ISHQ HAI TUMSE HI - 10 in Hindi Novel Episodes by Jaimini Brahmbhatt books and stories PDF | इश्क़ है तुमसे ही - 10

इश्क़ है तुमसे ही - 10

(aage aapne padha ki aman shivansh se or rajavat pariwar se milta hai.....Ab aage.....)

शिवांश अमन को एक कमरे में ले गया।उस कमरे में एक बड़ी तस्वीर थी ,उसमे शिवराजजी ओर गायत्रीजी के साथ दो बच्चें थे।एक लड़का जो करीब 10 साल का था और एक लड़की जो पांच या छः साल की होगी।उसपे हाथ फेरते हुए
शिवांश ने नम 😢आंखों से कहा:-ये हमारी लाडो ,हमारी
छोटी बहन है।
अमन ने उसके कंधे पर हाथ रखा,तो शिवांश ने कहा:-पिछले कुछ सालों से हम अपनी लाडो को खोज रहे है।मुझे पता चला कि 20 साल पहले वो हमला काली ने ही कराया था।एक आदमी उसका जो पापा के हाथ लगा था,वो कुछ दिन पहले होश में आया है उसने ही दत्ता का नाम बताया।ओर कल मेने उस दत्ता को भी पकड़ लिया।उसने बताया कि ,आखरी बार वो लोग उसे खोज ने बनारस ही गये थे।शायद वो बनारस में ही है।हमारी लाडो जिंदा है।
अमन😲:-क्या.??बनारस में??अमन बहुत शॉक्ड था। उसके दिल मे एकाएक बहुत सारे सवाल आ गए।कही शीवांगी तो...,उसने सोचा फिर खुद को नार्मल करते हुए शिवांश से बोला:-अगर तुम बनारस जाओ भी तो पहचान कैसे कर पाओगे?
शिवांश उसकि तरफ मुड़ के मुस्कुराके कहने लगा:-तुम्हे क्या लगता हैै।में ऐसे ही तुम्हे सब बता रहा
हूँ।पता किया है सब तुम्हारे बारे में की तुम बनारस से ही हो,अमन! शायद तुम मदद कर पाओ।
अमन:- जरूर.,तुम बताओ तो मुुुझसे जो मदद होगी वो जरूर करूँगा.. Promise.।
अमन मन में ;शायद..,वही हो जो में सोच रहा हूँ।
फिर शिवांश की तरफ देखा तो शिवांश ने अपने गले से लॉकेट निकाला।अमन को दिखाते हुए हाथ में देते हुए कहा:-ठीक
ऐसा ही लॉकेट हमारी लाडो के पास होगा,ये हमारी खानदानी प्रथा है.!खानदानी लॉकेट।
अमन ने देखा थठीक वेेसे ही लॉकेट उसने गभराते हुुुए हिचकिचाहट से पूछा:- तुम्हारी बहन
का नाम .??
शिवांश ने फिर फोटो
छूूूते कहा:-हमारी लाडो का नाम..,शीवांगी.! शीवांगी सिंह राजावत ।।
ये सुनतेे ही अमन दो कदम पीछे
हो गया।वो कुछ और सुनने से पहले ही लॉकेट वहा रख तेज़ी से वहाँ से चला गया।शिवांश को कुछ समझ नही आया।

अमन 😵अपने घर पहुंचा उसका तो दिमाग ही घूम गया था।वो सोचने लगा,मतलब..,मतलब शीवांगी जैसलमेर की कुँवरिसा है।शिवांश की बहन वो हमले की वजह से बनारस पहुंच गई।क्या करूँ..?देव को बताऊ कैसे रियेक्ट करेगा.?😧या शिवांश को बताऊ की उसकी बहन के बारे में जानता हूँ।नही..,नही..,क्या करूँ कुछ समझ ही नही आ रहा।वो अपना सर पकड़ कर बैठ गया।

उसने कुछ वक्त गहराई से सोच के फैसला लिया।में पहले देव को ही सब बताऊंगा फिर देखते है जो होगा वो ,,उसने देव को कॉल लगा दिया।देव ने फोन उठाया अमन ने खुद को नार्मल कर बात करना शुरू किया।
अमन☺️:-कैसा है यार.?

देव😏नाराज़गी से:- क्या कैसा है.?1 महीने बाद याद आई तुझे मेरी।जा नही बात कर रहा तुझसे।।

अमन🙂:-अरे यार,गुस्सा मत हो ।वक्त ही नही मिला सच्ची.!आज वक्त मिला है वो भी गोली लगने पर छूट्टी ली है मेने।

देव 😱गभराहट से:-व्हाट..!कब लगी गोली तू ठीक है ना अमन।

अमन:- रिलैक्स ठीक हु में ,बस छूके निकल गई।

देव:-बोल तो ऐसे रहा है गोली ना होके गर्लफ्रैंड हो गई।छूके निकल गई।😁

अमन😆:-वो सब छोड़ तू बता सब कैसा है वहा?गुड़िया केसी है.?

देव☺️:-सब ठीक चल रहा है यहाँ गुड़िया भी ठीक ही है।

अमन:-देव मुझे कुछ बताना है,तुझे।

देव:-हा., तो बताना हिचकिचा क्यों रहा है।

अमन:-वो ..,शी.., शीवांगी के बारे में ।

देव:- मेरी बहन के बारे में तुझे क्या बताना है।😆

अमन एक गहरी सांस ले कर:-देख देव जो में कहने जा रहा हूँ वो ध्यान से सुन,,।फिर ही रिएक्ट करना।

देव:- तू मुझे डरा रहा है,अमन।क्या बात है बोल।

अमन:-मुझे शीवांगी के असली परिवार के बारे में पता चल गया है, वो जैसलमेर के हुक़ूमसा शिवराज सिंह राजावत की बेटी है। उसका भाई शिवांश उसे ढूंढ रहा है।उसे ये भी पता लगाया है कि वो बनारस में ही है।

देव ये सब सुनकर शॉक्ड हो गया था उसका फोन उसके हाथ से छूट के गिर गया था।
अमन दूसरी ओर से आवाज दे रहा था। देव..,हेलो ..देव तू सुन रहा है।काल कट हो गई।अमन बहुत टेंशन में आ गया।

इधर देव के कानों में अमन की बाते गूंज रही थी।वो बेसुध से हो गया था।उसने कार की चावी ली और कार में बेठ चला गया।उसके कानों में बारबार अमन की बाते गूंज रही थी,उसे पता ही नही चला कि वो कितनी दूर निकल गया था।

उसने एक जगह अचानक ब्रेक लगाई।वो एक सुमसान मंदिर के पास पहुंच गया।वहां एक नदी भी थी।वो उसके किनारे खड़ा हो गया।

उसके अंदर मानो जंग छिड़ गई।
दो आवाजे उसके जहन से आने लगी।

-देव ये तू क्या कर रहा है,शीवांगी को सच बता दे।
-नही,देव बिल्कुल नही वो तुझसे दूर हो जाएगी।
-देव उसकी फैमिली है।
-नही,तू ही उसकी फॅमिली है।
-क्या कर रहा है देव तू इतना सेल्फिश हो गया।सुना ना उसका भाई भी उसे ढूंढ रहा है।वो तेरी तरह अनाथ नही है।

बस.. करो देव अपने कानों पे हाथ लगा चिल्लाने लगा।वो घुटनो के बल बेठ रोने लगा😭😭क्यों,,मेरे साथ ही क्यों,?पहले मा -पापा चले गए।अब सोना भी।में ही क्यूं एकला रहूँ।क्यूं।,,,वो चिल्ला के रोने लगा ।

तभी किसीने उस के सर पर हाथ रखा।देव ने देखा एक फ़क़ीर बाबा खड़े थे।
उनके सर पर हाथ रखने से देव शांत हो गया था।वो बोले-क्यूं परेशान है ,बच्चा.! सब फैसले वो ही लेता है।हम तो उसके हाथ की कठपुतली है।अकेले तो हम सब है यहाँ, तू भी में भी ।पर वो सबकी खबर रखता है।मौका वो देता है,सही राह चुनने का।तुझे भी मिला है,क्या पता तेरा डर बेमतलब हो।क्या पता तेरी लकीर में कुछ और हो ।ये कहके उन्होंने वापस उसके सर पर हाथ रख ऊपर देख कहा:-दुआ है इस फ़क़ीर की तुझे मालिक सही राह चुनने की ताकत दे,बच्चा..!!

वो चले गए।देव कुछ वक्त वही बैठा रहा।बचपन से ले के अबतक की शीवांगी की सारी याद उसके जहन में घूम रही थी।उसका मिलना , उसकी शरारते ,उसकी हँसी , उसका जिद्द करना देव का उसे मनाना सब कुछ,,।

कुछ और देर बाद अचानक वो उठा उसने एक फैसला लिया था।वो कार में बेठ चला गया।






..........................बाकी अगले पार्ट में......




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