तेरे प्यार की कसम - 3 in Hindi Love Stories by Tanya gauniyal books and stories Free | तेरे प्यार की कसम - 3

तेरे प्यार की कसम - 3

वीर ने जिस लड़की को तक्कर मारी थी वो और कोई नही आहना थी  आहना सड़क मे गिर गयी उसके सर मे चोट लगी वीर ने गाडी़ रोकि और सब बहार निकले
राजेश (वीर से ) : क्या करता है ध्यान रहता है तेरा
वीर : सॉरी पापा
सबने आहना  को उठाया 

राजेश : बेटा तुम ठीक हो 

आहना : हाँ अंकल जी मै ठीक हूँ


रंजना पानी देते हुए : बेटा पानी पीलो

आहना ने पानी पीया
दादी वीर से : कहा ध्यान  रहता है  तेरा


रघु : हा छोटे देख कर चलाना चहिए ना
वीर मू लटका कर : सॉरी
रघु: सॉरी हमसे नही  इस लड़की से बोल
वीर (आहना से):  सॉरी
आहना ने उसे  घूरके देखा उसका   दिल तो कर रहा था कि उसका मू तोड़ दे पर वहा पर बडे़ भी थे इसलिये चुप हो गई

आहना (भुझे मन से ): हम्म


राजेश : बेटा तुम ठीक हो ना
आहना : जी अंकल जी ठीक हूँ मै 
रघु (आहना से): तुम इस चोट मे  पट्टी लगा देना
आहना : हाँ लगा दूंगी अब मे चलती हूंँ

दादी : बेटा संभलके जाना
आहना : हाँ (वो वहा से चली गयी )


राजेश गुस्से मे  वीर से : दिखाई नहीं   देता क्या कहा ध्यान था अगर उसे कुछ हो जाता तो क्या करते हम
दादी: संभल के नहीं चला सकता
रंजना : बेटा ध्यान  से चलाना चाहिए
वीर सर निचे करके : सॉरी वो मेरा ध्यान उस बीच मे  चला गया कितना अच्छा  है
राजेश : अच्छा  हुआ उस बच्ची ने पुलिस  मे शिकायत नहीं करी वरना प्रॉब्लम मे पड़  जाते चलो अब बैठो गाडी़ मे रघु तुम चलाओ गाडी़
रघु वीर से :  छोटे जा पीछे बैठ जा
वीर उदास मन से : हम्म

रघु : उदास मत हो  है धयान रखा कर
रघु ड्राइविंग सीट मे बैठ  गया थोडी़ दूर जाकर उसने गाडी़ रोक दी


वहा पर एक बड़ा सा बंगला था एक गार्डन, गार्डन मे जो गमले थे उसमे सुंदर पेंटिंग बनी थी जिसमें  कलाकारी की गयी थी हर तरफ फूल थे कई गुलाब के फूल तो कही चमेली के  इतना खूबसूरत बगीचा थां वो उसी के पास वहा टेबल और कुर्सी रखी थी
सब कार से बहार निकले
रघु के सात सात  सब उस बगीचे की खूबसूरती मे खो से गए
रघु : कितना खूबसूरत है
वीर: हाँ भाई सच मे कितना खूबसूरत है
राजेश ने उस पेंटिंग को देखा जो गमले मे बनी थी : वाह कितनी अच्छी  पेंटिंग की है
कितन सालो के बाद आये है सब  कुछ बदल गया उनकी आंखे नम हो गयी
रंजना : हाँ  सही के रहे आप
उस घर से एक औरत बहार निकली
औरत उन्हें देखके हैरान हो गयी कुछ देर तक वो सोचती रहे गयी फिर उसे याद आया  औरत अनके पास गयी
औरत : आप लोग इतने  सालो के बाद  कैसे है आप सब

रंजना ने उसे देखा और झटके से गले लग गयी : रश्मि कैसी है तू
रश्मि: मे ठीक  हूँ तू बता मुझे याद भी नही किया तुने इतने सालो मे 

रंजना : नही  यार मैने  तुझे बहुत मिस किया

दोनो की आंँखो मे नमी थी वो दोनो अलग हुए
राजेश: कैसी है आप
रश्मि: मै ठीक हूँ आप बताओ
राजेश: मेरा यार कहा है
पीछे से अवाज आई : मै यहा हूँ
राजेश जी की आँखों मे नमी आ गयी वो ओर किसी का नही आयशा का ही घर था राज की आंखे नम हो गयी
राज और राजेश ने एक दुसरे को गले लगाया
राज: कैसा है तू अमरीका जाके हमे भूल गया
राजेश : माफ़ करदे अब कभी  जाऊंगा
दादी: हा हा अब तुम लोगो का भरत  मिलाव हो गया हो तो तुम  मुझे भी देख लो
राज : दादी कैसी हो रश्मि ने भी पूछा 
दादी : मै ठीक हूँ तुम दोनो कैसे हो
राजेश : हमारी गुडिया  कैसी है
राज : अब बडी़  हो गयी है ये सब कलाकारी उसीने की है
राजेश : वाह ये सब हमारी गुडिया ने की है
राज: हा और तेरा बेटा
राजेश रघु  वीर और अभिनव को पास बुलाया
ये है मेरा सबसे  बडा़  बेटा अभिनव
राज : वोई ना जिसका जन्म मेरी बेटी के साथ हुआ
राजेश : ना वो तो रघु है  और ये मेरा सबसे छोटा है और शरारती बच्चा वीर सब पाओ छुओ और वीर तू भी
सबने पैर छुए
रश्मि: चलो सब अंदर चलो
सब चले गए रघु ने एक पल के लिए बाग को देखा : कितना खूबसूरत सजाया है
फ़िर अंदर चला गया  सबर जाकर सोफे मे बैठ गए
रश्मि : मै सबके लिए चाय लेकर आती हूँ
रंजना : मै भी आती हूँ (दोनो किचन की तरफ चले गये)
वीर : मै घर देखेंने जाऊ
राज: अरे  क्यों नही बेटा जाओ
वीर अभिनव और रघु को भी वो पकड़कर  ले गया

रघु : क्या कर रहा है यार तू हमे क्यों  लायाअभिनव : हाँ और एसे कौन करता है 


वीर : उन बुड्ढो के बीच बैठकर  पकना नहीं है यार
अभिनव: ये क्या लैंग्वेज है बुड्ढो
वीर: यार अब  तुम शुरू मत हो जा
वीर बड़बडा़ते हुए  छट की ओर निकल गया
और वो दोनो भी चले गये पीछे  पीछे
वीर: वाह भाई यहा से कितना अच्छा नजारा दिखता है मजा आ गया
रघु (उस नजारो को देखकर): हा सच मे बहुत हसीन है
अभिनव भी  चारो तरफ घूम रहा था
वीर : भाई वो देखो ये तो वोई  बीच है यहा से दिखता है
रघु : हाँ कितना अच्छा  है न सब कुछ यहा रात को मज्जे आते होगे चारो तरफ पेड़ पौधे और बीच का सीन
वो आती जाती हवा को अपने चेहरे मे महसूस करने लगा
वहा पर
राजेश : हमारी गुडिया का क्या नाम है
राज: आयशा और आहना
राजेश : अच्छा दो बेटिया है तुमको
राज : हाँ
राजेश कुछ देर सोचते हुए : आयशा  .. कही वो तो नही जिसने हमारी मदद करी
दादी : आयशा ने तो हमारी मदद करी
हमे तो पता  ही नहीं था कि वो हमारे  घर की बेटी है
राज : मदद की

दादी ने सारी बात बता दी
दादी :  वो ही  ना जिसने आज पीला  सूट पेहना है

 

राजेश : हा बहुत प्यारी बच्ची है


राज: हा आज सुबह एयरपोर्ट गयी थी अपनी दोस्त अंजली के मामा  को लाने
राजेश: अच्छा  बहुत प्यारी बच्ची  है कहा है वो
राज: वो आपनी दोस्त के घर मे है दोस्त की शादि है,न
राजेश : अच्छा
दादी मन मे : काश आयशा हमारे घर कि बहू बन जाये रघु के लिए सही हैं
बहार से आहना भी आ गयी
आहना ने देखा के ये तो वही परिवार है  जिसकी गाडी़ उसका एक्सीडेंट हुआ था वो अंदर आयी
राज : बेटा आ गई ( राज ने देखा उसके सर से हल्का सा खून निकल रहा है )
राज घबराहत से सोफे से उठकर उसके पास आए : बेटा तुम्हें  क्या हुआ ये चोट कैसे लगी
आहना : कुछ नहीं हुआ  पापा
राजेश : हमारी गाडी़ से  तक्कर हो गयी थी
राज : बेटा ठीक होना इसमे बैंडेज लगा लो
आहना : हा पापा

राज : इनसे मिलो ये है मेरे बच्चपन के दोस्त ये इनकी माँ यानि तुमहारी दादी


आहना ने राजेश और दादी के पैर छुए
राजेश: जीती रो बेटा
दादी: खुश रहो (सब अंदर चले गए)
तभी  वहा पर रंजना  और रश्मि चाय लेके आये
रश्मि ने अहाना को देखा : अहाना तू आ गयी
आहना : आहना
रश्मि ने देखा के उसके सर से खून निकल रहा है वो उसके पास गयी : बेटा ये खून कैसे निकला

आहना : कुछ नही  हुआ माँ  चिंता मत करो मे बैंडेज लगा दूंगी


रश्मि: हा बेटा जाओ बैंडेज लगा लो
रश्मि ने सबको चाय दी और चाय का कप लेकर ऊपर ले
जाने लगी
आहना: माँ ऊपर किसके लिए ले जा रही हो
रश्मि : ऊपर बच्चे है
आहना : मै ले जाती हूँ
आहना ने रश्मि से ट्रे लेकर ऊपर  निकल गयी
रश्मि  हाँ बोलकर  बाकि सब के साथ बैठ गयी
राजेश राज से: बहुत अच्छे  संस्कार दिए है तुने हमारी दोनो गुडिया  को
राज : बस भगवान का करम है जो इतने अच्छी  बेटिया मिली है
दादी : दोनो ही प्यारी है
वहा आहना ऊपर आयी
आहना ने वहा पर वीर को देखा तो गुसा आ गया
आहना उसकी तरफ़  गयी और गुस्से से बोली: तुम ... तुम यहा क्या  कर रहे  हो

वीर और बाकि सब ने उसकी तरफ देखा


वीर : तुमम!
आहना : हा मै तुम ये छोडो़ तुम बताओ यहाँ क्या कर रहे हो
वीर: मै यहा अपने परिवार के साथ आया हूँ
आहना: वो तो मुझे दिख रहा है अंधे
वीर: तुमने मुझे अंधा क्यों कहा 
आहना : क्योंकि  तुम्हें  दिखता नही है गाडी़  चलानी नही आती तो  क्यों चलाते  हो
वीर : 😑 मुझे आती है गाडी़  चलानी तुम्हें नहीं आता और अंधा मे नही तुम हो
रोड मे देखकर चलना नही सीखा और बडी़  आई बोलने वाली
आहना गुस्से मे : मै सही चल रही थी तुम्हें  ही एक जिंदा लड़की आते हुए नही दिखी अंधा
वीर (गुस्से मे ) ज्यादा मत बोलो
आह : तुम मत बोलो वरना तुम्हारा मू तोड़  दूंगी
वीर : तोड़ के दिखाओ
आहना : देखो मुझे गुस्सा मत दिलाओ वरना सच मे मू तोड़  दूंगी
वीर: हाँ हाँ हाथ लगाके दिखा मोटी कहिकी
आहना : मोटी किसको बोला
वीर: तुम्हें मोटी सारा राशन पानी तुम ही खा देती होगी,
आहना: तुम्हारा  खाती हूँ नही ना तो तुम चुप रहो और ...
वीर बीच मे : नही रहुगा
आहना : तुम सॉरी बोलने की वजा झगड़ा कर रहे हो बद्तमीज़ हो तुम
वीर : तुम्हारे अंदर तो बहुत तमीज है बंदरिया जैसी शकल वाली
आहना उसे घूरके : बंदरिया मै  नहीं तुम हो बंदर मार डालूंगी
वीर: हो तुम बंदर जैसी शकल वाली
रघु: तुम दोनो शांत हो जाओ
वीर और आहना उसे देखकर :  मै क्यों इससे बोलो शांत होने को  (रघु चुप हो गया)
वो दोनो एक दुसरे को ऐसे घूर लाहे थे जैसे पुराने जन्म के दुशमन हो
आहना: अक्कडू कहीका गलती करता है सॉरी भी  नहीं बोलता
वीर : अब क्या करू उस वक़्त सॉरी कह दिया था ना
अहाना: अब ज्यादा कुछ बोला ना तो मू तोड़  दूंगी
वीर आगे बड़ते हुए : हाथ लगा के दिखाओ  छिपकली
आहना : छिपकले चुप हो जा
अभिनव रघु  के कान मे : इन दोनो के चक्कर मे चाय ठंडी हो जाएगी
रघु: हाँ  दोनो के चक्कर मे चाय ठंडी हो गयी
अभिनव : तू मांग कर देख
रघु  उसे देखके : मै
अभिनव: हा यार तू मांग
रघु हल्की सी अवाज मे : सुनो ये चाय देदो फिर झगड़ा करती रहना  (आहना ने नही  सुना)
अभिनव : जोर से बोल
रघु बडी़ हिम्मत करके जोर से  : चाय देदो
आहना का ध्यान गया तो वो कबसे चाय कि ट्रे लेके खडी़  थी उसने रघु  और  अभिनव के चाय  देदी और बहार जाने लगी
वीर: ओह्ह छिपकली मेरी चाय
आहना : छिपकलो  को चाय नही मिलती
वीर : छिपकली चाय दे वरना
आहना  उसे घूरके : वरना क्या
वीर आगे बड़ते हुए : वरना मुझे ओर भी तरिके आते है
आहना  को उसपर बहुत तेज गुस्सा आया : अभी बताती हूँ  इसको
आहना चाय का कप आगे करके : ले छिपकले चाय
वीर: छिपकली डर गयी
आहना मन मे : डरे मेरी जूती

आहना ने चाय का कप आगे किया जैसे वीर उसे  पकड़ने को हुआ वैसे ही आहना ने कप गीरा दिया

आहना (वीर से): क्या हो गया हाथ मे दडा़ (ताक़त) नहींहै
वीर: तुमने जान भुज के ऐसा किया ना
आहना : मैने क्या किया मै तो दे रही थी तुमने ही नहीं पकडा़ 
वीर: तुम्हे मै बताता हूँ छिपकली (वो आगे बड़ने लगा)
आहना: छिपकले बताती हूँ

आहना भी आगे बडी़  इससे पहले वीर कुछ कर पाता उससे  पहले आहना ने उसके पेट पर मुक्का मार दिया वो पेट पकड़के नीचे बैठ गया


वीर: हाय राम छिपकली इतना तेज कौन मारता है मर गया मै
आहना : मुझसे पंगा  लोंगे ना तो ये ही मिलेंगा अभी तो  हल्के से मारा है पेट मे अगर ज्यादा मुझसे पंगा लोगे ना मू तोड़  दूंगी तेरा छिपकले बद्तमीज़ (वो वहा से चली  गयी)
वीर नीचे बैठा बैठा दर्द मे करारते हुए : हाय इस मोटी ने  छिपकली ने कितना जोर से मारा
पीछे वो दोनो हँसे जा रहे थे वीर ने उनको देखा फिर बोला
वीर (दर्द मे बोलते हुए ) : क्या यार आप दोनो हस रहे हो
रघु : तूझसे  किसने कहा था उससे  पंगा ले
वीर: गलती हो गयी आआआह बहुत दर्द द हो रहा है
वो दोनो फिर हसँने लगे (वीर चिड़  गया)
आहना नीचे आयी
राजेश  : बेटा सबको  नीचे बुला  लो
आहना : ठीक है अंकल जी ( ऊपर चली गयी )
राजेश : अच्छा राज अब हम चलते है
राज: इतनी जल्दी नही यार खाना खाकर जाओ
राजेश: नहीं यार कल खाना अब घर का और ऑफिस में काम करना है
राज: ठीक है पर कल जरूर आना
राजेश: हा पक्का
आहना ऊपर आई
आहना: लंगूर नीचे बुला रहे है (चलो रघु और अभिनव जाने लगे )

रघु वीर से : चल वीर उठ जा
वीर : भाई उठा दो ना


रघु: खुद उठ
रघु और बाकि सब चले गए
वीर: आआ सब छोड़के चले गए   खुद ही उठना पडे़गा
वो उठा और पेट को पकड़के  नीचे आ गया
वहा सबने जाने की तैयारी   कर दी थी सब बहार निकले
राजेश ने वीर को देखा : क्या हुआ तुझे हाथ पेट मे क्यों रखा है 
वीर ने एक पल आहना को घूरके देखा आहना भी उसे  घूरके देख रही थी
वीर आहना को घूरके देखते हुए : कुछ नहीं पापा
अहाना भी बड़बडा़ते लग गयी  :छिपकला लंगूर कही का
आहना : ठीक है चलो अब घर
सब ने एक दुसरे को बाय कहा  और गाडी़  चल निकली अभिनव गाडी़ चला रहा था
वीर रघु से : उस छिपकली को छोडुगा नही 
रघु हँसी रोकने कि कोशिश करते हुए : सुन उससे पंगा ही क्यों  लिया सॉरी बोल देता  गलती तेरी थी
वीर : तो इतना जोर से मारने क्या जरूरत थी उस छिपकली को  हाथ है या हथोडा़
वो सब घर पहुचे सब अपने कमरे मे चले गए
रघु भी अपने कमरे मे चला गया

रघु फ्रेश होके आया फ़िर वो चुन्नी को देखने लग गया उसने वो चुन्नी हाथ मे  ली और खिड़की के पास चला गया  और चाँद को देखने लगा


वहा अंजली के घर मे
आयशा और बाकि सब ने ।खाना  खत्म किया
आयशा : अच्छा आंटी  अब मे चलती हूँ
अंजली  की माँ : ठीक है बेटा संबल के जाना
आयशा : गाडी़  भेज दी है पापा ने
अंजली की माँ : अच्छा
उसने सबको बाय कहा  और गाडी़ मे बैठ गयी
घर पहुँचके
वहा सब खाना  खा रहे थे
आयशा अंदर गयी,
रश्मि: बेटा आ गयी तू
आयशा : हा माँ
आहना : दी खाना खा लो
आयशा : नही मे  खाके आयी हूँ अहाना तुझे कल जाना है जल्दी सो जाना
आहना: ठीक है
आयशा कमरे मे आ गयी और फ्रेश होके चाँद को देखने लगी अहाना वहा पर आई
आहना : दी आपने पैकिंग कर ली
आयशा चाँद को देखते हुए : नही मै  नहीं आ रही हूं
आहना : क्यों  दी
आयशा : मेरा मतबल है कि मै  कुछ दिन  बाद आऊंँगी
आहना : पक्का ना
आयशा उसे देखते हुए : हा हा पक्का
आयशा ने नोटिस किया किया कि उसके सर मे बैंडेज लगी है
आहना: दी आपको पता है आज
जब तक वो बोलती आयशा ने उसे पकड़के घबराहट से  बोली : ये कैसे हुआ
आहना :  ये कुछ नही हुआ दी
आयशा: बता ना कैसे लगी
आहना: दी वो कार से एक्सीडेंट हो गया
आयशा : का ..र से कैसे कब तुने मुझे क्यों नही बताया
आहना: दी दी शांत हो जाओ बताती हूँ सब
उसने आयशा को बिस्तर मे बिठाया
आहना: दी आज मै जब बहार गयी थी तो एक कार से एक्सीडेंट हो गया
आयशा कुछ बोलने को  हुई तबही अहाना ने  बोला
आहना: दी चिन्ता  मत करो  छोटी सी चोट आयी और इसमे मैने  बैंडेज लगा दी और आपाको पता  है मैने बदला  भी ले लिया छिपकले से
आयशा : बदला? छिपकला कौन?
अहाना : अरे आपको पता है आज पापा के दोस्त आय थे और वो छिपकला भी  उन्हीं का  बेटा था जिसने एक्सीडेंट किया
आहना : अच्छा
आहना : हा और तो सुनो मैने ना उस छिपकले को मुक्का मार दिया
आयशा : अच्छा
आहना: हा पेट मे मार  दिया मुक्का
दोनो ने कुछ देर ऐसे ही बाते कि  फिर सोने चले गये
वहा रघु भी सो गया था
सुबह आहना और आयशा  ने  नास्ता किया और निकल गये अंजली  के घर को
वहा रघु और वीर भी निकल गये अपने ऑफिस के लिऐ
पर उन्हें रास्ता तो पता नही था इसलिए वो गलत रास्ते मे निकल गए

वहा आयशा और आहना को रास्ते मे  प्रिया  मिली आयशा आहना कार से उतरे और प्रिया से बाते करने लगे


उसी दौरान  वहा रघु और वीर गाडी़ मे थे  रघु फोन मे अभिनव से रास्ता पुछ रहा था : वीर गाडी़ रोख
वीर ने गाडी़ रोकी वो दोनो नीचे उतरे
वीर : क्या हुआ भाई
रघु : लगता है हम गलत रास्ते  मे है अभिनव कुछ  बता
वहा प्रिया आयशा और आहना बात कर रहे थे
प्रिया : आयशा जल्दी आ जाना
आयशा: हा हा आ जाऊँगी
आहना की नज़र वीर पे गयी

आहना आयशा से : दी वो है वो छिपकला
आयशा ने जब वहा देखा तो रघु वहा अभिनव  से बात कर रहा था  और वीर उससे कुछ दूर एक सबजी वाले से आहना पूछ रहा  था



आयशा ने रघु   को देखा : अभी बताती हूँ इस  लंगूर को


वो वहा जाने लगी
आहना: दी आप कहा जा  रही हो
आयशा : उस लंगूर यानी छिपकले के पास
आहना : दी रहने  दो हमे देर हो गई है
आयशा : क्यों रहने दु अभी बताती हूँ उसे
आहना और प्रिया गाडी़ मे बैठ गयी
प्रिया: कौन लंगूर किसके पास गयी  है वो
आहना : लंगूर नहीं छिपकला उस छिपकले ने मेरा एक्सीडेंट किया
वहा आयशा  रघु के पीछे खडी़  थी
आयशा (दोनो हाथ कमर मे रखके और उसे घूरके): छिपकले  मेरी बेहन का एक्सीडेंट करता  है अभी बताती हूँ
आयशा ने उसकी भाजुए पकड़ी और अपनी तरफ खींचा 
रघु कान मे से  फोन हटाकर उसे हैरानी से देखने लगा 

आयशा उसे घूरके : क्यों  रे छिपकले गाडी़  चलानी नही  आती अंधा  है  दिखता नही  है , एक जिंदा लड़की  को तक्कर मार दी  छिपकला कहिका फिर झगड़ा भी कर रहा है । रघु सिर्फ उसे हैरानी से देखता ही रह गया और आयशा वहा गाडी़ मे बैठ गयी  
फोन मे कबसे अभिनव बोले जा रहा था


अभिनव :  कहा है तेरा ध्यान रघु 
रघु ने फोन कान मे  लगाया: हा बोल
अभिनव : क्या हुआ कौन थी वो लड़की
रघु (सोचते हुए) : पता नही यार छिपकला और ना जाने क्या क्या कह रही थी
अभिनव : वो तुझे नही वीर को कह रही होगी याद है कल वाली बात शायद वो उसकी बहन थी
रघु को कल वाली बात याद आई : अरे हा पर वो लड़की तो नही थी कोई ओर थी
अभिनव :  तु ये सब छोड़ जल्दी ऑफिस आ

रघु ने फोन कट कर दिया वो आयशा की गाडी़ देखने लगा वहा पर वीर आया : भाई क्या कह रही थी हमारी भाभी


रघु गाडी़  को देखते हुए : छिपकला
वीर : छिपकला? क्यों
रघु का ध्यान टुटा : मतलब वो कह रही  थी  गाड़ी चलानी नही  आती
वीर : वो क्यों  के छिपकला बोल रही  थी वो तो कोई ओर थी  जिसने मुझे छिपकला बोला इसका मतलब कल हम भाभी के घर गए थे
रघु: भाभी ?   भाभी क्यों बोल रहा है
वीर: क्योंकि ये  वोही  लड़की है जो आपने एयरपोर्ट मे देखी थी और आप इनके दिवाने हो गए थे
रघु: क्या सचमे तबही मे कहु एक अलग सा एहसस क्यों  हुआ ( वो उस तरफ दौड़ पडा़ )
वीर (पीछे से): भाई ऑफिस नहीं चलना
रघु: तू जा मै  नहीं आ रहा
वीर : क्या भाई
गाडी़ मे  आयशा आहना से हसते हुए : मै भी उसे छिपकला  बोलके आ गयी
आहना : सही करा

आयशा: फोन मे  बात कर रहा था  मैने  सुना दिया उसको आहना हैरानी से  देखके : दी आप किसको बोलके आ गयी


आयशा :  उसे जो फोन मे बात कर रहा था

आहना : दी वो नहीं था जो सबजी  वाले से बात कर रहा था वो था


आयशा : क्या  ! क्या है यार  तुने ही तो कहा था कि जो वहा पे खडा़ था
आहना : दी क्या  कर दिया
प्रिया : जो उसने किया वो छोडो़ उधर देख  (रघु   रोड पार करके आ रहा था )
आयशा घबराहट मे : अब क्या करू मे
आहना : क्या करे क्या कुछ नही कर सकते
आयशा: यार
आहना: दी  वो नही था वो उसका भाई है
आयशा नाखून चबाते हुए : पहले बताना चाहिए ना अब क्या करे
प्रिया: क्या करे क्या (ड्राइवर से) जल्दी चलाओ गाडी़
ड्राइवर ने कार स्टार्ट  कि और चल निकला
वहा रघु पीछे  से चिलाते हुए : ओ  सुनो रुको

वहा एक ऑटो आया वो उसमे बैठकर  निकल गया वीर पीछे से :  भाई ऑफिस नही जाना  क्या


रघु ऑटो से सर निकालके : तू जा मै तेरी भाभी के पास जा रहा हूँ
वीर: क्या मुसीबत है यार ये भाई की आशिकी
वीर वहा  से पैर  पटकता  हुआ गाडी़ लेकर  निकल गया
रघु ऑटो से सर निकाल कर : ओ  रूखो सुनो गाडी़  रोको
गाडी़ मे
आयशा: थैंक्यू गॉड मुसीबत टली,
प्रिया: मुशीबत टली नही वो देख पीछे आ रही है पीछे देख ( आयशा ने सर निकाल कर पीछे  देखा तो रघु चिला रहा था: रूको तुमसे कहा रहा हूँ रूको
आयशा : क्या मुसीबत मे फस गयी मै तेरी वजा से
आहना: क्या दी मैने तो बोला  नही था आपको कि जाओ सुनाके आओ
आयशा उसे घूरके : एक तो तेरी वजह से ये सब हुआ 
प्रिया : तुम दोनो लड़ना बंद करो और कुछ भी करो इस मुशीबत से पीछा छुडा़ने के लिए
आयशा नाखून चबाते हुए : क्या सोचु कुछ समज नही  आ रहा (दोनो हाथो से जोड़कर ऊपर की तरफ देखकर: है भगावान बचा ले है शिवजी बचा लो प्लीज
आहना ड्राइवर से : अंकल जी गाड़ी तेज चलाओ प्लीज ड्राइवर ने गती तेज कर दी

पीछे रघु चिल्लाए जा रहा था गाड़ी चलाओ 
रघु ऑटो वाले से : भाई जल्दी चलो ना क्या बैलगाड़ी की तरहा चला रहे हो  सारी गाडी़ आगे निकल गयी है


ऑटो वाला : साहब अब इससे ज्यादा गती नहीं चला सकते  अगर  चलना है तो  इतने मे ही चलेगा वरना आप गाडी़ से उतर जाइए 
रघु: अच्छा अच्छा चलाओ  पर थोड़ा तेज
रघु मन मे : आज मे तुमसे मिल कर रहुगा
गाडी़ तेजी से चलने लगी जिस वजह से रघु पीछे रहे गयी गाडी़  अंजली के घर  जाकर रूकी सब गाडी़  से निकले

अंजली : कहा रहे  गए थे तुम लोग
आयशा: आ गए


वहा पर अनीता तिया और बाकि सब थे  सबने एक दुसरे को गले लगया और वैन मे वो बहुत बडी़  वैन थी  जिसमे अंजली अंजली के  करीबी और उसके दोस्त जा रहे थे
अंजली  : आयशा जल्दी आ जाना देर मत करना 
आयशा: हाँ हाँ आ जाऊगी तेरी शादी से पेहले ही
अंजली : मै  कोइ फंक्शन तेरे बीना शुरू नहीं करुंगी समझले
आयशा: ठीक है ठीक है
वैन स्टार्ट हुइ और  चल दी
आहना  वैन से सर निकालकर : बाय दी जल्दी आना
आयशा

: बाय अपना ध्यान

आहना : हम्म  (वैन निकल चुकी थी )


आयशा गाडी़ मे बैठ गयी : अच्छा हुआ बच गयी मे वरना ना जाने वो लड़का मुझे क्या क्या  सुनाता
आयशा ड्राइवर से: चलो  कैफे ले चलो
ड्राइवर: जी मेमसाहब
वहा पे रघु ने ऑटो रोका
रघु ऑटो से निकल गया : कहा  गयी गाडी़ अभी तो यही थी ( तबतक उसको  गाडी़  नजर आई )
वो ऑटो मे बैठा  और ऑटो  उस गाडी़  के पीछे चलने लगा आयशा को पता नही था  कि कोई उसका पीछा कर रहा है थोडी़ देर बाद गाडी़ एक कैफ़े मे आगे  रूकी
आयशा गाडी़  से निकली और कैफे मै चली गयी
रघु ने ऑटो वालो को पैसे दिए और कैफे मे चला गया
वहा पे आयशा के ˈक्‍लाइअन्‍ट्‌ थे आयशा उनसे मिली और
मीटींग शुरू की
रघु आयशा की नज़र से बचकर ऐसी जगह  में बैठ गया  और आयशा को देखने लगा 
आयशा का धयान सिर्फ  मीटींग मे ही था
थोडी़ देर बाद मीटींग खत्म हुई और रघु अभी भी आयशा को ही  देखे  जा रहा था
आयशा कैफे से बहार निकल गयी और कार मे बैठ गयी वहा गाडी़ स्टार्ट नही हुई
आयशा कार से बहार निकल गयी
आयशा: कार स्टार्ट नही हो रही
ड्राइवर: नहीं मैडम
आयशा: क्या प्रॉब्लम हो गई
ड्राइवर: अभी  चैक करता  हूंँ
पीछे से एक अवाज आयी : मे कुछ मदद कर सकता हूँ  आपकी  (आयशा ने पीछे देखा तो वो हैरान  हो गयी
आयशा मन मे : ये यहा अब मे  गयी काम  से कोई तो बचा लो मुझे है शिवजी बचा लो
रघु: क्या हुआ कहा खो गयी मै कुछ पूछ रहा हूँ मदद करूं
आयशा हिचकते हुए : ना...ही   मै मैनेंज कर लूँगी
रघु: कैसे करोगी मै करता हूँ मदद
आयशा उसे हैरानी से देखने लगी
रघु: हैरान  होके क्यों  देख रही हो
आयशा मन मे : ये  मुझे डाँट क्यों नही रहा बिना जाने इतना कुछ  कह दिया और ये चुप है कही तुफान से  पहले 
की शांती तो नही
रघु: मिस क्या  हुआ सो गयी क्या
आयशा का ध्यान टुटा वो हकलाते हुए: सॉ ..री
रघु: सॉरी किस लिए
आयशा अपनी उंगलियों को दबाते हुए : वो मैने बिना सोचे तुमको कुछ भी कह दिया वो तुम्हारे भाई को  समजके मैने बोल दिया
रघु: वो सब छोडो़ तुम्हें  मदद चहिए  मै करू
आयशा उसे हैरान होके देखने लगी : तुम्हें गुस्सा नही आ रहा मैने इतना कुछ कह दिया
रघु: गलती  मेरे भाई की थी तुम बेकार मे टेंसन मत लो तुमने और तुम्हारी बहन ने जो करा वो ठीक था
आयशा: पक्का
रघु: हा पक्का
आयशा: फ़िर तुम मेरा पीछा क्यों कर रहे थे
रघु  : ऐसे  ही तुमसे बात करनी थी
आयशा : अच्छा ओह्ह (मन मे ): ना जान मै क्या सोच बैठी थी
आयशा रघु से: वो मेरी कार खराब हो गयी स्टार्ट  ही नही हो रही
रघु: मै मैकेनिक को कॉल करना हूँ ( कॉल किया )
रघु आयशा से: मैकेनिक थोड़ी देर मे आ रहा है तबतक कॉफ़ी ...
आयशा बीच मे  : न..ही वो
रघु: मुझसे कोई प्रॉब्लम है
आयशा: नही चलो ठीक  है  (दोनो कैफ़े मे चले गए)
रघु (कुर्सी बैठते हुए ): क्या लोंगी  चाय या फिर कॉफ़ी
आयशा: चाय मेरी फेवरत है मे तो कभी भी  पी लू
रघु ने वेटर को बुलाया
वेटर: जी सर
रघु: दो कप चाय
वेटर: जी सर और कुछ
रघु: नहीं (वेटर चाला गया )
आयशा: तुम मुझसे सच मे  नराज नहीं हो क्या
रघु: ना नही हूँ
आयशा: वैसे तुम्हें  कभी  देखा  नहीं कभी
रघु: मै कल ही अमेरीका से आया हूँ
आयशा: अच्छा  मतलब विदेशी हो
रघु  : हम्म्म्म अभी आया हूँ सेटल होने
आयशा: अच्छा
रघु: क्या तुम मुझे घूमा सकती हो मेरा मतलब है मै यहा किसीको नही जानता और इंडिया रहा भी नही हूँ इसलिए   क्या तुम मुझे  घूमा सकती हो अगर तुम बुरा नहीं मानो तो
आयशा: हाँ, क्यों नहीं मै तुम्हे अच्छी से अच्छी जगाह दिखाऊगी
रघु : थैंक यू
उन दोनो ने चाय पी  बिल पे किया और बहार निकलगे
आयशा: कैसी लगी चाय
रघु: बडिया
आयशा ड्राइवर से: ठीक हुई या नहीं
ड्राइवर: ठीक हो गयी है मम
आयशा रघु से: वैसे तुम्हारा नाम क्या है
रघु : रघु मल्होत्रा ​​तुम्हारा
आयशा नाम है मेरा
रघु: बहुत अच्छा  नाम है
आयशा: थैंक यू
रघु : आज से हम दोस्त
आयशा: हाँ आज से हम दोस्त उसने हाथ मिलाने के लिए हाथ बडा़या   रघु ने  भी हाथ  बडा़या जैसे ही उनके  हाथ  मिले एक करेंट जैसा लगा  उन्होंने अपना हाथ अलग किया
आयशा मन मे अपना हाथ देखकर : ये क्या हुआ
रघु मन मे अपने हाथ को देखते हुए : ये क्या था करेंट  कैसा लगा
दोनो ने एक  दुसरे को देखा आयशा ने नजर हता ली
आयशा: रघु मै चलती हूँ
रघु: सुनो क्या मै भी आ सकता हूँ
आयशा : मै इंस्टीट्यूट जा रही हूंँ
रघु: अब तो हम दोस्त है तो आ सकता हूँ
आयशा: ठीक है चलो
दोनो गाडी़ मे बैठ गए और  गाडी़  चल निकली
गाडी़ मे  गाना बज रहा था
रघु ड्राइवर से: वॉल्यूम तेज करदो
ड्राइवर ने वॉल्यूम बडा़ दी
रघु आयशा से: मुझे गाना  सुनना , म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट बजाना बहुतअच्छा लगता है
आयशा: हा मुझे भी
रघु आयशा को ही  देखे  जा रहा था आयशा उससे नज़रे चुराके खिड़की की ओर देख रही थी
हा.. अज्ज दिन चढ़ेया तेरे रंग वरगा
अज्ज दिन चढ़ेया तेरे रंग वरगा फूल सा है खिला
आज दिन रब्बा मेरे दिन ये ना ढले वो जो मुझे खवाब में मिले उसे तू लगा दे अब गले तेनू दिल दा वास्ता रब्बा आया दर पे यार के सारा जहाँ छोड़ छाड़ के मेरे सपने संवार दे तेंनु दिल दा वास्ता आ..
रघु  ने अपने हाथ को देखा उसे थोड़ी देर वाली बात याद आ गयी करेंट लगने वाली आयशा भी चुपके चुपके उसे देखे जा रही थी
हा.. बक्षा गुनाहों को सुन के दुवाओं को रब्बा प्यार है तूने सब को ही दे दिया मेरी भी आहों को सुन ले दुवाओ को मुझको वो दिला मैंने जिसको है दिल दिया हो बक्षा गुनाहों को सुन के दुवाओं को रब्बा प्यार है तूने सब को ही दे दिया मेरी भी आहों को सुन ले दुवाओ को मुझको वो दिला मैंने जिसको है दिल दिया आसमान पे आसमान उसके दे इतना बता
दोनों एक दुसरे को देखने लगे
वो जो मुझको देख के हँसे पाना चाहूं रात दिन जिसे रब्बा मेरे नाम कर उसे तेनू दिल दा वास्ता अज्ज दिन चढ़ेया तेरे रंग वरगा हा.. माँगा जो मेरा है जाता क्या तेरा है मेने कौन सी तुझसे जन्नत माँगा ली कैसा खुदा है तू बस नाम का है तू रब्बा जो तेरी इतनी सी भी ना चली हा माँगा जो मेरा है जाता क्या तेरा है मेने कौन सी तुझसे जन्नत माँगा ली कैसा खुदा है तू बस नाम का है तू रब्बा जो तेरी इतनी सी भी ना चली चाहिए जो मुझे कर दे तू मुझको अता जीती रही सलतनत तेरी जीती रहे आशिक़ी मेरी देदे मुझे ज़िंदगी मेरी तेनू दिल दा वास्ता रब्बा मेरे दिन ये ना ढले वो जो मुझे खवाब में मिले उसे तू लगा दे अब गले तेनू दिल दा वास्ता रब्बा आया दर पे यार के सारा जहाँ छोड़ छाड़ के मेरे सपने संवार दे तेंनु दिल दा वास्ता अज्ज दिन चढ़ेया तेरे रंग वरगा.. अज्ज दिन चढ़ेया.. तेरे रंग वरगा.. अज्ज दिन चढ़ेया तेरे रंग वरगा.. अज्ज दिन

चढ़ेया.. तेरे रंग वरगा.. अज्ज दिन चढ़ेया 


गाडी़ रूकी दोनो को एक झटका सा लगा जैसे वो दोनो होश मे आए आयशा हड़बडा़ते  हुए बहार निकली
रघु  भी निकला 
हर हर महादेव