ISHQ HAI TUMSE HI - 12 in Hindi Novel Episodes by Jaimini Brahmbhatt books and stories PDF | इश्क़ है तुमसे ही - 12

इश्क़ है तुमसे ही - 12

राजस्थान में देव के कहने पर अमन ने राजावत परिवार को सब बता दिया था।देव और शीवांगी के रिश्ते ओर अतीत के बारे में भी,दो दिन बाद सबने बनारस जाना तय कर लिया।देखते देखते दो दिन बी बित गए।वो दिन भी आ गया जो शीवांगी का बर्थडे ,सुबह तैयार होकर वो मंदिर चली गयी।देव भी उसे शाम को सरप्राइज के साथ मिलने का वादा कर के चला गया था।या फिर खुद को तैयार करने ..,

शाम हो गई थी।शीवांगी बहुत सुंदर तैयार हुई थी अदिति आके उसके गले लग गई।HAPPY BIRTHDAY मेरी जान.!!

शीवांगी:-थैंक्यू मेरी जान।

कुणाल भी आ गया:-happy birthday beautiful।।

शीवांगी:-थैंक यू ,मेंढक।।

देव भाई कहा है? अदिति ने पूछा।
वो आते ही होंगे।शीवांगी ने कहा तभी देव आ गया ।शीवांगी ने उसे देखा देव अकेला था।उसने उसके पास जाकर सब तरफ देखते हुए कहा :-भाई सरप्राइज कहा है?हमारा ।यहाँ तू कुछ नही है।
तभी देव ने आवाज दि अमन.!!
अमन अंदर आया उसके साथ शिवराज जी/गायत्रीजी/शिवांश सब भी अंदर आये।शीवांगी उन्हें देखकर हैरान हो गई।उसने देव की तरफ देखते पूछा:-भाई !ये सब कोन है?मेहमान है क्या आपके।
तभी देव ने उसे हाथ थामते हुए कहा:- सोना..!आपको मुझ पे यकीन है।

शीवांगी:-ये कोई पूछने की बात है।भाई offcourse है।

देव:-मुझे आपको कुछ बताना है।शांति से सुनिए।ये आपके मम्मी-पापा है,ओर ये आपका भाई सगा ।ये कहकर देव ने शीवांगी सब सच बता दिया ।

सच सुनने के बाद शीवांगी दो कदम पीछे हो के गिरने हुई।शिवांश आगे बढ़ता उससे पहले देव ने उसे थाम लिया।

शीवांगी सच सुनकर सुन्न हो गई थी ।वो रोने लगी उसने देव को कहा:-😭😭ये मजाक है ना.!आप झूट बोल रहे हैं।भाई हमने कोई गलती की., हम पक्का शरारत नही करेंगे हर बात मानेंगे ।आप माफ कर दीजिए हमे पर ये सब बंध करिए ओर कह दीजिये ये सच नही है।हम आपकी बहन हैं,, बोलिये ना,!😭😭

देवने उसे चुप करते हुए कहा:-आप मेरी बहन है।ये सच कोई नही बदल सकता समझी आप।पर ये भी सच है कि यह आपका असली परिवार है।मुझे तो पता भी नही ये आपका असली बर्थडे है या नही।पर आपको बेस्ट गिफ्ट देना था,मुझे

नही...!ये कहते शीवांगी वहा से दौड़ते हुए अपने कमरे में चली गई।
देवने खुद को संभाला फिर शिवराज जी और सब की तरफ हाथ जोड़ के कहा:-प्लीज..!उसे गलत मत समझिए मुझे लगता है हमे उसे थोड़ा और वक़्त देना चाइये।आप यही रुक जाईये।
अमन ने सब को रूम दिखा दिया।रात हो गई पर सबके दिल मे चैन नही था।खास कर शिवांश/शीवांगी ओर देव के मन मे।अमन कुणाल को लेके घर चला गया।अदिति भी अपने घर चली गई।
शीवांगी के दिमाग और दिल मे तूफान था।वो उससे झूझ रही थी।एक ही झटके में उसकी जिन्दगी का रूख बदल गया था।

शिवांश भी छत पर खड़ा था।तभी देव भी वहां आ गया।दोनो के बीच कुछ देर खामोशी रही देव वापस नीचे चला गया वो चाय बनाकर लाया।उसने शिवांश के कंधे पर हाथ रखा।
देव:-चाय..!अच्छी होती है।दिमाग शांत करने के लिए।उसे थोड़ा वक्त दीजिये कुवरसा।

शिवांश:-अगर कुवरसा कहोगे तो चाय नही पिऊंगा।call me shivansh।

देव:-okk, तुम भी देव कहो।

शिवांश ने चाय ले ली:-तो तुम लाडो को सोना कहते हो।

देव:-तुम भी लाडो कहते हो ना।

शिवांश:-वो..,

देव:-सोना समझदार है,संभाल जाएगी ।हम्म.!

शिवांश:-ओर तुम??
देव ने उसे देखा तो शिवांश ने कहा:-अमन ने मुझे सब बताया है ,देव ।शीवांगी तुम्हारा सब है।ऐकले रह पाओगे, उसके बिना,,,
देव की आंखे भर आईं ।वो पलटकर जाने लगा।तुम्हे सो जाना चाइये।good night वो चला गया।
शिवांश ने उसे देखते हुए कहा ,तुम बहुत अच्छे हो देव।पर माना कि में लाडो के साथ ज्यादा नही रहा पर उसे तुमसे ज्यादा जनता हूँ ।जनता हु की मेरी बहन का फैसला क्या होगा।

सुबह हो गई।सबको सिर्फ शीवांगी का इंतज़ार था।अमन,अदिति ओर कुणाल भी आये हुए थे।

कुछ वक्त बाद....!

शीवांगी नीचे आई ।सब उसे देखने लगे शीवांगी देव के पास खड़ी हो गई।उसने शिवराज जी /गायत्रीजी की तरफ हाथ जोड़ के कहा:-आपने हमे जन्म दिया है।आप हमारे मा-पापा है।उसके लिए हमारा आपको सत सत प्रणाम।पर हम अपने भाई को छोड़कर कही नही जाएंगे।
सब हैरान थे।देव:-पर सोना.!उसे रोकते हुए शीवांगी ने सब से कहा:-पता है हमारे देव भाई ने आजतक कभी कोई कमी नही महसूस होने दी।महादेव कसम कभी ख्याल ही नही आया कि काश मा पापा होते....।क्यों आता.?हमारे भाई हमारे सब कुछ बन जाते थे.!मा-पापा-दोस्त-टीचर-भाई सब कुछ।आज भी हमारे बारे में सोचा ।पर हमें पता है ये हमारे बिना नही रह पाएंगे।
फिर देव की तरफ देख के कहती है:-आज समझ आया आप उस दी क्यों गायब थे।हमें सारी खुशियां देकर महान बनाना चाहते है।खुद के लिए क्या.?कैसे सोचा आपने के हम आपसे दूर जायेंगे।
वो देव के कॉलर को पकड़ रोने लगी देव ने उसे सीने से लगा दिया।
उन दोनों को देख सब की आंखे नम थी।तबी शिवांश ने तालिया बजाके उन दोनों के सामने आ गया।
देव और शीवांगी उसे हैरानी से देखने लगे।

शिवांश:-वाह.!क्या बात है,देखा आपने पापा ।तुम दोनों को क्या लगता है ये कोई फ़िल्म चल रही है।जो मुझे विलेन बना रहे हो।पर में बनूँगा नही।
उसने शीवांगी की तरफ देख के कहा:-तुमसे किसने कहा कि में तुम्हे तुम्हारे भाई से दूर करने आया हूँ।
फिर देव को देखकर कहा:-और तुम देव नाम है तो क्या सचमुच देव बनोगे।मत भूलो देव से ऊपर शिव होते है।में भी वैसा ही हु।जब हम यहां आ रहे थे तभी हमने एक फैसला किया था ।क्यों पापा.?

शिवराज जी:-हां ,बेटा जब अमन ने तुम दोनों के बारे में बताया तभी हम समझ गए थे तुम्हारा रिश्ता कितना गहरा है।आज हमारी बेटी के फैसले ने दिखा भी दिया।

गायत्रीजी ने देव के सर पर हाथ फिराते हुए कहा:-हम सिर्फ शीवांगी को नही, बल्कि अपने बेटे को भी लेने आये है।देव ,पता है शिवांश हमे बहुत तंग करता है।हमे ना एक ओर समझदार बेटा चाइये।माना कि हमने जन्म नही दिया तुम्हे पर तुम्हारी माँ बनने का हक जरूर मांग रहे है ।दोंगे ये हक हमे.??हम्म.!

देव ये सुनते ही गायत्रीजी के सीने से लग गया ।ओर रोने लगा देव का जो सब्र का बांध अबतक बंधा हुआ था वो उनकी ममता के स्पर्श से टूट गया।
उसने रोते😭 हुए कहा:-मुझे लगा कि में फिर अकेला राह जाऊंगा।पर आज तो मुझे अपनी माँ मिल गयी।thank you माँ।

शिवराज जी:-सारा प्यार मा को ही दोंगे क्या.?।पापा को प्यार नही मिलेगा।

देव उनके सीने से लग गया।सब ये देखकर बहुत खुश हुए।तभी शिवांश ने कहा:-भाई भी है।देव ने उसके सामने आकर हल्की चपत लगाते हुए कहा:-नोटंकी ओर शरारती भाई।दोनो गले लग गए।
शीवांगी ने मुह बनाते हुए कहा:-हमे सब भूल ही गये अरे.,हम भी है ना।
दोनो ने मिलकर उसे भी साथ खींच गले लगा लिया।

अमन:-okk बहुत हो गया ये इमोशनल ड्रामा चलो सेलेब्रेट करते है।

अदिति केक लेकर आती है।शिवांगी अपने दोनों भाइयों के साथ केके कट करती है।

आज सब खुश होते है।देव को आज मानो दुनिया ही मिल गई थी मा ,पापा ,भाई और बहन पूरा परिवार ।शीवांगी वो भी बहुत खुश थी क्योंकि उसके पास आज फैमिली जो थी।शिवांश को भी अपनी लाडो ओर देव जैसा भाई मिल गया था।










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