तेरे प्यार की कसम - 4 in Hindi Love Stories by Tanya gauniyal books and stories Free | तेरे प्यार की कसम - 4

तेरे प्यार की कसम - 4

रघु  उस बोर्ड को पड़ते हुए आर्ट इन मोशन : वाओ अच्छा नाम है
आयशा : हम्म आओ अंदर
रघु  और आयशा अंदर गए आयशा ने दरवाजा खुला देखा तो सोचने लगी : शायद संजय आया है
रघु  आयशा को खोया हुआ देखकर : क्या हुआ आयशा कहा खो गयी
आयशा का ध्यान टूटा : कही नही आओ मै तुम्हें दिखाती हूँ
आयशा ने रघु  को डांसिंग रूम दिखाया फिर इंस्ट्रूमेंट रूम
रघु  : वाओ कितने सारे इंस्ट्रूमेंट है अलग अलग से
आयशा : हम्म आओ तुम्हें लाइब्रेरी दिखाती हूँ
आयशा रघु को लाइब्रेरी मे ले गयी
रघु  उन बुक्स को देखकर : कितनी सारी बुके है
आयशा : हम्म तुम्हें लेनी है कोई तो देख लो
रघु  बुक देखने लगा रघु  ने एक बुक देखी : वो वाली जो दुसरे सेल्फ मे है वो
आयशा : मैं निकालती हूँ रूको
आयशा ने स्टूल रखा और उसमे चढ़ गयी आयशा बुक निकाल रही थी स्टूल हिल रहा था अचानक आयशा डिसबैंलेस हुई और स्टूल से गिर गयी इससे पहले आयशा जमीन मे गिरती रघु  ने उसे अपनी बाहो मे पकड़ लिया आयशा का एक हाथ रघु  के सीने मे था और दुसरे मे बुक थी वो दोनों एक दुसरे को देखने लगे कुछ देर बाद वहा पर एक लड़का आया वो संजय था उसने उन दोनों ऐसे देखा तो चौक गया
संजय आयशा से : तू यहा कब आई और ये कौन है
आयशा और रघु  दोनों का ध्यान टूटा रघु  ने आयशा को नीचे उतारा और पूछा : कही चोट तो नही लगी
आयशा : नही मै ठीक हूँ ये लो बुक
रघु  ने बुक ले ली
आयशा संजय से : तू कहा गया था
संजय : मुझे भूख लगी थी इसलिए अपने लिए चिप्स लेने गया था
आयशा : अच्छा
संजय : ये कौन है और तू कब आई
आयशा : मै अभी आई बस और ये रघु  है कल ही आया है अमेरिका से ( रघु  से ) : ये मेरा बचपन का दोस्त है संजय
रघु  ने हाथ बडा़या : हाय
संजय ने भी हाथ बडा़या : नाईस टू मीट यू
रघु  :  मी टू
आयशा संजय से : हमे भी तो खिला चिप्स ( उसने संजय से पैकेट छीना और भागने लगी संजय भी उसके पीछे भागा दोनों चिप्स के लिए बच्चों कि तरह झगड़ रहे थे ये देखकर रघु  के मन मे अजीब सा एहसास हो रहा था और इसे हम जलन का नाम दे सकते है
आयशा रघु  के पास आई और पैकेट बडा़ते हुए कहा : ये लो तुम भी खा लो
रघु  : नही तुम खाओ मुझे नही खाना
आयाशा : अरे ऐसे कैसे खा लो ( आयशा ने कोहनी से रघु  के पेट मे हल्का सा मारा और एक आइब्रो ऊपर करी ये देखकर रघु  को खुशी हुई वो खाने लगा  )
आयाशा एक्ससिटेमेंट मे : कैसा लगा
रघु  फीकि तरहा मुस्करा कर : अच्छा है
ऐसे ही उन लोगो ने एक साथ समय बिताया रघु  को संजय के वजह से अजीब महसूस हो रहा था वो आयशा के साथ अकेला रहना चाहता था पर अब कुछ नही कर सकते थे
शाम के पाँच बजे थे संजय को फोन आया
संजय आयशा से  : आयशा माँ का फोन था कुछ काम है मुझे जाना पडे़गा
आयशा : ओकए
संजय : मै आज अपनी कार नही लाया तेरी कार ले जा रहा हूँ
आयशा : ठीक है ले जा मै टेक्सी मे चली जाऊँगी
संजय : तू अकेली कैसे जाएगी
आयशा : तू जा संजय रघु  है ना मेरे साथ मै उसके साथ आ जाऊँगी
संजय : जल्दी चली जाना बाहर मौसम भी ठीक नही है बाय
आयशा : बाय
संजय ने रघु  को अजीब तरीके से देखा फिर चला गया
रघु  आयशा से : ये  क्या करता  है
आयशा : बिजनेस पार्टनर है
रघु  : तुम भी बिजनेस वूमेन हो
आयशा : हा तुम क्या करते हो
रघु  : मै भी बिजनेस ही देखता हूँ वैसे ये इंस्टीट्यूट किसका है
आयशा : ये मेरा और मेरी दोस्तों का है
रघु  : संजय भी है तुम्हें ये सब पंसद है
आयशा : हा मुझे गानो मे इंटरेस्ट है म्यूजिक मे डांसिंग मे आर्ट मे और मेरी दोस्तो को भी है इसलिए हमने ये खोला
रघु  : तुम यहा का खरचा कैसे चलाती हो
आयशा : यहा हम लोगो का म्यूजिक मे इंटरेस्ट बडा़ते है यहा पर जो लाइब्रेरी और इंस्ट्रूमेंट है लोग उसे खरीदते है हम डांस और हर इंस्ट्रूमेंट सीखाते भी है जिसको जो सीखना है वो पर ये सब फ्री मे सीखाते है यहा पर बडे़ बडे़ कम्पटीशन कि भी तैयारी करवाते है
रघु  : अच्छा है (आयशा को बडी़ उम्मीद से देखकर ) मुझे भी म्यूजिक मे इंटरेस्ट है क्या मै भी इस इंस्टीट्यूट का मैम्बर बन सकता हूँ
आयशा ने रघु  को देखा जो उसे बडे़  उम्मीद से देख रहा था
आयशा : ऑफ़  कोर्स तुम्हें इंटरेस्ट है तो तुम आज से यहा के मैम्बर  यहा म्यूजिक इंटरेस्ट वाले लोगों का वार्म वेलकम है तुम कभी भी आ सकते हो
रघु  मुस्कराया आयशा को देखकर उसने देखा बाहर मौसम खराब हो गया
रघु  आयशा से : हमे चलना चाहिए आयशा मौसम खराब हो रहा है
आयशा : हा बस पहले बुक देख लू
आयशा मू मे पेन दालकर बुक देखने लगी रघु  उसे ही देखे जा रहा था थोड़ी देर बाद आयशा का काम खत्म हुआ मौसम खराब हो गया था हल्की बूंदे गिरने लगी थी
दोनो बाहर निकले और इंस्टीट्यूट बंद करा वो बाहर निकलने लगे पर बारिश तेज हो गयी थी
रघु  : हमे यही रूकना चाहिए बारिश तेज हो रही है
आयशा और रघु  दोनों रूक गए थोड़ी देर बाद आयशा भागकर बारिश मे भीगने लगी रघु  पहले एक पल के लिए देखता रह गया फिर बोला : आयशा भीगो मत बिमार हो जाओगी
आयशा भीगते हुए : कुछ नही होगा यार तुम भी आ जाओ
रघु  मुस्कराकर बारिश के नीचे आ गया और बोला : आयशा भीगो मत
आयशा हसँते हुए : कुछ नही होगा (वो गोल गोल घूमने लगी रघु  तो उसमे खो सा गया आज आयशा ने ब्लैक कलर का क्रॉप टॉप ब्लैक कलर की जींस के साथ बालो का जुड़ा बनाया हुआ था  दोनों बारिश मे भीग रहे थे आयशा गोल गोल घूमने मे थी जब आयशा रघु  कि तरफ मुडी़ रघु  ने उसका हाथ पकड़ लिया आयशा खामोशी से देखने लगी रघु  आयशा के करीब आया और उसके सुनहरे घने लम्बे बाल खोल दिए और उसके गाल छूने लगा आयशा को जैसे करेंट सा लगा आयशा वही बर्फ कि तरहा जम गयी रघु  उसके होठों को छूने लगा आयशा ने अभी भी आँखें बंद कि थी रघु  ने उसके सर से अपना सर मिला लिया एक हाथ से आयशा माथे मे चलाने लगा उसने दोनों हाथ से आयशा के गाल पकड़ लिए और बहुत ही करीब आ गया रघु  ने उसकी दोनों  पलको को अपने होठो से छू लिया वहा बिजली कड़कने से आयशा ने आँखें खोली उसने रघु  कि टी शर्ट पकड़ ली रघु  और आयशा के दिल तेजी से धड़क रहे थे  दोनों एक दुसरे को देख रहे थे रघु  ने उसकी लट्टे अपने हाथ से कान के पीछे करी वहा बिजली कड़की आयशा पीछे मुड़कर जाने लगी रघु  ने उसके हाथ पकडा़ और पीछे से अपनी बाहो मे भर लिया रघु अपने हाथ आयशा के हाथ से नीचे लाने लगा उसने दोनों हाथ से आयशा के हाथ पकड़ लिए रघु  धीरे धीरे उसके कान के पास आया रघु  के होठ आयशा के कान छू रहे थे आयाशा कि पूरे बदन मे करेंट धौड़ रहा था रघु  ने उसकी गरदन के पास किस किया आयशा ने आँखें खोली और आगे बड़ गयी रघु  ने उसके हाथ से पकड़ लिया और उसे अपनी तरफ किया रघु  और आयशा एक दुसरे मे खोए थे आयशा रघु ने एक हाथ से आयशा कि गीली टी शर्ट पकडी़ और एक हाथ से चहरे को छूने लगा वो माथे से चहरे को छू रहा था आयशा के दोनों हाथ रघु  के सीने मे थे बारिश बंद हो गयी थी आयशा के माथे से होकर बूंदे उसके गुलाबी होठो के पास आ रहे थे ये सब किसी को भी
बहकाने के लिए काफी था वो दोनों एक दुसरे को ही देख रहे थे उस सुनसान रोड मे वो दोनों अकेले  एक दुसरे मे ही खोए थे आचानक ने तेज बिजली कड़की आयशा रघु  से अलग हुई आयशा पीछे मुड़कर जाने लगी पर उसके बाल रघु  कि टी शर्ट मे फस गए वो उन्हें निकालने लगी रघु  उसे खामोशी से देख रहा था आयशा के बाल निकल ही नही रहे थे आयशा ने रघु  को देखा
रघु  खामोशी से बोला : मैं निकालता हूँ
रघु  बाल निकालने लगा आयशा उसे नही देख रही थी वो जमीन को देख रही थी रघु  बाल निकाल रहा था जिस वजह से आयशा को हल्का हल्का दर्द हो रहा था
रघु  ने कहा : आयशा इधर मेरे  पास आओ
आयशा उसे देखने लगी
रघु  : मेरे पास खडी़ हो जाओ तुम्हें दर्द नही होगा
आयशा रघु  के पास खडी़ हो गयी रघु  ने बाल निकाल दिए
रघु  ने ऊपर आयशा को देखा और बोला  : निकल गए चलते है
आयशा ने एक पल रघु  को देखा फिर चल निकली
रघु  भी पीछे  पीछे चल निकला वो दोनों एक दुसरे से नजर चुरा रहे थे और सोच रहे थे कि आज अभी थोड़ी देर पहले उन दोनों को क्या हो गया था वो दोनों ऐसे चल रहे थे जैसे अंजान को एक दूसरे को नही जानते हो
आयशा मन मे : क्या हो गया था मुझे अभी क्यों मै इतने करीब चली गयी कोई और होता तो मै उससे कबका दूर हो जाती पर रघु  से ....( वो बोलते बोलते रूक गयी )
रघु  भी सोच रहा था कि उसे क्या हो गया था आजतक वो किसी के इतने करीब नही गया था जितने वो आज आयशा के गया था दोनों कभी एक दुसरे को तिरछी निगाहों से देख लेते तो कभी नजर हटा देते रघु  ने देखा कि आयशा गीली हो गयी है रघु  ने अपना कोट निकाला और आयशा कि तरफ बडा़या : ये लो आयशा पहन लो ठंड लग जाएगी
आयशा ने मना कर दिया पर रघु  ने उसे खुद पहना दिया आयशा उसे देखते ही रहे गयी थोड़ी देर चलने के बाद उन्हें एक टेक्सी आती दिखी रघु  ने रूकवाई और दोनों उसमे बैठकर निकल गए उसमे गाना बजा
ऐसा देखा नहीं खूबसुरत कोई जिस्म जैसे अजंता की मूरत कोई जिस्म जैसे निगाहों पे जादू कोई जिस्म नगमा कोई जिस्म खुशबू कोई जिस्म जैसे महकती हुई चाँदनी जिस्म जैसे मचलती हुई रागिनी
रघु  आयशा को देख रहा था और आयशा बारिश कि बूंदो को  रघु  ने देखा आयशा कि टी शर्ट गीली हो गयी है जिस वजह से उसकी कमर दिख रही है
जिस्म जैसे कि खिलता हुआ एक चमन जिस्म जैसे की सूरज की पहली किरण जिस्म तरशा हुआ दिलकश ओ दिलनशीं संदली संदली मरमरी मरमरी हुस्न ए जानां की तारीफ़ मुमकिन नहीं हुस्न ए जानां की तारीफ़ मुमकिन नहीं आफ़रीं आफ़रीं आफ़रीं आफ़रीं तू भी देखे अगर तो कहे हमनशीं आफ़रीं आफ़रीं आफ़रीं आफ़रीं हुस्न ई जानां की तारीफ़ मुमकिन नहीं हुस्न ई जानां की तारीफ़ मुमकिन नहीं
रघु  ने धीरे से आयशा से कहा : आयशा ( आयशा ने रघु  को देखा ) तुम्हारी कमर दिख रही है प्लीज बटन लगा दो आयशा ने बटन लगा दिए रघु  खिड़की के बहार देखने लगा आयशा रघु  को देखने लगी उसे वो सब याद आने लगा जो अभी कुछ देर पहले हुआ था वहा गाना आगे बजा
जाने कैसे बांधे तूने अखियों के डोर मन मेरा खिंचा चला आया तेरी ओर मेरे चेहरे के सुबह जुल्फों की शाम मेरा सब कुछ है पिया अब से तेरे नाम नज़रों ने तेरी छुवा तो है यह जादू हुआ होने लगी हूँ मैं हसीं आफ़रीं आफ़रीं आफ़रीं आफ़रीं आफ़रीं आफ़रीं
रघु  ने आयाशा को देखा वो देखता ही रह गया आयशा के माथे से अभी भी पानी कि बूंदे टपक रही थी जो उसके चहरे से होकर होठो के पास जा रही थी
चेहरा एक फूल की तरह शादाब है चेहरा उस का है या कोई महताब है चेहरा जैसे ग़ज़ल चेहरा जाने ग़ज़ल चेहरा जैसे कली चेहरा जैसे कँवल चेहरा जैसे तसव्वुर भी तस्वीर भी चेहरा एक खाब भी चेहरा ताबीर भी चेहरा कोई अलिफ़ लैला की दास्ताँ चेहरा इक पल यकींन चेहरा इक पल गुमां चेहरा जैसा के चेहरा कहीं भी नहीं माहरु माहरु महजबीं महजबीं हुस्न ए जानां की तारीफ़ मुमकिन नहीं हुस्न ए जानां की तारीफ़ मुमकिन नहीं आफ़रीं आफ़रीं आफ़रीं आफ़रीं तू भी देखे अगर तो कहे हमनशीं आफ़रीं आफ़रीं आफ़रीं आफ़रीं हुस्न ई जानां की तारीफ़ मुमकिन नहीं आफ़रीं आफ़रीं आफ़रीं आफ़रीं आफ़रीं
गाना खत्म हुआ गाडी़ रूकी रघु  गाडी़ से उतरा आयशा एक तक रघु  को देख रही थी रघु  आयशा से बोला : आयशा घर जाके फोन कर देना संभलके जाना
आयशा सिर्फ खामोशी से देख रही थी रघु  बाय बोलकर जाने लगा कुछ दूर चलके वो वापिस आयशा के पास आया और  बोला : आयशा अपना नंबर दे दो कान्टेक्ट करने के लिए
आयशा ने उसे देखते देखते अपना नंबर दिया रघु  बाय बोलकर चला गया गाडी़ स्टार्ट हुई और आयशा भी घर पहुँची वो घर के अंदर गयी वहा रश्मि खाना लगा रही थी
रश्मि : तू आ गयी कहा थी कितनी देर कर दी
आयशा : माँ मै इंस्टीट्यूट मे थी
रश्मि : बारिश भी हुई थी जा कपडे़ चैंज कर ले भीग गयी है
आयशा : जी माँ
आयशा जाने लगी रश्मि पीछे  से बोली : ये कोट किसका है
आयशा ने उस कोट को देखा आयशा को थोड़ी देर वाली बात याद आ गयी वो उसमे खो गयी
आयशा मन मे : ओ शिट मै कोट देना ही भूल गयी
रश्मि : आयशा कहा खो गयी
आयशा को होश आया : माँ ये वो
रश्मि बीच मे : संजय का है
आयशा हिचकते हुए : हा मतलब वो
रश्मि : ठीक है जा कपडे़ चैंज कर ले
आयशा कमरे मे आई उसने कोट उतारा और एक पल उस कोट को देखा फिर बेड मे रख दिया और फ्रेश होने चली गयी
रघु  भी अपने ही धुन मे अंदर आ रहा था बाकि सब खाना खा रहे थे वीर ने रघु  को देखा तो गुस्से मे उसकी तरफ बडा़ वो रघु  के पास खडा़ होकर उसे घूरकर बोला  : आ गयी घर वालो कि याद
रघु  अपने ही ख्यालो मे था वो आगे चलता गया वीर ने उसे पकडा़ : भाई कहा खोए हो
रघु  का ध्यान गया : हा बोल क्या हुआ
वीर घूरकर : क्या बोलु यार मै आप कहा थे सुबह से
रघु  : तेरी भाभी के पीछे गया था पता नही है क्या
वीर : हा पता है पर मिली या फिर पीछा करते रहगे
रघु  मुस्कराकर : हा मिली ना दोस्त भी बन गयी
रघु  ये बोलकर आगे निकल गया राजेश ने रघु  को देखा तो बोला : कहा थे बेटा
रघु  : पापा वो दोस्त के साथ था
राजेश : दोस्त ? हमे तो एक ही दिन हुआ आए हुए और दोस्त भी बन गए
रघु  : हा पापा आपने ही कहा था ना कि ये देश अच्छा है इसलिए नए दोस्त बना लिए ताकि घूम सकू  और जान भी सकू 
वीर कान मे : बना लिया या बना ली
रघु  : चुप कर यार ( वीर हसँ गया )
राजेश : आओ बेटा खाना खा लो
रघु  : जी पापा
दोनों बैठकर खाना खाने लगे
वीर रघु  के पास बैठा था वीर ने रघु  के कान मे बोला : भाई क्या हुआ बताओ
रघु  उसे तालते हुए : बाद मै बताऊगा
वीर : नही भाई अभी बताओ क्या क्या हुआ
रघु  : खाना खाने दे पहले
वीर : नही बताओ क्या रोमेंस हुआ
रघु  उसे देखने लगा : चुप कर खाने दे
वीर : बता दो ना कुछ तो हुआ है
रघु  : अच्छा तुझे कैसे पता
वीर : आपका खोया खोया अंदाज बता रहा है और
रघु  उसे देखकर  : और
वीर हसँते हुए  : और आपका कोट
रघु को खासी आ गयी वीर  : भाई आराम से खाओ
रंजना : क्या कर रहा है रघु  आराम से खा
वीर ने रघु  को पानी दिया 
रंजना : ठीक है
रघु  : जी माँ  (वो खाने लगा )
वीर : अब बताओ कोट कहा है ( शरारत से एक आइब्रो ऊपर करके )
रघु  मन मे : अब ये पूरी बात जानकर ही रहेगा
वीर : भाभी के ख्यालो मे ही खो गए क्या
रघु  : वो स्टूल से गिर रही थी मैने बचाया
वीर : वा भाई पहले ही दिन चौका मार दिया
रघु  : हम्म
वीर : और कोट का क्या सीन है वो कहा है
रघु  :  वो बारिश हुई थी ना तो मैने
वीर बीच मे : अपना कोट भाभी को दे दिया हना
रघु  हिचकते हुए : हा अब एक लड़की को ऐसे बारिश मे भीगता हुआ कैसे छोड़ देता
वीर दांत फाड़कर : और अगर वो भाभी हो तो और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है
रघु  : खाना खाने दे मेरे बाप
वीर हसँते हसँते : हा खाओ खाओ
रंजना : आज रश्मि के वहा जाकर अच्छा लगा ना
राजेश : हा
रघु  वीर से : ये क्या बात चल रही है
वीर : आज दिन मे हम खाना खाने उस छिपकली के घर गए थे अच्छा हुआ वो छिपकली वहा नही थी
रघु  मन मे : कल हम जिसके वहा गए थे वो आयशा कि बहन थी मतलब कल मै आयशा के घर गया था
रघु  ने खाना खत्म किया और अपने कमरे मे चला गया
रघु  : अबतक पहुँच गयी होगी फोन करू ( उसने फोन उठाया ) ना अभी नही करता शायद खाना खा रही हो ...(कुछ देर सोचने के बाद )  : क्या करू
वहा आयशा फ्रेश होकर खाना खा रही थी उसने खाना खत्म किया और ऊपर आ गयी उसने रघु  का कोट उठाया और खिड़की के पास खडे़ होकर देखने लगी
वो ये सब सोचे जा रही थी
रघु  : कर ही देता हूँ अबतक तो खाना भी खा लिया होगा
रघु  ने आयशा का नंबर डायल किया
आयशा का फोन बजा आयशा ने टेबल से फोन लिया और उठाया : हैलो कौन
रघु  : मै  ( आयशा रघु  कि आवाज सुनकर थोड़ी देर के लिए चुप हो गयी )
रघु  : आयशा मै रघु  भूल गयी क्या
आयशा : नही तुम्हें कैसे भूल सकती हूँ
रघु  : हम्म घर पहुँच गयी ना
आयशा : हा
रघु  : खाना खाया
आयशा : हा तुमने
रघु  मन मे : बोल दू क्या कि मै तुमसे प्यार करता हूँ नही अभी नही अभी ये मुझे गलत ना समझ ले अभी तो मिली है कही गुस्से मे दोस्ती तोड़ दी मेरा क्या होगा
आयशा : हैलो कहा हो रघु 
रघु ध्यान से बहार आकर  : हा हा आयशा यही हूँ खा लिया आयशा मेरा कोट तुम्हारे पास रह गया
आयशा उस कोट को देखकर : हा कल दे दूंगी
रघु  : हम्म कल तुम इंस्टीट्यूट मे मिलना
आयशा : हा .... आ.....छी .....
रघु  फिक्र से : क्या हुआ जुकाम लग गया क्या
आयशा :  ना नही वैसे ही आ गयी नाक मे कुछ घुस गया
आयशा दोबारा छिकी
रघु  टेंशन मे : अब क्या घुसा ( गुस्से से ) कहा था ना मत भीगो बिमार हो गयी ना
आयशा : रघु  वो बस ऐसी ही आ गयी
रघु  गुस्सा करते हुए : ऐसे कैसे आ गयी तुम भीगी इसलिए आई ( आयशा ने कुछ नही कहा )
रघु  : कहा था मत भीगो पर .... (वो बोलते बोलते चुप हो गया उसे एसास हुआ कि वो कबसे आयशा को डाँट रहा है
आयशा : रघु  तुम लाइन मे हो
रघु  : हा हा वो सॉरी
आयशा : सॉरी ! सॉरी क्यों
रघु  : वो मै कबसे तुम्हें डाँटे जा रहा था
आयशा : अरे कोई नही पहले मैने डाँटा फिर तुमने इत्स ओकए डोन्ट से सॉरी
रघु  : हम्म प्लीज आराम करो
आयशा : हा बाय कल मिलते है
रघु  : हा कितने बजे
आयशा : नौ बजे
रघु  : ओकए बाय ध्यान रखो अपना बाय
आयशा ने बाय बोलकर फोन कट कर दिया
रघु  बेड मे लेटकर आयशा के साथ बिताए हुए पल याद करने लगा थोड़ी देर बाद उसे नींद आ गयी आयशा ने वो कोट एक पैकेट मे रखा और सो गयी
सुबह के आठ पचपन हो गए थे आयशा रघु  के घर के पास पहुँची  वो रघु  से मिली
आयशा रघु  से : हाय
रघु  : कैसी हो ठीक हो अब छीके आ रही है
आयशा : नही बिल्कुल नही आ रही
रघु  : गुङ
आयशा पैकेट आगे करके : ये लो तुम्हारा कोट
रघु  : अभी यही रख दो बाद मे मै कौनसा भाग रहा हूँ
आयशा : हा ( उसने सीट के आगे रख दिया )
दोनों गाडी़ मे बैठे और इंस्टीट्यूट के लिए निकल गए
रास्ते मे आयशा बोले जा रही थी रघु  चुपचाप मुस्कराकर उसे सुने जा रहा था
आयशा ने गौर किया कि रघु  कुछ बोल नही रहा तो वो चुप हो गयी और उसे देखने लगी
आयशा हिचकते हुए : क्या हुआ रघु 
रघु  : कुछ नही
आयशा : तुम बोल क्यों नही रहे कुछ बोर हो रहे हो मेरी बातो से
रघु  : नही किसने कहा तुम बोलो मै बोर नही हो रहा
आयशा : पक्का अगर हो रहे हो तो मै नही बोलुंगी
रघु  : नही आयशा मै बोर नही हो रहा पक्का तुम बोलो
आयशा : सच्ची
रघु  : मै झूठ नही बोलता
आयशा : अच्छा जब मै संजय से बात करती हूँ वो कहता है कितना बोलती है और मुझे चुप करवा देता है
रघु  : वो संजय है और मै संजय नही हूँ तुम बोलो मै हमेशा तुमको सुनुगा
आयशा ने उसके गाल खींचकर कहा : सो स्वीट
रघु  को बहुत खुशी हुई रघु ने गाल मे हाथ रख दिया और उसे देखने लगा मुस्करा कर
इंस्टीट्यूट आ गया था गाडी़ रूकी और आयशा निकली आयाशा अंदर जाने लगी उसने पीछे  देखा तो रघु  गाडी़ मे गाल मे हाथ रखकर बैठा था आयशा उसके पास गयी और बोली : रघु  क्या हुआ आओ
रघु  को होश ही नही था
आयशा ने रघु  के सामने चुतकी बजायी फिर भी कुछ नही हुआ  आयशा ने उसे हिलाया रघु  होश मे आया
आयशा : कहा खो गए चलो
रघु  हड़बडा़ कर कार से निकला और अंदर जाने लगा आयशा भी पीछे  पीछे आई दोनों कुछ देर वहा रहे फिर कार मे बैठकर घूमने निकल गए आयशा ने रघु  को अच्छी  से अच्छी जगह दिखाई दोनों घूम रहे थे दोनों ने एक साथ खाना खाया रघु  को आयशा के साथ अकेले घूमने मे मजे आ रहे थे जैसे उसका सपना पूरा हो रहा हो
शाम के छह बज गए थे दोनों कार मे थे रघु  का घर आया रघु  बहार निकल गया और आयशा से बोला : बाय ध्यान से जाना
आयशा ने हा मे पलके झपकाई  रघु  थोड़ी देर रूक कर बोला : कल मिलोगी ना
आयशा : ना नही कल नही मिल पाऊंगी
रघु  : क्यों
आयशा : कल मै अपनी दोस्त कि शादि मे जा रही हूँ शिमला
रघु  मन मे : ये तो जा रही है अब क्या करू
आयशा रघु  से : कहा खो गए
रघु  : कही नही तुम कबतक आओगी
आयशा : चार से पाँच दिन मे
रघु  : क्या मै भी आ सकता हूँ
आयशा : तुम ! तुम क्या करोगे
रघु  : मै तुम मुझे वहा घूमा देना मैने सुना है वो पहाड़ी इलाका है
आयशा : हा पर तुम वहा किसीको नही जानते हो तो
रघु  उसकी आँखों मे देखकर : तुम्हें तो जानता हूँ सो
आयशा : ओकए ठीक है आ जाना
रघु  : ठीक है सुबह कितने बजे
आयशा : हम जल्दी निकलेगे सुबह चार बजे
रघु  : ठीक है चार बजे मिलेगे
आयशा : हम्म
रघु  बाय बोलकर चला गया आयशा उसे पीछे से जाते हुए देख रही थी
ड्राइवर : चले मैम
आयशा रघु  को देखकर : जी
गाडी़ स्टार्ट हुई और आयशा घर को निकल गयी आयशा अंदर जाने लगी पीछे  से ड्राइवर ने कहा : मैम ये पैकेट
आयशा ने पीछे देखा : ये पैकेट ओ इसमे तो रघु  का कोट है भूल गयी देना
आयशा ने वो पैकेट लिया और अपने कमरे मे आ गयी उसने पैंकिग कि साथ ही साथ रघु  का पैकेट भी रख दिया 
और नीचे खाना खाने लगी
रश्मि : बेटा कब निकलना है
आयशा : माँ कल सुबह चार बजे
रश्मि : ठीक है
आयशा : आप दोनों नही आ रहे आपको भी आना पडे़गा
रश्मि : नही बेटा मै नही आ पाऊंगी
राज : मै भी नही बहुत काम है बेटा
आयशा :  माँ आप तो आ जाओ उसने आप दोनों के लिए खास कहा है
रश्मि : नही बेटा मेरी दोस्त रंजना आयी है हमने साथ घूमने का प्लैन बानाया है
आयशा : ओकए
रश्मि : हम दोनों का आशीर्वाद दे देना
आयशा : ओकए
आयशा ने खाना खत्म किया और कमरे मे जाकर सो गयी रघु ने भी पैकिंग कि और तीन बजे का अलार्म लगाके सो गया
सुबह के तीन बजे अलार्म बजा रघु  फ्रेश होने चला गया लगभग तीन चालीस हो गया था रघु  समान लेकर तैयार था सब सोए थे पूरे  घर मे शांती थी रघु  वीर के कमरे मे आया और उसे जगाने लगा
रघु  धीरे से : छोटे  उठ
वीर नही उठा रघु  ने दोबारा आवाज लगायी : छोटे उठ जा ( वीर नही उठा ) रघु  ने उसे जोर जोर से हिलाया : उठ जा छिपकले उठ
वीर एक झटके से बेड मे उठा और बोला : छिपकली मुझे मारने हिम्मत मत करना कुंगफू आता है मुझे (वो हाथ  पैर चलाने लगा ) रघु  ने उसके सर पे चपत लगाई और बोला : बावले इंसान मे हूँ तेरा भाई
वीर ने अपनी आँखें मसली फिर साइड मे देखा तो उसमे चार बजने वाले थे
वीर रघु  से : इतनी सुबह सुबह क्यों उठाया सोने दो अभी सात नही बजे ( वो सोने लगा )
रघु  : सुन तो ले यार
वीर : क्या ( उसने देखा वहा पर समान रखा है
वीर : ये किसका समान है
रघु  : मेरा मै जा रहा हूँ
वीर बैठ गया और बोला : कहा जा रहे हो और क्यों जा रहे हो घर छोड़के किसी ने कुछ कहा आपसे बताओ मुझे मै अभी बताता हूँ उसे
रघु  : रूक जा रूक जा बोलने तो दे
वीर आधी नींद मे : हा बोलो
रघु  : मै शिमला जा रहा हूँ तेरी भाभी कि शादी देखने
वीर हैरानी से : क्या .!  क्या बोल रहे हो यार भाई नींद मे हो क्या अपनी ही बीवी कि शादि मे जा रहे हो
रघु  : अरे नही यार वो गलती से मू से निकल गया तेरी भाभी के दोस्त कि शादि है
वीर : तो आप वहा क्या करने जा रहे हो ढोल बजाने
रघु  : नही बावले टाइम बिताने जा रहा हूँ तेरी भाभी के साथ
वीर : अच्छा ठीक है
रघु  : ठीक है छोड़ मै जा रहा हूँ तू कुछ भी बहाने बना देना 
वीर : मै क्या बनाऊंगा
रघु  : कुछ भी ( रघु  ने टाइम देखा तो चार बजने वाले थे पाँच मिनट रह गए थे
रघु  ये बोलकर जाने लगा वीर ने उसे पकड़ लिया
वीर : पहले बताओ क्या बोलना है
रघु  : क्यों जान हत्या कर रहा है बोल देना कुछ भी
वीर : नही भाई बताओ
रघु  खुद को छुड़वाने कि कोशिश मे : देर हो रही है जाने दे चार बज गए है
वीर उसे पकड़के  : नही बताओ
रघु  मन मे : बोल देना ना कि मै टूर के लिए जा रहा हूँ दोस्त के साथ ( उसने खुद को छुडा़या और भाग गया )
वीर पीछे से : क्या भाई आप भी ना
वीर बेड मे लेटकर सो गया  रघु  बाहर पहुँचा वहा कार खडी़ थी उसे आयशा कि कार दिखी वो वहा आने लगा उसने देखा आज आयशा ने टी शर्ट और हल्का सा पजामा जैसा पहना था बालो का जुड़ा आयशा के गाल और होठ लाल हो रखे थे हल्की हल्की सुबह मे वो बहुत ही सुंदर लग रही थी गोरे गोरे गाल लाल हो रखे थे और रघु  के तो गाल हमेशा ही लाल रहते थे आयशा कार से उतरी रघु  एक जगह खडा़ होकर उसे निहारने लगा कुछ देर बाद वो आया नही तो आयशा उससे बोलने लगी पर रघु  पर जैसे असर ही नही हुआ आयशा उसके पास गयी और बोली : कहा हो रघु  चलो लेट हो रहे है
रघु  का ध्यान ही नही गया
आयशा ने उसकी बाजुए से उसे हिलाया तब उसे होश आया : कहा खो गए रघु  तुम
रघु  : कही नही चलो चलते है
आयशा : हम्म ( रघु  आगे निकल गया वो कार के पहुँचा अपना समान रखा फिर उसने देखा पीछे संजय बैठा है वो जाकर आगे बैठ गया आयशा वहा खडी़ खडी़ सोच रही थी : ये कहा खोया रहता है कही इसकी गर्लफ्रेंड तो नही है अमेरिका से आया है हो सकती है पूछकर देखु पर मुझे क्या करना मुझे क्या लेना देना इसकी गर्लफ्रेंड हो या हो
संजय चिलाकर : अब तुझे क्या हुआ आ ना जल्दी
आयशा : हा हा आ गयी ( वो चलने लगी )
वो कार के पास आई और पीछे  बैठ गयी रघु  साइड मिरर से आयशा को देखने लगा गाडी़ स्टार्ट हुई और चल निकली अपने सफर को 

गाडी़ चलती ही जा रही थी रघु  आयशा को ही देखे जा रहा था  आयशा का ध्यान गया साइड मिरर मे
आयशा रघु  को देखकर मन मे : इसके तो टमाटर जैसे गाल है
रघु  के गाल मोटे और टमाटर की तरहा लाल थे जब वो हँसता था बिल्कुल छोटे बच्चे कि तरहा लगता था गोल मटोल
आयशा मन मे : कितना क्युट है यार मन तो कर रहा है इसके गाल खींच लू सो क्युट
रघु  आयशा को देखकर मन मे : कितनी प्यारी हो तुम जब भी तुम्हारे करीब आता हूँ खो जाता हूँ
आयशा मन मे : इसकी कोई गर्लफ्रेंड होगी वैसे मुझे क्या लेना देना हो भी सकती है और नही भी हम्म शायद अपनी
गर्लफ्रेंड के ख्यालो मे खोया रहता है
संजय रघु  को घूरके : ये कबसे आयशा को  घूरे  जा रहा है मन तो कर रहा है अभी गाडी़ से निकाल दू
संजय आयशा से : आयशा तुम बोर नही हो रही
आयशा संजय से : हा हो रही हूँ
संजय रघु से: रघु प्लीज़ गाने बजा दो
रघु तो आयशा  को ही  देखे जा रहा था
आयशा : रघु गाना चला दो
रघु : हम्म (रघु ने गाना  चला  दिया )
ऐसे ही गानो के साथ टाइम पास होता गया
दिन के दो बज गए
आयशा : कही गाडी़  रोक देते है न भूक लगी है मुझे
संजय : हा मुझे भी लगी है
रघु: आगे कही ढाबा होगा  वहा पे  रोक देना
ड्राइवर : जी सहाब
कुछ देर के बाद एक ढाबा दिखा वहा गाडी़  रोक दी
सब गाडी़  से निकल गए और ढाबे मे चली गयी
संजय और रघु ढाबे मे गए और खाना खाने लगे
आयशा दुकानदार से : एक वाटरबोटल और दो चिप्स के पैकेट दे दिजिए
वहा ढाबे मे रघु और संजय के सामने  आलू के पराठे रखे थे संजय ठुस ठुस के खाए जा रहा था 
रघु ने देखा की आयशा चिप्स खा रही है गाड़ी मे  बैठकर
रघु संजय से : आयशा क्यों  नही खा रही खाना
संजय आलू  का पराठा ठुसते हुए : वो नही खाएगी
रघु हैरानी से : क्यों  उसे भूख नही लगी
संजय: हा लगी है पर वो नहीं खाएगी
रघु : क्यों
संजय : क्योंकि उसको  उल्टी हो जाती है इसलिए वो  चिप्स खाती है
रघु :  उसे भूख नही लगती
संजय : लगती है अब मुझे  भूख  लगी है खाने दो और खाओ
रघु ने कार मे देखा वहा आयशा चिप्स खा रही थी
रघु ने भी खाया
वो निकलने को हुए  रघु ने ढाबे वाले से दस  आलू के पराठे और थोड़ी  सी सब्जी पैक करवा ली
संजय : ये किसके लिए
रघु  : वो रास्ते मे भूक लगेगी तो
संजय बड़बडा़ते हुए कार के पास आ गया : कितना खाता है भुक्कड़ कहिका फ्रीफंड का सब खाने आ जाते है
वहा रघु दुकानदार के पास गया
रघु दुकानदार से : भईया उल्टी ना आए एसी कोई दवा है
दुकानदार ने एक टॉनिक देते हुए : ये टॉनिक है इससे उल्टी नही होगी  नींद आ जाएगी
रघु : ठीक है
रघु कार मे  बैठ गया
संजय : कहा रह गया था
रघु :  वो एक काम था
संजय: पता  है देर हो जाएगी जल्दी आना चहिए ना
आयशा बीचे मे तोकते हुए : संजय उसे  कुछ काम होगा तो इसमे इतना गुस्सा होने कि क्या बात है 
संजय बूरा सा मू बनाते हुए : ठीक है ठीक है
कार स्टार्ट हुइ और चलने लगी
रघु को बहुत अच्छा  लगा था क्योंकि  आज आयशा ने उसकी साइड  ली रघु साइड मिरर से आयशा  को देख रहा था आयशा भी उसे  ही देख रही थी
रघु मन मे : आज जिस तरह तुमने मेरे लिए संजय  से कहा मुझे अच्छा लगा
रघु ने आयशा  को पैकेट दिया
आयशा : ये पैकेट
रघु : इसमे तुम्हारे लिए खाना है खालो
संजय: तुम्हे बताया था ना  उल्टी हो जाती है उसे
रघु : हा पता  है इसलिए ये टॉनिक है ख़ाने  के बाद एक  चमच पी लेना नींद आ जाएगी फ़िर उल्टी नही होगी
आयशा : तुम इसे ही लेने गए थे
रघु: हा इतने घण्टों  का सफ़र है तुम भूखी कैसे रहोगी
आयशा : थैंक यू रघु
रघु : थैंक यू मत बोलो खाना खा लो बहुत भूख लगी है ना
आयशा : तुम्हें  कैसे पता
रघु: तुम जिस तराह उस पैकेट को खा रही थी उससे
आयशा ये बात सुनकर हँस  दी
आयशा ने पाँच  आलू के पराठे के साथ थोड़ी सी सब्जी खाली  उसे बहुत भूख जो लगी थी
आयशा उंगलिया चाटते हुए : वाह मजा आ गया अगर इसके साथ चाय मिल जाती तो और भी मजे आजाते
आयशा ने बाकि सब चीजें फोल्द करके अपने पास रख ली
रघु : अब वो टॉनिक पिलो उससे उल्टी नहीं होंगी
आयशा ने एक  चमच टॉनिक पिली
गाडी़  तेजी से चली जा रही थी
कुछ देरके बाद आयशा को निंद के जोके आना शुरू हो गए थे उसकी आँखें कभी खुल तो कभी बंद हो रही थी
रघु साइड मिरर से ये सब देख   रहा था 
आयशा बार बार  संजय से तकरा  रही थी नींद आने कि  वजह से ये देख कर रघु को अजीब  लग रहा था
संजय को तो थकान  की वजह से नींद आ रही थी
आयशा ने संजय  के कंधे  मे सर रख दिया
संजय झटकते हुए : क्या कर रही है  आयशा
आयशा ने सर हता दिया और  खिड़की के सहारे लगा दिया
रघु को ये सब देखकर एक सुकून सा मिल रहा था वो साइड मिरर से आयशा को देखने लगा
शाम के छह बज गए  गाडी़  चल ही रही  थी
संजय और आयशा सोये थे रघु  उठा था और खिड़की  खोलकर आती  जाती हवा को महसूस कर रहा था   संजय खराटे मार रहा था जिस वजह से आयशा की नींद  टूट गयी
आयशा चिड़ते ते हुए : क्या है यार सोने दे
संजय अभी भी खराटे मारे जा रहा था
आयशा जागते हुए : क्या है यार संजय सोने दे
संजय नहीं जागा
आयशा ने संजय के पेट मे मुक्का मार दिया
संजय निंद  से जाग गया : क्या हुआ कोई भूकंप आया
आयशा उसे घूरते हुए :  हा आ गया
संजय रोने वाली सूरत बनाते हुए : यार मुझे नही मरना आयशा उसके सर पर मारते हुए  : बावले इंसान इस कार  मे भूकंप आया  तेरे खराटे कि वजह से घूरना बंद  कर यार
संजय: यार अब सोऊ भी ना क्या
आयशा : सो  लेकिन हमे भी  सोने दे  कार मे तू ही नही है
गुस्से मे : अब अगर घूरा तो मुझसे बुरा कोई नही होंगा
संजय: तुझ जैसी दोस्त से अच्छा सो  दुशमन पता नही
किस घडी मे तुझसे मिला
आयशा कमर मे हाथ रखकर : अच्छा  जी
संजय : हा जी अब सोने भी नहीं दे रही हैं
आयशा: तेरी नींद  तेरी और हमारी नहीं
संजय: यार मे क्या करू सो भी ना अब
संजय मन मे : पता नही  किस जन्म का बदला  लेती है
पीछले जन्म मे क्या पाप  करा था  जो ये मेरी दोस्त बनी
है भगवान इस हिटलर जैसी दोस्त से बचा लो
आयशा : अब कहा खो गया
संजय : कही नहीं यार
आयशा : तुम गाडी़  के आगे जाओ और रघु तुम पीछे आओ
संजय : मै नहीं ...
आयशा बीच मे बोलते हुए  कड़क अवाज मे : चुप
अपनी बकवास बंद कर वरना ...
जा आगे बैठ  जा रघु तुम पीछे आओ
संजय : आयशा यार
आयशा: यार हम दोनो दिन मे  सोये है और वो नहीं सोया यार उसका भी तो देख
संजय मन मे : इसे बडी़  टैंशन  हो रही है
आयशा संजय को आंँख  दिखाते हुए : जा
संजय बड़बडा़ते  हुए : हा हा जा रहा  हूँ एक बात कहु
तू ना लेडी हिटलर है तुझे न हिटलर मिलना चाहिए 
आयशा: हा हा जा यहा से
गाडी़  साइड मे रूकी और संजय बहार निकल गया
रघु पीछे   वाली सीट मे बैठ गया और संजय आगे वाली मे
रघु तो ख़ुशी के मारे फूला नही समा रहा था 
रघु की खुशियाँ छुपाए नहीं छुप  रहीं थी
रघु वहा आयशा को देख कर हँसे जा रहा था
आयशा ने नजर मारी तो वो बोली : अब तुम क्यों  दांत फाड़ रहे हो  (रघु ने  बतिसी अंदर कर ली )
वहा संजय ने रघु को अजीब तरीके से देखा मन मे : इसे  क्या हुआ है  दांत क्यों  दिखा  रहा है
थोड़ी  देर बाद आयशा दोबारा सो गयी
रघु को भी नींद  आ रही थी
इस बार आयशा रघु के ऊपर गिर गयी पर रघु न उसे  झटका नहीं आयशा वहा  अराम से सो गयी
संजय को नींद आ रही थी वो बार बार उठ रहा  था
संजय मन मे : सोना नहीं है
वो अपनेआप को थप्पड़ मार रहा था  : नही  सोना है वरना ये  हिटलर मुझे गैस चैम्बर मे दाल  देगी नही संजय  नही सोना  छी यार कहा फस गया मे
संजय खुद से : मै नहीं सौऊगा वरना ये  मुझे मारेंगी
ना चहाते हुए भी वो सो गया और खराटे लेने लगा
आयशा की नींद टूटी
आयशा चिड़ते हुए : संंजय ...... तू तो गया
आयशा ने देखा कि उसने रघु  के कंधे  मे रखा है और रघु भी सो गया है उसकी नींद भी टूट गयी
आयशा ने एक पल उसे  देखा फिर संजय की तरफ़ देखकर : संंजय ...... तू तो गया
आयशा अपनी सीट से उठी और एक चपत लगायी संजय के गाल मे
रघु  उसे हैरानी से देख रहा था संजय ने घूरना बंद नही किया तो आयशा ने उसके दूसरे गाल मे चपट लगायी
वो तब भी नही उठा बल्कि गाल खुजला कर सो गया
संजय बड़बडा़ते हुए : ये मच्छर भी ना परेशान करते  है
वो करवत लेकर सो गया आयशा को उसपर बहुत तेज गुस्सा आ रहा था  पर उसने खर्राटे लेना बंद कर दिया था 
आयशा अब शांत हो गयी थी उसने रघु को देखा जो उसे देख रहा था
आयशा मासूमियत से : सॉरी वो मेरा सर
रघु : कोई बात नही तुम सोयी थी तुम्हें परेशान करना जरूरी नहीं समजा
आयशा खिड़की के  सारे टिका  कर आंँखे बंद कर दी
रघु मन मे : यही तो मै चहाता हूँ तुम  मेरी बाहो मे सोयी  रहो  सारी उमर
थोडी देर बाद आयशा को नींद आने  लगी थी
पर संजय ने कसम खायी थी, वो आयशा को सोने नहीं देगा वो फिर  खराटे मारने लगी रघु  कि भी नींद  डिस्टर्ब
आयशा का गुस्सा  हद से पार हो गया
आयशा चिलायी : उठ जा कुम्भकण  की औलाद
रघु उसके चिलाने से दर गया  वो इतनी जोर से चिलायी की अवाज गुंज लग गयी
ड्राइवर को भी हल्की हल्की नींद  आ रही थी आयशा के चिलाने से  ड्राइवर जाग गया और गाडी़ रूकी
आयशा गुस्से से गाडी़  से उतरी और संजय को भी बहार निकाला
संजय आधी  अधुरी नींद मे : क्या हुआ यार सोने दे ना
आयशा उसे घूरे जा रही थी पर उसे  कोई होश नही था वो खडे़ खडे़  ही सो गया
आयशा ने डिग्गी से पानी की बोतल निकाली और सारी एक साथ संजय के मू मे फैक  दी
संजय हड़बडा़ते हुए : होली आ गई क्या
आयशा उसे घूरके : नही तो  दिवाली है कुम्भकण की औलाद  (संजय नींद  से जाग चुका था ) क्या  आयशा अब मै सो भी ना यार
आयशा उंगली दिखाते  हुए : तू सोया ना अब तो तेरी हड्डियां तोड़  दूंगी (संजय ने बूरा सा मू बना लिया )
आयशा : तुझे समज नही आता क्या हमारी नही तो कम से कम ड्राइवर कि सोच उसे गाडी़  चलनी है तू सोएगा तो उन्हें भी  नींद  आएगी अगर  एक्सीडेंट हो गया तो 
संजय: ठीक है यार अब नही सो रहा
आयशा : अच्छा
संजय : हा पक्का वैसे भी तुझ हिटलर को देखकर सबकी नींद   उड़  जाती और कुछ नही हुआ मेरी बेमतलबकी होली भी हो गयी
वो दोनो गाडी़ मे बैठ गए (ड्राइवर ने गाडी़  स्टार्ट कर दी)
संजय दरते हुए आयशा से : अब  गाने तो चला सकता हूँ
आयशा कुछ बोलने को हुई तबतक संंजय : अच्छा  यार  नही चला रहा 
आयशा : नही यार  चला ले ड्राइवर को नींद नही आएगी
संजय : थैंक यू मैडम इजाजत देने के लिए 
रघु मन मे : ये तो  बडी़  तेज है बचके रहना पडेंगा ( वो भी एक  बार के लिए आयशा को देखके  दर गया था जब वो चिल्लायी
वहा आयशा ने एक नजर  रघु को देखा
रघु डर  गया
रघु मन मे : कही अब मेरी बारी तो नही भगावान बचा ले
पर मैने क्या किया है  नही तो  मुझे वो  जिस अंदाज  से देख रही है, मुझे नही  लगता की ये गुस्सा  करेगी
हा मै बच गया भगवान का शुक्र है
आयशा खिड़की  के बहार देखने लगी उसने अपनी
आँखे बंद कर ली
रघु: थैंक गॉड बच गया इस हिटलर से..... (थोड़ी  देर शांत होके) नहीं यार तुम हिटलर नहीं हो तुम्हारे  गुस्से मे भी प्यार है इसलिये तुम मेरी झांसी  की रानी हो प्यारी सी झांसी की रानी
वहा संजय  ने गाने चलाए
गाना था
कहने को जश्न-ए-बहारा है दिल ये देख के हैराँ है
फूल से खुशबू ख़फ़ा-खफा है गुलशन में
छुपा है कोई रंज फिज़ा की चिलमन में
सारे सहमे नज़ारे हैं सोये-सोये वक्त के धारे हैं
और दिल में खोई-खोई सी बातें हैं
आयशा ने अपनी आँखें खोली और रघु  को देखा रघु  भी उसे ही प्यार से देख रहा था वहा संजय अपनी आँखों को बार बार मसल रहा था ताकि उसे नींद  ना आए अब वो आयशा से मार नही खाना चहाता था आयशा और रघु  एक दुसरे को देखे जा रहे थे वहा गाना आगे बडा़
कैसे कहें क्या है सितम सोचते हैं अब ये हम
कोई कैसे कहे वो हैं या नहीं हमारे करते तो हैं साथ सफर फासले हैं फिर भी मगर जैसे मिलते नहीं किसी दरिया के दो किनारे पास हैं फिर भी पास नहीं
हमको ये गम रास नहीं शीशे की इक दीवार है जैसे दरमियाँ सारे सहमे नज़ारे हैं...
आयशा ने रघु  से नजरें चुरा ली और सोने लगी रघु  अभी भी आयशा को ही देखे जा रहा था
वहा संजय  ने अपनी आँखों को बडा़  बडा़  किया हुआ था ताकी उसे  नींद   के झोके ना आए के
ड्राइवर : एसे आंखे क्यों  फाड़ रखी है साहब
संजय चिड़ते  हुए : चुपचाप अपना काम करो
ड्राइवर : जी साहब
वहा रघु आयशा को ही  देखे जा रहा था और गाना भी आगे बडा़
हमने जो था नगमा सुना
दिल ने था उसको चुना ये दास्तान हमें वक्त ने कैसी सुनाई
हम जो अगर हैं गमगीं
वो भी उधर खुश तो नहीं
मुलाकातों में है जैसे घुल सी गई तन्हाई
मिलके भी हम मिलते नहीं खिलके भी गुल खिलते नहीं आँखों में हैं बहारें, दिल में खिज़ा सारे सहमे
नज़ारे हैं...
वहा रघु को भी नींद आ रही थी रास्ते मे गद्दे होने के कारण  कार थोड़ी ऊपर उठ रही थी जिस वजह से उसकी नींद  खराब हो रही थी इसलिए उसने अपना सर सीट मे रख दिया  गाडी़ के टायर के नीचे एक पत्थर आया जिस वजह से आयशा का सर रघु  के कंधे मे गिर गया
रघु ने जब देखा की आयशा गेहरी नींद  मे सोयी है उसने आयशा  का सर सीट मे लगा दिया पर फिर आयशा का सर रघु के कंधे मे गिर गया उसने इस बार सर नही हटाया उसने आयशा को अपनी बाहो मे ही सोने दिया आयशा अब गहरी नींद मे सो गयी थी रघु  भी सो चुका था वहा संजय  गाने  बदलने मे था 
संजय हाथ जोड़कर : है भगवान जल्दी  से सुबह करादे
संजय ने पीछे देखा तो आयशा रघु कि बाहो मे थी आयशा का एक हाथ  रघु के सीने मे और एक रघु  की बैक मे था रघु का भी एक हाथ आयशा के हाथ के  ऊपर था
और एक मे आयशा बाहो मे थी
संजय ये सब देखकर गुस्से मे लाल हो गया था
संजय  का बूरा हाल  था पर वो कुछ भी नहीं कर पा रहा था  आयशा के गुस्से की वजह से
संजय : इसको लाने कि क्या जरूरत थी अकेले हम दोनो भी आ सकते थे ना 
संजय रघु  को देखकर : कैसे चिपक रहा है आए हुए दो दिन नही हुए  और चिपक ऐसे रहा है जैसे पती पत्नी हो
इसके इरादे ठोक नही लग रहे मुझे
संजय एक अजीब सी हसँते हुए : इरादे  तो मेरे भी ठीक नही है ...
आयशा तुम्हारी बदतमीज़ीया मे  एक हद्द  तक बरदस्त  करूँगा  जो एक साल पहले हुआ वो अब दोबारा होगा ...।
हाहाहा बहुत मज्जा आएगा
तबही उसे किसी का फोन आया उसने पिक किया और बात करने लगा
संजय : सो साल जीओगे मे  अभी  तुम्हें ही याद कर रहा था
कॉलर : अच्छा  और वो करती है मुझे याद
संजय : हा हा भुली नही है वो
कॉलर : अच्छा  ही है मै हूँ  ऐसे चीज जो कभी कोई भूल नही  पाएंगे
संजय : हा चलो बाय  फ़ोन रखता हूँ
कॉलर : हा वैसे भी वो टाइम आ रहा है
संजय : हा बाय
कॉलर : बाय
संजय ने एक पल के लिए आयशा को देखा फिर एक टेडी़ सी मुस्कारहट पास करके आगे देखने लगा
कुछ देर बाद  वो घने जंगल मे पहुँचे  गाडी़ चलती ही जा रही  थी
रघु आयशा दोनो सोये थे  संंजय फोन मे  गाने सुन रहा था आँख बंद करके अचानक से एक जोर दार ब्रेक लगा
संजय  डैशबोर्ड से  टकराते टकराते बचा संजय ने अपनी आँखें  खोली
संजय ड्राइवर से : देख कर नहीं चला सकता
वहा  रघु की भी  नींद टूटी  रघु ड्राइवर से : क्या हुआ भईया
ड्राइवर : कुछ नहीं साहब लगता है गाड़ी के नीचे कुछ आ गया
संजय : तुम तमीज से गाडी़  नहीं चला सकते जाओ अब देखो क्या हुआ सुबह तक पहुँचना है
ड्राइवर : सॉरी साहब जी साहब
संजय : सॉरी जी  छोडो़ और जल्दी  बहार देखो
ड्राइवर ने कार स्टार्ट कि पर वो हुई नही 
संजय : अब क्या हुआ
ड्राइवर : मै देखता हूँ साहब वो भी निकल गया
पीछे  रघु ने देखा की आयशा उसकी बाहो मे सोयी है उसके दिल को  सुकून मिल रहा था वो आयशा के गालो को हाथ से सहलाने लगा ये सब संजय ने भी देखा उसके दिल मे आग लग गयी
संजय मिरर से रघु को घूरे जा रहा था पर रघु  आयशा के चेहरे मे ही खोया था
संजय देख नहीं पाया तो वो  बहार ड्राइवर के पास चली गयी
संजय ड्राइवर से गुस्से  से : क्या हुआ चलो
ड्राइवर को डाँटते हुए : साहब वो टायर पंचर हो गया
संजय गुस्से  से : क्या है ये सब अच्छे से  नहीं चला पाया क्या ड्राइवर ने सर झुका लिया
रघु ने संजय  का चिलाना सुना  रघु ने आयशा का सर हल्के से सीट मे रख दिया और बहार निकल गया
रघु : क्या हुआ
संजय : क्या हुआ क्या टायर पंचर हो गया है पता नहीं अब क्या होगा
रघु : क्या करे सुनसान रास्ता  हैं ऊपर से जंगल जंगली जानवर का खतरा हो सकता है मैकेनिक भी नही मिलेंगा
संजय : हम्म क्या करना अब आगे  चलकर देखते है शायद कोई रहने कि जगह मिल जाए
रघु : हम्म मैं आयशा को लेके आता हूँ
संजय ने कार से वो पैकेट ले लिया और पानी भी
रघु आयशा के पास आया और उसे जगाने लग गया पर वो उठी नहीं उसने आयशा को अपनी बाहो मे उठा लिया
वो तीनों चल निकले चलते चलते काफी देर हो गयी थी
संजय : लगता है  कुछ नहीं मिलेंगे भूख  भी लगी है मुझे क्या मुसीबत है यार
वहा रघु की गरदन मे आयशा  नींद मे हाथ घूमाने लगी
वो रघु  के सीने मे जोर जोर से मारने लगी कुछ बड़बडा़ते हुए
रघु उसे हैरानी से देख रहा था औय  आयशा सीने मे मारी ही जा रही थी
रघु उसकी मार खाए जा रहा था ऊपर से उसका चेहरा भी देखे जा रहा था वो अजीब से मू बना रही थी कभी पाउट्‌ थी कभी आँखें मटका रही थी   रघु  को उसपर बडा़  प्यार आ रहा था
आयशा बड़बडा़ते  हुए : संजय तुझे  मै छोडूंगी नही  मर  जायगा तू आज
रघु ने ध्यान से सुना तो उसे   संंजय का नाम सुनायी दिया उसे बहुत बुरा लगा
फ़िर आयशा दोबरा बड़बडा़ई : रघु तुम कितने अच्छे
हो ...
आयशा  के मू से अपनी तारिफ़ सुनके आयशा अच्छा लगा वो तीनों ऐसे ही चलते जा रहे थे पर कही रहने के लिए जगह  मिला ही नही  अचानक रघु की ध्यान गया की आयशा  उसके करीब आ रही है आयशा उसके करीब आ गयी थी ये संजय भी देखा उसे   बिलकुल अच्छा  नहीं लगा आयशा  उसके गालो को चाटने लगी
आयशा नींद मे : वाह क्या गोलगप्पा है मजा आ गया भईया तोड़ा  तीखा करो
रघु इस बात पर : इसे  मेरे  गाल गोलगप्पे लग रह है खदू कहीकि
आयशा उसे चाते जा रही थी रघु को कुछ याद आने लगा कुछ सफ़ साफ़ नही दिख रहा था पर ऐसा  लग रहा था जैसे कोई किसी  का  हाथ चाट रहा है  ...
रघु के सर हल्का सा दर्द  हुआ
वहा आयशा ने रघु के गाल का काटा
रघु दर्द मे चिला गया : आआऊऊऊऊचह!
वो इतनी जोर से चिलाया कि आयशा की नींद खुल गयी आयशा ने देखा कि वो रघु  के इतने करीब है वो उससे अलग हुई रघु  ने भी उसे छोडा़ और अपने गाल को सहराने लगा
आयशा वहा सब को हैरानी से देख  रही थी
आयशा : हम पाहुँच गए क्या  इतनी जल्दी
संजय : नहीं यार कार खराब हो गई इसलिए रहने के लिए जगा देख रहे थे
आयशा : अच्छा
आयशा ने रघु की तरफ़ देखा जो गाल मे हाथ रक कर उसे ही देख रहा था
आयशा रघु से : तुम चिलाय क्यों और गाल मे हाथ क्यों  रखा है
रघु : कुछ नही बस पैर मे चुभ गया था ये छोडो़   और चलो इससे पहले कोई जंगली जानवर आ जाए
चारो चलने लगे
संजय : मुझे भूख लगी है यार
आयशा तेरे हाथ में है पैकेट उसमे खाना है मुझे भी लगी है
संजय ने पैकेट खोल दिया और वो चारो सड़क के किनार रुख गए पाँच  पराठे और थोडी सी सब्जी बची थी
रघु आयशा से : तुमने नही खाए
आयशा : खाए थे पाँच  रात को भूख लगेगी इसलिए बचा लिए
रघु : हम्म
आयशा ने एक पराठे के साथ थोडी सी सब्जी ड्राइवर को दि संजय ने दो पराठे मे झपटता मार लिया आयशा ने एक पराठा रघु को दिया
रघु : तुम खा लो
आयशा : तुम्हे भूख नही लगी
रघु: लगी है पर तुम खा लो
आयशा : चुपचाप पकडो वरना मै नही खाऊँगी रघु ने ले लिया
रघु थोड़ी सी सब्जी उठाने वाला था तब तक संजय ने सब्जी उठा ली संजय अंजान बनते हुए खाने लगा आयशा को बहुत तेज गुस्सा आया पर वो कुछ बोल नहीं पायी
आयशा ने रघु को देखा जो पराठा खा रहा था आयशा ने थोड़ी सी अपनी सब्जी उसकी  तरफ बड़ा दी
आयशा : ये लो
रघु: नही तुम खा लो
आयशा : लो वरना  (रघु ने लेली )
उन सबने खाना खत्म किया और चल दिए
कुछ देर चलने के बाद आयशा को एक कॉटेज दिखा वो वहा  चलें गए वो लोग उस कॉटेज के पास पहुँचे सब अंदर  जाने को बडे़  पर आयशा नही
आयशा डरते हुए : मै नहीं आ रही
संजय: क्यों  बडी़  मुशकिल से तो कोई घर मिल रहा है और तू  नखरे दिखा  रही है
रघु : क्या हुआ आयशा क्यों नही आना चाहती
आयशा डरते हुए : अरे तुम लोगो ने देखा नही है फिल्मो मे कैसे जंगल मे गाडी़  खराब होती है फिर एक सुनसान घर दिखता है वहा पर भूत रहता है
संजय : क्या यार बचो जैसी हरकत चुप चाप चल
आयशा : नही मुझे डर लगता है
संजय : डर .... तुझे तुझ  हिटलर को
आयशा : यार मै भी तो  इंसान हूँ
संजय: मुजे लगा तू भूत है
आयशा: अपनी बकवास बंद कर
रघु : कुछ नही होगा चलो
आयशा : प्लीज़ नहीं देखना अभी एक बुढिया  निकलेगी लैम्प लेकर और फिर वही चुडै़ल होगी
उसका कहना सही हो गया एक औरत  निकली लैम्प लेकर
संजय ने उसे देखा और कहा : लो आ गयी भूत
आयशा ने जब देखा तो वो चिल्ला  पड़ी : भूत... भूत बचाओ कोई है .. बाचाओ गाओ वालो
संजय : कौनसे गाओ वाले
आयशा डरके रघु  से चिपक गयी उसने रघु  के सीने मे सर छुपा लिया
अम्मा : कौन है ..
संजय : अम्मा यहा रहने कि जगह खाली है हमे एक रात गुजारनी है
अम्मा : हा बेटा क्यों नही आओ
संजय : थैंक यू अम्मा
अम्मा : मैंसन नोट बेटा
संजय उन्हें हैरानी से देखने लगा : अम्मा को इंग्लिश भी आती है
आयशा ने अभी भी अपना सर छुपाया हुआ  था
आयशा : हा हा मॉडर्न जमाने कि भूतनी है
संजय  : वो अम्मा है भूतनी नही ... भूतनी तो तू है 
आयशा रघु  के सीने मे मारते हुए  : मै नही हूँ
रघु  मन मे:  मुझे क्यों मार रही हो ..
रघु उसके बालो मे हाथ फेरे जा रहा था संजय उसे जानबूझकर उकसाने लगा : तू है लम्बे बालो वाली भूतनी
आयशा ने रघु  के सीने मे मुक्का मार दिया : तू है भूत मै नही तू है चुडैल का रिश्तेदार
  रघु  को इतनी जोर से पडी़ कि वो दर्द से बोल उठा : आ.....
आयशा खिलखिलाते हुए   : अच्छा हुआ खजूर मजे आए 
उसने अपने चमकिले दांत अंदर किए और दूर हो गयी 
रघु पेट मे हाथ रखकर उसे ही देखे जा रहा था आयशा ने उसे एक नज़र देखा फिर नीचे ज़मीन में देखने लगी
आयशा:  वो .... सो..री ..
संजय पीछे से : चल डायन माफ़ किया
आयशा को उसपर बहुत तेज गुस्सा आया
आयशा गुस्से मे संजय से : तू रूक खजूर बताती हूँ
वो उसे  मारने उसके पीछे भागी संजय अंदर की तरफ भाग गया रघु भी उन दोनो के पीछे आ गया
वहा पर सब कुछ साफ था एक  परसेंट भी गंदगी नही थी
आयशा: कितना साफ है चका चौंद
संजय : ऐसे ही साफ़ दिखता हैं भूत वाली फ़िल्में मे फ़िर देखना कुछ देर मे मकडे के जाले  और ये बुड़ी अम्मा  चुडैल बन जाएगी  ...
आयशा चिल्लाते हुए बहार निकली और रघु से टकरा गयी वो रघु के गले लग गयी और उसे बहार ले जाने लगी
आयशा रघु के सीने  मे छुपकर  और उसे बहार की तरफ़
खीचकर : चलो यहा से प्लीज़ चलो इससे पहले  ये
घर डवारना बन जाए
रघु   : आयशा ये डवारना क्या होता  है?
आयशा : अरे मतलब डरावना यार चलो न
वो उसे खींचकर  बहार ले जाने लगी
रघु : आयशा डरो मत कुछ नही हुआ
वहा संजय भागकर कमरे मे चला गया और ड्राइवर को भी एक कमरा दे  दिया था
रघु आयशा का सर सहलाते हुए : डरो मत कोई भूत नहीं है वो तुम्हें  डरा रहा था बस
आयशा  उसके सीने मे सर छुपा लिया : नहीं अभी वो आंटी चुडैल  बन जाएगी
रघु उसे दिलाशा देते हुए : नही बनेगी
वो  अम्मा वहा आयी
अम्मा : क्या हुआ बेटा जाओ कमरे मे इस तरफ है
रघु : हा अम्मा  जा रहे है
आयशा : नहीं... यहा से चलो रघु
रघु : तुम कितनी डरपोक हो
आयशा ने सर उठाकर कहा : मैं डरपोक नहीं हूँ वो संजय ने डरा दिया
रघु उसे  उकसाते हुए : नहीं तुम हो डरपोक
आयशा ने उसे घूरके देखा : मै नहीं हूँ
रघु: अच्छा
आयशा : हा जी हा
रघु : जाओ फिर  कमरे मे
आयशा जाने को हुई उसने रघु  से कहा : रघु तुम भी आओ
रघु: क्यों  .. डर लग रहा है
आयशा : नहीं तो.. वो तुम्हें ना लगे इसलिये
रघु दुसरे कमरे के तरफ़ बड़ते हुए : मुझे डर नहीं लगता तुम जाओ
आयशा भागते हुए आयी और उसका हाथ पकड़  लिया : नहीं तुम्हें लगता है चलो
वो उसे खींचते  हुए ले गयी
रघु अपने हाथ को तो कबी आयशा  को देखे जा रहा था
आयशा कमरे मे पहुँची और दरवाजा बंद कर दिया
आयशा रघु को देखकर : तुम ..गलत मत समझना प्लीज यहा सो जाओ
रघु: क्यों डर की वज़ह से
आयशा डरते डरते : वो तो तुम्हें  लग रहा है ना इसलिए तो मेरा हाथ पकड़के ले आए कोई  नही तुम बेड मे सो जाओ  मै  यहा सोफे मे ही सो जाऊँगी
रघु : नहीं तुम बेड मैं सो जाओ मैं सोफे मे सो जाता हूँ
आयशा : पक्का तुम सो  जाओगे
रघु : हा
आयशा बेड मे लेट गयी वहा रघु खड़ा था
आयशा घबराते हुए :  तुम सो जाओ अब नहीं आएगा.. गा ..भूत
रघु उसके पास आया और बेड मे बैठा : अगर आ गया तो
आयशा ने रघु की बाजुए पकड़ ली : आ गया तो मै
मै .. मै हूँ ना मै बचाऊँगी
रघु ने उसके हाथ पकडा़ : डरो मत मै हूँ ना  तुम्हारे साथ कभी अकेला नहीं छोडूंगा
आयशा : पक्का
रघु : वादा कभी नहीं कसम है मुझे तुम्हारे प्यार की
आयशा उसमे खो सी गयी रघु भी कुछ देर तक खो गया
बहार से जंगली जानवरो की आवाज आ रही थी आयशा डर के मारे रघु के कंधे  से चिपक गयी
रघु हसते हुए : डरो मत मैं हूँ (उसके बाल सहलाने लगा)
आयशा ने सर ऊपर किया : नहीं, वो  मुझे नींद  आ रही है, तो  आआआ... (यौन करते हुए)
रघु हसँते  हुए सोफे मैं जाकर लेट गया
रघु आयशा को देखकर : जो जाओ
आयशा बिस्टार मे लेट गयी उसने चादर ओढ़ी। आयशा रघु की तरफ़ लेटी
आयशा रघु   से : तुम्हें  ठंड नही लग रही कुछ ओढ़ लो
रघु ने आयशा की तरफ़ देखा : नही तुम सो जाओ
आयशा : अगर आधी रात को तुम्हे डर लगे तो बता देना मैं बिल्कुल नहीं उठूँगी
रघु हसँते हुए  : सो जाओ
आयशा ने चादर मू तक ओढ़ ली और हनुमान चालीसा गाते हुए सो गयी
रघु उसे देखके हँसे जा रहा था आयशा सो चुकी थी रघु  उसके पास आया और चदर हथायी वो उसे देखने लगा
रघु आयशा को देखकर : हमेशा  तुम्हारे साथ रहूँगा  तुम्हारा साया बनकर एक पल के लिए भी अकेला नहीं छोडूंगा कसम तुम्हारे प्यार की
उसने आयशा के बाल सहलाए और फिर सोफे मे जाकर सो  गया
सुबह हो चुकी थी रघु उठा उसने सोचा बेड मे आयशा सो रही है वो बेड के पास आ गया उसने चादर है पर वहा पर कोई नही था
रघु: ये कहा  गयी ये लड़की  भी न
तभी उसके पीछे  कोई आया वो मुडा़ और अचानक उसे पीछे से भाऊ..... किया
वो और कोई नहीं आयशा थी रघु झसक के पीछे हट गया
आयशा खिलखिलाते हुए हँस  दी
रघु : तुमने तो मुझे डरा ही दिया
आयशा हँसते हुए : डरपोक कहिके
रघु उसे घूरते हुए : हा हा कौन है डरपोक  पता है , हहह
वो कमरे से चला गया आयशा पीछे  पीछे आ गयी 
आयशा : अच्छा अच्छा हो गया बाबा
रघु  मू बनाते हुए : हम्म
आयशा : संजय कहा  है
अम्मा :  वो दोनो सुबह जल्दी उठकर निकल गए
आयशा : हमे छोड़ कर
अम्मा  : उन्होने कहा था कि तुम लोग आ जाना वो मैनिक  को बुलाने चले गए 
आयशा कन्फ्यूज्ड  होकर : मैनिक? ..
रघु  : मैकेनिक यार
आयशा  : अच्छा ( तबतक आयशा का फोन बज उठा उसने  फोन उठाया )
संजय : तुम दोनो आ जाओ कार ठीक हो गयी है
आयशा  : ओकए (फोन कट गया ) रघु   से : रघु  चलो कार ठीक हो गयी है
रघु   : ठीक है
अम्मा ने उन्हें खाने के लिए खाना दिया और पानी भी
आयशा और रघु  ने अम्मा के पैर छुए
अम्मा : तुम दोनो हमेशा खुश रहो दोनो एक साथ रहो तुम दोनो कि जोड़ी हमेशा बनी रहे सदा सुहागन रहो
आयशा : अम्मा हम दोनों पति पत्नी नही है 
रघु  आयशा को देख रहा था
अम्मा  : अच्छा मुझे लगा पति पत्नी हो क्योंकि दोनो एक ही कमरे मे थे और जब तुम डरी तो इस बच्चे ने  तुम्हें पति कि तरहा संभाला (आयशा ने रघु  को देखा और आगे निकल गयी पीछे  पीछे रघु भी ) ... हर हर महादेव