धोखे से किसी का प्यार आप हमेशा के लिए हासिल नही कर सकते हो। और हां मैं कॉलेज के पहले दिन से तुम्हे पसंद करने लगा। चाहने लगा था। इतने दिन में मैंने तुमसे कुछ ऐसा नही कहा जिससे तुम्हे बुरा लगे। मैं चाहता तो झूठ बोल सकता था कि ये दिशा मेरी रिश्तेदार है, मेरी पुरानी दोस्त है और भी बहुत कुछ बहाने बना सकता था। पर मैंने तुमसे सच कहा क्योंकि मुझे लगता है सच का कोई विकल्प नही होता। और सच को किसी सबूत की जरूरत नही। मेरा सच तुम मेरी आंखों और बातों से पता लगा सकती हो। पर कल तुमने जो एक पल में मुझे पराया कर दिया। अपना दुश्मन मान लिया उसने सच में मुझे बहुत ठेस पहुंचाई। क्या इतने दिनों में तुम मुझे थोड़ा सा भी नही जान पाई ? उस राज की बातों में आ गई। खैर शुक्रिया मेरी बात सुनने के लिए। अब मुझे कुछ नही कहना। तुम्हे जो कुछ ठीक लगे वो तुम करो। आज के बाद मैं तुम्हे परेशान नही करूंगा। जब तुम्हे ठीक लगे तब तुम बात कर लेना। मैं हर वक्त तुमसे बात करने के लिए तैयार रहूंगा। प्यार न सही एक अच्छा दोस्त मान कर ही। अच्छा बाय।’’ - आदित्य ने कहा और चुपचाप पलट कर जाने लगा। आदित्य का मन बहुत भारी होने लगा था। उसने सोचा नही था। उस कॉपी की वजह से वो अपने लव एट फर्स्ट साइट से हाथ धो बैठेगा।

दिशा चुपचाप खड़ी उसे देखती रही। उस वक्त पूरे गार्डन में दूर दूर तक कोई नही था।

‘‘आदित्य! रूको।’’ - दिशा ने कहा और दौड़ के आदित्य के पास गई।

आदित्य की आंखे नम थी। दिशा उसके गले लग गई और कहा - ‘‘सॉरी। आदित्य। मैं भी तुम्हे पसंद करने लगी थी। पर राज की बातों में आ गई।’’

आदित्य को विश्वास नही हुआ कि दिशा उससे ये क्या कह रही है ?

उसने कहा - ‘‘क्या सच में ?’’

‘‘हां, टीना ने कल मुझे समझाया कि मैं एक बार तुम्हारे और राज की बातों के बारे में ध्यान से सोचूं। तो मैंने कॉलेज के पहले दिन से तुम्हारी और राज की दोनों की बातें सोची। तुमने कभी मुझसे राज के खिलाफ बात नही की पर राज हमेशा मुझसे तुम्हारी बुराई करता था। और अधिकतर मुझे इम्प्रेस करने की कोशिश करता था। साथ ही तुम मुझसे सबके सामने बात करते थे पर वो अधिकतर अकेले में ही बातें करता था। रात को मैसेज कर कर के परेशान करता था। तुम मुझसे पूछ कर ही बातें करते थे। मुझे माफ कर दो। तुमने सच बोल कर मुझे अपना बना लिया। और वैसे भी दिशा नाम की हजारों लड़कियां है, केवल मेरा ही नाम दिशा तो नही। और वो वैसे भी कहानी थी, कहानी तो लेखक की कल्पना होती है। तुमने ऐसा कुछ लिख भी दिया तो मुझे कुछ ऐसा ‘ओवररिएक्ट’ नही करना चाहिए था। सॉरी। आदित्य।’’

‘‘सॉरी मी टू दिशा।’’

‘‘और . . .’’ - दिशा कहते कहते रूक गई।

‘‘ और क्या ?’’

‘‘और आई लव यू आदित्य। ’’ - दिशा ने उसके गले लगते हुए कहा।

‘‘आई लव यू टू दिशा।’’ - आदित्य ने भी उसे गले लगाते हुए कहा।

दोनों उस वक्त एक दूसरे के गले लगे हुए थे। आदित्य की नजर तालाब में उस जगह पर थी जहा वो कॉपी अब तक पानी में समा चुकी थी। उसी वक्त अचानक से तेज बरसात शुरू हो गई।

दिशा ने कहा - "चलों। जल्दी वरना भीग जाएंगे।"

आदित्य ने उसका हाथ पकड़ कर कहा - "आज भीग ही जाने दो। वैसे भी कब तक इस बरसात से बचेंगे। और अब तो मुझे हमेशा याद रहेंगे ये ‘‘बरसात के दिन।"

समाप्त

कहानी कैसी लगी कमेंट के द्वारा जरूर बताएं। कहानी का अंत शायद कुछ पाठकों का अच्छा न लगें। पर कहानी के अंतिम संवादों में ही प्यार करने वालें युवाओं के लिए सीख है। प्यार को धोखे से नही सच्चाई से पाने की कोशिश करें। असलियत की जिंदगी में चमत्कार नही होते है।

 

मेरी पुरानी हवेली का राज, लव इन कॉलेज उपन्यास और ईश्वर तू महान है, छोटी लड़की की सीख, कसक प्यार की, बाबू कहानियां भी अगर आपने अभी तक पढ़ी नही है तो मेरी प्रोफाइल पर जाकर जरूर पढ़े।

आपके अमूल्य सुझावों का इंतजार रहेगा।

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Davda 1 week ago

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darsheel Singh 2 months ago

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nihi honey 2 months ago