तेरे प्यार की कसम - 1 in Hindi Love Stories by Tanya gauniyal books and stories Free | तेरे प्यार की कसम - 1

तेरे प्यार की कसम - 1

जगहः  अमेरिकाः  एक  हैंङसम   नौजवान  लड़का   भूरी आँखें   जिसमें  किसी   का इंतजार था
अमेरिका  का सबसे अमीर   लड़का  या  यु   कहें सबसे   फेमस  बिजनेस मैन जिसके  चर्चे हर जगह थे हर  लड़की   उसपर  मरती  थी   पर ना जाने वो किसको  चाहता था ।  लड़कियो   की चाहत था  पर उसे  किसी  का  इंतजार था  नाम  था  रघुवंश   मल्होत्रा  राजेश  मल्होत्रा का बडा़ बेटा  कहने  को तो  वो एक साधारण लड़का  था । न कोई लत न कोई  बुरी आदत ।
हर रात  उस चाँद को देखें जाता  और किसी को याद किए जाता  
समय  9:00  बजे  का
रघु अपनी  बालकनी मे बैठे बैठे  चाँद  को निहारे जा रहा था  ⛼🌃
वहाँ  पर एक  लड़का  आया और  सोफे मे बैठते हुए  बोलाः   भाई आप  फिर  इस  चाँद को  निहार रहे  हो   आपको  मिलता  क्या  है इसे निहारके  
रघु :  सुकून मिलता  है   किसी  अपने के पास  होने का एसाहस दिलाता है । 
लड़का   : भाई  आप  इस  चाँद  को ही निहारते रहो । है  क्या  इसमें  चाँद  ही तो है  इतना  मत निहारा करो  कही 
नज़र न लग जाये  देख देख के  उसमे गद्दे ना  पड़  जाए  आपको  निहारना है तो लड़कियो   को निहारो  यार कितनी  अच्छी  अच्छी  लड़किया  है  क्या  हर रोज  इसे ही देखते  रहते  हो ।
रघु  थोड़ा  सा हँसते हुए   : छोटे  मुझे  इस चाँद  को देखना पसंद  है । मुझे किसी   की याद दिलाता है।  🌒
किसकी भाई  : उस लड़के ने पूछा 
रघु : पता नहीं पर ऐसा  लगता है जैसे ये मुझसे कुछ कहना चाहता है ।  ना जाने  कौन  है नही जानता पर किसीकि   अधुरी  "कसम  को याद  दिलाता है "। 
लड़का  :  भाई आप  किसी लड़की  को एक नज़र  देखते  तो हो नहीं  फिर  किसको देखते  हो ।
औहहह!  कही वो आपके  सपनों  वाली  लड़की   तो नही जिसे आप  अपने  सपनो  मे देखते  हो 
रघु :  पता नही ! ये सब छोड़  तू  बता तूने पैकिंग  कर  ली।  लड़का   : हा भाई  पुरी  कर ली
(रघु के परिवार  मे उसके  माता पिता  छोटा भाई और  दादी  रहते थे वो लोग इंडिया  जा रहे थे। )
रघु : ठीक है सो जा 
लड़का : ठीक है भाई  आप  तो बस इस  चाँद  को देखते रहो  ।  गुङ नाईट
रघु आसमान मे उस चाँद  को देखते  हुए ) : हाँ हाँ तू जा सुबह जल्दी  नही उठा ना तो मार के जगाऊगा
लड़का  मुंह बनाते हुए  :  हाँ हाँ भाई जा रा हु बाय
लड़का  वहा से निकलते और साथ  मे  कुछ  बड़बडा़ते हुए: पता नहीं  यार भाई को क्या मिलाता है, इस  चाँद  को  देख कर देखना है तो  लड़कीयों  को देखो ना उनसे तो  दूर  रहते है पर्सनालिटी तो अच्छी है।   
लड़का अपने  कमरे मे  आकर सो  गया
वहाँ पर रघु अभी भी  एक  टक चाँद  को देखे जा रहा था
रघु सोफे मे  सर  टीका  कर बडे़ प्यार से उस चाँद  को देखे जा रहा था चहरे मे बङी  मुस्कुराहट लाके ।
थोडी देर  बाद वो उठकर अपने बिस्तर  मे जा कर सो गया उसे थोडी देर मे  ही नींद  आ गयी
इंडिया मे
सुबह के सात बजे
अचानक दो लोगो की परछाई जैसी दिखी दो लोग
एक लड़का  और एक लड़की   दोनों  एक सुनसान रास्ते  मे  एक दुसरे का हाथ पकड़  के चल रहे है ।
अचानाक से  उस  लड़के  का हाथ उस  लड़की  के हाथ  से छूट  जाता है  और  एक जोर  की चीख निकलती है।
एक लड़की   नींद  से जागती है ।
वो हांफते  हुए : ये सपना फिर आया मुझे ऐसा क्यों होता है  समझ नही आता  बचपन से ऐसे सपने आते है इन  सपनो का अब कोई  मतलब  नही रहा  मेरी जिदंगी मे
अमेरिका  मे
राजेश जी अपने  कमरे  मे बैठ  कर एक तस्वीर को देखे जा रहे है  तभी आवाज़ आई आप   फिर  चालु हो गए  
अब जा तो रहे  है  इंडिया अब क्या  चाहिए  आपको रात के   दस बजे उनकी याद  आ रही है सो जाइए सुबह निकलना भी है । 
राजेश जी : जी हा हमारी  रज्जो  आपका हुक्म हम ना माने ऐसा हो सकता है   
पीछे से आवाज़  आई  : रहने दिजिए आप उनकी  तस्वीर  निहारना बंद  करेंगे , ऐसे मेरी  तस्वीर  को कभी नही देखा  
राजेश  जी: आप  नराज मत हो  मेरी प्यारी वाइफ  उनकी याद  आई इसलिए  फोटो  देख ली और  आपकी क्यो देखु जब आप  खुद  हमारे साथ  है 
पीछे  से आवाज़  आई : रहने दिजिए  सो जाइए जब     इंडिया पहोचेगे तब उनको जी भर के देख लेना
राजेश जी : हा ठीक  है  वैसे भी  20 साल के बाद जाएँगे में  तो  खुश  हूँ   
पीछे  से आवाज़  आई  : अब सो जाइए  कल निकलना भी है इंडिया के लिए  । मैं  भी उतावली हो रही हूँ रश्मि से मिलने को कितने अच्छे  पल साथ  मे बिताय थे हमने एक साथ (उन यादो मे खोते हुए  )   चलिए  सो जाइए 
राजेश जी : ओकए गुङ नाईट
इंडिया मे
लड़की  उठी ओर  कमरे के बाहर  आयी उसीके कमरे के पास एक कमरा था  जो बंद  था   ( चटकनी लगी थी  ) उसने उस  कमरे को देखा कुछ देर के लिए  फिर आगे चली गयी  सीढियो से नीचे  आ गयी
बेटा  आप  उठ गई :  राज ने बोला
लड़की : जी पापा  ,  आपने  नाश्ता कर लिया    
  राज  : नही बेटा  अभी नही हुआ
तब तक उस लड़की  को किसीने पीछे  से पकड़ लिया  
दुसरी लड़की  : दी आप  उठ गयी गुङ  मॉर्निंग  
लड़की  : क्या  कर रही है आहना  छोड़  
लड़की  : क्या दी आप भी ना   लड़की  को छोड़ते हुए )  ये लो छोड़  दिया   
माँ  खाना  कब तैयार  होगा बहुत भूख लगी है  
लड़की : तूने  ब्रश कर लिया
आहना मासूम सा चहरा बना कर : नही दी नही किया  पर मुझे  ना बहुत भूख लगी है ।
लड़की  : जा पहले ब्रश करके आ फिर  खाना मिलेगा  
आहना : दी
लड़की  आँख  दिखाते हुए  : जा ना   
आहना  मरेमन से अंदर  चली गयी 
लड़की  भी ऊपर अपने  कमरे मे चली गई   
थोड़ी  देर बाद  
आहना  चेयर मे बैठकर   :  खाना  कहाँ है बहुत भूख लगी है  
लड़की  उपर से नीचे  आते हुए  : आहना  कितना  चिलाती है सब्र कर आ जाएगा
आहना  : दी सब्र ही तो नही होता  
लड़की  ङायनिंग टेबल  मे बैठते  हुए   : भुक्क़ड़  कितना  खाएगी मोटी   खा खाके  भेष बन जाएगी
आहना  मुँह  बनाते हुए : दी आप भी ना 
लड़की हँस  दी 
आहना  : माँ  जल्दी  लाओ  खाना कितनी  देर   लगेगी
किचन से एक औरत  खाना  लेकर  आई    
औरत  : खाना  आ गया
औरत  ने टेबल मे खाना रख दिया  सबने खाना शुरू  किया    
राज ने खाना  खत्म  किया  और  ऑफिस के लिए  निकल  गया  
आहना  : दी आप  ऑफिस नही जा रही   वैसे  आप  आ रही हो मेरे  साथ     
लङकी  : ना,   नहीं  जा रही ऑफिस   कल  आऊँगी तेरे साथ 
दोनो  ने खाना  खत्म  किया और लड़की  पेंटिंग   रूम मे  घुस  गयी ।
वहाँ  पर  कई सारी पेंटिंग  थी और  एक पेंटिंग को  ढका हुआ  था  लड़की  ने एक पल के लिए  उस  पेंटिंग को देखा  फिर  अपनी पेंटिंग  शुरू  करी  ।
पेंटिंग बनाते बनाते एक दो घंटे कब हो गए  पता ही नही चला  
2 बज गये थे उसने  आधी से ज्यादा  पेंटिंग पुरी कर ली थी
आहना कमरे  मे आते हुए   : दी आपने पेंटिंग बना दी 
वाओ  ( पेंटिंग को देख कर  ) मस्त है सच मे आप  बहुत- अच्छी  पेंटिंग बनाती हो।
लड़की   फीकी तरह मुस्कराहटे हुए : हम्म
आहना: दी वो अंजली  आई हे  ।
लड़की  : अंजली  और  वो तीन छोकडी़या भी है  
आहना : नहीं  दी वोई आइ है एक गुङ न्यूज़ है ।
लड़की  : क्या  गुङ न्यूज़ है ।
आहना :  आप  चलो तो सही

आहना   उसे  खींचते  हुए  ले गयी
आहना: दी चलो
लड़की: हा हा चल रही हूँ
बहार
अंजली: आंटी जी मू मीठा  किजीए
औरत: हा हा बेटा क्यु नही इतनी बडी़  ख़ुश खबरी सुनाई  है
अंजली: हा आंटी जी
अंजली ने उस लड़की को बहार आते देखा
अंजली वहाँ भागते हुए  गयी और  उस  लड़की  को  गले लगाकर बोली  : हाय कैसी  है तू
लड़की : मैं  ठीक  हूँ तू बता कैसी है
अंजली : मैं  ठीक  हूँ  तूतो हमे भूल ही गयी पर हम नहीं भूले तुझे
लड़की  :   नहीं  यार कैसे  भूल  जाऊँगी तुम्हें और बाकी सब   कहा है  
पीछे  से आवाज़  आई :  हम सब यहाँ  है   वो सब भी  लड़की  के गले लग गये 
सब एक साथ : कैसी  है तू  
लड़की   : मै ठीक  हूँ  तुम  बताओ कहा थे इतने  दिनो से  गायब 
अंजली  : ओ मैडम  ! गायब हम सब नहीं  तुम  रहती हो   समझी 
अनीता ( लड़की  की दोस्त  ) : हा सही कह रही है  अंजली  तुझे  इससे बात  ही नही करनी चाहिए आयी क्यों  नही  
प्रिया: हा  यार तू तो हमे भूल ही गयी कितने दिनों से नही  आयी 
लड़की : माफ कर दो यार वो ऑफिस के काम से फुर्सत नही  मिल  पायी सॉरी    
प्रिया : हा हम तो भूल  ही गये थे तुम  तो बिजनेसवुमन हो हम जैसे   छोटो को क्यो याद  करोगी  ( ताना मारते हुए  )
लड़की   : नहीं  यार ऐसा नही है एक बडा प्रोजेक्ट था वो  कंप्लीट करना था  तो इसलिए अब वो हो  गया  है तो आज ऑफिस नही गयी सोचा  तुम सब से मिल लूँ   
अनीता :इतना  बडा़  उपकार  मत  कर हमारे  उपर  तू तो आयी नही तो सोचा   हम ही आ जाए  मिलने और  तुझे क्या  हुआ  है तिया तू क्यों शांत है
 ( तिया को देखते हुए  ) कुछ बोल इसे  
तिया गुस्से  मे : क्या बोलू जब इसे  हमारी  परवा नहीं है ये  तो बड़े   घर की है ना इसलिए हम जैसे   छोटो से क्यों  मिलेंगी  मिलने मे शरम आती  होंगी  
लड़की  : ऐसा  मत बोलो  यार कोई  बडा़  या छोटा नही होता मैं  तुम्हारी  दोस्त हूँ  और  हमेशा  रहुगी समझी अब कभी ऐसा  मत बोलना वरना तुमसे नाराज हो जाऊँगी 
  तिया  (  लड़की  को गले लगाते हुए  ): अरे! सॉरी यार वो गुस्से  मे कुछ भी बक दिया  
लड़की: हम्म्म और बताओ  कैसा   चल रहा है सब ठीक  हे ना
अंजली: सब बढिया चल रहा  है एक गुङ  न्यूज़ है  
लड़की  :  क्या गुङ  न्यूज़ है
अनीता: गेस कर तब  बताएगे
प्रिया: हा गेस कर
लड़की: (चिड़ते हुए) मुजे नही  पता  बताओ  क्या है
तिया: यह  है ना हमारी अंजली  महारानी
लड़की: हा
तिया (हसते  हुए ): अब ये  जल्द ही  परदेशी होने  वाली है
लड़की :  मतलब
तिया (ख़ुश हो कर): अरे बैंड बाजा बजने वाला है इसका शादि  होने  वाली है इसकी
लड़की  (हैरान अभिव्यक्ति दे कर): क्या
लड़की  ने तुरंत  ही   पास खडी़ आपनी माँ को देखा जो उसे ही देख रही  थी औरत  लड़की को देखकर मुस्करायी
अनीता: क्या हुआ तू खुश नही है  क्या ?
लड़की : नही नही खुश  हुँ मै बहुत कॉंग्रट्स अंजली
अंजली:  थैंक यू  यार
औरतः तुम सब बैठो मै कुछ खाने  के लिए लाती हूँ
सबने ओके बोला और सोफे मे  बैठकर बाते करने लगे
अनीता: तेरी शादी मे बहुत मज्जे आयगे यार लड़को को ताड़ने मिलेंगा
प्रिया उसका साथ दे कर : हा यार  वैसे  तेरे  चचेरे भाई का लड़का हे ना वो बहुत  स्मार्ट है यार  बात करा ना उससे
अंजली: तुम   लोग पागल हो गये  हो यार
अनीता: हा यार वो तेरा कज़िन है ना प्रियांक क्या दिखता है यार मज्जे आ जाते  है देख कर
अंजली : तुझे  तो मे  अभी बताती  हुँ ( तकिया उथाकर  मारने लगी)
अनीता: अच्छा  अच्छा छोड़  दे यार माफ़ कर दे नही  पताऊगी  बस
अंजली: हम्म
सब हसँने लगे
आहना: अंजली दी बधाई हो
अंजली: शुक्रिया आहना तुझे भी आना है शादी  मे
आहना: हा क्यो  नही  हम भी आएगे शादी मे
(लड़की  जमींन को  देख कर कुछ सोचे जा रही  थी)
आहना: दी कहा खो गयी 
आहना की बात से उसका  ध्यान  टूटा
लड़की : हा आहना
आहना: कहा ध्यान है आपका
लड़की: कही नही  तुम सब बैठो मै  कुछ खाने के लिए  और चाय लेकर आती  हूँ
आहना ( मरेमन से): हम्म
लड़की वहा से उठकर  किचन  कि तरफ चली गई
आहना  लड़की  को जाते हुए देख रही थी  उसे  समझते हुए  देर  नही  लगी की वो उदास थी और उसे वजह पता थी
आहना अपने मन मे : दी कब तक आप ऐसी रहोगी एक  साल हो गया इस   बात  को  भूल क्यों नही जाती
अनीता: आहना ये  अब तक एक साल पहले की बाते नही  भूली
अंजली : हा आहना
अंजली  (उदासी से ): हा दी अब तक वो बात  नहीं भूली
प्रिया: कोई  बात नही हम है ना उसके दोस्त है सब ठीक कर देगें 
तिया: हा
आहना (उदासी से ) हम्म् ( किचन  की तरफ़ देखकर)
किचन  मे
लड़की  किचन मे आकर अपनी माँ को देखने लगी
औरत: ऐसे  क्यों  देख रही हो
लड़की: कुछ नही चाय बन गयी
औरत: हा
लड़की: मै ले जाति हूँ
औरत: हम्म
लड़की ने चाय की ट्रे उथाई और निकलने लगी
औरत: बेटा 
लड़की : हम्म माँ
औरत: कब तक  अतीत मे  जीते  रहोगी भूल  जाओ  हम सब आगे बड़े है  जिंदगी  मे तुम  भी बडो़
लड़की :  भूला नही  पा रही  हु  बहुत  कोशिश करती हुँ  पर नियती बार बार  वो सब याद दिलाती है
औरत: ऐसे  कब तक चलेगा  बेटा कब तक इसी बाते को पकड़ के  बैठौंगी तुम्हे भी  ...।
लड़की  बीच  मे बोलते हुए : माँ मै ये चाय देकर आती हूँ 
वो बहार  निकल  गयी 
औरत ( उदासी  से   ) खिड़की की तरफ देख कर    : पता नही कब तक चलेगा  ऐसे  ही कभी न कभी तो समझना   ही पडे़गा 
लड़की बहार आ गयी  सब  अपनी  ही  गप्पो मे लगे थे उसने चाय की ट्रे मेज़ पे रखी और बैठ  गयी औरत भी बहार आ  गई
औरत अंजली को देखकर: बेटा फिर कब है शादि
अंजली: आंटी  जी अभी  शादि मे   बहुत  वक़्त है अभी  तो रोका (शगुन देने की रश्म) है। आप सबको आना है अंकल जी को भी
औरत: हा क्यों नही  बेटा हम सब आएगे अंकल भी आएगे
अंजली:  आप सबको हमारे साथ   शापिंग मे भी  आना पडे़गा कोई बहाना नहीं चलेगा
आहना शॉपिंग के नाम से उच्छल खुद करने लगी , हा क्यों  नहीं मै  तो आऊगी खरीदारी करने
औरत: इसको  देखो कैसे   बन्दर की तरहा उच्छल रही है बन्दरिया कहिकी
सब हँस  पडे़
आहना (बूरा सा मू बनाते हुए ): क्या  माँ
औरत: सही  तो बोल रही हू बंदरिया
आहना चिड़ते  हुए मू  बनाते हुए : हहहह  कहते रहो आप  मै  बन्दरिया नही  हूँ 
लड़की: तु बन्दरिया नही है 
आहना: देखा  माँ  यहा  सिरफ मेरी दी  ही है
लड़की: तु बन्दरिया नही  मोती बन्दरिया  है
सब जोर जोर से हसँने लगे
आहना (गुस्से  मे ): क्या दी आप
लड़की: अच्छा अच्छा तो तू  है मोती चुहिया  अब खुश
आहना चिढ़  के मारे अपने  कमरे मे चली गयी
सब उसे जाते हुए  देख कर जोर जोर  से हसँने लगे 
अनीता: चलिए आंटी  हम चलते हैं देर हो गई है
अंजली: हा आंटी जी हम चलते  है
औरत: इतनी  जल्दी नही बेटा   खाना खा के जाओ  वैसे  भी रात होने वाली है
लड़की: हा रूक  जाओ इतनी जल्दी क्यो  जा रहे  हो
अंजली: नहीं  घर में बहुत सारे काम है और शगुन की भी तेयारी  करनी  है
औरत: ठीक  है  पर जब अगली बार आओगी ना तो तुम  सबको खाना खाके ही  जाना पडे़गा
लड़की: हम्म
सबने हामी भरी और चले गए
लड़की ने  एक पल के लिए  अपनी माँ को  देखा फिर ऊपर   कमरे मे  चली  गई
औरत लड़की  को जाते  हुए देख रही थी फिर किचन मे  चली  गई
अमेरिका
एक लड़की की के हसँने की आवाजे गूंज  रही  थी दुपट्टा उड़  रहा  था
आचानक से रघु की  नींद  खुल गयी
रघु नींद से जागकर): ये  सब कब बंद होगा कौन  है ये लड़की  जो मेरे सपनो  मे तो है पर   जिदंगी मे नही    
क्यों  आती है ये लड़की  सपनो  मे कैसा  रिश्ता  है इसके साथ  मेरा 
रघु न घडी़ मे  नज़र डाली तो  उसमे  5:30 बज गए  थे वो उठा और  फ्रेश    होने चला गया
लगबग 6 बज चुके थे  रघु तैयार हो चुका था। रघु अपने कमरे से  बहार निकल  गया और  अपने  भाई के कमरे मे चला गया। उसने देखा की वो सोया हुआ है
रघु चुपके से उसके बगल मे जाकर बैठ  गया और उसके बालो को सहलाने लगा फिर  प्यार  से बोला : छोटे उठ जा
सुबह हो  गयी है पर सामने से कोई जवाब नही आया
रघु: उठ  जा सुबह  हो गयी  है इंडिया के लिए नही निकलना
कोई जवाब नहीं आया तो उसने अपने भाई को हिलाना  शुरू कर दिया
हिलने की वजह से उसकी नींद  खुल गयी
क्या है यार भाई सोने दो ना थोड़ी देर
रघु: मेरे लाल उठ जा
भाई सोने दो  प्लीज (करवत बदलते हुए )
रघु गुस्से  मे: सोये रहे कुम्भकरण की औलाद तू वीर नही कुम्भकर्ण है उठ जा कितना सोयेगा
वीर: भाई सोने  दो  मुझे थोड़ी  देर प्लीज ।।
रघु: ठीक है तु सो जा कुम्भकर्ण । हम  निकल रहे है तू यही  रहे
वीर: हाँ हाँ जाओ जाना है तो मै  यहि रहुगा गोरियो के बीच
रघु: गोरियो के बीच?
वीर: हा वहा  इंडिया मे कौन मिलेंगी  गोरिया जैसे  यहा मिल रही है
रघु (उसे  गुस्से मे देखकर): अच्छा
वीर: हा भाई आप जाओ  वैसे  भी आपको तो  यहा कोई   लड़की  पसंद नही  आयी है  सायद  इंडिया मे ही  आ जाए
रघु: लड़की .... तू भी ना लड़कियो   के अलावा तुझे   कुछ नही  दिखता
वीर: भाई यहा कितनी गोरी लड़किया है कितनी तो मुझपर फ़िदा है, कोई पागल ही होगे जो इन्हे छोड़ के जाएगा  मे  तो  नही  जाने वाला, वो दादी  कहती हे ना वो कौन से भगवान थे  जिनकी कई सारी गोपिया थी
रघु थोडी देर सोचने के बाद : हम्म्म वो कृष्णा शायद से  वीर: हा वोई मे तो वोही हूँ  कृष्ण और वो मेरी गोपीया जहा गोपीया वही  ​​कृष्ण यानी  मै यहि हूँ  अब जाओ सोने दो
रघु: तू भी ना पागलो जैसी  बाते करता है पता नहीं  क्या  होगा तेरा तू  कब  सुधरेंगा
वीर बड़बडा़ते हुए : हा हा खुद को तो  कोई  लड़की  पसंद आती नही   और दुसरे को आये तो उसमे  प्रॉब्लम है
रघु : कुछ कहा तुने
वीर : कुछ नही मै क्या  बोलुंगा बस इतना  ही कह रहा था की मुझे मेरी  गोपियों के साथ  रहने दो आप अपनी राधा खोजो क्योंकि गोपियों  मे तो आपको  कोई इंटरेस्ट नही है
(रोन वली सूरत बनाकर) आपके चक्कर  मे मेरी भी शादि नही   हो रही है
रघु: तेरी शादि बापरे बाप तू  कभी  नही  सुधरेंगा  तू सोया रहे मे  जा  रहा  हुँ   तू रह अपनी  गोपीयो के साथ
मै  जा रहा हूँ  इंडिया रघु कमरे के बहार जाने को हुआ
वीर (उठते हुए ): भाई कहाँ जा  रहे  हो
रघु: तुने  ही तो कहा जाओ यहा से
वीर: भाई मै  गोपीयो के बिना रह सकता  हूंँ पर आपके  बिना नहीं
रघु बिस्तर मे  बैठ गया
वीर: कृष्ण मे  नहीं आप  हो और मै आपका  छोटा बलराम हूंँ
रघु  उसकी  बात  पर मुस्कराया  और उसका सर सहलाते हुए  बोलाः  चल  बलराम तैयार हो जा
वीर: ठीक है भाई
रघु: हम्म
वीर: भाई एक और बात
रघु: हा बोल
वीर: भाई मेरे लिए अपनी  राधा को  जल्दी ढूंढ  लो क्योंकि   (उदास हो कर)  मुझे  भी  इसी  जन्म  मे शादि करनी है तो कृपया राधा को  ढूंढ लेना
रघु ( उसे  हैरानी से देखने लगा )
चल मे अपनी राधा  को   ढूंढ लुंगा तू तैयार  हो
वीर: ठीक है भाई
रघु हस्ते हुए   कमरे से बहार निकल गया
थोडी देर बाद
कहाँ  रह गए  सब जल्दी आओ   (रघु ने बोला)
एक कमरे से बुढिया  आयी: आ गए  बेटा
कहाँ   रह  गयी थी  दादी  आप
दादी: बेटा आ गयी  आ ​​गयी  जल्दी चलो हमारे देश हिंदुस्तान
रघु: दादी संभल के गीर जाओगी बुढापे मे भी चैन नहीं है
दादी : बेटा  बडी़ मुश्किल से तो तेरा बाप माना है फिर इरादा ना बदल दे । एक मिनट क्या कहा तुने  मुझे  मै बुढिया ?
रघु : हा तो ! (थोड़ा अटकते हुए ) आ .....प
दादी  बीच  मे बोलते हुए  : मै बुढिया  नही हूँ अभी भी जवान हूँ 
रघु उन्हें  हैरानी  से देखने लगा
दादी : ऐसे क्यों देख रहा है मै अगर अभी भी बहार निकलती हूँ  ना सब लोग मुझे ही निहारते है ( बालो को स्टाइल से पीछे  करते हुए ) और तुझे पता तेरे दादा भी मुझपर फि़दा हो गए थे । हुई मै इतनी सुन्दर अब गलती से भी मुझे बुढिया मत कहना
रघु दादी को हैरानी से देखने  लगा
पीछे  से वीर बोला: भाई आ गया
रघु का ध्यान टूटा उसने   पीछे  देखा तो वीर आ रहा था
रघु वीर को घूरके: कहा था तू कबसे तुझे बुला रहा हुँ । तू तो उठ गया था न  जल्दी फिर भी इतनी देर
वीर: भाई तैयार होने मे  समय तो लगत है ना
रघु: क्यो  लड़की है तू
वीर: क्या बोल रहे हो  यार मे  लड़का हूँ
रघु: तो  फ़िर
वीर: क्या भाई  जाना नहीं है
रघु: क्यु तेरी शादी मे जाना  है जो  तू इतना सज धज के आया है
वीर: क्या भाई जले मे  नमक  क्यों   छिड़क रहे हो शादी मे तो  पूरे  दो घण्टे लगाऊगा  तैयार होने  मे
रघु हेरानी से  उसे देखकर बोलाः  तो अभी क्या  तुने  दो घण्टे नही  लगाए
वीर: भाई  तैयार तो होना ही पडे़गा ना लड़कियो ओ  उप्प्स  मतलब  मेरी गोपीयो को आखिरी बाय तो  कहना पडे़गा ना
रघु: तो  तू सिर्फ  उन्हे बाय कहने के लिए  सजा है
वीर (बडी़  बेशरमी से): हाँ
रघु को समज नही आ रहा था की आज उसके परिवार वालो को क्या हो गया था
इसलिए उसने किसी को कुछ ना  कहने  मे ही भलाई  समझी
पीछे से दो लोगो की आवाज़ आयी
रंजना: चलो बेटा हम आ गए
राजेश: चलो सब गाड़ी  मे बैठो
माँ गाड़ी  मे जाकर बैठो और तुम दोनो भी
वीर: हा पापा और निकल गया
दादी: हाँ हाँ जल्दी करो निकलना है फ्लाइट मिस नही कर सकते
रघु: हा कबसे कह रहा  हूँ  चलो
सब दरवाजे से बहार निकल रहे  तभी  अभिनव आ गया।  अभिनव रघु का  सगा भाई  नही था राजेश जी को वो बहुत पहले मिला  था उन्होंने  अभिनव को अपना  नाम  दिया  था बेटे की तरह बडा़ किया था । ये भी  इन्ही के साथ फिर से इंडिया शिफ्ट हो रहा  था।
अभिनव : कहा रह गये सब
राजेश : आ रहे है
सब बहार  चले गये  सब गाड़ी  मे बैठ  गये और चल दिये नए सफर को
राजेश : इन बीस सालो मे कितना कुछ बदल गया मेरा यार न जाने  कैसा  होगा कभी बात ही नही हो पायी
रंजना : हा सही कह रहे है न जाने रश्मि और उसकी बेटी  कैसी  होगी
राजेश  :हमे तो गुडिया का नाम  भी नही पता और एक कमाल कि बात बताऊ
वीर  :क्या  पापा
राजेश  : रघु और मेरे यार की बेटी का जन्म  एक ही दिन  हुआ पर हमे अमेरिका  आना पड़ गया
रंजना : हमारा तो मन भी नही था आने का
वीर : फिर आप लोग  कैसे आए और क्यों आय
राजेश  : यहाँ  मुझे बडे़ बडे़  कॉन्ट्रैक्ट मिल रहे थे मेरे यार के कहने मे आया यहाँ  फिर कभी टाईम ही नही मिला वापिस  जाने का पर मेरे बेटो की वजह से आज जा रहा हूँ
वीर को उनकी बातो से बोरियत आ रही थी इसलिए उसने कानों मे हेडफोन लगा लिए
रघु आसमान को ही देखे जा रहा था वीर की नज़र गयी तो उसने हेडफोन निकालकर कहा: चाँद  को निहारना बंद करो
रघु सवालिया अंदाज  मे : चाँद !  चाँद कहा है  दिन हो रही है रात नही
वीर : तो फिर किसको देख रहे हो 
रघु : किसीको नही
वीर : अब आसमान मे गड्ढे करने है 
रघु : चुप बावले इंसान
वीर ओकए यार भाई  बोलकर गाने सुनने लगा
रघु आसमान  को देखकर मन मे : आज मुझे खुशी क्यों  हो रही है मै तो कभी इंडिया  गया ही नही हूँ  और न ही किसीसे मिला हूँ  ये सब पीछे  छुट रहा है फिर भी दुख नही हो रहा सब कुछ है मेरे पास  पर फिर  भी अधुरा
सा लगता है अकेलापन महसूस होता है ।
वो सब एयरपोर्ट पहुंँचे सबने समान उतारा और अंदर चले गए रघु को किसी का  कॉल  आया तो वो रुक गया
वीर के अंदर आते ही लड़कियो ने उसे घेर लिया
एक लड़की  : हाय हैंङसम  हमे छोड़कर कहाँ  जा रहे हो
वीर : तुम्हें  छोड़कर  कहाँ  जाऊँगा (दादी से) : देखा दादी कितना फेमस  हूँ  मे
दादी : नालायक तू कभी नही सुधरेगा रघु से सीख वो तेरे जैसा नही है वो तो सिर्फ  सीता से ही प्यार करेगा  तेरे जैसा नही हर किसी मे मुहँ मारता रहेगा ( वो आगे निकल गयी )
लड़किया वीर से बात करने लगी
वहाँ  रघु  एयरपोर्ट के अंदर आया  एक  लड़की ने उसे देख लिया वो और बाकी सब भी  उसके पास चले गए
वीर पीछे  से चीलाते  हुए  :कहाँ  जा रही हो मै यहा हूँ
वहाँ  लड़कियो ने रघु को घेर लिया
रघु :  कहाँ  फस गया कोई  बचाओ
लड़किया उससे बात करने लगी
एक  लड़की : कही नही जाने  देंगे  हम तुम्हें
दुसरी  लड़की : हा हेंडसम कही नही जाओगे
वीर वहाँ  आया : लड़कियों कृपया साइड हो जाओ
रघु आगे बड़ गया पीछे  से वो लड़किया उसे ही देखे जा रही थी 
वीर: क्या भाई थोडी़ देर मे नहीं आ सकते थे  लड़कियो को अच्छे  से बाय भी नहीं बोल पाया
रघु: लड़कियो के बच्चे छोड़ इन सब को और जल्दी चल
वीर: क्या भाई आपको देखते  ही  लड़किया  आप के  पास आ गयी कितना  सजा था मे इनके  लिए
रघु: अपनी  बकवास  बंद  कर और चल
वीर मू बनाते हुए आगे चला गया
उन लोगो ने चेक इन किया और फ्लाइट मे  बैठ गए
फ्लाइट मे
वीर: भाई वैसे आप कहाँ  रह गए थे
रघु: कुछ  नही  यार फोन आ गया था
वीर: किसका भाई
रघु: निशा का
वीर: निशा ... का .... ओह गॉड ये लड़की कब आपका पीछा  छोडेंगि चुडैल कही की
रघु: पता  नही  यार
वीर: क्या कह  रही थी
रघु: क्या बोल सकती है कह रही थी कैसे हो मैने कहाँ
  में बिजी  हूँ  बाद  मे  बात करता  हूँ
वीर: भाई आपने  बताया नहीं उसको कि  हम इंडिया जा रहे है 
रघु: मुझे  अपने  पैर मे कुहाडी़ नही  मारनी
वीर: थैंक गॉड वरना आपके  पीछे पीछे  आ जाती वहाँ  भी पीछा  नही  छोड़ती चुडैल और उसकी वो दोनों दोस्त
वो तो महाचुडैल है
रघु: हम्म
इंडिया मे
अंजली का घर
अंजली के घर मे झोर सोर तैयारिया चल रही है
अंजली की माँ: फूल कहाँ  है जल्दी लाओ
अंजली: माँ यहाँ
अंजली की माँ: बेटा लाओ लाओ जल्दी से
अंजली के पापा: सब तैयारिया हो गयी है
अंजली की माँ:  हाँ  बस अंजली के मामा आ रहे है अमेरिका से  अगर कोई अंजली चला जाता 
अंजली के पापा: अभी मुझे समय तो नहीं है
अंजली: कोई बात नहीं पापा मे हूँ  ना मे  ले आऊंँगी उन्हे एयरपोर्ट से
अंजली की माँ: बेटा तू कैसे
अंजली (बीच  मे बोलते हुए )  मे अकेले  नही जाऊँगी  अपनी दोस्त  को लेकर  जाऊँगी
अंजली की माँ: ठीक है
अंजली ने  लड़की को फोन किया
लड़की गाडी़  मे  बैठ कर कागज पलत रही थी
(उसका फोन बजा )
उसने बिना देखे फोन उठाया और कान मे लगाया 
लड़की: हाँ (पेज को पलतते हुए)
अंजली: सुन मेरी बात
लड़की: हाँ
अंजली: मेरे मामा आ रहे है लेने चलेंगे उनहे एयरपोर्ट
लड़की: ठीक है (फोन कट कर दिया)
अचानक से गाडी़ रूकी
सामने  राज की कंपनी का बोर्ड लगा था
लड़की गाडी़ से उतरी और अंदर कंपनी मे घुश गयी
कंपनी मे
पियून : सुनो मैम आ गयी है
सब अपना  काम करने  लगे
राज जी कॉन्ट्रैक्ट के पेपर देख रहे  थे
लड़की आफिस के अंदर   चली  गयी
स्टाफ: गुड मॉर्निंग मैम
लड़की (एक मुस्कान देकर): सभी को गुड मॉर्निंग
और सीधे केबिन मे  घुश गयी
लड़की (कुर्सी मे  बैठते  हुए ): मीटिंग कब  है
एक अदमी: मैम कुछ देर मे
लड़की: ठीक है
आदमी वहाँ से राज जी के केबिन मे  चला  गया

आदमी राज के केबिन मे  आकर (सर)
राज: आयशा आ गयी
आदमी: हा सर
राज: ठीक है अब  जाओ
आदमी वहाँ  से चला गया
थोड़ी  देर बाद आयशा केबिन से निकली और   कांफ्रेंस रूम मे जाकर मीटिंग  चालु कर दी
करीब   आधे  घंटे  बाद मीटिंग  खतम हुई  और  आयशा घर को निकल  गयी
आयशा (गाड़ी  मे बैठकर  अंजली को कॉल लगायी  )
अंजली ने  फोन उठाया: हाँ बोल
आयशा: अंजली कब आ रहे  है मामा
अंजली: कल फ़्लाइट लैंड  होगी
आयशा: ठीक है
अंजली: सुन शॉपिंग मे भी जाना है याद है ना
आयशा: हा हा याद है
अंजली : और आहना को भी लेके आना वरना हंगामा मचा देगी
आयशा: हा बाय
अंजली: बाय
थोड़ी  देर बाद कार रूकी
ड्राइवर: मैम हम पाहुँच गए
आयशा: हम्म (गाडी से उतर गयी)
सामने  एक बोर्ड था जिसमे  लिखा था
                      आर्ट इन मोशन ( Art in motion)
       ये आयशा और उसकी दोस्तो का इंस्टीट्यूट था
(एक बडा सा हाल जिसके कोने मे  काउंटर था  काउंटर से लगता एक दरवाजा था  जिसमे  काच का शीशा लगा   था वो कमरा काफी बड़ा डांसिंग रूम था।
उसी के पास एक  ओर बडा़ रूम  था जिसमें बहुत सारे   इंस्ट्रूमेंट रखे थे उसके करीब एक रूम ओर था या यु
कहे लाइब्रेरी थी  जहाँ  पर सब  टाइप की बुके रखी थी संगीत, खेल, विश्वकोश, कहानियां आदि)
आयशा ने  कुछ  देर उस बोर्ड को देखा  फिर आगे चली  गयी उसने दरवाजा खोला
तिया ने आयशा को आते हुए  देख लिया था आयशा काफी दिनो के बाद आयी थी
तिया (काउंटर के पास खडी हो कर): आयशा तू आ गयी
आयशा: हा कैसा चल रहा है सब
अनीता: मस्त है सब
तिया: हा सब ठीक है
आयशा: प्रिया और आहना कहा  है
तिया: प्रिया लाइब्रेरी मे  है और आहना  डांसिंग रूम  मे है
आयशा: प्रिया लाइब्रेरी मे है  (चौंकाने वाला अभिव्यक्ति दे कर)
अनीता: तुझे भी यकिन नही हो रहा ना हमे  भी नही हुआ  यकिन
आयशा: मै देखती हु रुको
तिया: हा जाकर देख वो किताब कैसे पड़ रही है
आयशा वही से  लाइब्रेरी की ओर  निकल गयी
लाइब्रेरी  मे प्रिया  एक किताब लेके बैठी है और ध्यान से  किताब को देख  रही  है
आयशा ने देखा की वो इतनी  मगन है पढ़ने  मे की  उसने आयशा को भी  नहीं  देखा आते हुए
आयशा: क्या ख़ज़ाना मिल गया इसको जो ये मुझे  भी नही देख रही
आयशा चुपके  से  उसके पीछे आयी और सर पे एक चपत लगायी
प्रिया (सर को मसलते ):  कौन है यार
आयशा: मै  हूँ
प्रिया: तू .. तू आ गयी
आयशा: ना अभी  आना बाकि है अभी आधी आयी हूँ
प्रिया: यार तू भी ना
आयशा: वैसे  क्या हो रहा है
प्रिया: मतलब
आयशा: क्या पढ़ रही  है  तू
प्रिया: मै  .. वो मै एक  किताब पढ़  रही हुँ
आयशा: अच्छा  मुझे  लगा  क्रिकेट खेल रही है! मुझे  दिख  रहा है
मेरा मतलाब है कोनसी किताब पढ़ रही है
प्रिया( हसते हुए ): मै ना लड़को को इम्प्रेस करने वाली बुक पढ़  रही हूं
लड़को को लड़किओ मे  कौन  सी चीजें  पसन्द है वो ...
आयशा  गुस्से  मे: यहि किताब मिली  है पढ़ने को और कोई नहीं है क्या
प्रिया: तू गुस्सा  क्यों  हो रही है यार तू तो लड़को को भाव नही देती​​(आयशा को देखते हूए) और मुझे भी ........ (आयशा का गुस्से  वाला चेहरा देख कर चुप हो गयी)
आयशा: अब ये सब हो गया हो तो   तू भी  कुछ काम कर ले
प्रिया किताब हो एक साइड मे रख कर: हाँ हाँ
प्रिया मू बनाते हुए : खूद तो किसी लड़के को भाव नही देती मुझे  भी नहीं देखने देती
आयशा: कुछ कहा  तुने
प्रिया (मू लतका कर ) : नही कुछ नही
(मन मे बोलते हुए ) एसी मझाल किसकी जो तेरे सामने  कुछ  बोल पाए शेर भी तेरे सामने भीगी बिल्ली  बन जाए
आयशा:  अब कुछ काम कर ले  ये फ़ालतू की किताब पढ़ना बंद  कर
प्रिया मू लटाके बहार चली गयी
आयशा ने कुछ देर तक वो किताब देखी फिर साइड मे फेक दी: बकवास बुक
प्रिया उदास मन से बहार आयी उसने देखा सब उसपर हसँ रहे  थे
प्रिया सबको देखकर चिड़ते हुए : क्या है क्यों देख रहे हो ऐसे
तिया: हमने कहा  था मत पढ़  किताब अगर आयशा ने देख लिया तो तू गयी
प्रिया (उदासी से  ) हाँ हाँ यार रहने दो तुम लोग बता नहीं सकते थे तुम लोग
अनीता उसे आंखे दिखाते  : जैसे हमने बोला नहीं
प्रिया: तूने  ये क्यों  नही बताया कि वो आ गयी है
तिया: हम कैसे  बताते यार हम सब यहा थे
प्रिया: हाँ हाँ तुम सब रहने  ही दो  अब
पीछे से आवाज आई: तुम लोगो को टाइम पास करना ही आता है  आयशा ने बोला
चलो सब डांस की तैयारी करने सबने  डांस की प्रैक्टिस शरू कर दी
शाम के 5 बजे
हायै राम ठक गयी मे  कमर पीड़ हो गयी  मेरी
तिया: हा यार प्रिया मै भी ठक  गयी
अनीता: पानी पास कर ना
तिया ने अनीता को पानी पास किया
आहना पसीना पोचते हुए: मुझे भी देना
प्रिया: हाय आयशा ने तो मेरी कमर  तोड़  दी, अंजली बच गयी यार
अनीता: हा यार
आयशा बहार आती हैं: चलो अब घर चलते हैं
प्रिया (बैठे  बैठे अपनी कमर मे हाथ रख कर ) हाँ यार चलो घर कोई  हाथ  देकर उठा दो 
आयशा: तू कितनी नौटंकी करती है यार
चल चुपचाप  उठ जा
प्रिया: आआआहह बहोत दर्द हो रहा है मेरी  माँ
आयशा: तू उठ रही है या नहीं
प्रिया:  हाथ  तो देदे  उठाने के लिए
आयशा: अच्छा  तो  तू नही  उठ  रही मतलब
तिया अनीता के कान मे :   अब देख इसकी नौटंकी खतम कैसे होती है
दोनो फुसफुसाते हसँ पडे़
प्रिया: अरे यार कहा  से मिल गई ऐसी झूलमी दोस्त
आयशा: झूलमी दोस्त को बच्ची  उठ जा वरना
प्रिया बड़बडा़ते हुए : हिटलर कही तू दोस्त नही हिटलर है
आयशा: जरा जोर से बोल क्या बोल रही है
प्रिया (दर्द  मे करारते हुए ):  कुछ  नही यार
आयशा : अब उठ जा वरना कमर मे एक जोर की लात मारऊगी
प्रिया ये  बात  सुन कर सीधे  खडी़  हो गयी
चलो चलो घर चलो
सब हसँने लगे
सबने एक दुसरे को बाय बाय बोला और अपने घर को निकल गए
आयशा और आहना भी घर पहुँचे आहना अपने कमरे मे  चली गयी
आयशा सीढिय़ो मे चड़ कर अपने कमरे  की तरफ  बडी़  रास्ते मे उसकी नज़र कमरे की तरफ गयी वो वही रुककर चटकनी को देखने  लगी
थोड़ी  देर बाद उसने हिम्मत  करके वो चटकनी  खोली और कमरे मे  चली  गयी । वो उस कमरे की हर चीजों को ध्यान  से देखने लगी उसकी नज़र एक फोटो मे गयी उसने वो फोटो हिम्मत करके उठायी ओर कुछ देर तक देखती रही उसकी आँखो मे आँसू आ गए और वो सब याद आने लगा
आयशा दर्द भरी अवाज मे: बहुत मिस करती  हूँ आपको क्यों  किया ऐसा
क्यों  !!!!!!!!!!!!!!
पढ़ने के लिए धन्यवाद
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कसम तेरे प्यार की
(तान्या गौनियाल)
हर हर महादेव

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